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उत्तराखंड निकाय चुनाव के लिए पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम…

देहरादून – उत्तराखंड में निकाय चुनाव के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई है। आज चुनाव प्रक्रिया के दौरान 18,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे, जिनमें 1,120 पुलिसकर्मी, 24 पीएसी कंपनियां, 4,352 होमगार्ड, 2,550 पीआरडी जवान और 300 वन कर्मचारी शामिल हैं। चुनाव के दौरान किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए चेकिंग बैरियरों पर क्यूआरटी और अन्य पुलिस बल तैनात किए गए है।

प्रदेश के डीजीपी दीपम सेठ ने चुनाव सुरक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 1,516 मतदान केंद्र हैं और 3,394 मतदेय स्थल हैं, जिनमें से 592 संवेदनशील और 412 अतिसंवेदनशील स्थल हैं। पुलिस प्रशासन ने सभी मतदान स्थलों का निरीक्षण पूरा कर लिया है और सुरक्षा व्यवस्था के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।
इसके अलावा प्रदेश भर में 185 चेकिंग बैरियर लगाए गए हैं, जिनमें से 117 बैरियरों पर सीसीटीवी कैमरे और बाकी पर वीडियो कवरेज की जा रही है। 105 मोबाइल टीम और 109 क्यूआरटी की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
पुलिस की अब तक की बड़ी कार्रवाई
पुलिस ने अब तक चुनावी प्रक्रिया के दौरान कड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अवैध शराब और मादक पदार्थ बरामद किए हैं। पुलिस ने 89.50 लाख रुपये की शराब जब्त की है और 591 मामलों में 603 तस्करों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, 13 करोड़ रुपये से अधिक की मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं और 209 मामलों में 301 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने अपनी कार्रवाई को और मजबूत किया है, जिसके तहत 11,196 लाइसेंसी शस्त्रों को जमा किया गया है और 9,000 से ज्यादा लोगों को मुचलका पाबंद किया गया है। साथ ही, 1,255 गैर जमानती वारंटों को लागू किया गया और 124 फरार अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। 204 आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस की तैयारियों से चुनावी माहौल शांतिपूर्ण और सुरक्षित
उत्तराखंड पुलिस की कड़ी सुरक्षा और निगरानी के चलते चुनावों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने का विश्वास जताया जा रहा है। चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह से तैयार है और क्षेत्र में प्रभावी रूप से कानून व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
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पिरान कलियर दरगाह से वायुसेना अधिकारी का बेटा लापता, लावारिस हालत में मिला बैग

Haridwar News : हरिद्वार के पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक परिसर से भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी का 27 वर्षीय बेटा संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। युवक का बैग दरगाह परिसर में लावारिस हालत में मिला, जिसमें लैपटॉप, पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज बरामद हुए। घटना के बाद से परिजन परेशान हैं, वहीं पुलिस युवक की तलाश में जुटी है।
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पिरान कलियर दरगाह से वायुसेना अधिकारी का बेटा लापता
बिहार निवासी शंकर सिंह भारतीय वायुसेना में मास्टर वारंट ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में है। उनका बेटा सत्यम एक निजी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के तौर पर काम करता था। परिजनों के मुताबिक, उसने करीब डेढ़ महीने पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। बताया गया है कि सत्यम लंबे समय से अपने पिता के संपर्क में भी नहीं था और दोनों के बीच बातचीत बंद थी।
लावारिस हालत में मिला बैग
जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर को पिरान कलियर पुलिस को दरगाह परिसर से एक काला बैग मिला था। बैग लावारिस हालत में पड़ा हुआ था। पुलिस ने इसकी सूचना सत्यम के पिता को दी। 18 अक्टूबर को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बैग उन्हें सौंप दिया गया।

पुलिस ने दर्ज की युवक की गुमशुदगी
बैग की जांच के दौरान उसमें लैपटॉप, पासपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, जिनसे बैग की पहचान सत्यम से जुड़ी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पिता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने युवक की गुमशुदगी दर्ज कर ली।
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ अन्य माध्यमों से सत्यम का पता लगाने में जुटी है। फिलहाल युवक के लापता होने के कारणों और उसके संभावित ठिकाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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उत्तराखंड में खुली मिठाई पर लगेगी एक्सपायरी डेट, 26 अक्टूबर से बदलेगा नियम

देहरादून: उत्तराखंड में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक अहम बदलाव होने जा रहा है। अब दुकानों में खुली मिठाइयां खरीदते समय ग्राहकों को उनकी निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जानकारी भी मिल सकेगी। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 26 अक्टूबर 2026 से राज्य में खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की ट्रे तथा काउंटर पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है। खाद्य संरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की ताजगी और उनकी उपयोग अवधि के बारे में जागरूक करना है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई थी समस्या
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से मिठाई की दुकानों में किए गए निरीक्षण के दौरान सामने आया कि खुली मिठाइयों के निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी ग्राहकों को नहीं मिल पा रही थी। दुकानों में मिठाइयां बिक्री के लिए रखी होती थीं, लेकिन उन्हें कब बनाया गया और कब तक उनका सेवन किया जा सकता है, यह स्पष्ट नहीं होता था।
मिठाई की ट्रे और काउंटर पर दिखानी होगी तारीख
नए नियम के तहत दुकानदारों को बिक्री के लिए रखी खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के काउंटर या ट्रे पर निर्माण तिथि के साथ एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। यह व्यवस्था पूरे उत्तराखंड में लागू होगी।इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसके निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि जानने में आसानी होगी।
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डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

देहरादून। उत्तराखंड को आज नया राज्यपाल मिल गया है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को प्रदेश के नौवें राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ दिलाई। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही उत्तराखंड में राज्यपाल के रूप में उनकी नई पारी की शुरुआत हो गई है। अब प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था में उनकी भूमिका और आगामी कार्यों पर सभी की नजरें रहेंगी।
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1.डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली राज्यपाल पद की शपथ
2.नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ
डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने आज उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उनकी नियुक्ति प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। राज्यपाल प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। उनकी भूमिका राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय बनाए रखने में भी अहम होती है।

मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। इस समारोह के साथ उन्होंने संवैधानिक रूप से राज्यपाल की जिम्मेदारियां संभालीं।राज्यपाल पद की शपथ संविधान के प्रति निष्ठा और राज्य के संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राज्यपाल को अपने कार्यकाल के दौरान संवैधानिक मर्यादाओं और नियमों के अनुरूप काम करना होता है।
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