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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में संभागीय निरीक्षक कार्यालय का किया शुभारंभ।

चम्पावत – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत मुख्यालय के संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) कार्यालय का शुभारंभ किया। गोरलचोड़ मैदान में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने चंपावत के विकास का संकल्प लिया है।
उत्तराखण्ड में विराजमान देवी-देवताओं का तथा सभी लोगों का ही आशीर्वाद है कि वे पूरे प्रदेश के साथ ही चम्पावत के लिए मुख्य सेवक के रूप में कुछ कर पा रहे हैं, और ’इस कार्यालय का शुभारम्भ उस संकल्प को पूर्ण करने की दिशा में उठाया गया कदम है। आगे भी ऐसे कार्य नित प्रतिदिन होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही यहां के लोगों की ये मांग आज पूरी होने पर जितनी खुशी आप लोगों को है, उससे कहीं ज्यादा खुशी उन्हें हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत में परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक कार्यालय होने से यहॉ पर वाहनों की फिटनेस व ड्राइविंग लाइसेंस बनने जैसे कार्य होंगे तथा जनता के समय व धनराशि की बचत भी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों की समस्या के समाधान के लिए वह सदैव प्रयासरत हैं। इसी उद्देश्य से जिला मुख्यालय एवं टनकपुर में जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की स्थापना की गई है। ताकि यहां के लोगों को अनावश्यक देहरादून के चक्कर न काटने पड़े। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किए गए सभी वादों को समय पर पूरा करने का पूरा प्रयास भी कर रही है, इसी का परिणाम है कि चम्पावत भ्रमण के दौरान जिस सिप्टी वॉटर फॉल के सौन्दर्यकरण की घोषणा की थी, महाशिव रात्रि के दिन से ही इस कार्य की शुरुवात हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने टनकपुर में अंतरराज्यीय बस अड्डे की घोषणा की थी, उसके लिए भी धनराशि आवंटित कर दी है, जिला पुस्तकालय के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गयी है, राजकीय स्नात्तोकोत्तर महाविद्यालय चम्पावत को सोबन सिंह जीना विश्वविधालय अल्मोड़ा का परिसर बनाये जाने की स्वीकृति प्रदान हो गयी है, इस कॉलेज को मॉडल कॉलेज भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जनपद में कई विकास कार्य लगातार किये जा रहें है और आगे भी किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विभिन्न क्षेत्रों में विश्व में पहचान बनी है। प्रधानमंत्री जी के दिशा निर्देशन में सरकार भी उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प“ के मंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रही है। सभी के सहयोग से हम 2025 तक उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संभागीय निरीक्षक कार्यालय द्वारा बनाए गए लक्ष्मण सिंह के वाहन संख्या यूके 03 टीए 0491 का फिटनेस सार्टिफिकेट तथा सुरेश चन्द्र पाल और पुष्पा जोशी का लर्निंग लाईसेंस भी वितरित कर कार्यालय के कार्यों की शुरुआत की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा जिले के विकास हेतु अनेक घोषणाएं भी की जिसमें,
० मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चम्पावत में आर्मी स्कूल खोला जाएगा। इसके लिए निःशुल्क भूमि आवंटित की जाएगी।
० गोल्ज्यू मन्दिर के समीप पीडब्ल्यूडी की भूमि पर बने क्वार्टर्स को अन्यत्र सरकारी भूमि आवंटित की जाएगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग धनराशि आवंटित करेगा।
० गोल्ज्यू मन्दिर के समीप पीडब्ल्यूडी की भूमि पर एवं पशुपालन की भूमि पर पर्यटन अवस्थापनाओं का विकास किया जाएगा ताकि मानसखण्ड कॉरिडोर से जुड़े इस भव्य मन्दिर को पर्यटन से जोड़ा जा सके।
०लोहाघाट नगर के लिए जल्द ही सरयू पेयजल योजना के सम्बन्ध में उपयुक्त पाये जाने पर डीपीआर बनाया जाएगी
० टनकपुर बनवसा में तत्काल विस्तृत ड्रेनेज प्लान सिंचाई विभाग द्वारा बनाया जाएगा।
० गौरलचौड़ मैदान के समीप पुरानी जेल वाली भूमि पर ओपन एयर थियेटर पर्यटन द्वारा बनाया जाएगा। इसमें कुमाऊँनी शैली की वास्तुकला प्रयोग में लायी जाएगी।
०राजकीय उच्चतर मा० विद्यालय डुंगराबोरा के उच्चीकरण के सम्बन्ध में (इण्टर तक)।
०जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र लोहाघाट में लोहाघाट पंचेश्वर मोटरमार्ग के खीड़ी गांव से धौनी शिलिंग मोटर मार्ग का पुनः निर्माण एवं सुधारीकरण का कार्य किया जाएगा।
इस दौरान क्षेत्रीय सांसद अजय टम्टा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के विकास हेतु नित नए निर्णय लिए जा रहे हैं जिसमें नकल विरोधी कानून एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
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नेत्र दान (Eye Donation) कर हमेशा याद रहेगा जगदीश, पीआरडी जवान का समाज को सन्देश
पिथौरागढ़: नेत्र दान ( Eye Donation ) मरने के बाद भी आंखों का दान करने से किसी की अंधेरी जिंदगी को रोशन हो सकती है। ऐसा ही एक मामला पिथौरागढ़ के बेरीनाग से सामने आया है। बेरीनाग नगर मुख्यालय में रहने वाले 46 वर्षीय पीआरडी जवान जगदीश सिंह डोबाल ने अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में नेत्र दान का फैसला लिया।
कौन थे जगदीश सिंह डोभाल
जगदीश सिंह डोभाल पिथौरागढ़ के बेरीनाग नगर मुख्यालय में रहता था। जो प्रान्तीय रक्षक दल का जवान था। जगदीश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरीनाग में एम्बुलेंस चालक के पद पर तैनात था। जगदीश स्वास्थ्य कर्मी होने के साथ ही बेहतरीन रंगकर्मी और पशु प्रेमी था। जगदीश ने बेरीनाग में आयोजित रामलीला में 5 वर्षों तक सुग्रीव का अभिनय किया। मृतक जगदीश के साथी बताते हैं कि जगदीश सेवा के दौरान से ही अपने शरीर के अंग दान करने कि बातें करता था।
लगातार स्वास्थ्य खराब होने के चलते लिया फैसला
बेरीनाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात 46 वर्षीय जगदीश का अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर परिजन उसे देहरादून के एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया, जिसे देखते हुए जगदीश ने अपनी आंखों को दान ( Eye Donation ) करने का निर्णय लिया। लेकिन जगदीश के इस फैसले से परिजन भी हैरान हो गए। जगदीश के नेत्र दान करने के फैसले की अनेक संगठनों ने सराहना की।
क्या होता है नेत्रदान ( Eye Donation )
नेत्रदान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी आँखों से कॉर्निया निकालकर आई बैंक में संरक्षित किया जाता है। और बाद में जिनकी दृष्टि कॉर्निया खराब हो जाती है सर्जरी के माधयम से उनकी कॉर्निया को बदल दिया जाता है। एक व्यक्ति के नेत्र दान करने से दो व्यक्तियों की आँखों को रोशनी मिल सकती है।

कैसे पूरी होती है प्रक्रिया
- मृत्यु के 6 घंटे के अंदर आंखें निकाली जाती हैं
- मृत्यु के बाद परिजन आई बैंक को सूचना देते हैं।
- आई बैंक की टीम घर/अस्पताल पहुँचती है।
- मृतक की आँखों से केवल कॉर्निया निकाला जाता है (15–20 मिनट)।
- कॉर्निया आई बैंक में परीक्षण व संरक्षण किया जाता है।
- उपयुक्त मरीज को कॉर्निया प्रतिरोपित किया जाता है।
- एक दाता से दो लोगों को रोशनी मिलती है।
FAQs on Eye Donation (Netra Dan)
- 1. नेत्रदान (Eye Donation) क्या है?
- नेत्रदान वह प्रक्रिया है जिसमें मृत्यु के बाद दाता के कॉर्निया को निकालकर किसी अंधे व्यक्ति को दृष्टि देने के लिए प्रतिरोपित किया जाता है।
- 2. नेत्रदान कब और कैसे किया जाता है?
- मृत्यु के 6–8 घंटे के भीतर आई बैंक को कॉल किया जाता है, और उनकी टीम घर/अस्पताल आकर कॉर्निया सुरक्षित रूप से निकालती है।
- 3. क्या नेत्रदान से शरीर के रूप में बदलाव आता है?
- नहीं, केवल कॉर्निया निकाला जाता है, जिससे चेहरे पर कोई बदलाव नहीं होता।
- 4. कौन नेत्रदान कर सकता है?
- लगभग हर आयु और अधिकांश स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोग नेत्रदान कर सकते हैं।
- 5. नेत्रदान से कितने लोगों को लाभ मिलता है?
- एक दाता के कॉर्निया से दो लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकती है।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की राजयपाल से मुलाकात, राजभवन का नाम लोक भवन करने पर दी बधाई

देहरादून: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज लोक भवन जाकर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान मंत्री जोशी ने राज्यपाल को राजभवन का नाम लोक भवन होने पर बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया।
राजभवन का नाम लोक भवन करना महत्वपूर्ण कदम : गणेश जोशी
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन किया जाना जनता की भावना और स्थानीय संस्कृति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राज्यपाल का भी इस निर्णय को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद किया।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) की अध्यक्ष साधना शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से कैंप कार्यालय में भेंट की थी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस संबंध में एक पत्र मंत्री जोशी के माध्यम से भेजकर राजपथ की तर्ज पर ब्रिटिशकालीन ‘‘राजभवन’’ नाम को बदलने का आग्रह किया था।
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संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इन कर्मियों को किया जाएगा नियमित

देहरादून: उत्तराखंड में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश भर में संविदा कर्मी लगातार नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, जिस पर अब सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए संविदा कर्मियों को रहत दी है।
संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर बड़ा फैसला
उत्तराखंड में अब लगातार दस साल से सेवा करने वाले संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया है। दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ रूप में नियुक्त कार्मिकों का विनियमितीकरण (संशोधन) नियमावली-2025 जारी की गई है।
10 वर्षों से सेवा देने वाले कर्मचारी होंगे नियमित
सचिव कार्मिक शैलेश बगोली ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी है। संशोधित नियमावली के मुताबिक सभी शर्तें पूरी करने पर दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप से नियुक्त वे कार्मिक विनियमितीकरण के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने दिनांक 04.12.2018 तक इस रूप में कम से कम दस वर्ष की निररंतर सेवा उस पद या समकक्ष पद पर पूरी कर ली हो।
जबकि उपरोक्त संशोधन से पहले ये व्यवस्था थी कि नियमावली में बताई गई अन्य शर्तों को पूरी करने पर दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप से नियुक्त वो कर्मचारी विनियमितीकरण के पात्र थे, जिन्होंने वर्ष 2013 की नियमावली के प्रख्यापन की तिथि को इस रूप में कम से कम पाँच वर्ष की निरंतर सेवा उस पद या समकक्ष पद पर पूरी कर ली हो।
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