Dehradun
प्रदेश के पहाड़ी हिस्सों में आज हल्की बारिश के आसार, मैदानी इलाकों में सामान्य रहेगा मौसम।

देहरादून। प्रदेश के पहाड़ी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अंदेशा।

हालांकि मैदानी इलाकों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान हालांकि कहीं-कहीं हो सकती है छुटपुट बारिश।
मौसम विभाग ने पहाड़ के अधिकांश हिस्सों में आने वाले 2 से 3 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का जताया है अंदेशा।
बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता को सतर्क रहने की दी हिदायत।
Uttarakhand
Uttarakhand News: 5 साल में 826 स्कूल बंद, विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा

पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था पर पलायन की मार, पांच सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
UTTARAKHAND NEWS: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में इस बार कई चौंकाने वाले मामले सामने आए. ऐसी ही एक खबर शिक्षा विभाग से निकलकर सामने आई. विधानसभा में भाजपा के ही विधायक के सवाल पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बतया कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में लगभग 826 प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं. सरकार ने इसके पीछे की वजह बढ़ते पलायन को बताया है.
मुख्य बिंदु
विधानसभा में आया शिक्षा विभाग से जुड़ा चौंकाने वाला मामला
विधानसभा में ये मुद्दा भाजपा विधायक महेश जीना ने उठाया, जिसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने स्थिति को सदन में स्पष्ट किया. सरकार ने माना कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम रह गई थी, जिसके कारण उन्हें चलाना मुश्किल हो गया. ऐसे में शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कर छात्रों को पास के बड़े स्कूलों में समायोजित करने का निर्णय लिया. सरकार का कहना है कि इससे बच्चों को बेहतर शिक्षण माहौल और सुविधाएं मिल सकेंगी.
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पिछले 5 सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
उत्तराखंड में लचर शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता जिलेवार आंकड़े भी हैं. सबसे अधिक टिहरी जिले में 262 स्कूल बंद हुए हैं. इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104, अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43 और देहरादून में 38 स्कूल बंद हुए हैं. वहीं चंपावत में 34, उत्तरकाशी और बागेश्वर में 25-25, उधम सिंह नगर में 21, रुद्रप्रयाग में 15 और हरिद्वार में 2 स्कूलों पर ताले लगे हैं. वर्तमान में राज्य में करीब 10,940 स्कूल संचालित हो रहे हैं. लेकिन उनमें से कई स्कूल ऐसे भी हैं जहाँ पर बच्चों की संख्या केवल दो से तीन ही रह गई है.
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पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था के लिए अभिशाप बन रहा पलायन
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की कमी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. कई सरकारी स्कूलों में भवन जर्जर हैं और शौचालय, पेयजल व खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. यही कारण है कि अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को बचाए रखना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
Dehradun
देहरादून में आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल, अपनी मांगों को लेकर किया सीएम आवास कूच

Dehradun News : देहरादून में आज आंनबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
Table of Contents
देहरादून में आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल
देहरादून में आज प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है।

अपनी मांगों को लेकर किया सीएम आवास कूच
बता दें कि आंनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में वेतन वृद्धि और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग शामिल है। बड़ी संख्या में पहुंची कार्यकर्ताओं के कारण सड़कों पर जनसैलाब जैसा माहौल देखने को मिला और प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय मंत्री पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री आवास कूच करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय मंत्री रेखा आर्य पर भी निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।
Uttarakhand
Uttarakhand Budget Session 2026: 5 दिन में 1.11 लाख करोड़ बजट, 12 बिल और 4 अध्यादेश पारित

उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 1.11 लाख करोड़ का बजट पास
Uttarakhand Budget Session 2026: उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र 5 दिन की कार्रवाई के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है. सदन की कार्रवाई 5 दिन में टोटल 41 घंटे 10 मिनट चली. सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.11 लाख करोड़ रूपए का बजट पास हुआ. साथ ही इस दौरान 12 विधेयक और 4 अध्यादेश पास हुए.
मुख्य बिंदु
भराड़ीसैण में चल रहा विधानसभा का बजट सत्र पांच दिन की कार्रवाई के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया है. पांचवे दिन ध्वनिमत से 1.11 लाख करोड़ का बजट पास हुआ. साथ ही 4 अध्यादेश भी पारित हुए.
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उत्तराखंड विधानसभा से पास हुए 4 अध्यादेश
- उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनिमन और सेवा शर्त) संशोधन अध्यादेश 2025
- उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025
- उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2025
- उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026
विधान सभा से पास हुए 12 विधेयक
बजट सत्र के पांचवे दिन की शुरुआत सुबह 11:00 से शुरू होकर देर रात 12:30 बजे तक चली. 5 दिनों में सत्र की कारवाई कुल 41 घंटे 10 मिनट तक चली. साथ ही नियम 58 में 25 सुचनाएं प्राप्त हुई, जिसमें 17 सूचनाएं स्वीकार हुई, इसके साथ ही नियम 300 में 117 सूचनाएं सदन की कार्यवाहीं में आई.
सत्र में 12 विधेयकों को मिली मंजूरी
- उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक 2026
- उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
- समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993) (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक, 2026
- उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026
विपक्ष का सरकार पर हमला
विधानसभा सत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मजबूती से निभाई. उन्होंने कहा कि सरकार सत्र को समय से पहले समाप्त करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने प्रश्नकाल सहित विभिन्न नियमों के तहत सरकार को लगातार घेरने का काम किया. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का बजट सिर्फ “झूठ का पुलिंदा” है और इसमें सराहने लायक कुछ भी नहीं है. वहीं, कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी और हरीश धामी ने भी कहा कि सत्र के दौरान सरकार की कमियों को उजागर किया गया और कई विभागीय सवालों पर मंत्रियों के पास ठोस जवाब नहीं थे.
भाजपा ने सत्र को बताया सफल
दूसरी ओर, भाजपा ने बजट सत्र को सकारात्मक और उपयोगी बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरे सत्र में केवल विरोध करती नजर आई. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में हिस्सा नहीं लिया और बाद में सत्र की अवधि को लेकर सवाल उठाए, जो महज राजनीतिक बयानबाजी है.
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