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स्वाभिमान महारैली: भूख कानून ,मूल निवास और स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर तमाम संगठनों और स्थानीय लोगों ने निकाली विशाल रैली।

गैरसैंण – आज गैरसैंण में सशक्त भूख कानून ,मूल निवास 1950 , स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर तमाम संगठनों और स्थानीय लोगों ने स्वाभिमान रैली निकाली अपने संसाधनों से जुटी इस विशाल भीड में यह तो साबित कर दिया कि जनता अब अपना अधिकार चाहती है। फिर चाहे लड़के हो या छीन के, वहीं इस विशाल भीड़ को देखकर सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खींचना भी लाजमी है।

जिन्हें लगती गैरसैंण में ठंड ,वो छोड़ दें उत्तराखंड

9 नवम्बर सन 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था । इस राज्य की मांग को लेकर हुए आंदोलन में कई राज्य आंदोलन कारियों ने अपनी कुर्बानी दी थी। इसके पीछे सोच यह थी कि अलग राज्य होगा तो इस पहाड़ी राज्य का समुचित विकास होगा और यहाँ का पानी और यहां की जवानी यही के काम आएगी लेकिन राज्य गठन के 24 साल बीत जाने को है लेकिन आज भी राज्य आन्दोलन कारियों के सपने साकार नही हो पाए है।

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सिद्धपीठ लाटू देवता मंदिर के खुले कपाट, सैकड़ों श्रद्धालु बने ऐतिहासिक पल के साक्षी

Chamoli News : प्रसिद्ध सिद्धपीठ लाटू देवता मंदिर के कपाट आज भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। अब अगले छह माह भक्त लाटू देवता के दर्शन कर सकते हैं।
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सिद्धपीठ लाटू देवता मंदिर के खुले कपाट
चमोली जिले के वाण गांव स्थित सिद्धपीठ लाटू देवता मंदिर के कपाट शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे वैदिक विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार मंदिर के पुजारी खेम सिंह ने आंखों पर पट्टी बांधकर गर्भगृह में प्रवेश किया और पूजा-अर्चना संपन्न कराई।

सैकड़ों श्रद्धालु बने ऐतिहासिक पल के साक्षी
कपाट खुलते ही मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गूंज उठा और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया। इस अवसर पर स्थानीय लोगों द्वारा देव नृत्य, झोड़ा-चाछड़ी जैसे पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ भंडारे का भी आयोजन किया गया। मंदिर अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहेगा।
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भू-बैकुंठ श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट विधि-विधानपूर्वक खुले, हजारों श्रद्धालु बने ऐतिहासिक पल के साक्षी

Badrinath Dham : भू-बैकुंठ श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट आज सुबह विधि-विधापूर्वक खोल दिए गए हैं। हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। सीएम धामी ने कपाट खुलने के बाद भगवान बद्री विशाल के दर्शनव किए।
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भू-बैकुंठ श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट विधि-विधानपूर्वक खुले
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आज पूरे विधि विधान और वैदिक मन्त्रोचार के साथ प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ हेतु खोल दिए गए हैं। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान बदरी विशाल और अखंड ज्योत के दर्शन किए।
सीएम धामी ने किए भगवान बद्री विशाल के दर्शन
भू बैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

भगवान श्रीहरि विष्णु की पवित्र भूमि श्री बद्रीनाथ धाम हिमालय की गोद में स्थित ये दिव्य धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। इस पावन अवसर पर अलौकिक भक्ति, दिव्य ऊर्जा और अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति ने मन को भावविभोर कर दिया।
पीएम मोदी के नाम से की गई धाम में पहली पूजा
कपाटस खुलने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम से श्री हरि विष्णु की प्रथम पूजा की गई। सम्पूर्ण विधि विधान के साथ श्री बदरी विशाल का वंदन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं मंगल के लिए प्रार्थना की।
सीएम ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के साथ ही पावन चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। देवभूमि उत्तराखण्ड में देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सहज यात्रा अनुभव प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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गाड़ू घड़ा और गरुड़ की डोली बद्रीनाथ के लिए रवाना, 23 अप्रैल को खुलेंगे भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट

Badrinath Dham : 23 अप्रैल को भक्तों के लिए खुल जाएंगे भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट
Badrinath Dham : बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले होने वाली प्रक्रिया शुरू हो गई। गाड़ू घड़ा यात्रा और गरुड़ की डोली के साथ शंकराचार्य की डोली धाम के लिए रवाना हो गई है।
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गाड़ू घड़ा और गरुड़ की डोली बद्रीनाथ के लिए रवाना
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाने है। इस पहले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आज नृसिंह मंदिर परिसर में स्थित मंदिर विशेष पूजा की गई। जिसके बाद आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हो गई है।

जय बद्रीविशाल के नारों से गूंजा पूरा इलाका
गाड़ू घड़ा और गरुड़ की डोली और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना होने के दौरान पूरा इलाका जय बद्रीविशाल के नारों से गूंज उठा। इसके साथ ही द्री विशाल के भजनों के साथ महिलाओं व सेना के बैंडो की मधुर ध्वनि ने पूरा क्षेत्र भक्तिमय कर दिया।
23 अप्रैल को विधि-विधानपूर्व खोल दिए जाएंगे कपाट
बता दें कि रात्रि विश्राम पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बद्री में करने के बाद अगले दिन भगवान कुबेर और उद्धव की डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी तथा गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा बदरीनाथ के लिए रवाना हुई।
इस यात्रा में बद्रीनाथ धाम के रावल भी शामिल रहे और पूरे विधि-विधान के साथ आगे बढ़े। अब 23 अप्रैल को धार्मिक परंपराओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
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