Pithauragarh
रात के सन्नाटे में टूटी पहाड़ी, देवत गांव के लोग घर छोड़ भागे

पिथौरागढ़: जिले के नैनी सैनी हवाई अड्डे के पास स्थित देवत गांव में रविवार रात लगभग 9 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई जब पास की पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने लगे। पत्थरों की आवाज़ इतनी भयावह थी कि ग्रामीण घबराकर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। रात को ग्रामीणों को बारात घर में सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया।
यह घटना उस दुखद हादसे के ठीक एक सप्ताह बाद हुई है, जिसमें देवत पुरचौड़ा गांव के रघुवर प्रसाद और नरेश कुमार के घर के अंदर भारी-भरकम पत्थर गिर गया था। उस हादसे में 12 वर्षीय बालक की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य किशोर सनी घायल हो गया था।
रविवार रात फिर से पत्थर गिरने की घटना ने ग्रामीणों की पुरानी दहशत को और गहरा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह इलाका पहले भी ऐसे हादसों का गवाह रहा है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि हम हर दिन डर के साए में जी रहे हैं। कभी भी कोई बड़ा पत्थर जान ले सकता है। प्रशासन को चाहिए कि इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर उचित कदम उठाए।”
फिलहाल, प्रशासन द्वारा क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि सर्वे कर पहाड़ी से गिरते पत्थरों को रोकने के लिए मजबूत दीवार या सुरक्षा उपाय जल्द से जल्द किए जाएं।
Pithauragarh
CM धामी के पिथौरागढ़ दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट, मेला परिसर और आपदा स्थलों का DM-SP ने लिया जायजा

पिथौरागढ़: मुख्यमंत्री उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी के 28 अगस्त 2025 को प्रस्तावित पिथौरागढ़ भ्रमण (मोस्टमानू मन्दिर प्रतिभाग) के दृष्टिगत जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कलेक्ट्रेट सभागार में विभागीय अधिकारियों की बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
तत्पश्चात जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने देवतचौड़ा गांव का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। हाल ही में लगातार वर्षा के कारण पहाड़ियों से चट्टानें खिसकने के खतरे के चलते प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। अस्थायी रूप से प्रेशियस अकादमी भवन एवं बैंकेट हाल में ठहराव की व्यवस्था की गई है, जहां उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया।
इसके उपरान्त जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने मोस्टमानू मेला परिसर, बनाए गए मंच तथा अल्प विश्राम कक्षों का निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर उन्होंने मेला समिति के अध्यक्ष व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बिरेंद्र बोहरा, प्रसिद्ध सिने अभिनेता हेमंत पाण्डेय एवं मेला समिति के पदाधिकारियों से भेंट कर तैयारियों की जानकारी ली और प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
साथ ही छानापाण्डेय के तमखानी मैदान में निर्मित हो रहे हेलीपैड का भी स्थलीय निरीक्षण कर लोनिवि के अभियंता एवं उपजिलाधिकारी सदर मंजीत सिंह को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया।
Accident
पिथौरागढ़: धारचूला में दर्दनाक हादसा….खाई में गिरी पिकअप, एक घायल, चालक लापता; रेस्क्यू अभियान जारी

पिथौरागढ़: सीमांत धारचूला क्षेत्र में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तवाघाट से धारचूला की ओर आ रही एक पिकअप वाहन एलागाड़ के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। वाहन में दो लोग सवार थे, जिनमें से एक घायल को रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि चालक अब तक लापता है। पुलिस, एसडीआरएफ और एसएसबी की टीमें संयुक्त रूप से लापता युवक की तलाश में जुटी हुई हैं।
150 मीटर गहराई में जा गिरा वाहन
थाना प्रभारी विजेंद्र शाह ने बताया कि दुर्घटना बड़गांव ब्रिज के पास हुई, जहां पहाड़ी से गिरे भारी पत्थर के चलते वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया और वह करीब 150 मीटर गहरी खाई में काली नदी के किनारे जा गिरा। सूचना मिलते ही पुलिस बल, एसडीआरएफ और एसएसबी की टीमें मौके पर पहुंचीं और रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।
एक घायल, चालक लापता
हादसे में घायल युवक की पहचान रितिक घोष (24 वर्ष), निवासी रेजीनगर, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है। वह HCC कंपनी में कार्यरत है और फिलहाल धारचूला के अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
वहीं वाहन का चालक अब भी लापता है, जिसकी तलाश के लिए शनिवार सुबह से पुनः सघन खोजबीन शुरू कर दी गई है। रात के समय भारी बारिश और अंधेरे के कारण रेस्क्यू में काफी दिक्कतें आईं।
लगातार हो रहे हादसे, मौसम बना मुसीबत
जिले में इन दिनों लगातार बारिश के चलते भूस्खलन और चट्टानों के गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। कुछ दिन पहले घाट-टनकपुर मोटर मार्ग पर बोल्डर गिरने से एक कार क्षतिग्रस्त हुई थी, जिसमें सवार 5 लोग सुरक्षित बचा लिए गए थे। मुवानी में एक माह पूर्व हुई जीप दुर्घटना में 8 लोगों की मौत हो गई थी। देवतपुरचौड़ा गांव में पहाड़ी से गिरे बोल्डर से एक 11 वर्षीय किशोर की जान चली गई थी।
सावधानी जरूरी, स्कूलों में छुट्टी
प्रशासन ने बारिश की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को जिले भर के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। लोगों से अपील की गई है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी किए गए मौसम अलर्ट का पालन करें।
Pithauragarh
नींद नहीं, अब सिर्फ डर: पिथौरागढ़ में भूस्खलन से सहमे ग्रामीण

पिथौरागढ़ | उत्तराखंड: उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश अब लोगों के लिए प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि रोज़ का डर बन चुकी है। पिथौरागढ़ जिले के देवतपुरचौड़ा गांव में बीते सोमवार रात हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। बारिश के बीच पहाड़ी से अचानक गिरे भारी-भरकम बोल्डर ने एक 12 साल के मासूम की जान ले ली, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। इस हादसे में गांव का प्राथमिक विद्यालय और एक मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो गया।
“नींद नहीं आती… कब गिर जाए कोई पत्थर, इसी डर में जी रहे हैं”
गांव की एक बुज़ुर्ग महिला ने रोते हुए बताया कि बच्चा स्कूल के पास खेल रहा था, अचानक तेज़ आवाज़ आई और सब कुछ खत्म हो गया। अब रात को आंखें बंद करते डर लगता है कि कहीं पहाड़ी से फिर कुछ ना आ गिरे।
देवतपुरचौड़ा गांव पहाड़ी के ठीक नीचे बसा हुआ है, और यही पहाड़ी पिछले सात सालों से लगातार दरक रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहाड़ी से अक्सर पत्थर और बोल्डर गिरते रहते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासन तक पहुंची ग्रामीणों की गुहार
घटना के बाद गांव के लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और पहाड़ी का ट्रीटमेंट कराए जाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि ये पहली घटना नहीं है…पहले भी तीन बार ऐसा हो चुका है। कभी मकान टूटे, कभी जानवर मरे….और अब एक बच्चा भी चला गया।
एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा कि अगर पहाड़ी से लटके पत्थरों को पहले ही हटा दिया गया होता, तो शायद आज वो बच्चा जिंदा होता।
मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक और एसडीएम
घटना के बाद पूर्व विधायक चंद्रा पंत और एसडीएम मंजीत सिंह ने गांव का निरीक्षण किया और नुकसान का जायजा लिया। लेकिन ग्रामीणों का सवाल यही है कि निरीक्षण से क्या होगा, जब कार्रवाई नहीं होती?
गांव के करीब 60 परिवारों की ज़िंदगी खतरे में है, लेकिन पहाड़ी पर अब भी कई बड़े बोल्डर लटके हुए हैं….जो कभी भी गिर सकते हैं।
अब और कितना इंतज़ार?
पिथौरागढ़ हो या रामनगर पहाड़ों में बारिश के नाम पर डर और तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। देवतपुरचौड़ा गांव में एक मासूम की मौत शायद वह आख़िरी चेतावनी हो जिसे प्रशासन को अब नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
हर बरसात के साथ अगर सरकार और प्रशासन की नींद नहीं खुलती, तो इन आपदाओं की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती रहेगी।
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