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Tulsi Pujan Diwas क्यों मनाया जाता है ?, इस दिन सही पूजा से बदल सकती है आपकी किस्मत

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Tulsi Pujan Diwas 2025

Tulsi Pujan Diwas 2025 : हर साल 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है। इस दिन अगर आप सही विधि से मां तुलसी की पूजा करेंगे तो आपकी किस्मत भी बदल सकती है। इसके साथ ही आप पर मां तुलसी और भगवान विष्णु की कृपा बरसेगी।

Tulsi Pujan Diwas क्यों मनाया जाता है ?

तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। इस लिए इसकी पूजा करने से स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यूं तो सालभर तुलसी माता की पूजा की जाती है। लेकिन हर साल 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस (Tulsi Pujan Diwas 2025) मनाया जाता है। तुलसी पूजन दिवस तुलसी के धार्मिक और औषधीय महत्व को दिखाता है।

Tulsi Pujan Diwas 2025

साल 2014 से हुई थी इसे मनाने की शुरूआत

आपको बता दें कि Tulsi Pujan Diwas मनाने की शुरूआत साल 2014 में हुई थी। देश के कई साधु-संतों ने 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाने का फैसला लिया था। तभी से इसे आज के दिन मनाया जाता है। इस साल यानी कि 25 दिसंबर 2025 को तुलसी पूजन दिवस का शुभ मुहूर्त सुबह आठ बजे से 10 बजे तक रहेगा। वहीं की पूजा का मुहूर्त 5:30 बजे से सात बजे तक रहेगा।

Tulsi Pujan Diwas 2025

इस दिन सही पूजा से बदल सकती है आपकी किस्मत

तुलसी पूजन दिवस पर अगर आप सही विधि से पूजा करते हैं तो आप पर मां तुलसी और भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहेगी। तुलसी पूजन दिवस पूजा विधि (Tulsi Pujan Diwas Puja Vidhi) शुरू करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।

Tulsi Pujan Diwas

पूजा को शुरू करते हुए स्नान के बाद तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें। इसके बाद मां तुलसी को अक्षत, चंदन और रोली चढ़ाएं। फिर अपनी श्रद्धानुसार तुलसी की 7, 11, 21 या 111 परिक्रमा करें। परिक्रमा के दौरान तुलसी माता के मंत्रों का जाप करें। परिवार के साथ तुलसी माता की आरती करें और मां को भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांटें। इस दिन शाम को पूजा के बाद तुलसी के पास गाय.

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National

Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त कब है नाग पंचमी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त

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Nag Panchami 2026

Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त कब है नाग पंचमी?

सनातन धर्म में सावण (श्रावण) का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है।इसी पावन माह में आने वाली नाग पंचमी (Nag Panchami) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।नाग पंचमी का पर्व मुख्य रूप से भगवान शिव (Lord Shiva) के आभूषण स्वरूप नाग देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।

वर्ष 2026 में नाग पंचमी की सही तारीख को लेकर पंचांग गणनाओं के कारण कुछ असमंजस की स्थिति बन रही है।इस लेख में हम नाग पंचमी 2026 की सटीक तिथि, प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त, सम्पूर्ण पूजा विधि, पौराणिक महत्व और कालसर्प दोष से मुक्ति के प्रभावी उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


Nag Panchami 2026 Date: 16 या 17 अगस्त कब मनाई जाएगी नाग पंचमी?

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

वर्ष 2026 की पंचांग गणना के आधार पर इस प्रकार है:

विवरणतिथि एवं समय
पंचमी तिथि प्रारंभ16 अगस्त 2026 (रविवार), शाम 04:52 बजे से
पंचमी तिथि समाप्त17 अगस्त 2026 (सोमवार), शाम 05:00 बजे तक
उदया तिथि नाग पंचमी17 अगस्त 2026, सोमवार
विशेष योगतीसरा सावन सोमवार व्रत + सिंह संक्रांति

शास्त्रों में उदया तिथि (सूर्योदय कालीन तिथि) को ही सर्वमान्य माना जाता है।चूंकि 17 अगस्त की सुबह सूर्योदय के समय पंचमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए नाग पंचमी का व्रत और पूजन 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को ही किया जाएगा।

विशेष ध्यान दें: 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी के दिन ही तीसरा सावन सोमवार भी पड़ रहा है।सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह दुर्लभ संयोग शिव और नाग देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर प्रस्तुत करता है।(नोट: गुजरात में अमांत परंपरा के अनुसार नाग पंचमी 1 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी)


Nag Panchami 2026 Shubh Muhurat (पूजा का शुभ मुहूर्त)

नाग पंचमी पर प्रातःकाल में नाग देवता का पूजन करना अत्यंत श्रेष्ठ फलदायी माना गया है।

की ज्योतिषाचार्य गणना के अनुसार शुभ मुहूर्त समय:

  • नाग पंचमी पूजा मुहूर्त:17 अगस्त 2026, सुबह 05:51 AM से सुबह 08:29 AM तक।
  • कुल अवधि:लगभग 2 घंटे 38 मिनट।

नाग पंचमी का धार्मिक और पौराणिक महत्व (Significance of Nag Panchami)

सनातन संस्कृति में प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति आभार व्यक्त करने की समृद्ध परंपरा रही है। नाग पंचमी इसी परंपरा का प्रतीक है:

  • भगवान शिव और वासुकि नाग:भगवान शिव अपने गले में नागराज वासुकि को आभूषण स्वरूप धारण करते हैं।
  • भगवान विष्णु और शेषनाग:भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर विराजमान रहते हैं।
  • श्रीकृष्ण और कालिय दमन:पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि के आसपास भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना नदी को विषमुक्त करने के लिए कालिय नाग का दमन किया था।
  • पर्यावरणीय महत्व:कृषि प्रधान भारत में सर्प किसानों के मित्र माने जाते हैं।वे खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और कीटों का भक्षण कर फसलों की रक्षा करते हैं।

बारह प्रमुख नाग देवताओं के नाम

नाग पंचमी की पूजा के दौरान बारह प्रमुख नाग देवों का स्मरण और आवाहन करना शुभ होता है:

  1. अनंत
  2. वासुकि
  3. शेष
  4. पद्म
  5. कम्बल
  6. कर्कोटक
  7. अश्वतर
  8. धृतराष्ट्र
  9. शंखपाल
  10. कालिया
  11. तक्षक
  12. पिंगल

Nag Panchami Puja Vidhi: नाग पंचमी की सम्पूर्ण पूजा विधि

शास्त्रों के अनुसार नाग पंचमी के दिन निम्नलिखित विधि से पूजन करना चाहिए:

  1. स्नान एवं संकल्प:प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प लें।
  2. आकृति निर्माण:घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गोबर, हल्दी या रोली से नाग देव की आकृति बनाएं।
  3. शिवलिंग पर जलाभिषेक:सावन सोमवार होने के कारण सबसे पहले तांबे के पात्र से शिवलिंग पर जल व कच्चा दूध अर्पित करें।
  4. नाग देव पूजन:मिट्टी, पीतल या चांदी की नाग प्रतिमा पर अक्षत, चंदन, हल्दी, रोली, फूल और दूर्वा अर्पित करें।
  5. भोग अर्पण:नाग देवता को भुने हुए चने, लावा (खील), दूध, गुड़ और सात्विक मिठाई का भोग लगाएं।
  6. मंत्र जाप:पूजा के समय ॐ नमः शिवाय तथा ॐ नागदेवताय नमः मंत्रों का जप करें।
  7. कथा श्रवण व आरती:अंत में नाग पंचमी की प्रामाणिक व्रत कथा सुनें और धूप-दीप से आरती उतारकर प्रसाद वितरित करें।

जीवदया संदेश: जीवित सांपों को जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए, क्योंकि दूध सांपों की पाचन क्रिया के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।अतः केवल प्रतिमा या चित्र पर ही प्रतीकात्मक रूप से दूध अर्पित करना शास्त्रसम्मत है।


नाग पंचमी पर कालसर्प दोष निवारण के अचूक उपाय

ज्योतिष शास्त्र में नाग पंचमी को कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और सर्प दोष की शांति कराने के लिए अत्यंत सिद्ध दिन माना गया है।

  • चांदी के नाग-नागिन का दान:इस दिन चांदी के बने नाग-नागिन के जोड़े का पूजन करके उसे बहते जल में प्रवाहित करें अथवा मंदिर में दान करें।
  • महामृत्युंजय और रुद्राभिषेक: भगवान शिव का दूध व गंगाजल से रुद्राभिषेक कराएं और महामृत्युंजय मंत्र की कम से कम 108 बार एक माला का जाप करें।
  • राहु-केतु शांति: नाग गायत्री मंत्र (ॐ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्) का जाप करने से राहु-केतु की अशुभ महादशा का प्रभाव कम होता है।
  • पीपल वृक्ष पूजन: पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और नाग देव से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. नाग पंचमी 2026 में किस तारीख को है?

उत्तर: उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को मनाई जाएगी।

Q2. नाग पंचमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

उत्तर: 17 अगस्त 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 05:51 AM से 08:29 AM तक रहेगा।

Q3. क्या नाग पंचमी पर सुई-धागे या तवे का प्रयोग मना होता है?

उत्तर: कई स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं में नाग पंचमी के दिन लोहे के तवे पर रोटी बनाना, सिलाई-कढ़ाई करना अथवा भूमि की खुदाई करना वर्जित माना जाता है।

Q4. सावन सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ने का क्या लाभ है?

उत्तर: शिवजी नागों के स्वामी हैं।अतः सोमवार को नाग पंचमी पड़ने से महादेव और नाग देव दोनों का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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धर्म-कर्म

कल लगेगा साल का खास सूर्य ग्रहण, जानें कितने बजे से होगा शुरू, सूतक लगेगा या नहीं?

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Solar Eclipse 2026

Solar Eclipse 2026 : साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, बुधवार को लगने जा रहा है। ये खगोलीय घटना इसलिए खास है क्योंकि इस दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा।

कल लगेगा साल का खास सूर्य ग्रहण

कल लगने वाले सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ क्षेत्रों में सूर्य को पूरी तरह ढक देगा। जिससे दिन के समय कुछ देर के लिए अंधेरा जैसा नजारा दिखाई दे सकता है। NASA के मुताबिक, इस पूर्ण सूर्य ग्रहण की पट्टी ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरेगी।

हालांकि, भारत में रहने वाले लोगों को इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि भारत में उस समय रात होगी। ऐसे में देश के किसी भी हिस्से से सूर्य ग्रहण को सीधे देखा नहीं जा सकेगा।

कब लगेगा सूर्य ग्रहण?

12 अगस्त 2026 को होने वाला यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात के समय घटित होगा। ग्रहण की अलग-अलग अवस्थाओं का समय स्थान के अनुसार बदलता है। दुनिया के जिन हिस्सों में यह दिखाई देगा, वहां स्थानीय समय के मुताबिक ग्रहण की शुरुआत, अधिकतम और समाप्ति का समय अलग होगा।

वैज्ञानिक संस्थाओं के अनुसार, ग्रहण का सबसे महत्वपूर्ण चरण वह होगा जब चंद्रमा सूर्य के सामने आकर उसकी चमकदार सतह को पूरी तरह ढक देगा। इस दौरान केवल सूर्य का बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना दिखाई दे सकता है।

Solar Eclipse 2026

भारत में दिखाई देगा या नहीं?

12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत से इसे देखने का मौका इसलिए नहीं मिलेगा क्योंकि ग्रहण के दौरान यहां रात का समय होगा। NASA की ओर से जारी दृश्यता संबंधी जानकारी में भी भारत को इस ग्रहण के प्रत्यक्ष दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस और स्पेन के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।

क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल का पालन किया जाता है। आम तौर पर सूतक की मान्यता उस स्थान पर ग्रहण दिखाई देने की स्थिति से जुड़ी होती है।

चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसके सूतक काल को लेकर धार्मिक परंपराओं में सामान्यतः मान्यता नहीं मानी जाएगी। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और पंचांगों में इस संबंध में मत अलग हो सकते हैं।

Solar Eclipse 2026

क्यों खास है 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण बेहद दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में से एक है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह रोक देता है, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है।

इस दौरान कुछ स्थानों पर दिन के समय अचानक अंधेरा छाने लगता है और सूर्य के आसपास उसकी बाहरी परत यानी कोरोना दिखाई दे सकती है। NASA के अनुसार, पूर्णता के दौरान कोरोना का अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए सूर्य और उसके वातावरण को समझने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।

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आस्था

कब है Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 ? जानें शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का सटीक समय और पूजा विधि..

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Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026

Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Overview

साल 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026) को लेकर भक्तों के बीच तारीखों का बड़ा असमंजस है कि यह व्रत 3 जून को रखा जाएगा या 4 जून को। पंचांग की गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि 3 जून 2026 को रात 09:22 बजे शुरू होकर 4 जून 2026 को रात 11:31 बजे समाप्त होगी। चूंकि संकष्टी चतुर्थी में चंद्रोदय (Moonrise) के समय पूजा और अर्घ्य देने का विधान है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत बुधवार, 3 जून 2026 को ही रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 10:04 बजे रहेगा।


3 या 4 जून संकष्टी चतुर्थी?

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूजनीय’ और ‘विघ्नहर्ता’ माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की आराधना की जाती है। गणेश जी को प्रसन्न करने और जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) का व्रत सबसे फलदायी माना गया है।

साल 2026 में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026) बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है। यह कोई आम चतुर्थी नहीं है, बल्कि यह तीन साल में एक बार आने वाली अधिक मास (Adhik Maas) या मलमास की संकष्टी चतुर्थी है। आइए इस विशेष लेख में विस्तार से जानते हैं कि साल 2026 में विभुवन संकष्टी चतुर्थी की सही तारीख क्या है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, आपके शहर में चांद कब निकलेगा और इस दिन किस विधि से पूजा करने पर बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त होगा।


क्यों बेहद खास है ‘विभुवन संकष्टी चतुर्थी’?

हिंदू पंचांग में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को ही विभुवन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

  • तीन साल का इंतजार: चूंकि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह व्रत भी प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर ही पड़ता है।
  • बुधवार का दुर्लभ संयोग: साल 2026 में इस व्रत का महत्व इसलिए और अधिक बढ़ गया है क्योंकि 3 जून को बुधवार का दिन है। बुधवार का दिन पूर्ण रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। ऐसे में बुधवार के दिन संकष्टी चतुर्थी का आना एक अत्यंत दुर्लभ और महासंयोग माना जा रहा है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों को कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी।

तारीख को लेकर क्यों है कंफ्यूजन? 3 या 4 जून?

पंचांग भेद और तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण अक्सर व्रत और त्योहारों की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। साल 2026 की अधिक मास संकष्टी चतुर्थी को लेकर भी ऐसा ही भ्रम बना हुआ है। आइए ज्योतिषीय गणना के आधार पर इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं:

  • चतुर्थी तिथि का आरंभ: 3 जून 2026, बुधवार को रात 09 बजकर 22 मिनट पर।
  • चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 4 जून 2026, गुरुवार को रात 11 बजकर 31 मिनट पर।

शास्त्रों का नियम: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन (Moon Sighting) और चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य होता है। बिना चंद्रोदय की पूजा के यह व्रत अधूरा माना जाता है।

  • 3 जून की रात: चतुर्थी तिथि रात 09:22 बजे लग रही है और इस रात को चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद रहेगी।
  • 4 जून की रात: इस दिन भले ही पूरे दिन चतुर्थी तिथि रहेगी, लेकिन रात को 11:31 बजे समाप्त हो जाएगी।

चूंकि 3 जून को रात के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान है और इसी रात को भक्तों को व्रत का पारण चांद देखकर करना है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी का उपवास 3 जून 2026, बुधवार को ही रखा जाना शास्त्र सम्मत है।


विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: शुभ मुहूर्त और चौघड़िया (Shubh Muhurat)

3 जून 2026 को दिनभर में पूजा के कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें भगवान गणेश की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी:

सुबह का शुभ मुहूर्त (Morning Puja Muhurat)

  • लाभ चौघड़िया: सुबह 05:23 बजे से सुबह 07:07 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: सुबह 07:07 बजे से सुबह 08:51 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया: सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक

शाम और रात का शुभ मुहूर्त (Evening Puja Muhurat)

  • लाभ चौघड़िया: शाम 05:31 बजे से शाम 07:15 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया: रात 08:31 बजे से रात 09:47 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: रात 09:47 बजे से रात 11:03 बजे तक

चंद्रोदय का सटीक समय (Moonrise Timing)

संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण भाग रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना होता है।

3 जून 2026 को चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 04 मिनट (10:04 PM) रहेगा।

(नोट: भारत के अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है।)

चंद्रमा को अर्घ्य देने से न केवल भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं, बल्कि जिन जातकों की कुंडली में चंद्र दोष होता है या मानसिक तनाव रहता है, उन्हें भी चंद्र देव की कृपा से शांति और मजबूती मिलती है।


विभुवन संकष्टी चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

यदि आप इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो नीचे दी गई शास्त्रीय विधि के अनुसार पूजा करें ताकि आपको अपनी पूजा का पूर्ण फल मिल सके:

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें: व्रत के दिन सुबह जल्दी (सूर्योदय से पूर्व) उठें। घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करें। (इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है)।
  2. व्रत का संकल्प लें: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान गणेश के सामने बैठें और अपनी मनोकामना कहते हुए पूरे दिन निराहार या फलाहारी व्रत रखने का संकल्प लें।
  3. पूजा स्थल की तैयारी: एक लकड़ी की चौकी पर साफ पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  4. गंगाजल का छिड़काव: पूरे पूजा स्थल और स्वयं पर गंगाजल छिड़क कर पवित्रीकरण करें।
  5. पंचामृत स्नान: भगवान गणेश की धातु की मूर्ति है तो उन्हें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद साफ जल से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं।
  6. दूर्वा और सिंदूर: गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें अर्पित करें। याद रखें, बप्पा को दूर्वा अत्यंत प्रिय है और इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
  7. भोग लगाएं: गणेश जी को मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतु फल और पान का पत्ता अर्पित करें।
  8. दीपक और मंत्र जाप: बप्पा के सामने गाय के घी का दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गणेश जी के प्रभावी मंत्रों का जाप करें (जैसे: ॐ गं गणपतये नमः या वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥)।
  9. कथा और आरती: संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर या घी के दीपक से गणेश जी की आरती करें।
  10. शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य: शाम के समय दोबारा हाथ-पैर धोकर गणेश जी की आरती करें। रात को 10:04 बजे जब चंद्रोदय हो, तब एक तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, चंदन, अक्षत और फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद अपना व्रत खोलें (पारण करें)।

पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें? (Do’s and Don’ts)

  • क्या करें:
    • पूजा में हमेशा अक्षत (चावल) का उपयोग करें, लेकिन ध्यान रहे कि चावल के दाने टूटे हुए (खंडित) या सूखे नहीं होने चाहिए। चावल को थोड़ा गीला करके ही चढ़ाएं।
    • दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब या जरूरतमंदों को तिल, अन्न या वस्त्र का दान करें।
  • क्या न करें:
    • गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों (Tulsi Leaves) का उपयोग भूलकर भी न करें। पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी ने तुलसी जी को अपनी पूजा से वर्जित किया है।
    • व्रत के दिन घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन न बनाएं।
    • किसी के प्रति मन में क्रोध, ईर्ष्या या द्वेष की भावना न लाएं और न ही किसी को अपशब्द कहें।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ (Significance & Benefits)

शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति तीन साल में एक बार आने वाली इस विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत सच्चे मन से रखता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • संकटों का नाश: ‘संकष्टी’ का अर्थ ही होता है संकटों को हरने वाली। जीवन में आ रही बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
  • संतान सुख और दीर्घायु: महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए यह व्रत विशेष रूप से रखती हैं।
  • आर्थिक समृद्धि: बुधवार के संयोग के कारण इस दिन पूजा करने से घर में रुकी हुई धन संपदा वापस आती है और व्यापार में उन्नति होती है।
  • मानसिक शांति: चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन एकाग्रचित्त बनता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

साल 2026 की विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi 2026) आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक अनुपम अवसर है। 3 जून 2026, बुधवार को भगवान गणेश की विधि-विधान से की गई पूजा आपके जीवन के सभी विघ्न-बाधाओं को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी। आप सभी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं! बप्पा आपके जीवन को खुशियों से भर दें।

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उत्तराखंड में नहीं थम रहा बारिश का दौर, आज इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

TRT vs MO Dream11 Prediction Final 2026
Cricket1 day ago

TRT vs MO Dream11 Prediction Final 2026: Playing 11, Pitch Report & Fantasy Tips in Hindi

TRT-W vs SUL-W Dream11 Prediction Final 2026
Cricket1 day ago

TRT-W vs SUL-W Dream11 Prediction Final 2026: Pitch Report, Playing 11, Fantasy Cricket Tips

Nag Panchami 2026
National1 day ago

Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त कब है नाग पंचमी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त

Chamoli Tunnel Landslide
Uttarakhand2 days ago

Chamoli Tunnel Landslide : टीएचडीसी टनल में रेस्क्यू अभियान जारी, एक और श्रमिक बाहर निकाला गया; दो की तलाश जारी

पौड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति का उल्लास
Uttarakhand2 days ago

पौड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति का उल्लास, तिरंगे के रंग में रंगा पूरा जनपद

CM
Uttarakhand2 days ago

मुख्यमंत्री आवास में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हुआ ध्वजारोहण, CM धामी ने दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं

CS
Uttarakhand2 days ago

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन का स्वतंत्रता दिवस संबोधन: पलायन, पर्यटन और 2047 के संकल्प पर दिया ज़ोर…

Uttarakhand Weather
uttarakhand weather18 hours ago

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WDL vs SDS Dream11 Prediction Dpl Match 31
Cricket12 hours ago

WDL vs SDS Dream11 Prediction DPL Match 31: Pitch Report, Playing XI & Fantasy Cricket Tips

dehradun accident
big news16 hours ago

त्यूणी में बड़ा हादसा, खाई में गिरा पिकअप, एक की दर्दनाक मौत

NDT vs EDR Dream11 Prediction Match 30 DPL 2026
Cricket12 hours ago

NDT vs EDR Dream11 Prediction Match 30 DPL 2026: Playing XI, Pitch Report & Fantasy Tips

dehradun news
Dehradun13 hours ago

नियुक्ति की मांग पर सड़कों पर उतरे बीपीएड बेरोजगार, पुलिस ने हिरासत में लिया

dehradun news
Dehradun17 hours ago

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि आज, सीएम धामी ने श्रद्धा-सुमन अर्पित कर किया याद

chamoli news
Chamoli15 hours ago

बद्रीनाथ धाम में नर-नारायण महोत्सव का आगाज, जयकारों के बीच निकली डोली

chamoli news
Chamoli10 hours ago

THDC टनल में रेस्क्यू अभियान जारी, लापता दो लोगों की हर संभावित स्थान पर हो रही खोजबीन

Breakingnews1 year ago

रामनगर: क़ब्रिस्तान की ज़मीन को लेकर विवाद, दफनाने से पहले उठा बवाल |

Breakingnews1 year ago

हरिद्वार: गंगा घाट किनारे पेड़ पर लिपटा मिला अजगर, वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

Breakingnews1 year ago

हरिद्वार में बीजेपी नेता की दबंगई कैमरे में कैद, अफसर पर बरसे अपशब्द, चुप्पी पर उठे सवाल

Breakingnews1 year ago

“सासाराम की मुस्लिम महिलाओं ने रचाया मेहंदी से ‘ऑपरेशन सिन्दूर’, पीएम मोदी के स्वागत में गूंजा एकता का संदेश|

Breakingnews1 year ago

भदोही में खाकी शर्मसार: रिश्वत लेते पकड़े गए पुलिसकर्मी, वीडियो वायरल |

Breakingnews1 year ago

“चकराता के टाइगर फॉल में प्रकृति का कहर — भारी पेड़ और पत्थरों के गिरने से 2 की मौके पर मौत, कई घायल |

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मेरठ में महिला के साथ सड़क पर अश्लील हरकत करने वाला युवक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की गिरफ्त में |

Breakingnews1 year ago

वायरल-होने-का-शौक-पड़ा-भारी-—-देहरादून-पुलिस-ने-स्टंटबाज़-युवती-पर-की-चालानी-कार्रवाई |

Breakingnews1 year ago

ब्रेकिंग न्यूज़ | चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक के हापला बाजार में उद्यान विभाग के कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

Nainital1 year ago

नैनीताल: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किए मां नैना देवी के दर्शन, प्रदेश की सुख-शांति की कामना की….

Crime2 years ago

खेत की मेढ़ काटने को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष का वीडियो सोशल मिडिया पर वायरल….

Dehradun2 years ago

उत्तराखंड: पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और डीजीपी अभिनव कुमार आमने-सामने, त्रिवेंद्र ने आखिर क्यों DGP को दी हद में रहने की सलाह ?

Dehradun2 years ago

VIDEO: सुबह मॉर्निंग वॉक पर हाइवे पर निकला हाथी, पूर्व सैनिक घयाल, अस्पताल में भर्ती

Madhya Pradesh2 years ago

शिक्षक दिवस के अवसर पर इस शराबी शिक्षक का वीडियो सोशल मिडिया पर जमकर हो रहा वायरल !

Crime2 years ago

VIDEO: महिला की शिकायत पर हुआ नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज, दुष्कर्म का आरोप।

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Breakingnews1 year ago

रामनगर: क़ब्रिस्तान की ज़मीन को लेकर विवाद, दफनाने से पहले उठा बवाल |

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देहरादून: मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का किया भव्य स्वागत…

Breakingnews1 year ago

ब्रेकिंग न्यूज़ देहरादून: आईपीएस रचिता जुयाल ने निजी कारणों से दिया इस्तीफा…

Crime1 year ago

हल्द्वानी: बनभूलपुरा क्षेत्र में युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या, एक हिरासत में…

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देहरादून में स्मार्ट ऑटोमेटेड पार्किंग का कार्य अंतिम चरण में, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत…

Chamoli1 year ago

श्रद्धालुओं को ठगने बद्रीनाथ पहुंचा मोबाइल माफिया गैंग , पुलिस ने 6 को रंगे हाथों पकड़ा…

Crime1 year ago

कारोबारी को सेल्समैन ने लगाया 9 लाख से ज्यादा का चूना, फर्जी पेमेंट बुक से की ठगी, मुकदमा दर्ज…

Rudraprayag1 year ago

रुद्रप्रयाग: जखोली में फिर गुलदार का कहर, महिला की मौत से दहशत, वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश….

Dehradun1 year ago

देहरादून समेत उत्तराखंड के कई जिलों में आज भी बारिश, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट किया जारी….

Dehradun1 year ago

अंकिता भंडारी हत्याकांड में इंसाफ की जीत, धामी सरकार की सख्ती से टूटा रसूखदारों का गुरूर…

Dehradun1 year ago

ऋषिकेश रेंज के जंगल में पत्ते लेने गए युवकों पर बाघ का हमला, एक की मौत, दूसरा घायल….

Dehradun1 year ago

राजभवन नैनीताल में मनाया गया गोवा स्थापना दिवस, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत का दिया संदेश….

Dehradun1 year ago

उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों के लिए बनेगा विशेष ट्रेनिंग सेंटर: मुख्यमंत्री धामी

Rudraprayag1 year ago

केदारनाथ धाम यात्रा: सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग पर नहीं होगा घोड़े-खच्चरों का संचालन….

Nainital1 year ago

20वें गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट का राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किया उद्घाटन, पहले दिन 70 गोल्फरों ने लिया भाग…

Crime1 year ago

अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला…

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