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Agnipath Yojna 2026: अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! देखें लेटेस्ट अपडेट…

Agnipath Yojna 2026 Latest Updates
भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में युवाओं की भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) एक बार फिर देश भर में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। साल 2022 में शुरू हुई इस क्रांतिकारी योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर साल 2026 के अंत तक अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। इसी बीच, रक्षा गलियारों से अग्निवीरों के भविष्य को लेकर कई बड़ी और सकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं, जो इस योजना का स्वरूप बदल सकती हैं।
यदि आप भी भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा का जज्बा रखते हैं या अग्निवीर भर्ती 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो यह विस्तृत और व्यापक लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं अग्निपथ योजना क्या है, इसकी चयन प्रक्रिया, सैलरी स्ट्रक्चर, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ और 2026 में इसमें होने वाले बड़े बदलावों के बारे में।
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1. अग्निपथ योजना क्या है? (What is Agnipath Yojna?)
अग्निपथ योजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा 14 जून 2022 को शुरू की गई एक अल्पकालिक सैन्य भर्ती प्रणाली है। इसके तहत देश के युवाओं को 4 साल की अवधि के लिए भारतीय थल सेना (Indian Army), नौसेना (Indian Navy) और वायु सेना (Indian Air Force) में सेवा करने का अवसर मिलता है। इस योजना के माध्यम से सेना में भर्ती होने वाले जवानों को ‘अग्निवीर’ (Agniveers) के नाम से जाना जाता है।
सरकार का इस योजना को लाने के पीछे मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के प्रोफाइल को और अधिक युवा (Youthful Profile) बनाना, औसत आयु को 32 वर्ष से घटाकर 26 वर्ष करना और सेना को आधुनिक तकनीकों (जैसे ड्रोन, एआई, और डिजिटल युद्ध प्रणालियों) से लैस करना है।
2. साल 2026 में सबसे बड़ा बदलाव: क्या 25% से ज्यादा जवान होंगे परमानेंट?
अग्निपथ योजना के मूल नियमों के अनुसार, 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी कैडर (15 साल की नियमित सेवा के लिए) में बरकरार रखा जाना था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवामुक्त कर दिया जाना तय था।
लेकिन वर्ष 2026 में सबसे बड़ी ‘गुड न्यूज’ यह आ रही है कि तीनों सेनाओं ने परिचालन आवश्यकताओं और जमीनी अनुभवों के आधार पर इस रिटेंशन दर (Retention Rate) को बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है:
- भारतीय नौसेना (Indian Navy): तकनीकी और विशिष्ट कार्यप्रणाली को देखते हुए नौसेना लगभग 75 प्रतिशत तक अग्निवीरों को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग कर रही है।
- थल सेना और वायु सेना (Army & IAF): दोनों सेनाएं वर्तमान 25% की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने के पक्ष में हैं।
ऐसा क्यों किया जा रहा है?
सेना के अधिकारियों का मानना है कि पिछले 4 वर्षों में अग्निवीरों ने कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया है, कई बड़े अभियानों में हिस्सा लिया है और आधुनिक हथियारों का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। ऐसे में पूरी तरह से प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम इन जवानों को केवल 4 साल बाद बाहर करना व्यावहारिक नहीं होगा। अधिक रिटेंशन से सेना के पास अनुभवी सैनिकों का एक मजबूत पूल हमेशा उपलब्ध रहेगा।
3. अग्निवीर पात्रता और चयन प्रक्रिया 2026 (Eligibility & Selection Process)
यदि आप अग्निपथ योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित योग्यताओं को पूरा करना आवश्यक है:
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria):
- आयु सीमा: उम्मीदवार की आयु 17.5 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: पदों के अनुसार (जैसे जनरल ड्यूटी, टेक्निकल, क्लर्क आदि) उम्मीदवार का 10वीं या 12वीं पास होना अनिवार्य है।
- लिंग: इस योजना के तहत पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं।
चयन प्रक्रिया के चरण:
- केंद्रीयकृत ऑनलाइन परीक्षा (CEE): सबसे पहले उम्मीदवारों को कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा पास करनी होती है।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और मापन (PMT): लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को दौड़, बीम, और अन्य शारीरिक परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।
- चिकित्सीय परीक्षण (Medical Test): अंतिम चरण में पूर्ण चिकित्सा जांच की जाती है, जिसके बाद मेरिट लिस्ट जारी होती है।
4. अग्निवीर सैलरी और ‘सेवा निधि’ पैकेज (Salary Structure & Seva Nidhi)
अग्निवीरों को 4 साल की सेवा के दौरान एक आकर्षक और कस्टमाइज्ड मासिक पैकेज दिया जाता है, जो हर साल बढ़ता है। इसके साथ ही उन्हें रिस्क और हार्डशिप अलाउंस भी मिलता है।
| वर्ष | मासिक वेतन (Gross Salary) | इन-हैंड सैलरी (70%) | अग्निवीर कॉर्पस फंड (30%) |
| प्रथम वर्ष | ₹30,000 | ₹21,000 | ₹9,000 |
| द्वितीय वर्ष | ₹33,000 | ₹23,100 | ₹9,900 |
| तृतीय वर्ष | ₹36,500 | ₹25,550 | ₹10,950 |
| चतुर्थ वर्ष | ₹40,000 | ₹28,000 | ₹12,000 |
सेवा निधि पैकेज (Seva Nidhi Package):
अग्निवीर के वेतन से जो 30% हिस्सा काटा जाता है, उतना ही योगदान (Matching Contribution) भारत सरकार भी देती है। 4 साल की अवधि समाप्त होने पर, संचित ब्याज सहित प्रत्येक अग्निवीर को लगभग ₹11.71 लाख का एकमुश्त ‘सेवा निधि’ पैकेज दिया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी राशि पूरी तरह से आयकर (Income Tax) से मुक्त होती है।
5. जीवन सुरक्षा और अन्य वित्तीय लाभ
अग्निपथ योजना के तहत जवानों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है:
- गैर-अंशदायी जीवन बीमा: सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को ₹48 लाख का मुफ्त जीवन बीमा कवर मिलता है।
- ड्यूटी के दौरान शहादत पर: यदि कोई अग्निवीर सेवा के दौरान शहीद होता है, तो उसके परिवार को ₹1 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता (सेवा निधि और गैर-सेवा अवधि का वेतन मिलाकर) दी जाती है।
- दिव्यांगता की स्थिति में: ड्यूटी के दौरान अक्षमता की गंभीरता के आधार पर ₹44 लाख तक की अनुग्रह राशि का प्रावधान है।
6. 4 साल बाद क्या हैं करियर के विकल्प? (Future Opportunities)
जो 75% या 50% अग्निवीर (नए नियमों के आधार पर) 4 साल बाद सेवामुक्त होंगे, उन्हें समाज में पुनर्वास के लिए कई तरह के विशेष अवसर दिए जा रहे हैं:
- सुरक्षा बलों में आरक्षण: गृह मंत्रालय (MHA) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) जैसे BSF, CISF, CRPF और असम राइफल्स में पूर्व-अग्निवीरों के लिए 10% रिक्तियां आरक्षित की हैं।
- राज्य पुलिस में प्राथमिकता: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे कई राज्यों ने अपनी पुलिस और संबद्ध सेवाओं की भर्तियों में पूर्व-अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है।
- कॉर्पोरेट और बैंक लोन: कई बड़ी निजी कंपनियों (जैसे टाटा, महिंद्रा) ने पूर्व-अग्निवीरों को नौकरी देने की इच्छा जताई है। इसके अलावा, जो युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बैंक ‘सेवा निधि’ के आधार पर प्राथमिकता से लोन प्रदान करते हैं।
- शैक्षणिक डिग्री: रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के समन्वय से पूर्व-अग्निवीरों के लिए विशेष डिप्लोमा और ग्रेजुएशन क्रेडिट सिस्टम तैयार किया गया है, ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई आसानी से पूरी कर सकें।
निष्कर्ष (Conclusion)
अग्निपथ योजना 2026 न केवल भारतीय सेना को अत्याधुनिक और युवा बना रही है, बल्कि देश के युवाओं के लिए करियर के नए द्वार भी खोल रही है। वर्ष 2026 में सेना द्वारा रिटेंशन रेट (स्थायी होने की सीमा) को 25% से बढ़ाकर 50% या 75% करने की मांग ने युवाओं के बीच इस योजना के प्रति आकर्षण और भरोसे को और मजबूत कर दिया है। यदि आप अनुशासित जीवन, देश सेवा और एक सुरक्षित वित्तीय भविष्य की चाह रखते हैं, तो अग्निपथ योजना आपके सपनों को उड़ान देने का एक बेहतरीन माध्यम है।
अस्वीकरण: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक सूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। भर्ती की सटीक तारीखों और नियमों में बदलाव की अंतिम पुष्टि के लिए हमेशा भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट (joinindianarmy.nic.in) पर जाएँ।
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नवरात्रि पर मां के 9 रूप बदल सकते हैं किस्मत! जानें किसकी पूजा से दूर होंगे कष्ट

Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए विशेष माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, साहस, शांति और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। हर दिन मां के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है और उनसे जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
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मां शैलपुत्री की पूजा से मिलेगी दृढ़ता
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। देवी का यह स्वरूप धैर्य, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की कामना की जाती है। जो लोग जीवन में अस्थिरता या निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं, वे माता की पूजा कर मनोबल प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
भोग: मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से बढ़ेगा आत्मबल
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, संयम और संकल्प शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मन को एकाग्र रखने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थी और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत कर रहे लोग भी माता से एकाग्रता और आत्मबल की कामना करते हैं।
भोग: माता को शक्कर, सफेद मिठाई या पंचामृत अर्पित किया जाता है।

मां चंद्रघंटा की आराधना से दूर होगा भय
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। देवी का यह स्वरूप साहस, शौर्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से भय और मानसिक अशांति से मुक्ति तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्राप्त करने की कामना की जाती है।
भोग: मां चंद्रघंटा को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा से मिलेगी सकारात्मकता
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उन्हें सृष्टि की ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में ऊर्जा, उत्साह, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की जाती है। देवी का यह स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
भोग: मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा सुख-शांति का आशीर्वाद
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है और उनकी माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य और करुणा का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा से परिवार में सुख-शांति, प्रेम और खुशहाली की कामना की जाती है।
भोग: इस दिन माता को केले का भोग अर्पित किया जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा से मिलेगी बाधाओं से लड़ने की शक्ति
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति और सफलता प्राप्त करने की कामना की जाती है। देवी को महिषासुर का वध करने वाली मां के रूप में भी पूजा जाता है।
भोग: मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा है।

मां कालरात्रि की पूजा से दूर होगा भय और संकट
सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। देवी का यह स्वरूप उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करती हैं। उनकी पूजा करके भक्त जीवन की परेशानियों, अनिश्चितताओं और संकटों का सामना करने के लिए शक्ति और साहस की कामना करते हैं।
भोग: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां महागौरी की पूजा से मिलती है शांति
नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी मनाई जाती है और मां महागौरी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है। अष्टमी पर कई परिवारों में कन्या पूजन भी किया जाता है।
भोग: मां महागौरी को नारियल अर्पित करने की परंपरा है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में देवी को सिद्धियां प्रदान करने वाली और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माना जाता है। उनकी आराधना से ज्ञान, सफलता, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में संतुलन की कामना की जाती है। नवमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन और हवन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।

भोग: मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
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1 अक्टूबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम, आपकी जेब और दस्तावेजों पर पड़ेगा असर

New Rules : हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कुछ नए नियम और बदलाव लेकर आती है। अब अक्टूबर की शुरुआत होने वाली है और 1 अक्टूबर 2026 से LPG सब्सिडी, बैंक एफडी और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है।
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1 अक्टूबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम
कल यानी एक अक्टूबर से होने वाले बदलावों का सीधा असर आम ग्राहकों और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े कामकाज पर पड़ सकता है। ऐसे में अगर आप LPG सिलिंडर लेते हैं, बैंक में FD है या जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़ा काम है, तो इन बदलावों को जानना आपके लिए जरूरी है।
LPG सब्सिडी को लेकर देखने को मिलेगा बदलाव
सब्सिडी वाले सिलिंडर के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। हालांकि, BAA नहीं कराने पर LPG सिलिंडर की सप्लाई बंद नहीं होगी, लेकिन ग्राहक को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल सकता है और सिलिंडर बाजार दर पर लेना पड़ सकता है।

आरबीआई ने बल्क डिपॉजिट को लेकर नए नियम किए जारी
RBI के नए नियम के तहत अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी को बल्क डिपॉजिट माना जाएगा। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बैंक अपनी जरूरत के अनुसार ऐसी एफडी पर ब्याज दर तय कर सकेंगे।
बैंकों को हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी नई ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी। 10 मिनट के ग्रेस पीरियड के बाद यानी 10:10 बजे तक दरें वेबसाइट पर उपलब्ध होनी जरूरी होंगी।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए भी बदले नियम
1 अक्टूबर से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण से जुड़े संशोधित प्रावधान लागू होंगे। दो साल से अधिक देरी से पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। वहीं, एक से दो साल की देरी पर जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
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बड़ी खबर : कल से तीन दिन देश में बंद रहेंगे बैंक, जानें क्यों और कहां रहेगी बैंकों की छुट्टी ?

Bank Holidays : आज के समय में बैंकिंग से जुड़े ज्यादातर काम मोबाइल और इंटरनेट के जरिए आसानी से किए जा सकते हैं। पैसे ट्रांसफर करने से लेकर क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन और लोन की प्रक्रिया तक कई सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कुछ जरूरी कामों के लिए बैंक की शाखा में जाना पड़ता है। ऐसे में अगर बैंक पहुंचने के बाद शाखा बंद मिले तो परेशानी होना तय है। खासकर तब, जब लगातार कई दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हों।
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कल से तीन दिन देश में बंद रहेंगे बैंक
11 सितंबर से 13 सितंबर तक बैंक की छुट्टियों को लेकर अलग-अलग दिनों में अलग-अलग वजहें हैं। आइए जानते हैं इन तीन दिनों में कहां बैंक बंद रहेंगे और किस दिन पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी। 11 सितंबर को बैंक की छुट्टी पूरे देश में एक जैसी नहीं है।
राजस्थान में जहां चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं, वहां संबंधित बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अलावा जयपुर नगर निगम क्षेत्र में होने वाले चुनाव के चलते शुक्रवार यानी 11 सितंबर को बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा।
राजधानी दिल्ली में भी बंद रहेंगे बैंक
दिल्ली में 11 सितंबर को 18वें BRICS सम्मेलन के आयोजन के कारण सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। कुछ स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को भी बंद रखने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, दिल्ली में बैंक बंद रखने को लेकर अलग से कोई सामान्य बैंक अवकाश आदेश सामने नहीं आया है।

12 सितंबर को पूरे देश में बैंक बंद
अब बात करते हैं 12 सितंबर की। शनिवार यानी 12 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बैंक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक शाखाओं में अवकाश रहता है। इसलिए 12 सितंबर को देशभर में सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी। हालांकि, बैंक की कई डिजिटल सेवाएं जैसे UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सामान्य तौर पर उपलब्ध रह सकती हैं।
13 सितंबर को भी बैंक नहीं खुलेंगे
अगर आपको लगता है कि 12 सितंबर की छुट्टी के बाद 13 सितंबर को बैंक खुल जाएंगे, तो ऐसा नहीं है। 13 सितंबर को रविवार है, इसलिए देशभर में बैंक शाखाओं का साप्ताहिक अवकाश रहेगा। यानी सरकारी और प्राइवेट दोनों बैंकों की शाखाएं रविवार को बंद रहेंगी।
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