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उत्तराखंड की 332.748 हेक्टेयर भूमि पर यूपी सिंचाई विभाग का कब्ज़ा, संयुक्त बैठक होने के बावजूद स्थिति जस की तस।

ऊधम सिंह नगर – राज्य गठन के 23 साल बाद भी यूएस नगर जिले की 332.748 हेक्टेयर भूमि पर यूपी सिंचाई विभाग का अधिकार है। इसके लिए वर्ष 2021 में सीएम पुष्कर सिंह धामी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की संयुक्त बैठक होने के बावजूद स्थिति जस की तस है। परिसंपत्तियों का बंटवारा न होने के कारण उत्तराखंड सिंचाई विभाग वहां कर्मचारियों के लिए कॉलोनी तक नहीं बना पा रहा है।
परिसंपत्तियों के बंटवारे के लिए उत्तराखंड और यूपी के उच्चाधिकारियों की बैठक कई बार हो चुकी है। उत्तराखंड के जलाशयों और नदियों के पास की भूमि पर अब भी यूपी सिंचाई विभाग का अधिकार है। इस कारण 332.748 हेक्टेयर भूमि पर उत्तराखंड सरकार कोई नया निर्माण कार्य नहीं करा रही है।
वर्ष 2022 में चर्चा थी कि यूपी के अधिकार वाली भूमि उत्तराखंड को जल्द हस्तांतरित होगी। इसके लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने खाली भूमि पर कर्मचारियों के लिए कॉलोनी और आवास बनाने की योजना बनाई थी लेकिन यूपी से भूमि न मिलने के कारण नया निर्माण नहीं हो पा रहा है।
राज्य गठन के बाद से ही यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। यूपी ने उत्तराखंड सिंचाई विभाग को भूमि हस्तांतरित नहीं की है। शासन से भी भूमि हस्तांतरण संबंधी कोई आदेश नहीं मिले हैं। इस भूमि पर कर्मचारियों के लिए नई कॉलोनी बनाने की योजना बनाई गई है।
इन क्षेत्रों की जमीन पर यूपी का हक
खटीमा के पास स्थित नानकसागर जलाशय समेत जंगल जोगीठेर, गांगी, नानकमत्ता के ऐंचिता, बरकीडांडी, कैथुलिया, टुकड़ी, देवीपुरा, गिधौर गांव की कुल 330.265 हेक्टेयर भूमि यूपी से उत्तराखंड को हस्तांतरित की जानी है। बैगुल जलाशय भी सिंचाई खंड बरेली के अधीन है। इससे कुंवरपुर गांव की 0.103 हेक्टेयर भूमि, शारदा सागर खंड पीलीभीत की लालकोठी की 0.253 हेक्टेयर भूमि, रुहेलखंड नगर स्थित रंपुरा, किच्छा, नगला गांव की 2.127 हेक्टेयर भूमि भी हस्तांतरित होनी है।
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धामी राज में नौकरी की बरसात !, 4.5 साल में 28 हजार युवाओं को मिली सरकारी नौकरी की सौगात

Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साढ़े चार साल के कार्यकाल में 28 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी मिली है। धामी सरकार ने प्रति माह औसत 518 युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। जिस से युवाओं के चेहरे खिल उठे हैं।
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साढ़े 4 साल के कार्यकाल में 28 हजार को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साढ़े चार साल के कार्यकाल में अब तक साढ़े 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। इस तरह प्रति माह औसत 518 युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई। सख्त नकल विरोधी कानून के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता कायम होने से अब युवाओं का चयन एक से अधिक विभागों में हो रहा है। वहीं सरकार ने युवाओं को स्किल डेवलमेंपमेंट के जरिए विदेश में तक रोजगार देने की व्यवस्था की।
प्रति माह औसत 518 युवाओं को मिला रोजगार
धामी सरकार के कार्यकाल में युवा वर्ग सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है। चार जुलाई 2021 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद, धामी सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्किल प्रदान करने पर विशेष तौर पर फोकस किया। पहले और दूसरे कार्यकाल को मिलाकर अब मुख्यमंत्री का कार्यकाल 54 महीने का हो चुका है।

लोक सेवा आयोग, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, चिकित्सा सेवा चयन आयोग के जरिए साढ़े 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में स्थायी रोजगार प्रदान किया गया। यानी प्रति माह 518 युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई। अगले एक साल में भी विभिन्न आयोगों के जरिए, रिकॉर्ड संख्या में भर्तियां सम्पन्न की जाएंगी। इस तरह ये आंकड़ा बढ़ना तय है।
प्रदेश में पारदर्शी तरीके से हो रही भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी
सरकारी भर्तियों में सक्रिय नकल माफिया के कुचक्र को तोड़ने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने फरवरी 2023 से उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय), कानून लागू कर प्रदेश और देश को एक मॉडल नकल विरोधी कानून दिया।
इसके बाद से उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से समय पर बिना बाधा के सम्पन्न हो रही हैं। पहले भर्तियों में औसतन दो से तीन साल का समय लग रहा था। अब औसतन एक साल में ही भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जा रही है। इसके साथ ही प्रतिभाशाली युवा एक से अधिक परीक्षा में चयनित हो रहे हैं।

युवाओं को विदेश में भी मिले रोजगार के मौके
मौजूदा सरकार ने साल 9 नवंबर 2022 से मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना शुरु की है, इसके लिए युवाओं को आतिथ्य, नर्सिंग, ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करते हुए जर्मनी और जापान में रोजगार प्रदान किया जा रहा है। योजना के तहत अब तक 154 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जिसमें से 37 को जापान में रोजगार प्रदान किया जा चुका है।
युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध सरकार – सीएम धामी
सीएम धामी का कहना है कि हमारी सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए जहां सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर रिकॉर्ड संख्या में सरकारी नौकरियां प्रदान की गई।
वहीं भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया। साथ ही सरकार कौशल विकास ओर स्वरोजगार योजनाओं के जरिए भी युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है।
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उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह धवस्त, गणेश गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य की कानून व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
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उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह धवस्त
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश की राजधानी देहरादून के मुख्य बाजार में युवती की गला काट कर हत्या की गई उससे राज्य की ध्वस्त पड़ी कानून व्यवस्था की पोल खुल कर रह गई है। इस से साबित हो गया है कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और बेखौफ अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
गणेश गोदियाल ने सरकार पर साधा निशाना
गणेश गोदियाल ने कहा कि जिस प्रकार राजधानी देहरादून के मच्छी बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में दिन-दहाड़े युवती की गला काट कर हत्या की घटना को अंजाम दिया गया। उसने भाजपा के जंगलराज की पोल खोल कर रख दी है। जिस स्थान पर हत्या की घटना को अंजाम दिया गया। उस से कुछ ही दूरी पर राजधानी की मुख्य कोतवाली स्थित है। मुख्य बाजार में चौबीसों घंटे भीडभाड़ रहती है। लेकिन पुलिस आम जनता की सुरक्षा के प्रति असंवेदनशील बनी हुई है।

पुलिस झोंक रही है जनता की आंखों में धूल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चाहे महिला सुरक्षा का मामला हो, चाहे आम आदमी की जानमाल की सुरक्षा का राज्य पुलिस हर क्षेत्र में विफल रही है। अपराधी अपराध कर साफ बच रहे हैं और पुलिस द्वारा जनता की आंख में धूल झोंकने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पूर्व में राज्य में हुए अंकिता भण्डारी हत्याकांड की गुत्थी पूरी तरह सुलझाने और वीआईपी का खुलासा करने में भी पुलिस अभी तक नाकाम रही है। इससे ये भी साबित हो चुका है कि पुलिस द्वारा कहीं न कहीं अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
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अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंच विधायक अरविंद पांडे ने कर दी ऐसी मांग, उत्तराखंड बीजेपी में आया भूचाल

Uttarakhand Politics : गदरपुर विधायक अचानक पहुंचे पुलिस मुख्यालय, अब कर दी ये बड़ी मांग
Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में भले ही बर्फबारी हो रही हो और कड़ाके की ठंड पड़ रही हो। लेकिन यहां का राजनीतिक माहौल आजकल गरमाया हुआ है। भाजपा सरकार इन दिनों अपने ही विधायकों के बयानों से असहज नजर आ रही है।
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अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंचे BJP विधायक अरविंद पांडे
राजधानी देहरादून में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब सत्ताधारी भाजपा के कद्दावर नेता और गदरपुर विधायक Arvind Pandey अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंच गए। अपने तेवरों के लिए मशहूर विधायक पांडे ने सीधे डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात की और खुद पर लगे आरोपों को लेकर एक बड़ी चुनौती दे डाली।
विधायक अरविंद पांडे ने दे डाली खुली चुनौती
पुलिस मुख्यालय पहुंचकर अरविंद पांडे ने बड़ी चुनौती दे डाली है। बता दें कि गदरपुर विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडे के खिलाफ हाल ही में एक मुकदमा दर्ज हुआ है। जिसमें उन पर और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर बीते दिनों भी उत्तराखंड की राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हो रही थी। इस पूरे मामले पर विधायक खुद सामने आए हैं और उनका कहना है कि ये उन्हें ‘भू-माफिया’ साबित करने की एक सोची-समझी साजिश है।

नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग
आज पुलिस मुख्यालय पहुंचे विधायक ने साफ लहजे में कहा कि वो जांच से भागने वाले नहीं हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी हो। उन्होंने डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया जाए। ताकि सच्चाई सामने आ सके और पूरी दुनिया को पता चल सके।
विधायक की मांग से उत्तराखंड बीजेपी में आया भूचाल
जहां एक ओर गदरपुर विधायक Arvind Pandey ने इस पूरे मामले में चुप्पी तोड़ी है और मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखी है। तो वहीं उनके अचानक पुलिस मुख्यालय पहुंचने और नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग और उनके खिलाफ साजिश के आरोप वाली बात ने उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा भूचाल ला दिया है। अपनी ही पार्टी के विधायक के इस तरीके के बयान से जहां एक ओर सरकार असहज नजर आ रही तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी में भी अंर्तकलह नजर आ रही है।
अपनी ही पार्टी के नेताओं ने अरविंद पांडे के खिलाफ खोला मोर्चा
बीते दिनों ही Arvind Pandey के तीखे तेवरों के सामने आने के बाद उनके पार्टी से नाराज होने की बात सामने आ रही है। ऐसा तक कहा जा रहा था कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने के लिए पहुंच सकते हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जिसके बाद गदरपुर के नेताओं ने ही अरविंद पांडे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
यहां तक कि गदरपुर के बीजेपी नेताओं ने विधायक अरविंद पांडे पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। जिसके बाद से ही बीजेपी में अंर्तकलह की खबरें सामने आ रही हैं। इसे लेकर विपक्ष भी बीजेपी पर हमलावर है। अब देखना ये होगा कि बीजेपी इस से किस तरीके से निपटती है।
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