Uttarakhand
गुजरात से आई एक महिला की यमुनोत्री धाम यात्रा पर मौत, अब तक 24 श्रद्धालुओं की हुई मौत।

उत्तरकाशी – चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आई गुजरात की एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गई। अब तक यमुनोत्री धाम की यात्रा के दौरान मरने वालों की संख्या हुई 24 हो गई है।

जानकारी के अनुसार, जानकीचट्टी यमुनोत्री पैदल मार्ग पर गुजरात की कलसरिया मंगू बेन(59) अचानक अचेत होकर गिर गई। उन्हें अचेतावस्था में जानकीचट्टी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डाक्टर हरदेव सिंह पंवार ने बताया कि परिजनों के अनुसार वह पहले से बीमार थीं और उनका इलाज भी चल रहा था। चारधाम यात्रा के दौरान अब तक केदारनाथ में सबसे ज्यादा 52 यात्रियों की मौत हुई है। वहीं, बदरीनाथ में 23, और गंगोत्री में आठ यात्रियों की मौत हुई है।
Dehradun
उत्तराखंड का ‘लेखक गांव’ बनेगा नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

Dehradun News : उत्तराखंड सरकार द्वारा साहित्य पर्यटन को प्रोत्साहित करने की घोषणा का देश के पहले लेखक गांव ने स्वागत किया है। लेखक गांव का मानना है कि राज्य सरकार की इस पहल से उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी तथा साहित्य आधारित पर्यटन को व्यापक और संस्थागत स्वरूप प्राप्त होगा।
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उत्तराखंड का ‘लेखक गांव’ बनेगा नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट
देश के प्रथम लेखक गांव ने अपनी स्थापना के बाद से साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण और पर्यटन को एक सूत्र में जोड़ते हुए “साहित्य पर्यटन पथ” की अवधारणा पर निरंतर कार्य किया है। लेखक गांव का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि साहित्यकारों के जीवन, उनकी रचनाओं, जन्मस्थलों, कर्मभूमि और उनसे जुड़े सांस्कृतिक परिवेश को अनुभव कराने वाली एक नई पर्यटन संस्कृति विकसित करना रहा है। इसी दृष्टि से लेखक गांव ने साहित्य ग्रामों की अवधारणा को भी निरंतर आगे बढ़ाया है।
उत्तराखंड सरकार की पहल से मिलेगा व्यापक विस्तार
साल 2025 में सुमित्रानंदन पंत जयंती के अवसर पर हेनब गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के सहयोग से “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” का सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन लेखक गांव में किया गया। तदोपरांत 23 मई 2026 को लेखक गांव द्वारा “साहित्य पर्यटन पथ” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें साहित्यकारों, पर्यटन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने उत्तराखंड में साहित्य पर्यटन की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

कई ऐतिहासिक स्थलों को किया जा सकता है विकसित
लेखक गांव का मानना है कि उत्तराखंड में अनेक ऐसे साहित्यिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जिन्हें साहित्य ग्राम और साहित्य पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है। इनमें कौसानी प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली, रामगढ़ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और महादेवी वर्मा की साहित्य साधना से जुड़ा स्थल, मायावती स्वामी विवेकानंद की तपोभूमि भी है।
अल्मोड़ा महात्मा गांधी के प्रवास से जुड़ा क्षेत्र, कालीमठ आदि कवि कालिदास की जन्मस्थली, कण्वाश्रम ऋषि कण्व और चक्रवर्ती सम्राट भरत की परंपरा से जुड़ा क्षेत्र, माणा महर्षि वेदव्यास की तपस्थली, दुगड्डा इतिहासकार डॉ. शिवप्रसाद डबराल की कर्मभूमि, पाली हिंदी के प्रथम डी.लिट्. डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल तथा मालकोटी (पट्टी तल्ला नागपुर) सुप्रसिद्ध कवि चंद्रकुँवर बर्त्वाल की जन्मस्थली जैसे अनेक साहित्यिक स्थल शामिल हैं, जिन्हें एक समेकित “साहित्य पर्यटन पथ” के रूप में विकसित किया जा सकता है।
“सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ यात्रा” का जल्द होगा शुभारंभ
लेखक गांव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने कहा कि साहित्य पर्यटन केवल पर्यटन नहीं, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक स्मृतियों, साहित्यिक विभूतियों और प्रकृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। लेखक गांव इस दिशा में निरंतर कार्य करता रहा है और आगे भी राज्य सरकार, पर्यटन विभाग, शैक्षणिक संस्थानों तथा साहित्यिक जगत के सहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
इसी क्रम में आगामी सितंबर माह में लेखक गांव से “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ यात्रा” का शुभारंभ किया जाएगा। यह यात्रा कौसानी तक जाएगी, जहाँ सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली पर साहित्यिक आयोजन एवं लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।
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उत्तराखंड में आज कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, इन जिलों में स्कूल बंद

Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। खराब मौसम की चेतावनी के बाद प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर बागेश्वर, टिहरी और चंपावत जिलों में 29 जुलाई को कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
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उत्तराखंड में आज कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देहरादून के अनुसार, 29 और 30 जुलाई को राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही कई स्थानों पर गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।
29 जुलाई को इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 29 जुलाई के लिए देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इन इलाकों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की भी आशंका है।

30 जुलाई को इन जिलों पर रहेगा असर
30 जुलाई को बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी, टिहरी और नैनीताल में भी तेज बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।
प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने, आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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देहरादून में BSNL कर्मचारियों का प्रदर्शन, सरकार और प्रबंधन से की बड़ी मांगें, तीन दिन तक चलेगा धरना

Dehradun News : बीएसएनएल उत्तराखंड सर्किल में कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल–उत्तराखंड सर्किल के आह्वान पर 28 से 30 जुलाई तक चलने वाले इस आंदोलन के पहले दिन परिमंडल कार्यालय, पटेल नगर, देहरादून में कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
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देहरादून में BSNL कर्मचारियों का प्रदर्शन
आज देहरादून में बीएसएनएल उत्तराखंड सर्किल में कर्मचारियों ने अपना तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। धरना शुरू होने से एक दिन पहले यानी 27 जुलाई को कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में ब्लैक बैज लगाकर विरोध दर्ज कराया था। अब तीन दिवसीय आंदोलन के माध्यम से कर्मचारी अपनी लंबित मांगों के जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

सरकार और प्रबंधन से की बड़ी मांगें
यूनियन की प्रमुख मांगों में उत्तराखंड में लागू किए जा रहे संगठनात्मक पुनर्गठन (ऑर्गेनाइजेशनल रीस्ट्रक्चरिंग) के पायलट प्रोजेक्ट को वापस लेने की मांग शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि इस योजना को लागू करने से पहले सभी मानव संसाधन (HR) से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।
तीन दिन तक चलेगा धरना
बता दें कि यूनियन ने 1 जनवरी 2017 से लंबित तीसरे पीआरसी के तहत वेतन संशोधन (Wage Revision) का लाभ कर्मचारियों को दिए जाने की भी मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन संशोधन से जुड़ी “अफोर्डेबिलिटी क्लॉज” में आवश्यक छूट देकर इसका लाभ सभी कर्मचारियों तक पहुंचाया जाए।
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