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बीरोंखाल में जंगली मशरूम खाने से आठ मजदूर पड़ गए बीमार, अस्पताल में भर्ती।

पौड़ी – उत्तराखंड में पाैड़ी जिले के बीरोंखाल में जंगली मशरूम खाने से आठ मजदूर बीमार पड़ गए। सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार, फरसाड़ी बाजार में रह रहे आठ मजदूरों ने मशरूम की सब्जी खाई थी। जिसे खाने के कुछ ही देर बाद वह बीमार पड़ने लगे। सभी को आस पड़ोस के लोगों ने अस्पताल पहुंचाया। सीएचसी प्रभारी डा. शैलेंद्र रावत ने मजदूरों के जंगली मशरूम खाने से बीमार होने की पुष्टि की है। सभी मजदूरों का अभी इलाज चल रहा है। हालांकि, सभी खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
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पौड़ी में भालू ने महिला पर किया हमला, गंभीर हालत में हायर सेंटर किया गया रेफर

Pauri News : उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। लगातार गुलदार, भालू और बाघ के हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। पौड़ी में आज फिर भालू ने एक महिला पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
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पौड़ी में भालू ने महिला पर किया हमला
पौड़ी गढ़वाल में जंगली जानवरों का आतंक के कारण लोग दहशत में है। बुधवार सुबह पौड़ी में भालू ने एक महिला पर हमला कर दिया। मिली जानकारी के मुताबिक पाबौ विकासखंड के खंडुली गांव में महिला जानवरों के लिए चारा लेने के लिए जंगल गई थी। इसी दौरान भालू ने उस पर हमला कर दिया।
गंभीर हालत में हायर सेंटर किया गया रेफर
महिला की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे जिस कारण उसकी जान बच सकी। ग्रामीणों ने आनन-फानन में महिला को 108 एंबुलेंस सेवा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ पहुंचाया। जहां महिला को प्राथमिक उपचार देने के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर किया है।
जानवरों के लिए चारा लेने के लिए गई थी जंगल
मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह लगभग 11:30 बजे ज्योति देवी, पत्नी जगदीश चारा लेने के लिए जंगल जा रही थी। इसी दौरान भालू ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने तत्परता के कारण महिला की जान बची। जिला पंचायत सदस्य कलूण भरत रावत ने बताया कि डॉक्टरों ने महिला को हायर सेंटर रेफर किया है। जिसके बाद महिला को एयर एंबुलेंस से देहरादून में मैक्स अस्पताल पहुंचाया गया है।
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पौड़ी : भालू ने युवक पर किया हमला, किसी तरह हाथ-पैर चलाकर बचाई जान

Pauri: श्रीनगर-पौड़ी मार्ग पर भालू ने युवक पर किया हमला
मुख्य बिंदु
पौड़ी (Pauri): उत्तराखंड में लगातार मानव वन्य जीव संघर्ष के मामले बढ़ते जा रहे हैं. ताजा मामला पौड़ी जिले से सामने आया है. जहाँ पर एक बाइक सवार युवक पर भालू ने हमला कर जख्मी कर दिया है. जिसके बाद किसी तरहसे युवक ने शोर मचा कर अपनी जान बचाई.
श्रीनगर में भालू ने युवक पर किया हमला
मिली जानकारी के मुताबिक, 3 फरवरी मंगलवार को 21 वर्षीय अभिषेक, निवासी प्रेमनगर, पौड़ी गढ़वाल बाइक से जा रहा था. तभी अचानक से पौड़ी-श्रीनगर मोटरमार्ग पर ढांडरी के पास भालू ने उस पर हमला कर दिया. भालू युवक को घसीटते हुए सड़क से नीचे ले गया.
आसपास के लोगों ने पहुँचाया अस्पताल
लेकिन अभिषेक ने किसी तरह चीख-पुकार मचाते हुए अपनी जान बचाई. इस हमले में अभिषेक के गले और सिर पर कई चोटें आई. मौके पर मची चीख पुकार सुनकर आस-पास के लोगों ने तुरंत घायल को जिला अस्पताल पहुँचाया. जहाँ उसका इलाज चल रहा है. घायल की स्थिति अभी स्थिर बताई जा रही है.
घायल युवक अभिषेक ने बताया कि
वो अपने रास्ते पर था, तभी अचानक भालू सामने आ गया और उस पर झपट पड़ा. अपनी जान बचाने के लिए उसने हिम्मत दिखाते हुए हाथ-पैर चलाकर भालू को दूर भगाने का प्रयास किया, जिसमें वह सफल रहा. इसी बीच, उसके शोर मचाने पर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंच गए और उसे सुरक्षित बाहर निकाला.
हमले से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल
भालू के हमले की घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है. पीड़ित युवक और स्थानीय लोगों ने वन विभाग पौड़ी से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और भालू को आबादी से दूर भगाने की मांग की है, ताकि आगे किसी और पर हमला न हो सके. उनका कहना है कि पहले गुलदार के हमले सामने आते थे, लेकिन अब भालू के हमले भी होने लगे हैं, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है.
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गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने किया घोस्ट विलेज पातली का दौरा, निर्जन गांवों आबाद बनाने का लिया संकल्प

Pauri News : उत्तराखंड में पलायन इस कदर हावी हो गया है कि दर्जनों गांव हर साल खाली हो रहे हैं और घोस्ट विलेज बन रहे हैं। जहां एक ओर लोग गांव छोड़कर बाहर जा रहे हैं तो वहीं गढ़वाल से लोक सभा सांसद एवं भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी घोस्ट विलेज पातली पहुंचे और गांव का दौरा किया। उन्होंने निर्जन गांवों आबाद बनाने का संकल्प लिया।
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गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने किया घोस्ट विलेज पातली का दौरा
गढ़वाल से लोक सभा सांसद अनिल बलूनी पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक स्थित पातली गाँव पहुंचे जो कि एक निर्जन गाँव (घोस्ट विलेज) है। पहाड़ में घोस्ट विलेज और पलायन की समस्या पर जन जागरण और प्रवासी ग्रामीणों का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए गढ़वाल सांसद ने पातली और आस पास के प्रवासी ग्रामीणों से संवाद कर इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
पातली गाँव के लोगों को जो गाँव से पलायन कर चुके हैं, वे सभी देहरादून और अन्य महानगरों से अपने गाँव पातली पहुंचे थे। आसपास के कई गाँवों से बड़ी संख्या में लोग भी पातली आये थे। अनिल बलूनी ने उनसे चर्चा की कि पहाड़ के गाँवों का सुनसान होना कितना खतरनाक है, अपनी आँखों के सामने अपने ही गाँव को घोस्ट विलेज बनते देखना कितना तकलीफदेह है। सभी प्रवासी ग्रामीणों की आंखों में अपने गांवों के घोस्ट विलेज बन जाने की पीड़ा स्पष्ट दिख रही थी। वे अपने गांव को बचाने को लेकर काफी भावुक थे।

निर्जन गांवों आबाद बनाने का लिया संकल्प
गढ़वाल सांसद ने लोगों से अपील की कि हम सबको कम से कम एक लोकपर्व और अपने परिवार के कम से कम एक सदस्य का जन्मदिन अपने गाँव में मनाना चाहिए। एक संतान का विवाह कार्यक्रम भी अपने गाँव में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हमने ऐसा किया तो हमारे बच्चे, हमारे परिवार के सदस्य भी स्वाभाविक रूप से अपने गाँव से जुड़ेंगे, अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़ेंगे और अपने पुरुखों से परिचित होंगे। इससे घोस्ट विलेज भी गुलजार होंगे।
वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज से गांव किए जा रहे आबाद
गढ़वाल सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज और वेडिंग इन उत्तराखंड के जरिये पहाड़ को आबाद करने का बीड़ा उठाया है तो क्या हम अपने निजी आयोजनों के लिए भी अपना गांव नहीं आ सकते हैं? अनिल बलूनी ने कहा कि मैंने पहाड़ और अपने निर्जन गाँवों को आबाद करने के उद्देश्य से इगास और अपना वोट, अपने गाँव जैसे कार्यक्रम शुरू किये जिससे जमीन पर अच्छा बदलाव आया है।

पहाड़ के कम होते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी की चर्चा
भाजपा सांसद ने ग्रामीणों से पहाड़ के कम होते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहाड़ के गांवों को बचाना उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और यहाँ के राजनैतिक भविष्य के लिहाज से भी बेहद जरूरी है। हमारा सीमांत प्रदेश, चीन से सटा हुआ है। इस लिहाज से उच्च हिमालयी क्षेत्र के ग्रामीण, हमारे फुटसोल्जर सरीखे होते हैं। दूसरी वजह पहाड़ में निर्वाचन क्षेत्रों की लगातार घटती संख्या है।
पौड़ी जिले में पहले 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र थे जो अब घटकर 6 रह गए हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले समय में केवल 4 या 5 विधानसभा रह जाए। इसी प्रकार चमोली जिले में 4 विधानसभा थी, आने वाले समय में 2 रह जाए – ऐसा भी हो सकता है। नैनीताल, पिथौरागढ़ में भी विधानसभा सीटें कम हो रही है। ये हम लोगों के लिए सोचने का विषय है। पहाड़ की आवाज उठाने के लिए पहाड़ को आबाद रखना बेहद जरूरी है।
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