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बर्फबारी के बीच गंगोत्री पहुंचे शिवभक्त, शिवरात्रि के लिए भर रहे पावन गंगाजल

Uttarkashi News : उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है। जिस कारण पहाड़ों पर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस ठंड के बावजूद भी शिवभक्त गंगोत्री गंगाजल लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
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बर्फबारी के बीच गंगोत्री पहुंचे शिवभक्त
आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पर्व को लेकर शिवभक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बावजूद गंगोत्री धाम पहुँचकर पावन गंगाजल भर रहे हैं।
शिवभक्तों की आस्था के आगे ठंड भी पड़ी फीकी
गंगोत्री क्षेत्र में मौसम बेहद ठंडा है और चारों ओर बर्फ जमी हुई है, लेकिन शिवभक्तों की आस्था के आगे ठंड और कठिनाइयाँ फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। श्रद्धालु बर्फबारी के बीच गंगोत्री धाम से शुद्ध जल लेकर अपने-अपने स्थानों पर भगवान शिव को अर्पित करने की तैयारी में जुटे हैं।

बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं शिवभक्त
शिवभक्तों का कहना है कि गंगोत्री धाम से लाया गया गंगाजल महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु गंगोत्री पहुंचे रहे हैं। महाशिवरात्रि के नजदीक आते ही गंगोत्री धाम में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है।
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यमुनोत्री जाने वालों के लिए बड़ी खबर, चारधाम यात्रा से पहले खुलेगी सिलक्यारा सुरंग

Uttarkashi News : आगामी चारधाम यात्रा में यमुनोत्री धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिल सकती है। उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग को अगले यात्रा सीजन तक यातायात के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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यमुनोत्री जाने वालों के लिए बड़ी खबर
निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार, सुरंग का सिविल निर्माण कार्य मार्च तक पूरा करने की योजना है। इसके बाद बिजली, लाइटिंग और अन्य इलेक्ट्रिकल कार्य किए जाएंगे। सभी काम तय समय पर पूरे होने पर आगामी यात्रा सीजन में सुरंग से वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकती है।
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के चालू होने से यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए मौजूदा मार्ग की तुलना में लगभग 26 किलोमीटर की दूरी कम होने की उम्मीद है। इससे श्रद्धालुओं के यात्रा समय और वाहनों के ईंधन की बचत हो सकती है। यह परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम सड़क परियोजना का हिस्सा है।
2018 में शुरू हुआ था सुरंग निर्माण का काम
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 858 करोड़ रुपये रखी गई थी और इसे वर्ष 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि, तकनीकी समस्याओं और निर्माण के दौरान आई चुनौतियों के कारण काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो सका।

चारधाम यात्रा से पहले खुलेगी सिलक्यारा सुरंग
सुरंग निर्माण के दौरान 12 नवंबर 2023 को बड़ा हादसा हुआ था। भूस्खलन के कारण सुरंग के भीतर 41 श्रमिक फंस गए थे। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए करीब 17 दिनों तक बचाव अभियान चलाया गया। विभिन्न बचाव एजेंसियों और विशेषज्ञों के प्रयासों से सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। इस हादसे के बाद निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। जनवरी 2024 में राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को दोबारा निर्माण शुरू करने की अनुमति मिली। इसके बाद सुरक्षा संबंधी सावधानियों के साथ काम आगे बढ़ाया गया। अप्रैल 2024 में सुरंग को आर-पार करने में सफलता मिली।
जल्द ही पूरा हो जाएगा परियोजना का बाकी काम
निर्माण के दौरान सुरंग के लगभग एक किलोमीटर हिस्से में विकृति आने के कारण री-प्रोफाइलिंग का काम भी करना पड़ा। इस प्रक्रिया में प्रभावित हिस्से को निर्धारित आकार में लाया गया। निर्माण कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, यह काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा जुलाई में कंक्रीट का ब्लॉक गिरने से एक श्रमिक की मौत भी हुई थी।
अब परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। यदि सिविल निर्माण और इसके बाद होने वाले इलेक्ट्रिकल कार्य तय समय पर पूरे हो जाते हैं, तो आगामी चारधाम यात्रा में इस सुरंग से आवाजाही शुरू होने की संभावना है। हालांकि, यात्रियों के लिए मार्ग खोलने की वास्तविक तारीख संबंधित कार्यों की पूर्णता और आवश्यक मंजूरी पर निर्भर करेगी।
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उत्तरकाशी में जंगल में बैल चराने गए व्यक्ति की खाई में गिरने से मौत, जंगली जानवर के हमले की आशंका

Uttarkashi News : उत्तरकाशी से दुखद खबर सामने आ रही है। नौगांव क्षेत्र में बैल चराने के लिए जंगल गए शख्स की खाई में गिरने से मौत हो गई।
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उत्तरकाशी में जंगल में बैल चराने गए व्यक्ति की मौत
उत्तरकाशी के नौगांव क्षेत्र के तुनालका गांव निवासी 54 वर्षीय जनक सिंह सजवाण की जंगल में गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। घटना गांव के पास नाला तोक के जंगल की बताई जा रही है। इस मामले में जंगली जानवर के हमले की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
जंगली जानवर के हमले की जताई जा रही आशंका
मिली जानकारी के मुताबिक जनक सिंह अपने बैलों को चराने के लिए जंगल गए थे। जिस जगह ये घटना हुई, वहां से ग्रामीणों का आम रास्ता गुजरता है, जो करीब छह फीट चौड़ा है। घटना के बाद उनके बैलों का पता लगभग छह घंटे बाद चला। बताया जा रहा है कि बैल घटनास्थल से काफी दूर चले गए थे। इसी आधार पर ग्रामीणों ने आशंका जताई कि किसी जंगली जानवर के हमले के कारण वे वहां से भागे होंगे।

यमुनोत्री हाईवे के पास मृत मिले जनक सिंह
बताया गया कि जनक सिंह यमुनोत्री हाईवे के पास मृत मिले। आशंका है कि वह करीब 400 मीटर तक नीचे लुढ़कते हुए गिरे थे। ग्राम प्रधान महावीर सजवाण ने भी घटना की परिस्थितियों को देखते हुए जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई है। उन्होंने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।
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शीतकाल के लिए इस दिन बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, शुभ मुहूर्त हुआ तय

Uttarkashi News : यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए कब बंद होंगे इसकी तारीख और शुभ मुहूर्त तय हो गया है। विजयदशमी के अवसर पर मंदिर समिति और पुरोहित समाज की बैठक में पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाट बंद करने का समय निर्धारित किया गया।
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शीतकाल के लिए इस दिन बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट
प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद करने का शुभ समय सुबह 10 बजकर 28 मिनट निर्धारित किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनुराधा नक्षत्र और सौम्य धनु लग्न में विधि-विधान के साथ यह प्रक्रिया संपन्न होगी।
विजयदशमी पर आयोजित बैठक में लिया गया फैसला
विजयदशमी के अवसर पर यमुनोत्री धाम में मंदिर समिति और पुरोहित समाज की बैठक आयोजित की गई। इसमें पंचांग और परंपराओं के आधार पर कपाट बंद करने का मुहूर्त तय किया गया। इसी के साथ इस वर्ष धाम के कपाट बंद होने की तिथि भी घोषित हो गई।

हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं यमुनोत्री धाम
यमुनोत्री धाम उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सर्दियों के आगमन के साथ कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की पूजा-अर्चना उनके शीतकालीन प्रवास स्थल पर की जाती है।








































