Uttarakhand
गुजरात से आई एक महिला की यमुनोत्री धाम यात्रा पर मौत, अब तक 24 श्रद्धालुओं की हुई मौत।

उत्तरकाशी – चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आई गुजरात की एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गई। अब तक यमुनोत्री धाम की यात्रा के दौरान मरने वालों की संख्या हुई 24 हो गई है।

जानकारी के अनुसार, जानकीचट्टी यमुनोत्री पैदल मार्ग पर गुजरात की कलसरिया मंगू बेन(59) अचानक अचेत होकर गिर गई। उन्हें अचेतावस्था में जानकीचट्टी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डाक्टर हरदेव सिंह पंवार ने बताया कि परिजनों के अनुसार वह पहले से बीमार थीं और उनका इलाज भी चल रहा था। चारधाम यात्रा के दौरान अब तक केदारनाथ में सबसे ज्यादा 52 यात्रियों की मौत हुई है। वहीं, बदरीनाथ में 23, और गंगोत्री में आठ यात्रियों की मौत हुई है।
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कौन हैं आशीष चौहान ? जो बने देहरादून के नए जिलाधिकारी, कई जिलों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, जानें यहां

Ashish Chauhan : उत्तराखंड सरकार ने राजधानी देहरादून की प्रशासनिक जिम्मेदारी अब अनुभवी आईएएस अधिकारी आशीष चौहान को सौंप दी है। उन्हें जिले का नया जिलाधिकारी (DM) नियुक्त किया गया है।
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कौन हैं आशीष चौहान ? जो बने देहरादून के नए जिलाधिकारी
आशीष चौहान वर्ष 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उनका मूल निवास राजस्थान में है। उन्होंने इतिहास विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की है और इसी क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री भी हासिल की है बता दें कि प्रशासनिक सख्ती, आम लोगों से सीधा संवाद और फील्ड स्तर पर सक्रिय कार्यशैली के कारण आशीष चौहान लंबे समय से राज्य के प्रमुख अधिकारियों में गिने जाते हैं।
कई जिलों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
आशीष चौहान इससे पहले उत्तराखंड के कई अहम जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने पौड़ी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है। इन जिलों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।

वर्ष 2025 में उन्हें पौड़ी के जिलाधिकारी पद से स्थानांतरित कर यूकाडा (UKADA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और खेल एवं युवा कल्याण विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया था।
कई बार देर रात पहुंच जाते थे दूर-दराज के गांव
पौड़ी में उनके कार्यकाल की सबसे अधिक चर्चा उनकी कार्यशैली को लेकर हुई। वे कई बार देर रात तक दूरदराज गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते और मौके पर समाधान की कोशिश करते दिखाई दिए। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो कार्यालय तक सीमित रहने के बजाय फील्ड में सक्रिय रहना पसंद करते हैं।

बैठकों से अधिक जमीनी स्थिति का आकलन करने को देते हैं प्राथमिकता
उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत एवं आपदा प्रभावित जिलों में काम करने का अनुभव भी उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड को मजबूत बनाता है। सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा राहत कार्यों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई मामलों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
आशीष चौहान की कार्यप्रणाली को लेकर यह माना जाता है कि वे कागजी बैठकों से अधिक जमीनी स्थिति का आकलन करने को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा वे अप्रैल 2021 से जून 2021 तक उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (MD) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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करोड़ों की संपत्ति लेकिन फिर भी उत्तराखंड के नेता नहीं उठा पा रहे अपनी यात्रा का खर्चा, RTI से हुआ बड़ा खुलासा

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में यूं तो नेताओं के पास करोड़ों की संपत्ति है लेकिन फिर नेता और उनके परिवार वाले दान में मिलने वाले पैसों से यात्रा कर रहे हैं।
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करोड़ों की संपत्ति लेकिन फिर भी उत्तराखंड के नेता BKTC के खर्चे पर कर रहे यात्रा
उत्तराखंड के नेता और उनके बच्चे बद्रीनाथ और बाबा केदार के दर्शनों के लिए जाने का खर्चा तक नहीं उठा पा रहे हैं तभी तो इनकी यात्राओं के पैसे बीकेटीसी को देने पड़ रहे हैं।
जिस पैसे को आप अपनी श्रद्धा से बद्री केदार में चढ़ाते हैं ये सोचते हुए कि इनसे कुछ पुण्य का काम होगा या ये पैसे किसी जरूरतमंद के काम आएंगे तो वहीं इन पैसों को भी उत्तराखंड के मंत्री विधायक और उनके परिवार की खुशामत के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी कह रहे हैं। उनके द्वारा किए गए खुलासे और पेश किए गए दस्तावेज पूरी कहानी बयां कर रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नहीं उठा पाई अपनी यात्रा का खर्चा
उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी और खुद केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल मंदिर समिति के खर्चे पर चलती हैं। कैबिनेट मंत्री की बेटी नेहा जोशी बाबा केदार के दर्शनों के लिए जाती हैं लेकिन अपने खर्चे के लिए साथ कुछ भी नहीं ले जाती।
उनके रहने की व्यवस्था भी मंदिर समिति करती है और खाने की भी। विकेश नेगी ने आरटीआई से खुलासा किया है कि नेहा जोशी की आवभगत में बीकेटीसी ने महज दो दिन में ही 60 हजार रूपए खर्च दिए। अब यहां सवाल उठता है कि क्या उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री की बेटी इतनी गरीब हैं कि अपनी दो दिन की यात्रा का खर्चा तक खुद नहीं उठा सकतीं।

केदारनाथ विधायक पर बीकेटीसी ने खर्च किए 37,500 रूपए
ये लिस्ट यहीं नहीं रूकटी अगला नाम जो है वो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा। क्योंकि ये नाम किसी और का नहीं बल्कि खुद बाबा केदार की नगरी केदारनाथ की विधायक का है। यूं तो विधायक महोदया महीने का चार लाख रूपए सभी भत्ते मिलाकर लेती हैं लेकिन अपनी एक दो दिन की यात्रा के कुछ हजार भी खुद नहीं चुका पा रहीं। केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के दर्शन और रहने पर बीकेटीसी ने 37,500 रूपए खर्चे किए। ये ब्यौरा तब का है जब पिछले साल कपाट खुलने के दौरान विधायक महोदया केदारनाथ पहुंची थीं।
पीएम मोदी के भाई से जिलाध्यक्ष पर खर्च हुए हजारों रूपए
ये लिस्ट यहीं पर नहीं रूकती इसमें पीएम मोदी के भाई से लेकर रुद्रप्रयाग भाजपा जिलाध्यक्ष तक कई नाम शामिल हैं। जो खुद का खर्चा ही नहीं उठा पाते इसलिए चंदे पर जीते हैं। बीकेटीसी ने प्रधानमंत्री मोदी के भाई पंकज मोदी पर: ₹22,000, आरएसएस नेता प्रकाश व निरंजन पर: ₹20,000, रुद्रप्रयाग भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट और अन्य कार्यकर्ताओं के ऊपर: ₹24,000 और बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक अजय श्रीवास्तव के ऊपर: 23,000 रूपए खर्च किए हैं।

सभी से पैसे वापस ले बीकेटीसी – गणेश गोदियाल
बीकेटीसी के अध्यक्ष रह चुके कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया की अगर बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष इन दौरों के दौरान खुद भी मौजूद थे तो यह खर्चा समिति के खाते में जुड़ सकता है लेकिन अगर इससे इतर ये लोग अपने निजी दौरे पर थे और समिति द्वारा खर्च किया गया है तो मंदिर समिति को चाहिए कि इन सभी नेताओं को एक पत्र जारी करें और उनसे वह पैसा वापस लिया जाए जो उनके दौरे के दौरान खर्च हुआ।
Rudraprayag
अलकनंदा में समाई बोलेरो! चालक का अब तक नहीं मिला सुराग, सर्च ऑपरेशन अब भी जारी

Rudraprayag News : रूद्रप्रयाग में एक बोलेरो वाहन बीती देर रात अलकनंदा नदी में गिर गया। जिसका चालक लापता है। चई घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक उसका कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है।
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अलकनंदा में समाई बोलेरो! चालक का अब तक नहीं मिला सुराग
रुद्रप्रयाग जिले के बिजराकोट क्षेत्र के पास रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। जानकारी के अनुसार, चमसिल क्षेत्र के सारी बैंसोड़ के निकट एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी में जा गिरा। बताया जा रहा है कि दुर्घटना उस समय हुई जब वाहन गौचर से बिजराकोट की ओर लौट रहा था।
वाहन में केवल चालक ही थी सवार
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वाहन में केवल चालक सवार था। चालक की पहचान बिजराकोट निवासी राकेश सिंह के रूप में हुई है। हादसे के बाद से चालक का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है और उसकी तलाश जारी है।

मौके पर सर्च ऑपरेशन अब भी जारी
घटना की सूचना मिलते ही घोलतीर पुलिस, एसडीआरएफ, जल पुलिस और डीडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सभी टीमें संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। देर रात से अब तक 12 घंटे से भी ज्यादा का समय बीत गया है लेकिन चालक का अब तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।
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