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Uttarkashi : बर्फबारी में ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई थी अंगीठी, दम घुटने से युवक की मौत

Uttarkashi News : उत्तरकाशी में बर्फबारी के बीच ठंड से बचने के लिए एक युवक ने अपने कमरे में अंगीठी जलाई थी। दम घुटने से युवक की मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
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बर्फबारी में ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई थी अंगीठी
उत्तराखंड में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ठंड से बचने के लिए लोग अंगीठी का सहारा ले रहे हैं। लेकिन Uttarkashi जिले में अंगीठी के कारण युवक की मौत हो गई। हर्षिल थाने के तहत झाला में युवक ने ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाई और अंगीठी को ही जलाकर सो गया। युवक की अंगीठी के धुएं की गैस से दम घुटने से मौत हो गई।
Uttarkashi के ही होटल में काम करता था मृतक युवक
मिली जानकारी के मुताबिक युवक झाला स्थित एक होटल में काम करता था। मंगलवार देर रात ठंड से बचने के लिए उसने अंगीठी जलाई और सो गया। गैस लगने से युवक की कमरे में ही मौत हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

हीना का रहने वाला था मृतक
बताया जा रहा है कि महेश (25) निवासी हीना, झाला के एक होटल में काम करता था। मंगलवार रात वो सोया था लेकिन अगली सुबह वो होटल में रूके यात्रियों को नहीं दिखा। जिसके बाद उन्होंने मालिक को इसकी जानकारी दी। जिस पर मालिक उसके कमरे पर पहुंचा। आवाज लगाने पर भी वो नहीं उठा जिलके बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया।
कमरे के अंदर पूरा धुंआ भरा हुआ था और युवक वहीं पर पड़ा हुआ था। लोगों ने चेक किया तो युवक की मौत हो गई थी। जिसके बाद मालिक ने इसकी जानवकारी हर्षिल थाने में दी।
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सीएम पद से चूके अब स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी छिना, धन सिंह रावत से हटाकर सुबोध उनियाल को दिया गया चार्ज

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में दो दिन पहले कैबिनेट विस्तार देखने को मिला था। जिसमें पांच नए मंत्री बनाए गए हैं। जबकि रविवार को सीएम धामी ने नवनियुक्त मंत्रियों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया है। लेकिन इसके साथ ही पुराने मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला है।
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सुबोध उनियाल को मिली स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
रविवार को हुए विभागों के बंटवारे में स्वास्थ्य विभाग को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नौ साल से प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से ये जिम्मा वापस ले लिया गया है। अब ये जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को दी गई है।

सीएम पद से चूके अब स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी छिना
दो बार सीएम से बनने से चूके कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से अब स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी वापस ले लिया गया है। अब उनके पास विद्यालयी शिक्षा, उच्च ,तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा के साथ सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी ही बची है। बता दें कि फिलहाल धन सिंह रावत पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डॉ रावत के कार्यकाल में हुए कई आंदोलन
बता दें कि डॉ. धन सिंह रावत को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी त्रिवेंद्र सरकार में साल 2017 में सौंपी गई थी। जिसके बाद तीरथ रावत और धामी सरकार में भी ये जिम्मेदारी उन्हीं के पास रही। लेकिन अब नौ साल बाद ये जिम्मा उनस वापस ले लिया गया है। उत्तराखंड में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डॉ. धन सिंह रावत का कार्यकाल में पहाड़ों पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर कई आंदोलन देखने को मिले। चौखुटिया से लेकर टिहरी तक लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर आंदोलन तक किए।

चौखुटिया में सरकारी अस्पताल की बदहाली को लेकर बड़ा जन आंदोलन हुआ। टिहरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, पौड़ी और रामनगर में भी बड़े आंदोलन देखने को मिले। चौखुटिया में शुरू हुआ आंदोलन देहरादून कूच पदयात्रा में बदला। जिसके बाद खुद सीएम धामी ने इसका संज्ञान लिया था। माना जा रहा है बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लगातार हो रहे सरकार के विरोध के बाद ये फैसला लिया गया है।
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धाकड़ धामी का चार साल का कार्यकाल बेमिसाल, UCC से लेकर सशक्त भू-कानून तक लिए ये बड़े फैसले

Uttarakhand News : धामी सरकार ने आज चार साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस दौरान धामी सरकार ने UCC से लेकर सशक्त भू-कानून तक कई बड़े फैसले लिए जो ना केवल प्रदेश बल्कि देश के लिए नजीर बन गए हैं।
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धाकड़ धामी का चार साल का कार्यकाल बेमिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने चार वर्ष के दौरान कई ऐसे ऐतिहासिक और सशक्त फैसले लिए, जिनसे राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।
सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई। इसके साथ ही राज्य में सशक्त भू-कानून, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू कर कानून-व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
UCC से लेकर सशक्त भू-कानून तक लिए ये बड़े फैसले
यूसीसी के साथ ही सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इसका परिणाम ये रहा कि बीते चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

अवैध अतिक्रमण पर की गई कार्रवाई
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। जिसके अंतर्गत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। अब यही प्राधिकरण पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए राज्य में लगभग 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जो प्रशासनिक दृढ़ता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई अहम फैसले
धामी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई अहम फैसले लिए हैं। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया। इसके साथ ही सहकारी प्रबंध समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना शुरू की गई। प्रदेश में अब तक 2.54 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संकेत है। स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का बिना ब्याज ऋण देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना की शुरुआत कर महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

राज्य आंदोलनकारियों के लिए लिया गया ऐतिहासिक निर्णय
उत्तराखण्ड सरकार ने चार साल के कार्यकाल में राज्य आंदोलनकारियों, सैनिकों और आमजन के सम्मान व कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को सम्मान देते हुए सरकारी नौकरियों में उन्हें 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है।
इसके साथ ही उनके आश्रितों की पेंशन ₹3000 से बढ़ाकर ₹5500 प्रतिमाह कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य आंदोलन के दौरान 7 दिन जेल गए व घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन भी ₹6000 से बढ़ाकर ₹7000 प्रतिमाह कर दी गई है, जो उनके संघर्ष के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर रोक
उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून की शुरुआत अप्रैल 2018 में हुई थी, जब उस समय की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने इसे लागू किया। इसके बाद नवंबर 2022 में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कानून को और कड़ा करते हुए इसमें संशोधन किया। संशोधित प्रावधानों के तहत जबरन धर्मांतरण के मामलों में अधिकतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया। आगे चलकर 2025 में इस कानून को और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त सख्त प्रावधान भी शामिल किए गए।
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बड़ी खबर : देहरादून में डंपर चालक का शव मिलने से सनसनी, पुलिस मामले की जांच में जुटी

Dehradun News : राजधानी देहरादून में कोतवाली पटेल नगर क्षेत्र के अंतर्गत आज आसन नदी झूला पुल के नीचे डंपर चालक का शव मिलने से सनसनी मच गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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देहरादून में डंपर चालक का शव मिलने से सनसनी
देहरादून में क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ता ही जा रही है। आए दिन हत्याएं और शव मिलने की खबरों से लोगों में सनसनी मच रही है। रविवार शाम को आसन नदी झूला पुल के नीचे एक युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। आस-पास मौजूद लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जहरीले पदार्थ के सेवन से मृत्यु की आशंका
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए मोर्चरी भिजवा दिया है। पोस्टमार्टम के बाद जहरीले पदार्थ के सेवन से मृत्यु होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने लोगों से पूछताछ शुरू कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

भूडपुर नया गांव देहरादून निवासी के रूप में हुई पहचान
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस को आसन नदी झूला पुल के नीचे एक शख्स का शव पड़ा होने की सूचना मिली थी। जिस पर कोतवाली पटेल नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू की तो शख्स की पहचान 32 वर्षीय महेन्द्र सिंह निवासी भूडपुर नया गांव देहरादून के रूप में हुई। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है।
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