Dehradun
केदारनाथ और यमुनोत्री धाम पहुंचने की राह होगी आसान, सुप्रीम कोर्ट की हाई पॉवर कमेटी ने अनुमति की प्रदान।

देहरादून – केदारनाथ और यमुनोत्री धाम पहुंचने की राह और आसान होगी। केदारनाथ धाम मार्ग के अगस्त्यमुनि से फाटा तक और यमुनोत्री मार्ग पर पालीगाड से जानकीचट्टी मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की हाई पॉवर कमेटी ने अनुमति प्रदान कर दी है।

वर्तमान में दोनों स्थानों पर मार्ग सिंगल लेन है जो डबल लेन हो सकेगा। जिससे यातायात और सुगम हो सकेगा।चारधाम यात्रा मार्ग को बीते सालों में बेहतर किया गया है। लेकिन केदारनाथ धाम में अगस्त्यमुनि से फाटा कुंड बाइपास तक 13 किमी सड़क सिंगल लेन है, इसके कारण कई बार वाहनों का आवागमन प्रभावित होता रहा है।
इसी तरह यमुनोत्री धाम मार्ग पर करीब 23 किमी पालीगाड से जानकी चट्टी तक का मार्ग भी सिंगल लेन है। अब इन दोनों मार्गों को चौड़ा करने की राह आसान हो गई है। एनएच के अधिकारियों के अनुसार पहाड़ के कटान पर करीब पांच साल पहले रोक लग गई थी। तब से मामला रुका हुआ था। अब हाई पॉवर कमेटी ने मार्ग को चौड़ा करने की अनुमति दे दी है।
एनएच के अधिकारियों के अनुसार मार्ग की चौड़ाई सात मीटर तक बढ़ सकेगी। इसके अलावा पटरी भी बनेगी। इससे करीब चौड़ाई 10 मीटर तक हो सकेगी। इससे आवागमन आसान हो सकेगा। लोनिवि के प्रमुख अभियंता दीपक यादव व एनएच के मुख्य अभियंता दयानंद कहते हैं कमेटी से अनुमति मिल गई है। अब आगे की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार योजना के लिए डीपीआर को तैयार करना होगा।
केदारनाथ धाम आने वाले यात्री अपने वाहनों से सोनप्रयाग तक पहुंचते हैं, इसके बाद गौरीकुंड के लिए शटल सेवा संचालित होती है। सोनप्रयाग में वाहनों के दबाव से निपटने के लिए बाइपास की योजना बनाई गई थी, पर वह आगे नहीं बढ़ सकी। एनएच के अधिकारियों के अनुसार जो मौजूदा मार्ग था, उसकी क्षमता वृद्धि की गई थी। अब नदी के दोनों तरफ से करीब तीन किमी लंबाई का एक रिंग रोड बनाने की योजना है, जिससे वाहनों का आवागम को बेहतर किया जा सके। इस काम के लिए पुल निर्माण भी होगा।
Dehradun
आदमपुर हवाई अड्डे का नाम गुरु रविदास महाराज को हुआ समर्पित, सीएम ने पीएम मोदी का जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आदमपुर हवाई अड्डे का नाम संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज जी के नाम पर समर्पित किया जाना, उनके महान विचारों, सामाजिक चेतना और मानवता के प्रति समर्पण को सच्ची श्रद्धांजलि है।
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आदमपुर हवाई अड्डे का नाम गुरु रविदास महाराज को हुआ समर्पित
संत रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर लिया गया ये निर्णय न केवल अत्यंत सराहनीय है, बल्कि सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समानता, करुणा, सेवा और मानव मात्र के सम्मान का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
सीएम ने पीएम मोदी का जताया आभार
सीएम धामी ने कहा कि उन्होंने भेदभाव, ऊंच-नीच और असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठाकर एक समतामूलक समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महापुरुषों और संतों के विचारों को सम्मान देने की परंपरा निरंतर सशक्त हो रही है।
आदमपुर हवाई अड्डे को संत गुरु रविदास महाराज जी के नाम से जोड़ना, उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये निर्णय सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि संत रविदास जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज समरसता, सद्भाव और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।
Uttarakhand
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026: 5 से 8 फरवरी तक देहरादून में आयोजित होगा महोत्सव

Uttarayani Kauthik Mahotsav: सेवा संकल्प फाउंडेशन करेगा उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 का आयोजन
मुख्य बिंदु
Uttarayani Kauthik Mahotsav: सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 का भव्य आयोजन देहरादून, परेड ग्राउंड में 5 से 8 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है। चार दिवसीय ये सांस्कृतिक उत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरागत कला एवं व्यंजन, लोकगीत, संगीत एवं लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियों का सजीव मंच बनेगा।
महोत्सव का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार
महोत्सव का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे जन-जन तक सशक्त रूप में पहुँचाना है। उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को केंद्र में रखते हुए भारत के विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय संस्कृतियों की भी भव्य प्रस्तुति की जाएगी। विशेष रूप से इस महोत्सव में उत्तर-पूर्वी भारत की सांस्कृतिक झलक, वहां की परंपराएं, लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सशक्त संदेश जनमानस तक पहुंचेगा।

पांच फरवरी से शरू होगा महोत्सव
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, लोककला एवं लोकसंगीत को जन-जन तक पहुँचाना, स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त मंच प्रदान करना तथा समाज में सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता को मजबूत करना है। ये महोत्सव देहरादून, परेड ग्राउंड में 5 से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित्त होगा।



Uttarakhand
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 की तैयारी शुरू, गीता धामी ने किया पूजन

DEHRADUN: माघ पूर्णिमा पर उत्तरायणी कौथिक महोत्सव की तैयारी, गीता धामी ने विधि-विधान से किया पूजन
मुख्य बिंदु
DEHRADUN: सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर परेड ग्राउंड, देहरादून में 5 फरवरी से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले उत्तरायणी कौथिक महोत्सव की सफलता के लिए विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्रद्धा एवं आस्था के साथ पूजन कर महोत्सव के सफल, सुव्यवस्थित एवं मंगलमय आयोजन की कामना की।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव को लेकर सेवा संकल्प फाउंडेशन ने शुरू की तैयारी
पूजा के बाद गीता धामी ने पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश देते हुए वृक्षारोपण किया। इसके बाद उन्होंने सेवा संकल्प फाउंडेशन से जुड़े सभी साथियों के साथ बैठक कर महोत्सव की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की और आयोजन को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं जनसरोकारों से जोड़ने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में जनजातीय संस्कृतियों की दी जाएगी प्रस्तुति
गीता धामी ने जानकारी दी कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को केंद्र में रखते हुए भारत के विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय संस्कृतियों की भी भव्य प्रस्तुति की जाएगी। विशेष रूप से इस महोत्सव में उत्तर-पूर्वी भारत की सांस्कृतिक झलक, वहां की परंपराएं, लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सशक्त संदेश जनमानस तक पहुंचेगा।

उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, लोककला एवं लोकसंगीत को जन-जन तक पहुँचाना, स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त मंच प्रदान करना तथा समाज में सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता को मजबूत करना है।
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