Uttarakhand
DEHRADUN NEWS: 4 साल बेमिसाल कार्यक्रम, सीएम धामी ने गिनाईं उपलब्धियां, भविष्य का रोडमैप रखा सामने
DEHRADUN NEWS: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सरकार के चार वर्ष पूरा होने पर परेड ग्राउंड में आयोजित 4 साल बेमिसाल कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से चार साल पहले प्रदेश की जनता ने उन्हें दोबारा राज्य की सेवा का अवसर दिया था।
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सीएम ने 401.86 करोड़ की योजनाओं का किया लोकार्पण
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 401.86 करोड़ की लागत से कुल 74 विकास योजना का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें 99.44 करोड़ की 33 योजनाओं का शिलान्यास एवं 302.42 करोड़ की 41 विकास योजनाओं का लोकार्पण शामिल है।
21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का होगा
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि शपथ ग्रहण के दौरान उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुसार देवभूमि के गौरव को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया था। अब चार साल के बाद वो गर्व से कह सकते हैं कि वो संकल्प तेजी से सिद्धि की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में बाबा केदारनाथ की दिव्य धरा से कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा। इसलिए प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के मुख से निकले इन शिवोमयी शब्दों को चरितार्थ करने के संकल्प के साथ काम कर रही है।
चार सालों में बेहतर हुआ उत्तराखंड में लिविंग स्टैण्डर्ड
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीते चार वर्षों में जहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत कर नागरिकों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयास किया है। वहीं, विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास का विजन प्रस्तुत किया है। इन्हीं प्रयासों से बीते चार वर्षों में राज्य ऐसी कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का साक्षी बना है जो किसी भी छोटे राज्य के लिए असंभव समझी जाती थीं।
चार साल में डेढ़ गुनी रफ्तार से बड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बीते चार साल में राज्य की आर्थिकी में डेढ़ गुना से अधिक की वृद्धि हुई है और बीते एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई, साथ ही प्रति व्यक्ति आय में भी 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं, वहीं स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर साढ़े 1700 हो गई है। यही नहीं इस दौरान 2 लाख 65 हजार से अधिक माताएं-बहनें लखपति दीदी बनी हैं। राज्य सरकार के सतत प्रयासों से रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की है।
उत्तराखंड को सतत्त विकास लक्ष्य इंडेक्स में मिला पहला स्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 के सतत् विकास लक्ष्य इंडेक्स में उत्तराखण्ड को प्रथम स्थान प्राप्त होने से राज्य सरकार के प्रयासों पर मुहर लगी है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भी उत्तराखण्ड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी भी प्राप्त हुई है। नीति आयोग द्वारा जारी इंडिया इनोवेशन इंडेक्स रिपोर्ट में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। बीते चार वर्षों से लगातार देश में “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” होने का गौरव प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखण्ड को नेशनल लॉजिस्टिक्स इंडेक्स, स्टेट स्टार्टअप इकोसिस्टम, स्टेट एनर्जी एंड ग्रीन इंडेक्स जैसे कई राष्ट्रीय सूचकांकों में भी विभिन्न पुरुस्कार प्राप्त हुए हैं।
14 सौ करोड़ की विकास योजनाएं देहरादून में कार्यरत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार देहरादून को एक आधुनिक और विकसित शहर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्यरत है। आज देहरादून में लगभग 14 सौ करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय केवल घोषणाएं होती थी, तब केंद्र से भेजा गए 1 रुपए में से 15 पैसे ही लोगों तक पहुंच पाते थे। परंतु आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में नई कार्य संस्कृति का सूत्रपात कर शासन व्यवस्था से दलालों और बिचौलियों का सफाया करने का काम किया। इसलिए आज प्रदेश सरकार जिस कार्य का शिलान्यास करती है उसे तय समय में पूर्ण कर उसका लोकार्पण भी करती है।
4 चार सालों में 30 हजार युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पहले प्रदेश में नकल और पेपर लीक के कारण प्रतिभावान युवाओं के सपने चूर-चूर हो जाते थे। इसलिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार सख्त नकल विरोधी कानून लेकर आई। जिसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े 4 चार वर्षों में राज्य के 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है। आज 100 से अधिक नकल माफिया जेल की हवा खा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में केवल छोटी मछलियों पर ही कार्रवाई होती थी। लेकिन आज प्रदेश में बड़े आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है।
धामी सरकार ने लागू किया धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि के दैवत्व की रक्षा के लिए डेमोग्राफी को भी संरक्षित रखने का प्रयास कर रही है। इसके लिए जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को लागू किया। उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए 12 हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को मुक्त कराया है। साथ ही छद्म भेष धारण कर लोगों को ठगने वालों के खिलाफ ऑपरेशन कालनेमि संचालित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता कानून लागू कर सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू किया है, जिसे देश भर के राष्ट्रवादी सोच के लोगों ने सराहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी वर्ष से जुलाई से उत्तराखण्ड में सभी मदरसों में सरकारी बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा।
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को मिला ‘पद्म भूषण’, आज दिल्ली में राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

Uttarakhand News : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को आज ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। उन्हें ये पुरस्कार जनहित के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया है।
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को मिला ‘पद्म भूषण’
25 मई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया। उन्हें ये सम्मान शिक्षा, पत्रकारिता, समाज सेवा और जनहित के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया।
भगत सिंह कोश्यारी का जीवन और सफर
प्रारंभिक जीवन:
भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में हुआ था। अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत उन्होंने शिक्षक और पत्रकार के रूप में की। वह पर्वत पीयूष नामक समाचार पत्र के संपादन से भी जुड़े रहे।

राजनीतिक यात्रा:
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जनसेवा और राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
महत्वपूर्ण पद:
अपने राजनीतिक करियर में भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल जैसे प्रमुख पदों पर कार्य कर चुके हैं।
उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया, जिसे जनसेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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कौन हैं आशीष चौहान ? जो बने देहरादून के नए जिलाधिकारी, कई जिलों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, जानें यहां

Ashish Chauhan : उत्तराखंड सरकार ने राजधानी देहरादून की प्रशासनिक जिम्मेदारी अब अनुभवी आईएएस अधिकारी आशीष चौहान को सौंप दी है। उन्हें जिले का नया जिलाधिकारी (DM) नियुक्त किया गया है।
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कौन हैं आशीष चौहान ? जो बने देहरादून के नए जिलाधिकारी
आशीष चौहान वर्ष 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उनका मूल निवास राजस्थान में है। उन्होंने इतिहास विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की है और इसी क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री भी हासिल की है बता दें कि प्रशासनिक सख्ती, आम लोगों से सीधा संवाद और फील्ड स्तर पर सक्रिय कार्यशैली के कारण आशीष चौहान लंबे समय से राज्य के प्रमुख अधिकारियों में गिने जाते हैं।
कई जिलों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
आशीष चौहान इससे पहले उत्तराखंड के कई अहम जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने पौड़ी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है। इन जिलों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।

वर्ष 2025 में उन्हें पौड़ी के जिलाधिकारी पद से स्थानांतरित कर यूकाडा (UKADA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और खेल एवं युवा कल्याण विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया था।
कई बार देर रात पहुंच जाते थे दूर-दराज के गांव
पौड़ी में उनके कार्यकाल की सबसे अधिक चर्चा उनकी कार्यशैली को लेकर हुई। वे कई बार देर रात तक दूरदराज गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते और मौके पर समाधान की कोशिश करते दिखाई दिए। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो कार्यालय तक सीमित रहने के बजाय फील्ड में सक्रिय रहना पसंद करते हैं।

बैठकों से अधिक जमीनी स्थिति का आकलन करने को देते हैं प्राथमिकता
उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत एवं आपदा प्रभावित जिलों में काम करने का अनुभव भी उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड को मजबूत बनाता है। सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा राहत कार्यों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई मामलों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
आशीष चौहान की कार्यप्रणाली को लेकर यह माना जाता है कि वे कागजी बैठकों से अधिक जमीनी स्थिति का आकलन करने को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा वे अप्रैल 2021 से जून 2021 तक उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (MD) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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करोड़ों की संपत्ति लेकिन फिर भी उत्तराखंड के नेता नहीं उठा पा रहे अपनी यात्रा का खर्चा, RTI से हुआ बड़ा खुलासा

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में यूं तो नेताओं के पास करोड़ों की संपत्ति है लेकिन फिर नेता और उनके परिवार वाले दान में मिलने वाले पैसों से यात्रा कर रहे हैं।
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करोड़ों की संपत्ति लेकिन फिर भी उत्तराखंड के नेता BKTC के खर्चे पर कर रहे यात्रा
उत्तराखंड के नेता और उनके बच्चे बद्रीनाथ और बाबा केदार के दर्शनों के लिए जाने का खर्चा तक नहीं उठा पा रहे हैं तभी तो इनकी यात्राओं के पैसे बीकेटीसी को देने पड़ रहे हैं।
जिस पैसे को आप अपनी श्रद्धा से बद्री केदार में चढ़ाते हैं ये सोचते हुए कि इनसे कुछ पुण्य का काम होगा या ये पैसे किसी जरूरतमंद के काम आएंगे तो वहीं इन पैसों को भी उत्तराखंड के मंत्री विधायक और उनके परिवार की खुशामत के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी कह रहे हैं। उनके द्वारा किए गए खुलासे और पेश किए गए दस्तावेज पूरी कहानी बयां कर रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नहीं उठा पाई अपनी यात्रा का खर्चा
उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की बेटी नेहा जोशी और खुद केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल मंदिर समिति के खर्चे पर चलती हैं। कैबिनेट मंत्री की बेटी नेहा जोशी बाबा केदार के दर्शनों के लिए जाती हैं लेकिन अपने खर्चे के लिए साथ कुछ भी नहीं ले जाती।
उनके रहने की व्यवस्था भी मंदिर समिति करती है और खाने की भी। विकेश नेगी ने आरटीआई से खुलासा किया है कि नेहा जोशी की आवभगत में बीकेटीसी ने महज दो दिन में ही 60 हजार रूपए खर्च दिए। अब यहां सवाल उठता है कि क्या उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री की बेटी इतनी गरीब हैं कि अपनी दो दिन की यात्रा का खर्चा तक खुद नहीं उठा सकतीं।

केदारनाथ विधायक पर बीकेटीसी ने खर्च किए 37,500 रूपए
ये लिस्ट यहीं नहीं रूकटी अगला नाम जो है वो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा। क्योंकि ये नाम किसी और का नहीं बल्कि खुद बाबा केदार की नगरी केदारनाथ की विधायक का है। यूं तो विधायक महोदया महीने का चार लाख रूपए सभी भत्ते मिलाकर लेती हैं लेकिन अपनी एक दो दिन की यात्रा के कुछ हजार भी खुद नहीं चुका पा रहीं। केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के दर्शन और रहने पर बीकेटीसी ने 37,500 रूपए खर्चे किए। ये ब्यौरा तब का है जब पिछले साल कपाट खुलने के दौरान विधायक महोदया केदारनाथ पहुंची थीं।
पीएम मोदी के भाई से जिलाध्यक्ष पर खर्च हुए हजारों रूपए
ये लिस्ट यहीं पर नहीं रूकती इसमें पीएम मोदी के भाई से लेकर रुद्रप्रयाग भाजपा जिलाध्यक्ष तक कई नाम शामिल हैं। जो खुद का खर्चा ही नहीं उठा पाते इसलिए चंदे पर जीते हैं। बीकेटीसी ने प्रधानमंत्री मोदी के भाई पंकज मोदी पर: ₹22,000, आरएसएस नेता प्रकाश व निरंजन पर: ₹20,000, रुद्रप्रयाग भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट और अन्य कार्यकर्ताओं के ऊपर: ₹24,000 और बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक अजय श्रीवास्तव के ऊपर: 23,000 रूपए खर्च किए हैं।

सभी से पैसे वापस ले बीकेटीसी – गणेश गोदियाल
बीकेटीसी के अध्यक्ष रह चुके कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया की अगर बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष इन दौरों के दौरान खुद भी मौजूद थे तो यह खर्चा समिति के खाते में जुड़ सकता है लेकिन अगर इससे इतर ये लोग अपने निजी दौरे पर थे और समिति द्वारा खर्च किया गया है तो मंदिर समिति को चाहिए कि इन सभी नेताओं को एक पत्र जारी करें और उनसे वह पैसा वापस लिया जाए जो उनके दौरे के दौरान खर्च हुआ।
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