Rudraprayag
अगस्त्यमुनि में डोली के प्रवेश को लेकर गरमाया मामला, लोगों ने गेट तोड़ने का किया प्रयास
Rudraprayag: अगस्त्यमुनि में दूसरे दिन भी गेट के बाहर खड़ी रही डोली, मौके पर जमकर हुआ हंगामा
मुख्य बिंदु
रुद्रप्रयाग (Rudraprayag): उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अगस्त्यमुनि में मैदान निर्माण को लेकर पिछले एक महीने से धरना चल रहा है। जिसके बाद कल मकर संक्रांति के पर्व पर केदारनाथ हाईवे पर अगस्त्यमुनि में मुनि महाराज की डोली ने जमकर तांडव मचाया। डोली को कल मंदिर से रवाना होकर अगस्त्य ऋषि के मैदान में जाना था। जहां सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे भक्त डोली का इंतजार कर रहे हैं।
अगस्त्यमुनि में दूसरे दिन भी गेट पर घंटों खड़ी रही मुनि महाराज की डोली
लेकिन मैदान का गेट उपर से बंद होने पर डोली ने मैदान के अंदर प्रवेश नहीं किया। जिसके बाद आज गुरुवार को भी माहौल गरम रहा। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मामले में हंगामा बढ़ने के बाद प्रवेश गेट को तोड़ना शुरू कर दिया है।
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गुरुवार को मकर संक्रांति पर निकली अगस्त्य ऋषि की ऐतिहासिक डोली यात्रा के दूसरे दिन भी भारी विवाद हुआ। मैदान का गोल गेट नहीं तोड़े जाने पर बुधवार को डोली ने प्रवेश नहीं किया था। जबकि आज गुरुवार को दोबारा डोली मैदान में प्रवेश के लिए पहुंची। लेकिन गेट न तोड़े जाने पर डोली ने आज भी मैदान में प्रवेश नहीं किया। जिसके बाद मौके पर जमा भीड़ में से कई लोग जिनमें औरतें भी शामिल थी गेट के ऊपर चढ़ कर गेट तोड़ने लगे।
आक्रोश में आए लोगों ने गेट तोड़ने का किया प्रयास
स्टेडियम निर्माण के खिलाफ स्थानीय लोग लम्बे समय से प्रदर्शन कर रहे थे। जिसके चलते साल के पहले दिन ही त्रिभुवन चौहान और अन्य को थाने में हाजिरी भी लगानी पड़ी थी। साथ ही जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने भी गेट को हटाने की बात कही थी। लेकिन मामले में किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई न होने से स्थानीय लोग आक्रोश में हैं। उनका कहना है कि ये भूमि अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की है जहाँ पर गेट निर्माण नहीं किया जाना चाहिए था।
डोली समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि
15 सालों बाद अगस्त्य ऋषि की डोली यात्रा का आयोजन किया गया, जिसको लेकर प्रशासन को पहले से सूचना दे दी गई थी। लेकिन प्रशासन ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
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केदारनाथ धाम में बर्फबारी, सफेद चादर से ढकी बाबा की नगरी, दिखा मनमोहक नजारा

Rudraprayag News : केदारनाथ धाम में बृहस्पतिवार सुबह हुई बर्फबारी के बाद बाबा केदार की नगरी बर्फ की सफेद चादर से ढक गई। बर्फ से ढके धाम का मनमोहक नजारा देखकर श्रद्धालु उत्साहित नजर आए। भक्त इस खूबसूरत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे, तो कई श्रद्धालुओं ने सेल्फी लेकर इन पलों को यादगार बनाया। हालांकि, बर्फबारी के चलते धाम में ठंड भी बढ़ गई है।
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केदारनाथ धाम में बर्फबारी, सफेद चादर से ढकी बाबा की नगरी
रुद्रप्रयाग जिले के निचले क्षेत्रों में भी मौसम का असर देखने को मिला। जिला मुख्यालय के साथ ही ऊखीमठ, गुप्तकाशी, जखोली और बसुकेदार क्षेत्र में सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई। मौसम में आए बदलाव के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
कपाट बंद होने से पहले दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं। कपाट बंद होने की तारीख नजदीक आने के साथ ही बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। बर्फबारी और बढ़ती ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कमी नहीं आई है। श्रद्धालु मौसम की चुनौतियों के बीच बाबा केदार के दर्शन कर रहे हैं।

केदारनाथ में 18.53 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
इस यात्रा सीजन में अब तक 18 लाख 53 हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं। बुधवार को 8,376 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। इसके साथ ही इस साल धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या बढ़कर 18,53,032 हो गई है।
कपाट बंद होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला लगातार जारी है। बर्फबारी के बाद धाम का नजारा और भी आकर्षक हो गया है, जिससे यहां पहुंच रहे भक्तों को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत अनुभव मिल रहा है।
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देवप्रयाग में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत, तीन घायल

Devprayag News : उत्तराखंड में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला देवप्रयाग का है, जहां एक वैगनआर कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में चालक समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
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देवप्रयाग में खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत
देवप्रयाग में दर्दनाक हादसा हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक, कार चंडीगढ़ से रुद्रप्रयाग जा रही थी। देवप्रयाग से करीब चार किलोमीटर श्रीनगर की ओर ग्राम पाली में रिवर व्यू कैफे एंड रेस्टोरेंट के पास वाहन अचानक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। कार में चालक सहित पांच लोग सवार थे।
पुलिस ने चलाया रेस्क्यू अभियान
हादसे की सूचना मिलने पर देवप्रयाग पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर खाई में फंसे लोगों को बाहर निकाला। तीन घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी, देवप्रयाग पहुंचाया गया। दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस हादसे के कारणों का लगा रही पता
पुलिस ने मृतकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। हादसे में सत्येश्वरी देवी (72), पत्नी हुकम सिंह चौहान, निवासी किमखाल, थाना कर्णप्रयाग, जिला चमोली और अनिल, पुत्र सुदर्शन, निवासी किमोली, जिला चमोली की मौत हो गई।
हादसे में चार तीन लोग घायल
- उत्तम सिंह (33), पुत्र मोहन सिंह, निवासी लाडोली, रुद्रप्रयाग।
- टीशा रावत (18), पुत्री लक्ष्मण सिंह रावत, निवासी बीना, थाना रुद्रप्रयाग।
- सुनीता देवी (45), पत्नी लक्ष्मण सिंह रावत, निवासी बीना, थाना रुद्रप्रयाग।
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तुंगनाथ-चोपता जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, प्लास्टिक ले जाने पर लगेगी रोक

Rudraprayag News : उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल तुंगनाथ और चोपता की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने के लिए वन विभाग ने स्वच्छता अभियान तेज करने का फैसला लिया है।
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तुंगनाथ-चोपता जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की ओर से क्षेत्र में 100 स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्लास्टिक लेकर आने पर रोक लगाने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।
अभियान के तहत अब तक क्षेत्र से करीब 5,000 किलोग्राम कचरा एकत्र किया जा चुका है। इस मुहिम में स्थानीय लोगों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

प्लास्टिक ले जाने पर लगेगी रोक
समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चोपता क्षेत्र भी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ यहां कचरे की समस्या भी बढ़ी है, जिससे प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई है।
नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं सफाई अभियान
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के मुताबिक, तुंगनाथ और चोपता में नियमित रूप से सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं और रैलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है।
वन विभाग की योजना है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक लेकर क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें। इस पहल का उद्देश्य तुंगनाथ और चोपता को कचरे से मुक्त रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और इस खूबसूरत क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाए रखना है।













































