Dehradun
सीएम पुष्कर सिंह धामी निरंतर अधिकारीयों से बनाए हुए है संपर्क, श्रमिक बंधुओं के साथ ऑडियो कम्युनिकेशन करने के लिए सेटअप हुआ तैयार।

देहरादून – सिलक्यारा टनल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी से कार्य किया जा रहा है, सीएम धामी इस सम्बन्ध में निरंतर अधिकारियों से संपर्क में हूं। ऑगर मशीन से पुनः कार्य आरंभ करते हुए 45 मीटर तक ड्रिलिंग पूरी कर ली गई है।
केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त उपकरणों के माध्यम से ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दोनों ड्रिलिंग विकल्पों पर कार्य किया जा रहा है। NDRF एवं SDRF की सहायता से अंदर फंसे श्रमिकों के साथ ऑडियो कम्युनिकेशन सेटअप तैयार कर लिया गया है, इसके उपरांत एक-एक कर के सभी की चिकित्सकों से बात करवाई जा रही है। श्रमिकों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मनोचिकित्सक से भी उनकी बात करवाई जा रही है। श्रमिक बंधुओं की कुशलता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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उत्तराखंड में सांसद निधि खर्च का हाल: दिसंबर 2025 तक सिर्फ 18% राशि ही उपयोग

RTI में खुलासा: उत्तराखंड के सांसदों की निधि खर्च की धीमी रफ्तार
Uttarakhand MPLADS Fund Utilization Report: उत्तराखंड के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को आवंटित सांसद निधि (MPLADS) के उपयोग को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक कुल आवंटित राशि का केवल 18 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है। उल्लेखनीय है कि इस आंकड़े में पूरे हो चुके और वर्तमान में प्रगति पर चल रहे दोनों प्रकार के कार्यों पर किया गया व्यय शामिल है।
मुख्य बिंदु
जारी हुआ उत्तराखंड के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड
दरअसल, ये खुलासा आरटीआई के माध्यम से सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता नदीम उद्दीन ने ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय, उत्तराखंड से सांसद निधि व्यय से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में लोक सूचना अधिकारी एवं उपायुक्त प्रशासन हेमंती गुंज्याल द्वारा दिसंबर 2025 तक का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक उत्तराखंड के कुल 8 सांसदों—5 लोकसभा और 3 राज्यसभा—को मिलाकर 95.90 करोड़ रुपये की निधि आवंटित की गई। इसमें से 49 करोड़ रुपये 5 लोकसभा सांसदों को वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए दिए गए, जबकि 46.90 करोड़ रुपये 3 राज्यसभा सांसदों को उनके कार्यकाल शुरू होने से लेकर दिसंबर 2025 तक आवंटित किए गए।
केवल 18 % खर्च कर पाए सांसद निधि
लेकिन, व्यय के आंकड़े अपेक्षाकृत कम रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्तमान कार्यकाल में पूर्ण परियोजनाओं पर 7.08 करोड़ रुपये और जारी कार्यों पर 10.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस प्रकार कुल व्यय 17.73 करोड़ रुपये रहा, जो कि कुल आवंटित राशि का मात्र 18 प्रतिशत है।

यदि लोकसभा सांसदों की बात करें, तो 5 सांसदों द्वारा पूर्ण कार्यों पर 2.089 करोड़ रुपये और प्रगति पर चल रहे कार्यों पर 1.191 करोड़ रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इस प्रकार लोकसभा सांसदों का कुल व्यय उनकी आवंटित निधि का लगभग 7 प्रतिशत ही है।
राज्यसभा सांसदों ने 31 प्रतिशत उपयोग की निधि
दूसरी ओर, राज्यसभा सांसदों का व्यय अनुपात अपेक्षाकृत अधिक रहा है। तीन राज्यसभा सांसदों द्वारा पूर्ण कार्यों पर 4.99 करोड़ रुपये और चल रहे कार्यों पर 9.46 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस तरह राज्यसभा सांसदों ने अपनी कुल आवंटित निधि का लगभग 31 प्रतिशत उपयोग किया है।
232 कार्यों को नहीं मिली अधिकारियों से स्वीकृति
इसके अलावा, जानकारी में ये भी सामने आया है कि सांसदों द्वारा प्रस्तावित 232 कार्यों को अब तक संबंधित अधिकारियों ने स्वीकृति नहीं दी है। वहीं, स्वीकृत कार्यों में से 87 परियोजनाएं दिसंबर 2025 तक शुरू भी नहीं हो सकी हैं।
इन तथ्यों से स्पष्ट है कि सांसद निधि के उपयोग की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जबकि विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है। अब देखना ये होगा कि आगामी समय में इन परियोजनाओं को गति देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
सांसद निधि खर्च में कौन आगे, कौन पीछे?
दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड के सांसदों के बीच सांसद निधि (MPLADS) खर्च को लेकर स्पष्ट अंतर देखने को मिला है। जहां कुछ सांसदों ने अपेक्षाकृत अधिक राशि खर्च की है, वहीं कई सांसदों का व्यय प्रतिशत काफी कम रहा है।
लोकसभा सांसदों की स्थिति
सबसे पहले लोकसभा सांसदों की बात करें तो नैनीताल-उधमसिंह नगर से सांसद अजय भट्ट 18% निधि खर्च के साथ शीर्ष पर हैं। उनके बाद टिहरी गढ़वाल की सांसद माला राज लक्ष्मी शाह 14% व्यय के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
जबकि, गढ़वाल से अनिल बलूनी का व्यय शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि अल्मोड़ा के अजय टम्टा और हरिद्वार के त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा 1% से भी कम राशि खर्च की गई है।
राज्यसभा सांसदों की स्थिति
वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा सांसदों में नरेश बंसल 47% व्यय के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद कल्पना सैनी 27% और महेंद्र भट्ट 6% खर्च के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
स्पष्ट रूप से देखा जाए तो राज्यसभा सांसदों का औसत व्यय लोकसभा सांसदों की तुलना में अधिक रहा है।
सांसदों के कार्यों का विवरण
📊 लोकसभा सांसद
| सांसद | प्रस्तावित कार्य | स्वीकृत | पूर्ण | प्रगतिरत | शुरू नहीं | खर्च % |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अजय भट्ट | 316 | 229 | 54 | 154 | 21 | 18% |
| माला राज लक्ष्मी | 128 | 89 | 11 | 64 | 14 | 14% |
| अनिल बलूनी | 4 | 2 | 1 | 1 | 0 | 0% |
| अजय टम्टा | 4 | 4 | 0 | 2 | 2 | <1% |
| त्रिवेंद्र रावत | 16 | 10 | 1 | 5 | 4 | <1% |
📊 राज्यसभा सांसद
| सांसद | प्रस्तावित कार्य | स्वीकृत | पूर्ण | प्रगतिरत | शुरू नहीं | खर्च % |
|---|---|---|---|---|---|---|
| नरेश बंसल | 191 | 144 | 23 | 92 | 29 | 47% |
| कल्पना सैनी | 121 | 89 | 26 | 60 | 3 | 27% |
| महेंद्र भट्ट | 44 | 23 | 2 | 7 | 14 | 6% |
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देहरादून में कानून व्यवस्था हुई धड़ाम, बेखौफ घूम रहे बदमाश !, 14 दिन में 4 हत्याओं से दहशत का माहौल

Dehradun crime : देहरादून जो कभी अपने शांत वातावरण के लिए देशभर में मशहूर था, आज वहीं दिनदहाड़े भरेबाजार हत्याएं हो रही हैं। जिस कारण लोगों में दहशत का माहौल है। देहरादून में 14 दिनों में चार हत्याओं से जहां एक ओर कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। तो वहीं दसूरी ओर लोगों में डर साफ-साफ देखा जा सकता है।
Table of Contents
देहरादून 14 दिन में 4 हत्याओं से दहशत का माहौल
राजधानी देहरादून में बुधवार को एक युवक की भरेबाजार गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये हत्या शहर के बीचोबीच और सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके में की गई। तिब्बती मार्केट में टेनिस खेलकर वापस लौट रहे युवक को बदमाशों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। लेकिन ये इकलौती ऐसी घटना नहीं है। इस पहले लगातार एक के बाद कई हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

शहर में महज 14 दिनों के भईतर चार हत्याओं को अंजाम दिया गया है। 29 जनवरी को विकासनगर क्षेत्र में एक छात्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जिसका शव अगले दिन घर से कुछ ही दूरी पर झाड़ियों में पड़ा हुआ मिला था। इस घटडना के दो दिन बाद ही 31 जनवरी को ऋषिकेश में महिला की उसके लिव-इन-पार्टनर ने हत्या कर कर दी थी। इस घटना के एक दिन बाद ही दो फरवरी को दूल्हा बाजार में हुए गुंजन हत्याकांड से सनसनी मच गई थी। इसके 9 दिन बाद ही बुधवार को कारोबारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।
देहरादून में कानून व्यवस्था हुई धड़ाम
महज 14 दिनों के भीतर हुई इन हत्याओं ने देहरादून की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। बल्कि इन घटनाओं ने खाकी को दागदार किया है। जिस तरीके से शहर के बीचो-बीच गुंजन हत्याकांड और तिब्बती मार्केट हत्याकांड को अंजाम दिया गया इसने पुलिस की नाकामी को उजागर कर दिया है।

गुंजन हत्याकांड में आरोपी ने मच्छी बाजार में कोतवाली से कुछ ही मीटर दूरी पर हत्या को अंजाम दिया। इतना ही नहीं आरोपी कितना बेखौफ इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हत्या के बाद वो भागा नहींबल्कि चापड़ लहराते हुए निकला। ठीक इसी तरह तिब्बती मार्केट हत्याकांड में भी बदमाशों ने अर्जुन को गोली मारने से पहले फुरसत से बीड़ी पी और फिर उसे गोली मारकर आसानी से निकल गए।

खुलेआम घूम रहे बदमाश, नहीं बचा पुलिस का खौफ
तिब्बती मार्केट में हुए अर्जुन हत्याकांड के बाद आरोपी भाग निकले और उन्हें पकड़ने में पुलिस को 24 घंटे लग गए। ये हत्याकांड शहर के बीचोबीच हुआ था और आरोपियों को शहर के बाहर से एनकाउंटर के बाद पकड़ा गया है। ये घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। कैसे शहर के बीचोबीच घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश इतनी दूर तक निकल गए और दिनभर कैसे पुलिस की नजरों से बचे रहे ?, इसके साथ ही सवाल ये भी उठता है कि क्या बदमाशों में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया जो दिनदहाड़े राजधानी में ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
राजधानी में बीते 14 दिनों में हुई ये वारदातें पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े होते हैं। जब प्रदेश की राजधानी में इस तरीके से वारदातें हो रही हैं तो पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था का क्या हाल होगा।
Dehradun
Dehradun: BCA की छात्रा की प्री-मेच्योर डिलीवरी में मौत, कथित पिता ने बच्चे को लेने से किया इनकार

देहरादून में रह रही खटीमा की छात्रा की प्री-मेच्योर डिलीवरी में मौत, लिव इन में रह रही थी छात्रा
Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां पर एक अविवाहित छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे को जन्म देने के दौरान छात्रा की मौत हो गई है। जिसके बाद अब नवजात का कथित पिता उसे स्वीकार करने से इन्कार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक छात्रा और युवक लिव इन में रह रहे थे, जिसकी खबर न तो परिजनों को थी और न ही उन्होंने UCC पोर्टल पर पंजीकरण किया था।
मुख्य बिंदु
अविवाहित छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म
पुलिस के मुताबिक, मृतक छात्रा मूल रूप से खटीमा, जनपद ऊधमसिंहनगर की रहने वाली थी। वर्तमान में वो देहरादून के सुभाषनगर क्षेत्र स्थित एक विश्वविद्यालय से बीसीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान,वो अपने ही क्षेत्र के एक युवक के साथ देहरादून में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। युवक मनीष उसी विश्वविद्यालय से बीएससी न्यूट्रीशन साइंस की पढ़ाई पूरी कर चुका है। बताया जा रहा है कि दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने इस संबंध की जानकारी अपने परिवारों को नहीं दी थी। इसके अलावा, पुलिस जांच में ये भी सामने आया है कि उनके लिव-इन संबंध का कोई आधिकारिक पंजीकरण नहीं कराया गया था।
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बच्चे को जन्म देने के बाद छात्रा की मौत
इस बीच, जांच में ये अहम तथ्य सामने आया कि छात्रा गर्भवती थी। कुछ दिन पहले ही आठ महीने में उसकी सिजेरियन प्रक्रिया के जरिए प्री-मेच्योर डिलीवरी हुई थी। दुर्भाग्यवश, जन्म के बाद नवजात शिशु की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते उसे एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, रविवार को छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसका प्रेमी उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल, मौत के स्पष्ट कारण सामने नहीं आ पाए हैं, इसलिए पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है।
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कथित पिता ने बच्चे को लेने से किया इनकार
इधर, अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले की लिखित सूचना बाल कल्याण समिति को दी। जानकारी में बताया गया कि एक अविवाहित युवती ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। शुरुआत में नवजात के कथित पिता ने बच्चे को अपने साथ घर ले जाने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उसने इससे इनकार कर दिया। इसके चलते, युवक और युवती—दोनों के परिवारों के बीच भी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि नवजात शिशु की देखभाल की जिम्मेदारी आखिर किसके पास होगी।
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हॉस्पिटल प्रशासन ने बाल कल्याण समिति को लिखा पत्र
डॉक्टरों का कहना है कि नवजात को अधिक समय तक एनआईसीयू वार्ड में रखना संभव नहीं है। इसी कारण, अस्पताल प्रशासन ने बाल कल्याण समिति से अनुरोध किया है कि बच्चे को अस्थायी रूप से शिशुगृह में रखा जाए। इस संबंध में, समिति की सदस्य नीता कंडपाल ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन को निर्देश दिए गए हैं कि नवजात का आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। ताकि, शिशु के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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