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गैरसैंण में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक रहा विधानसभा सत्र, जानें बजट सत्र की खास बातें

Uttarakhand News : उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण रहा। धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने की दहलीज पर आयोजित यह सत्र न केवल सरकार की उपलब्धियों और नीतियों का प्रतिबिंब बना, बल्कि सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक नए, आक्रामक और मुखर राजनीतिक अंदाज की भी झलक का साक्षी बना।
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गैरसैंण में सीएम धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक रहा विधानसभा सत्र
9 मार्च से शुरू हुए इस बजट सत्र के दौरान गैरसैंण में सदन की कार्रवाई कुल 41 घंटे 10 मिनट तक चली, जो घंटों के लिहाज से गैरसैंण में अब तक का सबसे लंबा विधानसभा सत्र माना जा रहा है। इस दौरान सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया और कुल 12 विधेयकों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही चार अध्यादेशों को भी सदन ने स्वीकृति प्रदान की।
सत्र के दौरान विधानसभा को 50 अल्प सूचित प्रश्न और 545 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 291 प्रश्नों के उत्तर सदन में दिए गए। यह सत्र केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के विकास और सरकार की कार्यशैली को लेकर व्यापक चर्चा का मंच भी बना। इस दौरान कई विधायकों ने सदन में धामी सरकार के कार्यों और विकासात्मक प्रयासों की सराहना भी की।
सदन में आक्रामक दिखाई दिए सीएम धामी
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अलग ही तेवर देखने को मिला। आम तौर पर शांत, संयमित और संतुलित अंदाज में नजर आने वाले धामी इस बार पूरी तरह आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखे हमले करते हुए एक-एक मुद्दे पर कांग्रेस की राजनीति, उसके कार्यकाल और उसकी नीतियों को कठघरे में खड़ा किया।

सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार घोषणाएँ करने वाली सरकार नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने वाली सरकार है। उन्होंने बताया कि मुख्य सेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाएँ पूरी हो चुकी हैं और बाकी पर तेजी से काम जारी है।
खनन का राजस्व बढ़कर हुआ 1200 करोड़
सीएम धामी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार केवल शिलान्यास और लोकार्पण के शिलापट लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि घोषणाओं को कर्म की स्याही से लिखने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि शायद विपक्ष के लिए यह समझना कठिन है, क्योंकि उनके समय में जनता के प्रति जवाबदेही का भाव ही नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के कार्यकाल पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश में खनन गतिविधियां बाहुबलियों और दबंगों के भरोसे छोड़ दी गई थीं। नियमों की खुलेआम अनदेखी होती थी और राज्य का राजस्व खनन माफिया और उनके आकाओं की जेब में चला जाता था। उन्होंने बताया कि उस समय खनन से मिलने वाला राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 1200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

2012 से 2017 के दौर था पॉलिसी पैरालिसिस
कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला जारी रखते हुए धामी ने वर्ष 2012 से 2017 के दौर को पॉलिसी पैरालिसिस का समय बताया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार का पूरा ध्यान केवल शराब नीति पर केंद्रित था और मुख्यमंत्री सचिवालय तक लाइसेंस के बदले नकदी की नीति में उलझा हुआ था। उस दौर के स्टिंग ऑपरेशनों ने पूरे देश में उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचाया था।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने राष्ट्रहित के बड़े फैसले लेने का साहस नहीं दिखाया। धारा 370 हटाने, तीन तलाक समाप्त करने और प्रभु श्रीराम मंदिर के निर्माण जैसे ऐतिहासिक निर्णय वर्षों तक टाले गए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन संकल्पों को सिद्धि में बदला गया।
समान नागरिक संहिता को लेकर सीएम ने विपक्ष को घेरा
समान नागरिक संहिता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू की। इससे महिलाओं को तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों की आँखों पर तुष्टिकरण की पट्टी बंधी हो और सिर पर वोट बैंक की राजनीति की टोपी हो, उन्हें समान अधिकारों की बात समझ में नहीं आती।
धामी ने लैंड जिहाद और अतिक्रमण के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने बताया कि सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में अवैध कब्जे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष की राजनीति हमेशा तुष्टिकरण और वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को केवल एक राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल किया, जबकि उनकी सरकार चाहती है कि हर बच्चे के हाथ में टूलकिट नहीं बल्कि अच्छी किताब हो और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
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बीकेटीसी का गड़बड़झाला !, उपाध्यक्ष पर पत्नी को ‘फोर्थ क्लास कर्मचारी’ दिखाकर वेतन लेने के आरोप

Uttarakhand News : उत्तराखंड में अक्सर चर्चाओं में रहने वाली बीकेटीसी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश नेगी ने बड़ा खुलासा करते हुए बीकेटीसी के उपाध्यक्ष पर पत्नी को ‘फोर्थ क्लास कर्मचारी’ दिखाकर वेतन लेने के आरोप लगाए हैं।
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बीकेटीसी के गड़बड़झाले का विकेश नेगी ने किया खुलासा
बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय कपरवाण पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी को कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में दिखाकर वेतन प्राप्त किया। ये जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिए सामने आई है, जिसका खुलासा आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश नेगी ने किया है। जिससे समिति की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
उपाध्यक्ष पर पत्नी को ‘फोर्थ क्लास कर्मचारी’ दिखाकर वेतन लेने के आरोप
बता दें कि आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने आरटीआई से मिले दस्तावेजों के आधार पर ये आरोप सामने आया है कि उपाध्यक्ष ने अपनी पत्नी के नाम पर हर महीने करीब 12 हजार रुपये का भुगतान समिति से प्राप्त किया। जिसके बाद से राजनीतिक हलचल मच गई है।

विकेश नेगी ने किए कई बड़े खुलासे
विकेश नेगी का आरोप है कि देहरादून स्थित बीकेटीसी कार्यालय में कक्ष आवंटित होने के बावजूद उपाध्यक्ष ने अपना निजी आवास और कार्यालय रुद्रप्रयाग में दर्शाया। इसी आधार पर उन्होंने लगभग 25 हजार रुपये प्रतिमाह भत्ते के रूप में लिए। जबकि समिति का मुख्यालय जोशीमठ में और कैंप कार्यालय देहरादून में संचालित होता है।
विजय कपरवाण ने आरोपों को किया खारिज
बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण कहना है कि उनकी पत्नी समिति में कार्यरत नहीं हैं और उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया। उनके अनुसार, निजी स्टाफ में काम करने वाली दो महिला कर्मचारियों के भुगतान को तकनीकी कारणों से एक ही नाम से बिल बनाकर जारी किया गया, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से थी।
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केदारनाथ से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की कार हादसे का शिकार, कार के उ़ड़े परखच्चे, 1 महिला लापता

Tehri News : केदारनाथ से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तोताघाटी के पास हादसे का शिकार हो गई। जानकारी पर एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई है और रेस्क्यू अभियान जारी है।
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केदारनाथ से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की कार हादसे का शिकार
ऋषिकेश–बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तोताघाटी क्षेत्र के पास केदारनाथ धाम से दर्शन कर दिल्ली लौट रहे श्रद्धालुओं की कार अचानक नियंत्रण खो बैठी और गहरी खाई में गिर गई। हादसे कते दौरान कार नदी में जा गिरी। इस दौरान कार के परखच्चे उड़ गए।
मौके पर रेस्क्यू अभियान जारी
थाना प्रभारी प्रशांत बहुगुणा के अनुसार, तोताघाटी के सामने कार गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुंच गई। गहरी खाई और कठिन रास्तों के बावजूद राहत अभियान जारी रखते हुए टीम ने एक घायल व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला है। उसे राफ्ट के माध्यम से नदी के रास्ते सुरक्षित स्थान तक लाने की कार्रवाई की जा रही है।

हादसे के बाद से कार सवार महिला लापता
कार में सवार एक महिला का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस का कहना है कि हादसे में वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे आशंका है कि महिला खाई में दूर तक जा गिरी हो सकती है। फिलहाल राहत और बचाव टीमें लापता महिला की तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
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Uttarakhand Assembly : उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र की कार्रवाई शुरू, सदन में विपक्ष का जोरदार हंगामा

Uttarakhand Assembly Special Session : उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र की कार्रवाई शुरू हो गई। सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी महिलाओं के योगदान के बारे में अपनी बात रख रहे हैं।
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उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र की कार्रवाई शुरू
विधानसभा के विशेष सत्र की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सदन में अपना संबोधन शुरू किया। इसस दौरान विपक्ष का हंगामा भी देखने को मिल रहा है।

महिला आरक्षण बिल पर केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करें विपक्ष
सीएम धामी ने सदन में अपील करते हुए कहा कि उत्तराखंड विधानसभा को सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाने के केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलकर सहयोग करना जरूरी है।

सदन के बाहर भी जोरदार विरोध
जहां एक ओर सदन के अंदर विपक्ष का हंगामा देखने को मिल रहा है। तो वहीं सदन के बाहर भी विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। महिला आरक्षण को लेकर बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र से पहले विधानसभा गेट पर कांग्रेस विधायक वीरेन्द्र जाटी ने गन्ने से लदी ट्रॉली पलटकर विरोध जताया। इस प्रदर्शन के दौरान किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया।
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