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संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथियाँ: जानिए कब कब होगा व्रत…..

संकष्टी चतुर्थी व्रत को संकट हारा या सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह विशेष दिन भगवान गणेश की आराधना करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। व्रत करने से व्यक्ति के जीवन के सभी संकटों का निवारण होता है और उसकी इच्छाएँ पूरी होती हैं। इस दिन की पूजा से सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है और एक वर्ष में कुल 12 से 13 व्रत होते हैं। प्रत्येक चतुर्थी का विशेष महत्व होता है और इसमें भगवान गणेश के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है।
संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथियाँ:
| तिथि | व्रत का नाम |
|---|---|
| जनवरी 17, 2025, शुक्रवार | माघ, कृष्ण चतुर्थी |
| फरवरी 16, 2025, रविवार | फाल्गुन, कृष्ण चतुर्थी |
| मार्च 17, 2025, सोमवार | चैत्र, कृष्ण चतुर्थी |
| अप्रैल 16, 2025, बुधवार | वैशाख, कृष्ण चतुर्थी |
| मई 16, 2025, शुक्रवार | ज्येष्ठ, कृष्ण चतुर्थी |
| जून 14, 2025, शनिवार | आषाढ़, कृष्ण चतुर्थी |
| जुलाई 14, 2025, सोमवार | श्रावण, कृष्ण चतुर्थी |
| अगस्त 12, 2025, मंगलवार | भाद्रपद, कृष्ण चतुर्थी |
| सितंबर 10, 2025, बुधवार | आश्विन, कृष्ण चतुर्थी |
| अक्टूबर 10, 2025, शुक्रवार | कार्तिक, कृष्ण चतुर्थी |
| नवम्बर 8, 2025, शनिवार | मार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी |
| दिसम्बर 7, 2025, रविवार | पौष, कृष्ण चतुर्थी |
व्रत की विधि और पूजन: संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन तक रखा जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को साफ कर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को दूर्वा, मोदक, फूल और दीप अर्पित करें। दिनभर व्रत रखें और शाम को चंद्र दर्शन के बाद पूजा समाप्त करें। इस दौरान भगवान गणेश के मंत्र और स्तुति का पाठ करें।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व: संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। यह व्रत घर में सुख-शांति और समृद्धि लाने के साथ-साथ व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है। व्रत करने से संकटों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति का जीवन सुख, शांति, और समृद्धि से भर जाता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। इसकी सटीकता और सम्पूर्णता के लिए जनमंच टीवी उत्तरदायी नहीं हैं।
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Dehradun
उत्तराखंड में खुली मिठाई पर लगेगी एक्सपायरी डेट, 26 अक्टूबर से बदलेगा नियम

देहरादून: उत्तराखंड में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक अहम बदलाव होने जा रहा है। अब दुकानों में खुली मिठाइयां खरीदते समय ग्राहकों को उनकी निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जानकारी भी मिल सकेगी। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 26 अक्टूबर 2026 से राज्य में खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की ट्रे तथा काउंटर पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है। खाद्य संरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की ताजगी और उनकी उपयोग अवधि के बारे में जागरूक करना है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई थी समस्या
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से मिठाई की दुकानों में किए गए निरीक्षण के दौरान सामने आया कि खुली मिठाइयों के निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी ग्राहकों को नहीं मिल पा रही थी। दुकानों में मिठाइयां बिक्री के लिए रखी होती थीं, लेकिन उन्हें कब बनाया गया और कब तक उनका सेवन किया जा सकता है, यह स्पष्ट नहीं होता था।
मिठाई की ट्रे और काउंटर पर दिखानी होगी तारीख
नए नियम के तहत दुकानदारों को बिक्री के लिए रखी खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के काउंटर या ट्रे पर निर्माण तिथि के साथ एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। यह व्यवस्था पूरे उत्तराखंड में लागू होगी।इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसके निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि जानने में आसानी होगी।
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डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

देहरादून। उत्तराखंड को आज नया राज्यपाल मिल गया है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को प्रदेश के नौवें राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ दिलाई। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही उत्तराखंड में राज्यपाल के रूप में उनकी नई पारी की शुरुआत हो गई है। अब प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था में उनकी भूमिका और आगामी कार्यों पर सभी की नजरें रहेंगी।
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1.डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली राज्यपाल पद की शपथ
2.नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ
डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने आज उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उनकी नियुक्ति प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। राज्यपाल प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। उनकी भूमिका राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय बनाए रखने में भी अहम होती है।

मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। इस समारोह के साथ उन्होंने संवैधानिक रूप से राज्यपाल की जिम्मेदारियां संभालीं।राज्यपाल पद की शपथ संविधान के प्रति निष्ठा और राज्य के संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राज्यपाल को अपने कार्यकाल के दौरान संवैधानिक मर्यादाओं और नियमों के अनुरूप काम करना होता है।
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उत्तराखंड में आज भी बारिश-बर्फबारी के आसार, मौसम विभाग ने 3 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट

Uttarakhand Weather : उत्तराखंड में आज भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहने के अनुमान है। पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग के लिए अलर्ट जारी किया है।
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उत्तराखंड में आज भी बारिश-बर्फबारी के आसार
उत्तराखंड में मौसम के मिजाज में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। बृहस्पतिवार को अचानक बदले मौसम के बाद शुक्रवार को प्रदेशभर में मौसम साफ रहा और आसमान में चटक धूप खिली। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड से कुछ राहत मिली, जबकि मैदानी इलाकों में भी मौसम सुहावना बना रहा।
मौसम विभाग ने 3 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में मौसम का ये मिजाज ज्यादा समय तक स्थिर रहने की संभावना नहीं है। शनिवार को एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम बदल सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र ने कुछ जिलों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई है।

बर्फबारी होने से ठंड में होगा इजाफा
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 17 अक्टूबर को उत्तराखंड के पांच पर्वतीय जिलों में मौसम बदल सकता है। बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ के कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश होने की संभावना है।
इसके साथ ही 3,800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अनुमान जताया गया है। ऐसे में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए पर्वतीय इलाकों में मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
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