Champawat
चंपावत में जनगणना की धीमी रफ्तार पर डीएम सख्त, हर हाल में समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

Champawat News : राष्ट्रीय जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में सुस्ती पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। द्वितीय चरण की प्रगति महज 20 प्रतिशत रहने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए साफ निर्देश दिए कि तय समयसीमा के भीतर हर हाल में लक्ष्य पूरा किया जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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चंपावत में जनगणना की धीमी रफ्तार पर डीएम सख्त
अपर जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाली आधारशिला है।
ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही कतई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने 25 अप्रैल से शुरू हुए द्वितीय चरण को 24 मई 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए।
हर हाल में समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश
जिले में तैनात 370 प्रगणकों और 62 सुपरवाइजरों के साथ नगर पालिका क्षेत्रों में लगे 89 प्रगणकों व 19 सुपरवाइजरों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।

डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर कार्य की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करें और किसी भी स्तर पर ढिलाई मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं।
लापरवाही बरतने पर होगी कड़ी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि यदि किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या प्रगणक द्वारा लापरवाही बरती गई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन तक शामिल है।
डीएम ने आमजन से भी अपील की कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय सहयोग करें और घर-घर पहुंच रहे प्रगणकों को सही और पूरी जानकारी दें। ताकि भविष्य की योजनाएं सटीक आंकड़ों के आधार पर तैयार की जा सकें।
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तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क, मरीज आज भी कंधों पर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Champawat News : सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और पलायन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पाटी विकासखंड के सुदूरवर्ती घिंघारुकोट तोक की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। घिंघारुकोट तोक में मरीज को डोली से अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया है।
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तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क
चंपावत जिले के घिंघारुकोट तोक में साल 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव को चार किलोमीटर मोटर मार्ग से जोड़ने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। नतीजा ये है कि आज भी घिंघारुकोट के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं और दुर्गम पैदल रास्तों पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मरीज को डोली से पहुंचाया गया अस्पताल
गांव तक कोई मोटर मार्ग नहीं होने से बीमार मरीजों को आज भी डोली या परिजनों के कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजाना उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब फिसलन और भूस्खलन के खतरे के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते हैं।

कई बार मांग के बाद भी मिला केवल आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। जिससे योजना फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है।
गांव के बुजुर्गों का दर्द सबसे अधिक झकझोरने वाला है। उनका कहना है कि पूरी जिंदगी सड़क का इंतजार करते-करते बीत गई। अब उनकी अंतिम इच्छा सिर्फ इतनी है कि गांव तक सड़क पहुंच जाए, ताकि कम से कम अंतिम यात्रा सम्मान के साथ सड़क मार्ग से हो सके।
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चंपावत में दर्दनाक हादसा, 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में आए मजदूर, एक की मौत, 3 घायल

Champawat News :चंपावत जिले के पाटी क्षेत्र में शनिवार को बीएसएनएल की फाइबर लाइन बिछाने का कार्य एक दर्दनाक हादसे में बदल गया। काम के दौरान बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से एक 19 वर्षीय मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूर करंट लगने से झुलस गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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चम्पावत में 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में आए मजदूर
चंपावत जिले के जौलाड़ी वार्ड में बीएसएनएल की फाइबर लाइन के लिए पोल स्थापित किया जा रहा था। इसी दौरान पोल ऊपर से गुजर रही 11 केवी विद्युत लाइन से संपर्क में आ गया, जिससे उसमें करंट दौड़ गया। हादसे के समय पोल संभाल रहे चारों मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
हाईटेंशन लाइन चपेट में आने से मजदूर की मौत
स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और सभी घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटी पहुंचाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद नेपाल निवासी 19 वर्षीय सुशील शाही को मृत घोषित कर दिया।

घटना में गंभीर रूप से घायल नेपाल निवासी धनजीत बुद्ध को प्राथमिक उपचार के बाद पहले जिला अस्पताल चम्पावत और फिर बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया। वहीं उपेंद्र बहादुर शाही और कमल शाही को मामूली चोटें आने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
हादसे के कारणों की जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पोल खड़ा करते समय उसका 11 केवी बिजली लाइन से संपर्क होना हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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harela 2026 : ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से गूंजा हरेला, CM धामी ने हरित उत्तराखंड का दिया मंत्र

harela 2026 : लोकपर्व हरेला के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को दी हरेला पर्व की शुभकामनाएं
सीएम धामी ने हरेला की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति हमारी आस्था और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से शुरू हो रहे ‘थीमैटिक वृक्षारोपण अभियान’ में अधिक से अधिक लोग सहभागिता करें और गुणवत्ता युक्त वानिकी के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाएं।
प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व
सीएम ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण का भी संकल्प लें।

हरेला को पर्यावरण संरक्षण के जनआंदोलन के रूप में मनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों को वृक्ष बनने तक उनका संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण के इस जन अभियान से जुड़ेगा तो उत्तराखंड को और अधिक हराभरा, स्वच्छ एवं समृद्ध बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने सभी से हरेला पर्व को पर्यावरण संरक्षण के जनआंदोलन के रूप में मनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण छोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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