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सीएम धामी ने हेल्पलाइन-1905 की वर्चुअल समीक्षा, लॉगिन न करने वाले अधिकारियों से जवाब तलब, छह महीने से लंबित शिकायतों के मामले में भी की नाराजगी जाहिर।

देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले एक महीने में सीएम हेल्पलाइन पोर्टल में लॉगिन न करने वाले विभागीय अधिकारियों से जवाब तलब करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संतोषजनक कारण नहीं बताया जाता है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने ताकीद किया कि आने वाले समय में विभागीय कार्य के प्रति इस प्रकार की शिथिलता पाए जाने पर विभागीय सचिव व विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय होगी। उन्होंने छह महीने से लंबित शिकायतों के मामले में नाराजगी जाहिर की।

मुख्यमंत्री नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन से वर्चुअल माध्यम से सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने क्षेत्र पंचायत समिति (बीडीसी) की बैठकों में विभागीय और रेखीय विभागों के अधिकारियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में रोस्टर बनाकर जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी भी शामिल हों। मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन का वाट्सएप चैटबोट भी शुरू किया।

उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज 15 दिन से लंबित शिकायतों का सकारात्मक समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर के अधिकारी से विभागीय सचिव तक सभी अधिकारी जन शिकायतों के समाधान के लिए शिकायतकर्ताओं से स्वयं नियमित संवाद करें।

सीएम ने सभी जिलाधिकारियों को अपने जिलों के प्रत्येक ब्लॉक में आयोजित होने वाली बीडीसी की बैठकों के रोस्टर बनाने के निर्देश दिए। इन बैठकों में जिलास्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी का भी रोस्टर बनाकर उन्हें बैठकों में भेजा जाए। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि तहसील दिवस का नियमित आयोजन किया जाए। जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तहसील दिवस में नियमित प्रतिभाग कर जन समस्याओं का समाधान करें। तहसील दिवस पर शिकायतों के निपटारे संबंधित जानकारी मुख्यमंत्री जन-समर्पण तहसील दिवस पोर्टल पर भी नियमित अपलोड हो।
मुख्यमंत्री ने विभागीय सचिवों को निर्देश दिए कि शिकायतों का जल्द समाधान हो। जो शिकायतें मांग से संबंधित हैं उनका अलग से उल्लेख हो। शिकायतों को निपटाना उद्देश्य न हो, बल्कि शिकायतों का समाधान होना चाहिए। सीएम हेल्पलाइन मॉड्यूल के हिसाब से नियमित प्रशिक्षण भी कराया जाए। प्रशिक्षण में संबंधित अधिकारी स्वयं उपस्थित रहें। सभी विभागीय सचिव और विभागाध्यक्ष प्रत्येक माह के द्वितीय सप्ताह में सीएम हेल्पलाइन-1905 की विभागीय समीक्षा करें और शिकायतों का तत्काल निस्तारण करें। सभी विभाग समीक्षा बैठकों का कार्यवृत्त नियमित पोर्टल पर अपलोड करें।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त हुई शिकायतों के सात शिकायतकर्ताओं से फोन से वार्ता की। इनमें से तीन शिकायतकर्ताओं की समस्या का समाधान हो चुका है जबकि सीएम ने चार शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का शीघ्र समाधान का भरोसा दिया।
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BJP में बवाल ! प्रदेश अध्यक्ष के सामने लगे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, टिहरी विधायक के खिलाफ बगावत !

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड की राजनीति में गुटबाजी केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है। जिस भाजपा ने हमेशा कांग्रेस पर आंतरिक कलह और धड़ो में बंटी पार्टी का आरोप लगाय और खुद को अनुशासित संगठन बताया, अब उसी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह तस्वीर तब सामने आ रही है, जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
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BJP प्रदेश अध्यक्ष के सामने लगे ‘मुर्दाबाद’ के नारे
दरअसल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष टिहरी दौरे पर थे इस दौरान उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यकर्ताओं ने महेंद्र भट्ट के सामने ही विधायक किशोर उपाध्याय मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस दौरान महेंद्र भट्ट कार्यकर्ताओं को समझाते हुए भी नजर आए लेकिन कार्यकर्ताओं ने उनकी एक नहीं सुनी।
टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय के खिलाफ बड़ी बगावत
कार्यकर्ताओं ने स्थानीय विधायक पर तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाए। ये आरोप किसी गैर दल के कार्यकर्ता लगाते तो समझ आता लेकिन पार्टी के अध्यक्ष के सामने ही अपने ही पार्टी के विधायक के खिलाफ इस तरीके की नारेबाजी साफ-साफ इशारा करती है कि टिहरी में बीजेपी के भीतर घमासान मचा हुआ है।

बीजेपी को 2027 में भुगतना पड़ सकता है खामियाजा
इस विरोध से साफ है कि ये गुस्सा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ज्वाला बनकर फूट सकता है। जिसका खामियाजा बीजेपी को 2027 के चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि सारे मौजूदा और पूर्व विधायक एक ही पार्टी भाजपा की शरण में आ गए हैं। ऐसे में भाजपा के भीतर सिर फुट्टवल की स्थिति थमेगी या फिर और रायता फैलाएगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा।
पार्टी नेतृत्व पर टिकी सभी की निगाहें
अब सवाल ये है कि क्या पार्टी नेतृत्व समय रहते इन नाराजगी की आवाज़ों को शांत कर पाएगा, या फिर यह अंदरूनी कलह आने वाले दिनों में और गहराएगी? क्योंकि चुनाव से पहले अगर संगठन में ही असंतोष बढ़ता है, तो उसका असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ सकता है।
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कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 28 जून से शुरू करेगी जागरूकता अभियान

Uttarakhand Politics : कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड में कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। 28 जून से शुरू होने जा रहे जन जागरूकता अभियान के जरिए कांग्रेस प्रदेशभर में सरकार को घेरने की तैयारी में है।
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कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
पार्टी का दावा है कि वो शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पेपर लीक और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और सरकार की नाकामियों को उजागर करेगी। इसी कड़ी में 28 जून से प्रदेशव्यापी जन जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है।
अभियान के पहले चरण में प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों को चार जोन में विभाजित किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक, पूर्व विधायक और कार्यकर्ता इन क्षेत्रों में जनसभाएं, बैठकें और संवाद कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

28 जून से शुरू करेगी जागरूकता अभियान
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है, स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हो रही हैं, युवाओं के सामने बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है और लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी सरकार जवाब देने से बच रही है। ऐसे में कांग्रेस जनता के बीच जाकर इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी और सरकार की कथित विफलताओं को लोगों तक पहुंचाएगी।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौंपी कमान
अभियान को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने सभी बड़े नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, भुवन कापड़ी, हरक सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा समेत कई नेताओं को अलग-अलग जोनों की कमान दी गई है।
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अंकिता भंडारी केस से जुड़े ऑडियो विवाद में सुरेश राठौर को राहत, कोर्ट से मिली जमानत
Uttarakhand Politics : बड़ी खबर – पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर को मिली जमानत
Uttarakhand Politics : पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट मामले में जमानत मिल गई है।
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अंकिता भंडारी केस से जुड़े ऑडियो विवाद में सुरेश राठौर को राहत
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से राहत मिल गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) रवि प्रकाश की अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है।
पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर को मिली जमानत
अदालत ने सुरेश राठौर की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।
मामला डालनवाला कोतवाली में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री साझा किए जाने के आरोप में सुरेश राठौर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) के तहत केस दर्ज किया गया था।
14 जून 2026 को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस ने 14 जून 2026 को मामले में बीएनएस की धारा 308(6) भी जोड़ी थी। इसके बाद सुरेश राठौर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था।
सुनवाई के बाद अदालत ने मामले के तथ्यों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करते हुए उन्हें जमानत देने का निर्णय लिया। फिलहाल मामले की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं।
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