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सिल्क्यारा सुरंग: भूगर्भीय सर्वे सेफ्टी ऑडिट के बाद इसी महीने शुरू होगा निर्माण कार्य; नही होगी चूक, एनएचआईडीसीएल ने की तैयारी शुरू।

देहरादून – 41 मजदूरों के कैद होने के बाद चर्चाओं में आई उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग का निर्माण कार्य भूगर्भीय सर्वे, सेफ्टी ऑडिट के साथ इसी महीने से शुरू किया जायेंगा। राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इस बार निगम सुरंग निर्माण में किसी तरह की चूक नहीं चाहता।

सिल्क्यारा सुरंग में 56 मीटर तक मलबा आने के बाद 41 मजदूर भीतर फंस गए थे। केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने बमुश्किल 17वें दिन उन्हें सकुशल बाहर निकाल दिया था। इसके बाद से सुरंग निर्माण के भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खल्खो ने बताया कि मलबा हटाने और सुरंग का निर्माण कार्य इसी माह से शुरू होगा। उन्होंने बताया कि निर्माण से पहले भूगर्भीय सर्वेक्षण और सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। इसके साथ ही मलबा हटाने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि निर्माण में अतिरिक्त एहतियात बरतते हुए वर्ष 2024 में इसे पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि, इस हादसे के बाद यह लक्ष्य थोड़ा पीछे हटता नजर आ रहा है।
सिलक्यारा सुरंग की डीपीआर में जो भूगर्भीय जांच की रिपोर्ट लगी हुई है, वह गलत निकली। निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में इस पहाड़ में हार्ड रॉक बताई गई थी, लेकिन जब निर्माण शुरू हुआ तो भुरभुरी मिट्टी निकली। इसी वजह से अब दोबारा जियो सर्वे कराया जाएगा।
सिलक्यारा सुरंग से मजदूरों को बचाव के लिए राज्य सरकार ने वैज्ञानिकों की एक टीम को जांच सौंपी थी, जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी थी। उस रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर ही बचाव अभियान चला था। परिवहन मंत्रालय की ओर से इस सुरंग से संबंधित कोई जांच अभी तक नहीं बैठाई गई है। जांच में लापरवाही करने वालों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट हो पाएगी।
483 मीटर बचा हुआ है हिस्सा
सिलक्यारा सुरंग 4500 मीटर (4.5 किमी) लंबी है। सिलक्यारा की ओर से करीब 2,350 और दूसरे बड़कोट छोर से करीब 1,600 मीटर तक सुरंग खोदी जा चुकी है। बीच का करीब 483 मीटर हिस्सा ही बचा हुआ है। इसकी खोदाई पूरी होने के बाद सुरंग आरपार हो जाएगी। इस सुरंग का निर्माण 853.79 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है।
Dehradun
डीज़ल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, पेट्रोल पंपों पर बांटी “मेलोडी टॉफी”

Uttarakhand Politics : डीज़ल, पेट्रोल और CNG की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर आज देहरारदून में उत्तराखंड कांग्रेस का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कांग्रेसियों ने पेट्रोल पंपों पर जाकर मेलोडी टॉफी बांटी।
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डीज़ल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों पर कांग्रेस का अनोखा विरोध
डीज़ल, पेट्रोल और CNG की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर विकासनगर में कांग्रेस सड़कों पर उतर आई। शहर एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने पेट्रोल पंपों पर “मेलोडी टॉफी” बांटकर केंद्र सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने बढ़ती महंगाई को आम जनता की कमर तोड़ने वाला बताते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला।
पेट्रोल पंपों पर कांग्रेसियों ने बांटी “मेलोडी टॉफी”
विकासनगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर वाहन चालकों और आम लोगों को मेलोडी टॉफियां बांटी और बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पेट्रोल, डीज़ल और CNG के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई चरम पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।

रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम छू रहे आसमान
कांग्रेस का कहना है कि “केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों और अकुशल वित्तीय प्रबंधन के कारण पेट्रोलियम पदार्थों समेत रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। जनता आर्थिक बोझ तले दब चुकी है, लेकिन सरकार को आम आदमी की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।”
बढ़ती महंगाई पर तत्काल राहत देने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर देश की जनता को मितव्ययता का पाठ पढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विदेश दौरों और दिखावटी आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने साफ कहा कि पार्टी जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करती रहेगी और सरकार की जनविरोधी नीतियों को जनता के बीच उजागर करती रहेगी। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बढ़ती महंगाई पर तत्काल राहत देने की मांग उठाई है।
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देहरादून में देर रात चली कार्बाइन से गोलियां, दून एयरपोर्ट में तैनात हेड कांस्टेबल की मौत, इलाके में मचा हड़कंप

Dehradun News : राजधानी देहरादून से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां देर रात रानीपोखरी में अचानक कार्बाइन से गोलियां चलने से हड़कंप मच गया। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा।
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देहरादून में देर रात चली कार्बाइन से गोलियां
देहरादून में देर रात कार्बाइन से गोलियां चलने से हड़कंप मच गया। मिली जानकारी के मुताबिक देहरादून एयरपोर्ट स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में तैनात एक हेड कांस्टेबल की रानीपोखरी स्थित उनके आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
एयरपोर्ट गार्ड ड्यूटी में तैनात हेड कांस्टेबल की मौत
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार रात करीब 10:30 बजे हेड कांस्टेबल सुनील (49) अपने नागाघेर, रानीपोखरी स्थित घर के बरामदे में मौजूद थे। इसी दौरान उनकी कार्बाइन से अचानक कई गोलियां चल गईं, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के तुरंत बाद उन्हें उपचार के लिए हिमालय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक गार्ड को लगी 11 गोलियां
थानाध्यक्ष राजेंद्र खोलिया के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि हेड कांस्टेबल को उनकी कार्बाइन से लगभग 11 गोलियां लगी हैं। पुलिस ने पंचनामा की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है।
एसपी देहात वन जया बलोनी ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
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कौन हैं आशीष चौहान ? जो बने देहरादून के नए जिलाधिकारी, कई जिलों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, जानें यहां

Ashish Chauhan : उत्तराखंड सरकार ने राजधानी देहरादून की प्रशासनिक जिम्मेदारी अब अनुभवी आईएएस अधिकारी आशीष चौहान को सौंप दी है। उन्हें जिले का नया जिलाधिकारी (DM) नियुक्त किया गया है।
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कौन हैं आशीष चौहान ? जो बने देहरादून के नए जिलाधिकारी
आशीष चौहान वर्ष 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उनका मूल निवास राजस्थान में है। उन्होंने इतिहास विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की है और इसी क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री भी हासिल की है बता दें कि प्रशासनिक सख्ती, आम लोगों से सीधा संवाद और फील्ड स्तर पर सक्रिय कार्यशैली के कारण आशीष चौहान लंबे समय से राज्य के प्रमुख अधिकारियों में गिने जाते हैं।
कई जिलों में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
आशीष चौहान इससे पहले उत्तराखंड के कई अहम जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने पौड़ी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया है। इन जिलों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।

वर्ष 2025 में उन्हें पौड़ी के जिलाधिकारी पद से स्थानांतरित कर यूकाडा (UKADA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और खेल एवं युवा कल्याण विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया था।
कई बार देर रात पहुंच जाते थे दूर-दराज के गांव
पौड़ी में उनके कार्यकाल की सबसे अधिक चर्चा उनकी कार्यशैली को लेकर हुई। वे कई बार देर रात तक दूरदराज गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते और मौके पर समाधान की कोशिश करते दिखाई दिए। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो कार्यालय तक सीमित रहने के बजाय फील्ड में सक्रिय रहना पसंद करते हैं।

बैठकों से अधिक जमीनी स्थिति का आकलन करने को देते हैं प्राथमिकता
उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत एवं आपदा प्रभावित जिलों में काम करने का अनुभव भी उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड को मजबूत बनाता है। सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा राहत कार्यों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई मामलों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
आशीष चौहान की कार्यप्रणाली को लेकर यह माना जाता है कि वे कागजी बैठकों से अधिक जमीनी स्थिति का आकलन करने को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा वे अप्रैल 2021 से जून 2021 तक उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (MD) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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