Uttarakhand
ब्रेकिंग: जोशीमठ भू-धंसाव को लेकर उत्तराखंड सरकार की आई रिपोर्ट, प्रभावितों को विस्थापित करने की दी सलाह।
देहरादून – जोशीमठ संकट को लेकर उत्तराखंड सरकार की 8 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट आई।

प्रभावित लोगों को तत्काल विस्थापित करने की सलाह दी गई।
जिन इमारतों को नुकसान पहुंचा उन्हें गिराकर उसका मलबा हटाने की सलाह।
जेपी कॉलोनी से मारवाड़ी ब्रिज तक सैंपल इकट्ठे किये गए क्योंकि यहीं तक पानी का फ्लो थाजोशीमठ भूधंसाव मामले में उत्तराखंड सरकार एक्शन मोड में।
आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेषज्ञों के साथ बैठक करेंगे।
दीर्घकालिक उपायों के तहत जोशीमठ की जियो टेक्निकल, जियो फिजिकल, हाइड्रोलाजिकल जैसे अध्ययन होंगे।
मंगलवार को जोशीमठ का दौरा कर सकते हैं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस संबंध में मुख्यमंत्री से जानकारी ले चुके हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय इस विषय पर उच्च स्तरीय बैठक कर चुका है।
big news
देहरादून से 10 दिन में 13 बच्चे लापता, सबसे ज्यादा नाबालिग बच्चियां हुई लापता, सामने आई चौंकाने वाली वजह

Dehradun News : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले 10 दिनों के दौरान 13 नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामले सामने आने से अभिभावकों, पुलिस और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मामलों ने बच्चों की सुरक्षा और बदलते सामाजिक परिवेश को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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देहरादून से 10 दिन में 13 बच्चे लापता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों की गुमशुदगी से जुड़े मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। इनमें ऋषिकेश, सेलाकुई, सहसपुर और अन्य इलाकों से नाबालिगों के घर से लापता होने की घटनाएं शामिल हैं। सभी मामलों में बच्चों की उम्र 12 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है।
सबसे ज्यादा बच्चियां हुई लापता
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि लापता होने वाले बच्चों में बड़ी संख्या नाबालिग बच्चियों की है। इससे परिजनों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की भी चिंताएं बढ़ी हैं। पुलिस इन मामलों की जांच में जुटी है और बच्चों की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव, आभासी दुनिया की ओर आकर्षण और अपेक्षाओं में वृद्धि जैसी परिस्थितियां बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। उनका कहना है कि कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों से नाराज होकर भावनात्मक निर्णय ले लेते हैं और घर छोड़ने जैसे कदम उठा बैठते हैं।
डॉक्टर ने सोशल मीडिया को बताया इसकी वजह
डॉक्टर ने सोशल मीडिया को इसकी वजह बताया है। उन्होंने बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत का संदेश दिया है। विशेषज्ञ परिवारों में संवाद बढ़ाने, बच्चों की भावनात्मक स्थिति को समझने और उनकी गतिविधियों पर संतुलित नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि दर्ज मामलों में कार्रवाई जारी है और बच्चों को सुरक्षित खोजने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
Rudraprayag
तिलवाड़ा में अनियंत्रित होकर नदी में गिरी केदारनाथ जा रहे यात्रियों की कार, मौके पर मची-चीख पुकार

Rudraprayag Accident : चारधाम यात्रा मार्ग पर सुबह-सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। केदारनाथ धाम जा रहे यात्रियों की कार अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी। जिस से मौके पर यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
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तिलवाड़ा में नदी में गिरी केदारनाथ जा रहे यात्रियों की कार
चारधाम यात्रा पर निकले पश्चिम बंगाल के यात्रियों की एक कार रविवार सुबह रुद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कार अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 50 मीटर नीचे नदी किनारे जा गिरी। हादसे के बाद पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया।
सभी यात्रियों को किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
जिला कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि तिलवाड़ा पेट्रोल पंप के निकट एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर नदी किनारे पानी में फंस गया है। सूचना मिलते ही चौकी तिलवाड़ा और कोतवाली अगस्त्यमुनि की पुलिस टीम आवश्यक राहत एवं बचाव उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई। इसके अलावा एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और 108 आपातकालीन सेवा की टीमों को भी मौके पर भेजा गया।
दुर्घटनाग्रस्त वाहन महिंद्रा एक्सयूवी 700 (यूपी16-डीके0856) बताया गया है। वाहन में कुल पांच यात्री सवार थे, जो पश्चिम बंगाल से केदारनाथ धाम की यात्रा पर जा रहे थे। वाहन नदी किनारे पानी में फंस गया था, जिसके बाद बचाव दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

हादसे में नहीं हुई किसी प्रकार की जनहानि
हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। हालांकि वाहन में सवार दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। दोनों महिलाओं के हाथ-पैर में फ्रैक्चर सहित अन्य चोटें आई हैं। वहीं चालक समेत तीन अन्य पुरुष यात्रियों को मामूली चोटें लगी हैं।
रेस्क्यू टीम ने सभी घायलों को खाई से बाहर निकालकर 108 एम्बुलेंस की सहायता से जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रशासन और राहत एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्रियों की जान सुरक्षित बचा ली गई।
Uttarakhand
अल्मोड़ा में खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम में पहुंचे सीएम धामी, किसानों से किया कृषि भूमि संरक्षण का आह्वान

अल्मोड़ा में कृषि विभाग द्वारा आयोजित हुआ “खेत बचाओ अभियान” कार्यक्रम
अल्मोड़ा के विकासखंड हवलबाग में कृषि विभाग द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस मौके पर कृषि मंत्री गणेश जोशी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” अब जनभागीदारी से जुड़कर जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर बोले सीएम धामी
सीएम धामी ने कहा कि पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग के दौर से गुजर रही है, ऐसे में हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर खेती करनी होगी। उन्होंने बताया कि किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए उनके खातों को बैंक अकाउंट से जोड़ा गया है, जिससे सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है और बीच के बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तभी सफल होती है जब किसान सरकार के साथ मिलकर काम करें।

“खेत बचाओ अभियान” कार्यक्रम में 6 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है और किसान इसका लाभ भी ले रहे हैं। उन्होंने अल्मोड़ा में “तारबाड़ योजना” के लिए 6 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत करने की घोषणा भी की।
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं और किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ा जा रहा है। वहीं राहुल गांधी की अल्मोड़ा रैली को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर राहुल गांधी को देवभूमि के लिए संवेदना होती तो वे देहरादून भी आ सकते थे, लेकिन उनके लिए अंडमान-निकोबार जाना ज्यादा महत्वपूर्ण था।
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