Delhi
बिग ब्रेकिंग: गणतंत्र दिवस की परेड में कर्तव्य पथ पर पहली बार निकली उत्तराखंड की झांकी ने पहला स्थान हासिल कर रचा इतिहास।

देहरादून – गणतंत्र दिवस परेड को अभी तक राजपथ के नाम से जाना जाता था, किंतु इस वर्ष उसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया है। नाम बदलने के बाद कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस की यह। पहली परेड थी, जिसमे उत्तराखंड की झांकी मानसखंड को देश मे प्रथम स्थान मिलने से इतिहास में उत्तराखंड राज्य का नाम दर्ज हो गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि हम सबके लिए गौरवशाली पल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराणों में गढ़वाल का केदारखंड और कुमाऊं का मानसखंड के रूप में वर्णन किया गया है। स्कंदपुराण में मानसखंड के बारे में बताया गया है। जागेश्वर मंदिर की बहुत धार्मिक मान्यता है।
प्रधानमंत्री ने हमेशा अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की बात कही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सांस्कृतिक नवजागरण में उत्तराखंड सरकार भी काम कर रही है। मानसखंड मंदिर माला मिशन योजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। “मानसखण्ड” मंदिर माला मिशन के तहत चार धाम की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है।
भारत सरकार को भेजे गए झांकी का विषय/टाइटिल “मानसखंड”मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुझाया था। उन्होंने मंदिर माला मिशन के अंतर्गत मानसखंड के रूप में इस विषय का सुझाव दिया था।
झांकी निर्माण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब दिल्ली कैंट में झांकी का निर्माण किया जा रहा था तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने झांकी का निरीक्षण करते हुए झांकी को उत्कृष्ट एवं राज्य की संस्कृति के अनुरुप निर्माण के लिये सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक/ नोडल अधिकारी के एस चौहान को निर्देश दिए थे तथा झांकी के कलाकारों से मिलकर उनको शुभकामनाएं भी दी थीl
झांकी के निर्माण तथा झांकी में सम्मिलित कलाकार दिन रात मेहनत करते है। झांकी निर्माण का कार्य 31 दिसंबर को प्रारंभ किया गया था, जिसको सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक किया जाता है। साथ ही झांकी में सम्मिलित कलाकारों को टीम लीडर के साथ कड़ाके की सर्दी में कर्तव्य पथ रिहर्सल के लिए 4 बजे जाना पड़ता है।
सितंबर माह में भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों एवं मंत्रालयों से प्रस्ताव मांगे जाते हैं।अक्टूबर तक राज्य सरकारें विषय का चयन कर प्रस्ताव भारत सरकार को भेजती है। उसके बाद भारत सरकार प्रस्तुतिकरण के किये आमंत्रित करती है। पहले बार की मीटिंग में विषय के आधार चार्ट पेपर में डिजाइन तैयार कर प्रस्तुत करना होता है। आवश्यक संशोधन करते हुए तीन बैठके डिजाइन निर्माण के सन्दर्भ में होती है जिन प्रदेशों के डिजाइन कमेटी को सही नही लगते हैं उनको शार्टलिस्ट कर देती है। उसके बाद झांकी का मॉडल बनाया जाता है। मॉडल के बाद थीम सॉंग 50 सेकंड का जो उस प्रदेश की संस्कृति को प्रदर्शित करता हो तैयार किया जाता है। इस प्रकार जब सभी स्तर से भारत सरकार की विशेषज्ञ समिति संतुष्ट हो जाती है तब झांकी का अंतिम चयन किया जाता है।
गढ़वाल की चारधाम यात्रा की भांति सरकार कुमाऊं में मंदिर माला मिशन के अंतर्गत पर्यटन बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं इसी के दृष्टिगत प्रसिद्ध पौराणिक जागेश्वर धाम को दिखाया गया था। उत्तराखंड का प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क, बारहसिंगा, उत्तराखंड का राज्य पशु कस्तूरी मृग, गोरल, देश की राष्ट्रीय पक्षी मोर जो उधमसिंह नगर में पाई जाती है, उत्तराखंड के प्रसिद्ध पक्षी घुघुती, तीतर, चकोर, मोनाल आदि, तथा उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपन कला को प्रदर्शित किया गया था। झांकी के आगे और पीछे उत्तराखंड का नाम भी ऐपन कला से लिखा गया था।
जागेश्वर धाम के मंदिर घनघोर देवदार के वृक्षों के बीच में है। इसलिए झांकी में मंदिर के आगे और पीछे घनघोर देवदार के वृक्षो का सीन तैयार किया गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड का है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी दृष्टि से गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखंड की झांकी को देश मे प्रथम स्थान पर आना उनके विजन को दर्शाता है।
मानसखंड खंड की झांकी को देश मे प्रथम स्थान प्राप्त होने से कुमाऊं क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे क्योंकि देश विदेश के पर्यटको को मंदिर माला मिशन की जानकारी होने से वह कुमाऊं की ओर रुख करेंगे। इसलिए गढ़वाल मंडल के साथ अब कुमाऊं मंडल में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
झांकी में उत्तराखंड की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए उत्तराखंड का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य करने में पिथौरागढ़ के भीम राम के दल के 16 कलाकारों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। उत्तराखंड को देवभूमि के साथ ही योग भूमि भी कहा जाता है। झांकी के ऊपर योग करते हुए बारु सिंह और अनिल सिंह ने योग करते हुए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
झांकी का थीम सांग “जय हो कुमाऊं, जय हो गड़वाला” को पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध जनकवि जनार्दन उप्रेती ने लिखा था तथा उसको सौरभ मैठाणी और साथियों ने सुर दिया था। इस थीम गीत के निर्माता पहाड़ी दगड़िया, देहरादून थे।
सोसल मीडिया के माध्यम से गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखंड की झांकी मानसखंड को देश विदेश में करोड़ो लोगों ने देखा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर केदारनाथ और बद्रीनाथ की भांति ही कुमाऊं के प्रमुख पौराणिक महत्व के मंदिर क्षेत्रो में अवस्थापनात्मक विकास के लिए मानसखंड मन्दिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है। इन्हें बेहतर सड़कों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही इस योजना के ज़रिए गढ़वाल और कुमाऊं के बीच सड़क कनेक्टिविटी को भी सुधारा जाएगा, ताकि उत्तराखण्ड में गढ़वाल और कुमाऊं के बीच यातायात सुगम हो।
मानसखंड कॉरिडोर को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मानसखंड कॉरिडोर पर काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि विभिन्न धार्मिक सर्किटों का विकास किया जाए। उन्होंने कहा इसके तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आने वाले मुख्य मंदिरों को आपस में जोड़ेंगे एवं सर्किट के रूप में विकसित करके धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी के विजन के अनुसार पहले चरण में क़रीब 2 दर्जन से अधिक मंदिरों को इसमें शामिल किया गया है। इनमें जागेश्वर महादेव, चितई गोलज्यू मंदिर, सूर्यदेव मंदिर, नंदादेवी मंदिर कसारदेवी मंदिर, झांकर सैम मंदिर पाताल भुवनेश्वर, हाटकालिका मंदिर, मोस्टमाणु मंदिर, बेरीनाग मंदिर, मलेनाथ मंदिर, थालकेदार मंदिर, बागनाथ महादेव, बैजनाथ मंदिर, कोट भ्रामरी मंदिर, पाताल रुद्रेश्वर गुफा, गोल्ज्यू मंदिर, निकट गोरलचौड मैदान, पूर्णागिरी मंदिर, वारही देवी मंदिर देवीधुरा, रीठा मीठा साहिब, नैनादेवी मंदिर, गर्जियादेवी मंदिर, कैंचीधाम, चैती (बाल सुंदरी) मंदिर, अटरिया देवी मंदिर व नानकमत्ता साहिब प्रमुख रूप से शामिल किए गए हैं।
Delhi
Delhi Bomb Threat: 4 स्कूल और Axis Bank को मिली धमकी, मचा हड़कंप

दिल्ली में बम धमकी के बाद अलर्ट, छात्रों को सुरक्षित निकाला गया
Delhi Bomb Threat: सोमवार सुबह दिल्ली में चार स्कूलों और एक बैंक को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। ईमेल के जरिए मिली इस धमकी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं। एहतियातन स्कूलों और बैंक परिसर को खाली कराया गया और सभी जगहों पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया
मुख्य बिंदु
दिल्ली के चार स्कूलों को मिली बम से उड़ाने की धमकी
सोमवार सुबह दिल्ली में उस समय हड़कंप मच गया जब अलग-अलग इलाकों में स्थित चार स्कूलों और एक बैंक को बम से उड़ाने की धमकी मिली। ये धमकी ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। सुरक्षा के मद्देनजर संबंधित परिसरों को खाली कराया गया और आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई। शुरुआती जांच में किसी भी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी है।
ईमेल के जरिए मिली थी धमकी
जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे से साढ़े 9 बजे के बीच दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर स्थित स्कूलों और एक बैंक को धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए। इनमें दिल्ली कैंट स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल, मयूर विहार का सलवान पब्लिक स्कूल, जनकपुरी का मीरा पब्लिक स्कूल और बल्लीमारान का राबिया गर्ल्स स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा बराखंबा रोड स्थित एक बैंक शाखा को भी धमकी भरा संदेश मिला। सूचना मिलते ही पुलिस टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और सभी स्थानों पर सघन जांच शुरू कर दी गई।
धमकी की मिलने के बाद स्कूलों को कराया खाली
धमकी मिलने के बाद एहतियातन स्कूल परिसरों को खाली कराया गया। छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। इसके साथ ही बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने स्कूल और बैंक परिसरों में गहन तलाशी अभियान चलाया। सुरक्षा एजेंसियों ने हर कोने की बारीकी से जांच की ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
साइबर टीम ईमेल का स्रोत पता लगाने में जुटी
पुलिस अधिकारियों के मुतबिक, अब तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। हालांकि जांच अभी जारी है और सभी स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वहीं साइबर टीम को भी सक्रिय कर दिया गया है, जो धमकी भरे ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
Tech
कैब इंडस्ट्री में बड़ा धमाका : 5 फरवरी से शुरू हुई ‘Bharat Taxi App’, ओला-उबर को देगी टक्कर!

Bharat Taxi App : कैब इंडस्ट्री में बड़ी क्रांति, अब न सर्ज प्राइसिंग का डर और न कमीशन का बोझ
भारतीय परिवहन (Transportation) के इतिहास में 5 फरवरी 2026 की तारीख एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर ‘भारत टैक्सी ऐप’ (Bharat Taxi App) का आधिकारिक आगाज़ हो चुका है। यह महज एक और कैब बुकिंग ऐप नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ‘गेम चेंजर’ मॉडल है जो ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने और ड्राइवर्स व यात्रियों के हितों की रक्षा करने के लिए मैदान में उतरा है।
सरकार के समर्थन और सहकारी (Cooperative) भावना के साथ शुरू हुई यह सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में अपनी दस्तक दे चुकी है, जिसे जल्द ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे महानगरों में चरणों में विस्तारित किया जाएगा।
क्यों चर्चा में है भारत टैक्सी ऐप? (Unique Value Proposition)
भारत में अब तक कैब एग्रीगेटर्स का जो मॉडल रहा है, उसमें अक्सर दो शिकायतें सबसे प्रमुख रही हैं: पहली, यात्रियों से वसूला जाने वाला बेतहाशा ‘सर्ज प्राइस’ (Surge Pricing) और दूसरी, ड्राइवर्स से लिया जाने वाला भारी-भरकम कमीशन (जो अक्सर 25% से 30% तक होता है)। भारत टैक्सी ऐप ने इन दोनों ही समस्याओं की जड़ पर प्रहार किया है।
ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल: अब ड्राइवर ही बनेंगे मालिक
इस ऐप की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खूबी इसका ‘ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल’ है। पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स पर ड्राइवर केवल एक ‘पार्टनर’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन भारत टैक्सी में वे प्लेटफॉर्म के सह-मालिक (Co-owners) होंगे।
- ज़ीरो कमीशन: भारत टैक्सी अपने ड्राइवर्स से किसी भी ट्रिप पर कोई कमीशन नहीं लेगा। यानी यात्री जो भुगतान करेगा, उसका पूरा हिस्सा सीधे ड्राइवर की जेब में जाएगा।
- शेयरहोल्डिंग: इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले प्रत्येक ड्राइवर को सहकारी संस्था के 5 शेयर दिए जाएंगे। इससे ड्राइवर्स का संगठन के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा और वे खुद को एक कर्मचारी के बजाय एक उद्यमी महसूस करेंगे।
- न्यूनतम मेंबरशिप फीस: कमीशन के बजाय, ड्राइवर्स को केवल एक मामूली मेंबरशिप फीस देनी होगी। इसे अपनी सुविधा के अनुसार दैनिक, साप्ताहिक या मासिक आधार पर चुकाया जा सकता है।
यात्रियों के लिए क्या है खास? (Passenger Benefits)
एक आम यात्री हमेशा दो चीजें चाहता है: सस्ता सफर और पारदर्शिता। भारत टैक्सी इन दोनों पैमानों पर खरी उतरती दिख रही है।
किराए में 30% तक की बचत
कंपनी का दावा है कि भारत टैक्सी का किराया मौजूदा मार्केट रेट्स से लगभग 20 से 30 फीसदी तक कम होगा। चूंकि कंपनी बीच में अपना कमीशन नहीं रख रही है, इसलिए उस बचत का सीधा लाभ यात्रियों को सस्ते किराए के रूप में दिया जा रहा है।
सर्ज प्राइसिंग का खात्मा
अक्सर देखा जाता है कि बारिश होने पर या ऑफिस ऑवर्स के दौरान कैब का किराया अचानक दोगुना या तिगुना हो जाता है। भारत टैक्सी ने स्पष्ट किया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ‘नो सर्ज प्राइसिंग’ नीति लागू होगी। मौसम खराब हो या ट्रैफिक जाम, यात्री को वही किराया देना होगा जो बुकिंग के समय स्क्रीन पर दिखेगा।
विविध विकल्प
भारत टैक्सी ऐप केवल कारों तक सीमित नहीं है। इसमें यात्रियों को उनकी ज़रूरत और बजट के हिसाब से तीन प्रमुख विकल्प मिलेंगे:
- बाइक (Bike Taxi) – कम दूरी और ट्रैफिक से बचने के लिए।
- ऑटो (Auto Rickshaw) – किफायती और आसान सफर के लिए।
- कार (Cabs/Taxis) – कंफर्टेबल लंबी दूरी की यात्रा के लिए।
ड्राइवर्स की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा (Social Security)
भारत टैक्सी केवल बिजनेस पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि यह अपने ड्राइवर्स (जिन्हें ‘सारथी’ कहा जा सकता है) के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्लेटफॉर्म ने लॉन्च के साथ ही निम्नलिखित लाभों की घोषणा की है:
- दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance): ड्यूटी के दौरान किसी भी अनहोनी की स्थिति में ड्राइवर को 5 लाख रुपये का कवर दिया जाएगा।
- स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance): ड्राइवर और उसके परिवार की सेहत का ख्याल रखते हुए 5 लाख रुपये का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा भी प्रदान किया जाएगा।
- पारदर्शी भुगतान: भुगतान प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि ड्राइवर्स को उनके पैसे के लिए हफ्तों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
आंकड़ों में भारत टैक्सी का दबदबा
लॉन्चिंग के समय ही भारत टैक्सी ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। यह दिखाता है कि मार्केट में इस तरह के विकल्प की कितनी सख्त ज़रूरत थी।
| विवरण | आंकड़े |
| लॉन्च की तारीख | 5 फरवरी 2026 |
| प्रारंभिक शहर | दिल्ली-एनसीआर |
| पंजीकृत ड्राइवर्स | 3 लाख से ज्यादा |
| शुरुआती यूजर्स | 1 लाख से ज्यादा |
| संभावित बचत | 30% तक (यात्रियों के लिए) |
| कमीशन दर | 0% (शून्य) |
कैब इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?
भारत टैक्सी का आना भारतीय गिग इकोनॉमी (Gig Economy) के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे बड़ी विदेशी कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: जब ग्राहकों को सस्ता और ड्राइवर्स को बेहतर विकल्प मिलेगा, तो अन्य कंपनियां भी अपनी दरों और कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव करने पर मजबूर होंगी।
- ड्राइवर संतुष्टि: अगर ड्राइवर्स को बेहतर कमाई और सम्मान मिलता है, तो कैब कैंसिलेशन (Cancellation) जैसी समस्याएं कम होंगी, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: सहकारी मॉडल होने के कारण, पैसा विदेशी कंपनियों के खातों में जाने के बजाय देश के भीतर और सीधे काम करने वाले लोगों के पास रहेगा।
निष्कर्ष: एक नई उम्मीद का उदय
भारत टैक्सी ऐप का उद्देश्य केवल एक कमर्शियल ऐप बनना नहीं, बल्कि एक समावेशी (Inclusive) पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। जहां तकनीक का इस्तेमाल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सेवा और सशक्तिकरण के लिए किया जा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो यह आने वाले समय में न केवल परिवहन, बल्कि अन्य डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए भी एक मानक (Benchmark) बन जाएगा।
यदि आप भी दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और महंगे किराए व सर्ज प्राइसिंग से परेशान हैं, तो ‘भारत टैक्सी ऐप’ को आज़माना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह न केवल आपकी जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि देश के लाखों ड्राइवर्स को एक सम्मानजनक जीवन जीने में मदद भी करेगा।
Uttarakhand
भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी उत्तराखंड की झांकी, “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर है आधारित

Uttarakhand News : भारत पर्व पर उत्तराखंड की झांकी भी प्रदर्शित होगी। जो कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर आधारित है। इसमें अल्मोड़ा और बागेश्वर की ताम्र कला को प्रदर्शित किया गया है।
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भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी उत्तराखंड की झांकी
भारत पर्व के आयोजन के दौरान 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखण्ड की विकास यात्रा के दर्शन किए जा सकेंगे। इस वर्ष उत्तराखण्ड की झांकी की थीम “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” रखी गई है, जो आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पारंपरिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
“आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर है आधारित
सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने बताया कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” झांकी के ट्रैक्टर सेक्शन में पारंपरिक वाद्ययंत्रों ढोल और रणसिंघा की आकर्षक तांबे की प्रतिकृतियां हैं, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्पी कारीगरों की कलात्मक महारत का प्रतीक हैं।

ट्रेलर सेक्शन के पहले भाग में तांबे के मंजीरे की एक बड़ी मूर्ति दिखायी गई है, जो तांबे की कला की बारीकियों को विस्तार से उजागर करती है। बीच का सेक्शन खूबसूरती से बनाए गए तांबे के बर्तन जैसे गागर, सुरही, कुण्डी को दर्शाया गया है, जो उत्तराखण्ड के पारंपरिक घरेलू जीवन के आवश्यक तत्व हैं।
कौशल और श्रम की गरिमा का प्रतीक हैं ये बर्तन
इस सेक्शन के नीचे, साइड पैनल पारंपरिक वाद्ययंत्र भोंकोर के प्रमुख चित्रणों से सजाए गए हैं, जो सांस्कृतिक कहानी को और समृद्ध करते हैं। झांकी के पिछले सेक्शन में तांबे के कारीगर की एक आकर्षक और प्रभावशाली मूर्ति है, जो हाथ से तांबे के बर्तन बनाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है। कारीगर के चारों ओर बारीकी से बनाए गए तांबे के बर्तन हैं, जो पीढ़ियों से मिले ज्ञान, कौशल और श्रम की गरिमा का प्रतीक हैं।
उत्तराखण्ड की ये झांकी उत्तराखण्ड के शिल्पी समुदाय की कारीगरी, सांस्कृतिक योगदान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका, कौशल एवं परम्परा को दर्शाती है। चौहान ने आगे बताया कि उत्तराखण्ड की झांकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उसकी प्राचीन शिल्प कला के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है, जो आज भी जीवंत रूप में समाज का हिस्सा बनी हुई है।

उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और रचनात्मक विरासत
स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक तकनीकों से निर्मित तांबे के बर्तन और उपकरण न केवल उत्कृष्ट शिल्प कौशल का उदाहरण हैं, बल्कि राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक के साथ ही धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है। सदियों से ये शिल्प उत्पाद घरेलू उपयोग और पारंपरिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग रहे हैं, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और रचनात्मक विरासत को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शिल्पी समुदाय के अनेक परिवारों के लिए ये प्राचीन शिल्प केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि आजीविका का एक सशक्त माध्यम भी है। पीढ़ियों से चली आ रही उत्कृष्ट तकनीकें प्रत्येक कृति को एक साधारण उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर कला के विशिष्ट नमूने में परिवर्तित कर देती हैं, जो शिल्पी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को प्रतिबिंबित करती हैं।
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