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नवरात्रि के पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा, ये भोग लगाने से बरसेगी आप पर कृपा, जानें पूजा विधि और मंत्र

Chaitra Navratri 2026 Day 1 : हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है, और पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना का विशेष महत्व होता है।
इसी दिन विधि-विधान से कलश स्थापना भी की जाती है, जिससे नवरात्रि पूजा का शुभारंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है और मानसिक अशांति दूर होती है।
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नवरात्रि के पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है, इसलिए इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इनका वाहन वृषभ (बैल) है, इसी कारण इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल शोभायमान रहता है।
कलश स्थापना का शुभ समय
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, कलश स्थापना के लिए सुबह 6:50 बजे से 7:52 बजे तक का समय उत्तम है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इन दोनों समयों में से किसी एक में श्रद्धापूर्वक स्थापना करना शुभ फलदायी माना गया है।

नवरात्रि के पहले दिन की व्रत कथा (Navratri Day 1 Vrat Katha)
धार्मिक कथाओं के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन की कथा (Navratri Day 1 Vrat Katha) – पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री सती के रूप में प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। एक बार दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया।
भगवान शिव के मना करने के बावजूद माता सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंचीं। वहां उन्हें और उनके पति का अपमान सहना पड़ा। इस अपमान से आहत होकर सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद अगले जन्म में उन्होंने हिमालय के घर जन्म लिया और शैलपुत्री के नाम से जानी गईं। बाद में उनका विवाह पुनः भगवान शिव से हुआ और वे उनकी अर्धांगिनी बनीं।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- 1. सबसे पहले सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
- 2. पूजा स्थल को शुद्ध कर कलश स्थापना करें।
- 3. मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- 4. उन्हें रोली, अक्षत, फूल अर्पित करें।
- 5. धूप-दीप जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें और आरती करने के बाद प्रसाद बांटे।
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं? (Navratri Day 1 Bhog)
मां शैलपुत्री को घी का भोग (Navratri 2026 Day 1 Bhog) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि घी अर्पित करने से भक्त को अच्छे स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। बात करें मां शैलपुत्री के मंत्र की तो इस दिन ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः का जाप करने से मन को शांति मिलती है और मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मां शैलपुत्री की आरती (Mata Shailputri Aarti in Hindi)
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।
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चैत्र नवरात्रि 2026 पर कैसे करें कलश स्थापना ?, जानें कलश स्थापना का शुभ समय और विधि

Chaitra Navratri 2026 पर ऐसे करें कलश स्थापना, ये समय रहेगा सबसे शुभ
Chaitra Navratri 2026 : हिंदू परंपरा में चैत्र नवरात्रि का विशेष स्थान है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस वर्ष नवरात्रि 19 तारीख से आरंभ हो रही है और इसी दिन से हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत हो रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।
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चैत्र नवरात्रि 2026 पर कैसे करें कलश स्थापना ?
चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ प्रतिपदा तिथि पर होने वाली घटस्थापना, यानी कलश स्थापना से किया जाता है। इसे पूरे पर्व की आधारशिला माना जाता है। विधि-विधान से कलश स्थापित कर देवी दुर्गा का आह्वान किया जाता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कलश स्थापना का शुभ समय
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, कलश स्थापना के लिए सुबह 6:50 बजे से 7:52 बजे तक का समय उत्तम है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इन दोनों समयों में से किसी एक में श्रद्धापूर्वक स्थापना करना शुभ फलदायी माना गया है।
कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना करते समय मन में श्रद्धा और आस्था का होना सबसे महत्वपूर्ण है। पूजा के दौरान नौ लौंग लेकर उन्हें कलावा में बांधकर एक माला तैयार की जा सकती है, जिसे पहले दिन मां दुर्गा को अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से देवी की कृपा बनी रहती है।

कलश के लिए सोना, चांदी या अन्य धातु का पात्र इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन शास्त्रों में मिट्टी के कलश को सबसे अधिक पवित्र और शुभ माना गया है। सही विधि और सच्ची भक्ति के साथ की गई स्थापना से नवरात्रि का पूजन पूर्ण फलदायी होता है।
नवरात्रि पूजा की सामग्री की लिस्ट
| पूजा सामग्री | रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीपक, कपूर, लाल कपड़ा, चुनरी, बिंदी, चूड़ी, कंगन, कुमकुम, मेहंदी, इत्र |
|---|---|
| अन्य सामग्री | पूजा थाली, घंटी, शंख, गंगाजल, आम/अशोक पत्ते, नारियल, जौ, दुर्गा चालीसा, मिठाई, घी, मूर्ति/फोटो, कलश, फल, लौंग, पान, सुपारी |
FAQs Chaitra Navratri 2026
Q1. चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना कब की जाती है?
कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि के दिन की जाती है, जो नवरात्रि का पहला दिन होता है।
Q2. Chaitra Navratri 2026 की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
सुबह 6:50 बजे से 7:52 बजे तक का समय शुभ माना गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त 12:05 बजे से 12:50 बजे तक भी उत्तम है।
Q3. कलश स्थापना क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
यह नवरात्रि पूजा की शुरुआत का मुख्य अनुष्ठान है, जिससे मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
Q4. कलश में क्या-क्या रखा जाता है?
कलश में गंगाजल, जौ, सिक्के, सुपारी आदि रखे जाते हैं और ऊपर नारियल व आम/अशोक के पत्ते लगाए जाते हैं।
Q5. कलश किस धातु का होना चाहिए?
सोना, चांदी या तांबे का कलश उपयोग किया जा सकता है, लेकिन मिट्टी का कलश सबसे शुभ माना जाता है।
Q6. क्या कलश स्थापना घर में कोई भी कर सकता है?
हाँ, कोई भी श्रद्धा और सही विधि के साथ घर पर कलश स्थापना कर सकता है।
Q7. कलश स्थापना में लौंग का क्या महत्व है?
नौ लौंग को कलावे में बांधकर माला बनाकर अर्पित करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Dehradun
Dehradun: SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी सख्त, जिलाधिकारियों को एक्शन प्लान के निर्देश

SIR के लिए जिलेवार एक्शन प्लान बनाएं जिलाधिकारी- मुख्य निर्वाचन अधिकारी
DEHRADUN: उत्तराखण्ड में आगामी अप्रैल माह में होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सचिवालय में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए समीक्षा की।
मुख्य बिंदु
अप्रैल में होने वाली SIR से पहले CEC की समीक्षा बैठक
बैठक में कम मैपिंग वाले जनपदों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कड़़ी नाराजगी जताते हुए सम्बंधित ईआरओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एसआईआर का एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
BLO के लिए ट्रेनिंग कार्य चलाने के निर्देश
बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि प्रदेश में 87 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग की जा चुकी है, लेकिन जनपद देहरादून, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मैपिंग की प्रगति कम है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा शहरी क्षेत्रों में नगर निगम के अधिकारियों,कर्मचारियों की एसआईआर के लिए तैनाती की जाए। उन्होंने बीएलओ की ट्रेनिंग कार्य लगातार चलाए जाने के निर्देश दिए।
राजनैतिक दलों को 100 % BLA नियुक्त करने के निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों को एसआईआर से पूर्व सभी बूथों पर शत प्रतिशत बूथ लेवल एजेंट्स की नियुक्ति के लिए राजनैतिक दलों से बैठक करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जनपद गणना प्रपत्र के वितरण का पूरा प्लान तैयार कर दें ताकि समय पर फार्म वितरण की प्रक्रिया संपन्न कराई जा सके।
Uttarakhand
KEDARNATH YATRA 2026 को लेकर बड़ी खबर, दर्शन के लिए देना होगा सर्टिफिकेट, गैर सनातनियों पर ये अपडेट…

BKTC का बड़ा फैसला, समिति से जुड़े मंदिरों में दर्शन के लिए देना होगा शपथ पत्र
KEDARNATH YATRA 2026: उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चार धाम यात्रा की शुरुआत होगी. यात्रा को लेकर सभी विभाग अपनी-अपने तैयारी में जुटे हैं. बीते दिनों बद्री केदार मंदिर समिति की बजट बैठक में चारधाम यात्रा में गैर सनातनियों का प्रवेश वर्जित करने का निर्णय लिया गया था. जिसके बाद इस निर्णय पर पूरे देशभर में सियासत तेज़ हो गई थी. अब इस फैसले पर कुछ हद तक राहत देते हुए BKTC की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है.
मुख्य बिंदु
मंदिर में दर्शन से पहले देना होगा शपथ पत्र
दरअसल, बीते दिनों बद्री-केदार मंदिर समिति की बजट बैठक में निर्णय लिया गया था कि चारधाम यात्रा में गैर सनातनियों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध जाएगा. जिसके बाद प्रदेश समेत पूरे देशभर में इस फैसले को लेकर सियासत तेज़ हो गई थी. अब इस पर मंदिर समिति की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. मंदिर समिति से जुड़े हुए मंदिरों में दर्शन के लिए अब श्रद्धालुओं को शपथ पात्र देना होगा.
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मंदिर परिसर में ही मिलेगा आस्था का सर्टिफिकेट
BKTC के अध्यक्ष हेमंत दिवेदी ने स्थिति स्पष्ट करने हुए बताया कि श्रद्धालुओं को समिति से जुड़े मंदिरों में दर्शन करने के लिए सनातन परम्परा में आस्था का शपथ पत्र देना होगा. ये शपथ पत्र समिति की ओर से मंदिर परिसर में ही उपलब्ध कराया जाएगा. जिससे श्रद्धालु सनातन परम्परा में अपनी आस्था का प्रमाण दे सकेंगे. अब दोबारा से समिति का ये फैसला चर्चाओं में आ गया है. जहाँ एक ओर लोग इसे धर्म से जोड़ कर देख रहे हैं, वहीँ दूसरी ओर इस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रहीं हैं.

यात्रा के लिए 121 करोड़ का बजट पास
साथ ही यात्रा के लिए मंदिर समिति ने सभी जरुरी तैयारियां पूरी कर ली हैं. बीते सप्ताह हुई बोर्ड की बैठक में इस बार यात्रा के लिए 121 करोड़ का बजट भी पास किया गया है. इसके साथ ही बद्री केदार मंदिर समिति ने कई बदलाव किए हैं, BKTC के अध्यक्ष ने बताया कि मंदिर परिसर में मोबाइल ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा. मंदिर परिसर की तकरीबन 60 मीटर की परिधि में कोई भी व्यक्ति मोबाइल नहीं ले जा पाएगा.

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सारा अली खान का उदाहरण आया सामने
वहीँ BKTC अध्यक्ष हेमंत दिवेदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे ये सवाल पूछा गया कि क्या सारा अली खान भी अब केदारनाथ नहीं आ पाएंगी? इस पर जवाब देते हुए दिवेदी ने कहा कि सारा अली खान शिव भक्त हैं और सनातन का सम्मान करती हैं. इसी तरह से कोई भी श्रद्धालु वो किसी भी समुदाय का हो अगर सनातन में भरोसा रखता है तो वो शपथ पत्र देकर मंदिर मेंन दर्शन कर सकता है.
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