Dehradun
लोकसभा चुनाव: युवाओं पर टिकी सियासी निगाहें, किसी भी पार्टी का कर सकते है राजतिलक;निर्वाचन आयोग ने आकड़ें किए जारी।

देहरादून – आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड के युवा किसी भी राजनीतिक दल का राजतिलक कर सकते हैं। हालांकि उत्तराखंड में पांच सीटें हैं लेकिन जिसने भी इन पांच सीटों पर कब्जा किया देश में उसी पार्टी सरकार बनी। यह परंपरा 2009 के बाद से अब तक चली आ रही है। गौर करने वाली बात यह है कि युवा मतदाता सबसे अधिक है। ऐसे में उत्तराखंड की दोनों प्रमुख पार्टियों ने युवाओं को रिझाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। कितने युवा मतदाता लिखेंगे राजनीतिक दलों का भाग्य और क्या है पार्टियों की तैयारी।

उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव को लेकर जहां सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी है, तो वहीं निर्वाचन आयोग के द्वारा भी लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है, इसी कड़ी में निर्वाचन आयोग के द्वारा मतदाता सूची को लेकर आंकड़े जारी किए गए है, जिसमे में कई पहलुओं को निर्वाचन आयोग ने शामिल किया है, सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि युवा मतदाताओं की संख्या अधिक हैं। यही युवा राजनीतिक दलों की तकदीर लिखने का काम करेंगे।
उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की बात करें तो 82 लाख 43 हजार 423 मतदाता है,जिनमे अलग-अलग आयु वर्ग के आंकड़े भी आयोग के द्वारा जारी किए गए है। 18 से 19 साल के युवा जो पहली बार मतदाता बने हैं उनका आंकड़ा 1लाख 29 हजार 62 है,जबकि 20 से 29 साल के आयु वर्ग के मतदाताओं का आंकड़ा 16 लाख 59 हजार 290 वहीं 30 से 39 साल के युवाओं का आंकड़ा मतदाता लिस्ट में सबसे ज्यादा 22 लाख 44 हजार 926 है,जबकि 40 से 49 आयु वर्ग के मतदाताओं का आंकड़ा 17 लाख 4 हजार 530 है। 50 से 59 के बीच का यही आंकड़ा 11 लाख 86 हजार 686 बैठता है,तो वहीं 60 से 69 साल के आय वर्ग का यही आंकड़ा 7लाख 50 हजार 563 बैठता है जबकि 70 से 79 के बीच का यही आंकड़ा 4 लाख 14 हजार 114 बैठता है,जबकि 80 साल से ऊपर के मतदाताओं का आंकड़ा 1 लाख 54 हजार 269 है। अब केवल युवा वर्ग के मतदाताओं का आंकड़ा यदि हम जोड़े तो 18 से 39 साल के युवाओं के आंकड़े को हम ले तो 40 लाख 33 हजार 278 मतदाता युवा है,जो कि 50 प्रतिशत के लगभग बैठता है,और वोट प्रतिशत युवा का ज्यादा रहा तो जिस दल की ओर युवाओं का रूझान ज्यादा रहा,5 लोकसभा सीट वाले उत्तराखंड में उस दल के ज्यादा सांसद जीतने तय है।

भाजपा के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व युवा मुख्यमंत्री धामी का क्रेज युवाओं में देखने को मिलता है और केंद्र व राज्य सरकार के काम हो। उस पर युवाओं का भरोसा कायम हुआ है और युवा मतदाता भारतीय जनता पार्टी को ही मतदान करेगा और पांचो लोकसभा सीट उत्तराखंड से भाजपा फिर से जीतेगी। यही सीएम धामी के कामों पर भी युवाओं की मुहर होगी।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि उत्तराखंड में युवाओं के हित की आवाज बनकर कांग्रेस खड़ी है नजर आई है, भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामले में युवाओं के साथ खड़े होने की बात हो या फिर अंकित भंडारी हत्याकांड में जिस तरीके से युवा सड़कों पर था, उसका साथ भी कांग्रेस के द्वारा बखूबी तरीके से दिया गया और आज भी अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कांग्रेस सड़कों पर है, इसलिए उत्तराखंड का युवा कांग्रेस के साथ है और लोकसभा चुनाव में युवा मतदाता कांग्रेस को ही वोट करेगा।
लोकसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग के द्वारा जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उसको लेकर भी उत्तराखंड में सियासी दलों में सियासत युवाओं को लेकर देखने को मिल रही है, भाजपा और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय दल युवाओं से खुद को कनेक्ट होने की बात कर रहे हैं, ऐसे में देखना होगा कि आखिरकार जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आते हैं तो उत्तराखंड का युवा कौन से राजनीतिक दल की किस्मत का फैसला लिखता है।
Dehradun
अंकिता केस पर उत्तराखंड में बवाल, लोकभवन पहुंचे कांग्रेसी नेता, पुलिस ने हिरासत में लिया

Dehradun News : उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। मामले में कथित VIP की राज्यपाल पद पर नियुक्ति और दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के विरोध में कांग्रेस ने देहरादून में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने लोकभवन पहुंचकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। हंगामे के बीच पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।
Table of Contents
अंकिता केस पर प्रेस वार्ता के बाद लोकभवन पहुंची कांग्रेस
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसके बाद पार्टी के नेता अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर लोकभवन पहुंचे और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वे लोकभवन में ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन उनका ज्ञापन लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। इसके बाद प्रदर्शन तेज हो गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस दौरान हरक सिंह रावत ने आत्मदाह करने की धमकी भी दी।
कथित VIP की नियुक्ति पर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP को लेकर सवाल उठने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनका कहना है कि सरकार ने स्वयं इस प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति की थी, ऐसे में नियुक्ति के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अब मातृशक्ति को एकजुट होकर न्याय की मांग उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, अंकिता को न्याय नहीं मिलने के कारण पूरे देश की नजरें उत्तराखंड पर हैं और इस मामले से प्रदेश की छवि प्रभावित हो रही है।

हरीश रावत बोले- अस्मिता से जुड़ा है मामला
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंकिता भंडारी प्रकरण को उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता ने अपने गौरव की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाई और अब यह सभी की जिम्मेदारी है कि मामले को न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।
हरीश रावत ने कहा कि अंकिता के लिए न्याय की लड़ाई केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का संघर्ष है। उन्होंने इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की निंदा भी की।
हरक सिंह रावत ने गिरफ्तारी को बताया तानाशाही
कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने अंकिता के माता-पिता को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे तानाशाही करार देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला।
अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी की मांग है कि नियुक्ति के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
Breakingnews
27 अक्टूबर से गैरसैंण में जुटेगा उत्तराखंड विधानसभा का सदन, राज्यपाल ने दी सत्र को मंजूरी

Uttarakhand News : उत्तराखंड विधानसभा का आगामी सत्र 27 अक्टूबर से गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित होगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र की तारीख और समय को लेकर आधिकारिक सूचना जारी कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे से शुरू होगी।
Table of Contents
27 अक्टूबर से गैरसैंण में विधानसभा का मानसून सत्र
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, ये उत्तराखंड की पंचम विधानसभा का वर्ष 2026 का तीसरा सत्र होगा। सत्र की तिथि निर्धारित होने के साथ ही इसके आयोजन की तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। फिलहाल सत्र कितने दिन चलेगा, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। इसके अलावा सदन में रखे जाने वाले विधेयकों और प्रस्तावित कार्यसूची का भी अभी खुलासा नहीं किया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने तैयारियों पर क्या कहा?
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सत्र की तैयारियों को लेकर कहा कि विधानसभा सचिवालय पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, ताकि सत्र का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके।

सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सदन में होगी चर्चा
गैरसैंण की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में होने वाला यह सत्र राज्य की विधायी गतिविधियों के लिहाज से अहम है। सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सदन में चर्चा होगी। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच किन विषयों पर प्रमुखता से बहस होगी, यह विस्तृत कार्यसूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
Dehradun
उत्तराखंड के नए राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन कौन हैं? MP से राजभवन तक का सफर जानिए

Dhal Singh Bisen Biography : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले बिसेन लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री और लोकसभा सांसद तक की जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब उन्हें राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। आखिर कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, मध्य प्रदेश से उनका क्या नाता है और कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर? आइए जानते हैं।
Table of Contents
उत्तराखंड के नए राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन कौन हैं?
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट विधानसभा क्षेत्र के पिपरिया में हुआ था। उनका राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश की विधानसभा से शुरू हुआ। वर्ष 1990 में वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 1993, 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने बरघाट सीट से जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने लगातार चार बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
मध्य प्रदेश सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद डॉ. बिसेन को मध्य प्रदेश सरकार में भी अहम जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2003 से 2005 के बीच वे कैबिनेट मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने वन, परिवहन, स्कूल शिक्षा, खनिज और जेल जैसे विभागों का दायित्व संभाला। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम किया।
2019 में पहुंचे लोकसभा, 2024 में कटा टिकट
राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लोकसभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई। वर्ष 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर वे पहली बार लोकसभा पहुंचे।
बालाघाट संसदीय क्षेत्र में सिवनी जिले के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। बरघाट विधानसभा क्षेत्र में पहले विधायक के रूप में काम करने का अनुभव उनके लिए चुनावी राजनीति में उपयोगी रहा। हालांकि, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया। अब राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति ने उनके राजनीतिक सफर को एक नई दिशा दी है।

पवार समाज से आते हैं डॉ. बिसेन
डॉ. ढाल सिंह बिसेन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के पवार समाज से संबंध रखते हैं। बालाघाट क्षेत्र में पवार समाज की उल्लेखनीय उपस्थिति रही है और यहां की चुनावी राजनीति में इस समुदाय की भूमिका भी अहम मानी जाती है।
बालाघाट लोकसभा सीट से सांसद रहे बोध सिंह भगत और डॉ. ढाल सिंह बिसेन के बाद वर्तमान सांसद भारती पारधी भी पवार समाज से आती हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर बिसेन का भी बालाघाट की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा है।
डॉक्टर और किसान भी हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन
राजनीति के अलावा डॉ. ढाल सिंह बिसेन की पहचान होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी रही है। वे मूल रूप से किसान हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव, विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व तथा राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने के बाद अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल की भूमिका सौंपी गई है।
मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. ढाल सिंह बिसेन के लिए राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया पड़ाव है। अब उत्तराखंड में संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी पर सभी की निगाहें रहेंगी।
Rudraprayag13 hours agoदेवप्रयाग में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत, तीन घायल
National12 hours agoअष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर कंफ्यूजन, जानें कब करें कन्या पूजन, क्या है शुभ मुहूर्त ?
uttarakhand weather13 hours agoउत्तराखंड में बदला मौसम का मिजाज, अगले तीन दिन बारिश के साथ ही बर्फबारी के आसार
Roorkee8 hours agoरात में गेस्ट हाउस पहुंचा यूट्यूबर, सुबह मिली मौत की खबर, वीडियो कॉल से खुलेंगे राज?
Dehradun6 hours agoअंकिता केस पर उत्तराखंड में बवाल, लोकभवन पहुंचे कांग्रेसी नेता, पुलिस ने हिरासत में लिया







































