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गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करेंगे राज्यपाल।

देहरादून – गणतंत्र दिवस के मौके पर उत्तराखंड पुलिस में सेवा के आधार पर अधिकारियों और कर्मचारियों को राज्यपाल उत्कृष्ट सेवा पदक, उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिन्ह एवं सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह दिए जाने की घोषणा कर दी गई है।

सराहनीय सेवा के लिए (सेवा आधार पर) राज्यपाल का उत्कृष्ट सेवा पदक
- विपिन चन्द्र पन्त, पुलिस उपाधीक्षक, जनपद चंपावत।
- गजपाल सिंह रावत, प्लाटून कमांडर मुख्यमंत्री सुरक्षा, उत्तराखंड।
- धनीलाल, अपर गुल्मनायक, 40 वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार।
उत्कृष्ट सेवा के लिए (सेवा आधार पर) उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिन्ह
- अजय कुमार रावत, निरीक्षक, पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड।
- श्याम लाल, निरीक्षक यातायात जनपद रुप्रयाग।
- गोबिन्द सिंह मेहता, उप निरीक्षक(एम), जनपद नैनीताल।
- अर्जुन सिंह, अपर उप निरीक्षक जनपद टिहरी गढ़वाल।
सराहनीय सेवा के लिए (सेवा आधार पर) सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह
- बृज मोहन पन्त, निरीक्षक नागरिक पुलिस पीटीसी नरेन्द्रनगर।
- देवेन्द्र सिंह रावत, निरीक्षक जनपद चमोली।
- सुभाष चन्द्र, निरीक्षक एलआईयू कार्यालय पुलिस अधीक्षक(क्षेत्रीय) देहरादून।
- राकेश बिष्ट, दलनायक 46वीं वाहिनी पीएसी,रूद्रपुर, ऊधमसिंहनगर।
- बृज मोहन, उप निरीक्षक पुलिस दूरसंचार पुलिस दूसंचार मुख्यालय।
- सतीश चन्द्र कापड़ी, उप निरीक्षक नागरिक पुलिस जनपद अल्मोड़ा।
- गब्बर सिंह, अपर गुल्मनायक एसडीआरएफ वाहिनी,उत्तराखंड।
- सलमान अली, उप निरीक्षक(एम) एफएसएल उत्तराखण्ड, देहरादून।
- बिन्देश्वर प्रसाद, अपर उप निरीक्षक जनपद उत्तरकाशी।
- शिव चरण, अपर गुल्मनायक आईआरबी द्वितीय, देहरादून।
- हेमन्त सिंह, अपर गुल्मनायक आईआरबी प्रथम, रामनगर, नैनीताल।
- त्रिलोक सिंह, अपर उप निरीक्षक जनपद चंपावत।
- धन सिंह, फायर सर्विस चालक, जनपद बागेश्वर।
- संजय कुमार तिलाड़ा, मुख्य आरक्षी जनपद नैनीताल।
- अनिल कुमार मर्तोलिया, मुख्य आरक्षी 88 जनपद पिथौरागढ़।
- प्रदीप कन्नौजिया, मुख्य आरक्षी सीआईडी खंडदेहरादून।
- वाणी बिलास, मुख्य आरक्षी सतर्कता सेक्टर, देहरादून।
- सपना नेगी, आरक्षी 55, जीआरपी उत्तराखंड।
- अरविन्द गिरी, लान्स नायक 477, 31वीं वाहिनी पीएसी।
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पिरान कलियर दरगाह से वायुसेना अधिकारी का बेटा लापता, लावारिस हालत में मिला बैग

Haridwar News : हरिद्वार के पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक परिसर से भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी का 27 वर्षीय बेटा संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। युवक का बैग दरगाह परिसर में लावारिस हालत में मिला, जिसमें लैपटॉप, पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज बरामद हुए। घटना के बाद से परिजन परेशान हैं, वहीं पुलिस युवक की तलाश में जुटी है।
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पिरान कलियर दरगाह से वायुसेना अधिकारी का बेटा लापता
बिहार निवासी शंकर सिंह भारतीय वायुसेना में मास्टर वारंट ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में है। उनका बेटा सत्यम एक निजी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के तौर पर काम करता था। परिजनों के मुताबिक, उसने करीब डेढ़ महीने पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। बताया गया है कि सत्यम लंबे समय से अपने पिता के संपर्क में भी नहीं था और दोनों के बीच बातचीत बंद थी।
लावारिस हालत में मिला बैग
जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर को पिरान कलियर पुलिस को दरगाह परिसर से एक काला बैग मिला था। बैग लावारिस हालत में पड़ा हुआ था। पुलिस ने इसकी सूचना सत्यम के पिता को दी। 18 अक्टूबर को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बैग उन्हें सौंप दिया गया।

पुलिस ने दर्ज की युवक की गुमशुदगी
बैग की जांच के दौरान उसमें लैपटॉप, पासपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, जिनसे बैग की पहचान सत्यम से जुड़ी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पिता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने युवक की गुमशुदगी दर्ज कर ली।
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ अन्य माध्यमों से सत्यम का पता लगाने में जुटी है। फिलहाल युवक के लापता होने के कारणों और उसके संभावित ठिकाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
Dehradun
उत्तराखंड में खुली मिठाई पर लगेगी एक्सपायरी डेट, 26 अक्टूबर से बदलेगा नियम

देहरादून: उत्तराखंड में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक अहम बदलाव होने जा रहा है। अब दुकानों में खुली मिठाइयां खरीदते समय ग्राहकों को उनकी निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जानकारी भी मिल सकेगी। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 26 अक्टूबर 2026 से राज्य में खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की ट्रे तथा काउंटर पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया है। खाद्य संरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की ताजगी और उनकी उपयोग अवधि के बारे में जागरूक करना है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई थी समस्या
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से मिठाई की दुकानों में किए गए निरीक्षण के दौरान सामने आया कि खुली मिठाइयों के निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि की जानकारी ग्राहकों को नहीं मिल पा रही थी। दुकानों में मिठाइयां बिक्री के लिए रखी होती थीं, लेकिन उन्हें कब बनाया गया और कब तक उनका सेवन किया जा सकता है, यह स्पष्ट नहीं होता था।
मिठाई की ट्रे और काउंटर पर दिखानी होगी तारीख
नए नियम के तहत दुकानदारों को बिक्री के लिए रखी खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के काउंटर या ट्रे पर निर्माण तिथि के साथ एक्सपायरी डेट अथवा यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। यह व्यवस्था पूरे उत्तराखंड में लागू होगी।इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसके निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि जानने में आसानी होगी।
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डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

देहरादून। उत्तराखंड को आज नया राज्यपाल मिल गया है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को प्रदेश के नौवें राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ दिलाई। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही उत्तराखंड में राज्यपाल के रूप में उनकी नई पारी की शुरुआत हो गई है। अब प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था में उनकी भूमिका और आगामी कार्यों पर सभी की नजरें रहेंगी।
Table of contents
1.डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली राज्यपाल पद की शपथ
2.नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ
डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने आज उत्तराखंड के नए राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उनकी नियुक्ति प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। राज्यपाल प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। उनकी भूमिका राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय बनाए रखने में भी अहम होती है।

मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। इस समारोह के साथ उन्होंने संवैधानिक रूप से राज्यपाल की जिम्मेदारियां संभालीं।राज्यपाल पद की शपथ संविधान के प्रति निष्ठा और राज्य के संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। राज्यपाल को अपने कार्यकाल के दौरान संवैधानिक मर्यादाओं और नियमों के अनुरूप काम करना होता है।
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