Uttarakhand
उत्तरकाशी: देर रात एक महिला ने नदी में लगाई छलांग, एसडीआरएफ ने शव किया बरामद।

उत्तरकाशी – उत्तरकाशी के मोरी में खरसाड़ी के पास देर रात एक महिला ने नदी में छलांग लगा दी। सूचना पर पहुंची एसडीआरएफ की टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाकर रात को ही महिला का शव बरादम कर लिया।

घटना रात करीब 12 बजे की है। पुलिस को सूचना मिली की खरसाड़ी के पास एक महिला नेनदी में गिर गई है। एसडीआरएफ की टीम उप निरीक्षक सुरेश प्रसाद के नेतृत्व में आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल पहुंची।
एसडीआरएफ की टीम ने घटनास्थल पहुंचकर घनघोर अंधेरे में ही सर्च अभियान चलाया। टीम ने महिला का शव बरामद किया। महिला की पहचान कृष्णा जैन(42) पत्नी कश्मीर सिंह जैन निवासी खरसाड़ी उत्तरकाशी के रूप में हुई है। टीम ने बताया कि महिला ने नदी में छलांग किन कारणों से लगाई यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
Udham Singh Nagar
रुद्रपुर में मौलाना को भड़काऊ बयान देना पड़ा भारी, मुदकमा दर्ज, विधायक ने भी दिया जवाब

Rudrapur News : ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में त्रिशूल चौक पर ईद उल मिलादुन्नबी के जलूस के दौरान एक ऐसा भड़काऊ बयान वायरल हुआ जो कि मौलवी को भारी पड़ गया है। इस विवादित भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर अब तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस एशन मे आई और मुकदमा दर्ज कर दिया और जाँच शुरू कर दी है।
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रुद्रपुर में मौलाना को भड़काऊ बयान देना पड़ा भारी
ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में ईद-उल-मिलादुन्नबी के दौरान रुद्रपुर के त्रिशूल चौक पर हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच एक विवादित बयान दे डाला, जिसके बाद सियासत में उबाल आ गया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस एक्शन में आई और विवादित बयान देने वाले मौलवी पर मुकदमा दर्ज कर दिया।
वीडियो में वक्ता द्वारा कहा गया कि अगर मदरसे बंद कर दिए तो फिर देखना मुसलमान क्या हाल करेंगे। ये किसी की सुनने वाले नहीं हैं। ये तो अपने मौलाना की इज्जत करते हैं, तो सुन लेते हैं, वरना आज भी वही जज्बा है, जब शहादत के समय था, जब जंग हुई थी और नबी जब परेशान हुए थे। इस तरह के बयान मुस्लिम वक्ता द्वारा दिए गए, जिसके बाद माहौल गरमा गया है और भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने इसका जवाब दिया है।

विधायक शिव अरोड़ा ने भी दिया जवाब
भड़काऊ भाषण को लेकर कहा कि बारावफात पर रुद्रपुर के त्रिशूल चौक पर कुछ कट्टरपंथी ये धमकाते हैं कि मुसलमान क्या हाल करेंगे, अगर मदरसे बंद कर दिए गए तो। ये जितने भी अवैध मदरसे हैं, ये आतंकवादी और दंगाई पैदा होते हैं, वह बंद ही नहीं, नस्तेनाबूद होंगे। ये मुख्यमंत्री धामी की सरकार है। यहां दंगाइयों और आतंकवादियों को पैदा करने वाले मदरसों की कोई जगह नहीं है।
और कांग्रेस की मानसिकता, जो तुम्हें मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने के सपने दिखाती थी, ऐसे सपने देखना बंद करो। और ये जो धमकाने की हिमाकत कर रहे हो, सुधर जाओ, नहीं तो ऐसा हाल होगा कि सात पुश्तें याद रखेंगी।
सरकारी जमीनें ली गईं हैं वापस
विधायक ने कहा कि रुद्रपुर ईदगाह की जमीन की बात है, वो सरकारी जमीन थी, वापस ली गई और दुनिया की कोई ताकत उस जमीन को तुम्हें वापस नहीं दिला सकती। और यहां के नए-नए नेता, जो कांग्रेसी बने हैं, वो इसी जलसे में कूद-कूदकर मुबारकबाद देते फिर रहे थे और जब हिंदुओं को धमकाया गया कि मुसलमान क्या हाल करेंगे, तब उनकी जुबान सिल जाती है।
Dehradun
रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का लाभ ले रहीं महिलाएं, कल भी रोडवेज में होगा मुफ्त सफर

Dehradun News : उत्तराखंड में आज रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना कर रही हैं। वहीं भाई भी बहनों की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प ले रहे हैं।
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रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का लाभ ले रहीं महिलाएं
रक्षाबंधन के इस खास मौके पर उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी है। राज्य की महिलाएं आज यानी 28 अगस्त के साथ-साथ 29 अगस्त को भी उत्तराखंड रोडवेज की बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगी।
दो दिन महिलाओं से नहीं लिया जाएगा बस का किराया
सरकार के आदेश के मुताबिक, रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तराखंड के भीतर संचालित उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को 100 प्रतिशत किराया छूट दी जा रही है। यानी प्रदेश की सीमा के भीतर रोडवेज बस से सफर करने वाली महिलाओं से टिकट का किराया नहीं लिया जाएगा।

महिला सम्मान और सशक्तिकरण से जोड़ा फैसला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार का प्रयास है कि रक्षाबंधन जैसे पर्व पर महिलाओं को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। मुफ्त बस सेवा का उद्देश्य उनके आवागमन को आसान बनाना और आर्थिक बोझ कम करना है।
सरकार करेगी रोडवेज के खर्च की भरपाई
महिलाओं को मुफ्त यात्रा देने से उत्तराखंड परिवहन निगम पर पड़ने वाले आर्थिक भार की भरपाई भी राज्य सरकार करेगी। शासन की ओर से जारी आदेश में इस व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है।
अपर सचिव उत्तराखंड शासन रीना जोशी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, निशुल्क यात्रा के कारण परिवहन निगम को होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
Dehradun
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी और मजबूत, 13 संवेदनशील झीलों पर सरकार की नजर

Uttarakhand News : उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज करने का फैसला लिया है। सरकार अब संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की नियमित निगरानी के साथ-साथ संभावित आपदा से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर चेतावनी तंत्र विकसित करेगी।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी और मजबूत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की वैज्ञानिक तरीके से लगातार निगरानी की जाए। इसके तहत झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भूगोल और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों का समय-समय पर आकलन किया जाएगा।
संवेदनशील इलाकों में लगेंगे आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम
सरकार की योजना ऐसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की है, जहां ग्लेशियर झीलों के कारण अचानक बाढ़ या अन्य आपदा का खतरा अधिक हो सकता है। इसके लिए सेंसर, जलस्तर मापने वाले उपकरण और बेहतर संचार प्रणाली जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ चेतावनी प्रणाली लगाने से काम पूरा नहीं होगा। संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षित निकासी मार्ग, प्रभावित क्षेत्र का पूर्व चिन्हांकन, स्थानीय चेतावनी व्यवस्था और राहत-बचाव की तैयारियों को भी मजबूत किया जाए।

नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में तैयारियों की समीक्षा
नेपाल में हाल में सामने आई आपदा के बाद उत्तराखंड में भी संभावित जोखिमों को लेकर प्रशासन ने तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रुहेला और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखाई देने पर उसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है।
उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें से चार झीलों का सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
अब बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में झील की मौजूदा स्थिति, पानी के स्तर में बदलाव, संभावित खतरे और झील के नीचे आने वाले क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
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