Dehradun
उत्तरखंड में सरकारी नौकरी के लिए नही मिले खिलाड़ी, 81 प्रतिशत पद खाली…फिर से मांगे जाएंगे आवेदन।

देहरादून – उत्तराखंड के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी के 81 प्रतिशत पद खाली रह गए। मात्र 19 प्रतिशत खिलाड़ियों को ही विभिन्न विभागों में नौकरी मिली है। राज्य के पदक विजेता अधिक से अधिक खिलाड़ी को नौकरी का लाभ मिले इसके लिए शासनादेश में संशोधन किया जाएगा। खेल विभाग के निदेशक जितेंद्र सोनकर के मुताबिक विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में लाया जाएगा।

राज्य की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने नई खेल नीति के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक लाने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की व्यवस्था की है। खेल विभाग का कहना था कि वर्तमान में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओड़िशा, बिहार समेत कई राज्यों में पदक लाने वाले खिलाडियों के लिए सीधे सरकारी नौकरी की व्यवस्था है। लेकिन पूर्व में उत्तराखंड में इसकी व्यवस्था न होने से उत्तराखंड के पदक विजेता खिलाड़ी अपने सुरक्षित भविष्य के लिए अन्य राज्यों से खेल रहे हैं। खिलाड़ियों के इस पलायन से राज्य खेल प्रतिभाओं के होने के बावजूद खेलों में अन्य राज्यों से पिछड़ रहा है। जिसे देखते हुए पदक लाने वाले खिलाड़ियों के लिए सीधे सरकारी नौकरी की व्यवस्था बनाना आवश्यक है। खेल नीति में इस व्यवस्था के बाद 14 सितंबर 2023 को खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न नियुक्ति का शासनादेश किया गया था।
शासनादेश में खिलाड़ियों के लिए छह सरकारी विभागों में 156 पद निकाले गए थे, लेकिन मात्र 31 पदों पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए गए। राज्य में खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की पहली बार की गई व्यवस्था के बावजूद पात्र खिलाड़ी नहीं मिले। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जो खिलाड़ी पहले राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड से खेला हो फिर बाद में उसने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व किया हो। उत्तराखंड के उन खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी की व्यवस्था है, लेकिन देखने में आया कि कुछ खिलाड़ी पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेल चुके हैं। बाद में वर्षों उन्होंने उत्तराखंड से खेला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके इन खिलाड़ियों ने राज्य से जब भी खेला हो उनके लिए भी नौकरी का रास्ता खोला जाएगा।
पदक लाने वाले खिलाड़ियाें के लिए राज्य में पहली बार खेल विभाग में 4, युवा कल्याण में 6, गृह में 62, वन विभाग में 28, माध्यमिक शिक्षा में 50 और परिवहन विभाग में 6 पद निकाले गए थे। विभिन्न 32 खेलों में पदक लाने वाले खिलाड़ियों के लिए ही आउट ऑफ टर्न जॉब की व्यवस्था की गई है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड के पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी के लिए जो पद खाली रह गए हैं, उन पदों को भरने के लिए पात्र खिलाड़ियों से फिर से आवेदन मांगे जाएंगे। खाली पदों को जल्द भरा जाएगा।
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पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, आउट ऑफ टर्न नौकरी का शासनादेश जारी

Uttarakhand News : उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए बड़ी खबर है। खेल नीति-2021 के तहत अब 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। शासन की ओर से इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।
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पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी
प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। खेल नीति-2021 के अंतर्गत पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति प्रदान किए जाने को लेकर शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत प्रदेश के 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में राजपत्रित एवं अराजपत्रित पदों पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी।

आउट ऑफ टर्न नौकरी का शासनादेश जारी
प्रदेश की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने इस महत्वपूर्ण निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों को बधाई दी। खेल मंत्री ने कहा कि “खेलगा युवा तो आगे बढ़ेगा युवा” के संकल्प के साथ प्रदेश सरकार लगातार खिलाड़ियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि आउट ऑफ टर्न नियुक्ति से प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ अपने भविष्य को सुरक्षित करने का अवसर मिलेगा।
243 पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलेगी नौकरी
खेल मंत्री ने बताया कि नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों में 34 स्वर्ण, 115 रजत और 94 कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों को खेल एवं युवा कल्याण, गृह, परिवहन, वन तथा शिक्षा सहित विभिन्न विभागों में समायोजित किया जाएगा।

खेल मंत्री ने साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध हो ताकि हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने के साथ अपने भविष्य को भी सुरक्षित कर सकें।
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उत्तराखंड पुलिस में बड़ा बदलाव, 14 अफसरों की नई तैनाती, देखें पूरी लिस्ट

Uttarakhand Police Transfer : पुलिस मुख्यालय ने उत्तराखंड पुलिस विभाग में 14 अधिकारियों की नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार, इनमें एक सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP), सीधी भर्ती के 10 पुलिस उपाधीक्षक (DSP) और पदोन्नति के बाद तैनाती पाने वाले तीन पुलिस उपाधीक्षक शामिल हैं।
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उत्तराखंड पुलिस में बड़ा बदलाव
आईपीएस अधिकारी देव व्रत जोशी को सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर हरिद्वार भेजा गया है। वहीं, पदोन्नति के बाद राजेश साह को बागेश्वर, प्रदीप पन्त को 40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार और नदीम अतहर को आईआरबी द्वितीय, देहरादून में तैनाती दी गई है।

14 अफसरों की नई तैनाती
प्रशिक्षण पूरा करने वाले 10 पुलिस उपाधीक्षकों को भी उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों और इकाइयों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित स्थानों पर कार्यभार ग्रहण करना होगा।

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उत्तराखंड में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री, बंद स्कूलों पर सरकार को अल्टीमेटम

Uttarakhand News : उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों के बंद होने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी ने ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के तहत दावा किया है कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के 826 प्राथमिक सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। इस मुद्दे पर सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण देने के लिए पार्टी ने 10 दिन का समय दिया है।
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उत्तराखंड में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री
CJP के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह ने रविवार को प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 270 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि पहाड़ी जिलों के कई विद्यालयों में बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और जरूरी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने सरकारी और निजी स्कूलों के बीच उपलब्ध सुविधाओं के अंतर पर भी सवाल उठाया।
बंद स्कूलों पर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
श्रेष्ठ सिंह ने सरकार से बंद किए गए सभी 826 स्कूलों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूल में मौजूद सुविधाएं, विद्यालय बंद करने का कारण, आसपास की आबादी और सबसे नजदीकी वैकल्पिक स्कूल की दूरी जैसी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है। इसके अलावा CJP ने सरकार से 10 दिनों के भीतर उत्तराखंड एजुकेशन रोडमैप जारी करने की मांग की है।

2 अक्टूबर के बाद आंदोलन की चेतावनी
CJP ने कहा है कि यदि तय समय के भीतर सरकार की ओर से 826 स्कूलों को बंद किए जाने पर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, तो 2 अक्टूबर के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी के मुताबिक इस रोडमैप में शिक्षकों की उपलब्धता के साथ-साथ पेयजल, शौचालय, सुरक्षित भवन, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं को पूरा करने के लिए जिलावार समयसीमा तय की जानी चाहिए।
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग
पार्टी ने ये भी कहा है कि जवाब नहीं मिलने की स्थिति में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे कदम उठाया जाएगा। फिलहाल इस पूरे मामले में सरकार की ओर से पक्ष या विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही बंद किए गए स्कूलों की स्थिति और सरकार के निर्णय के कारणों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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