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बर्फबारी बनी आफत! उत्तराखंड के 5 जिलों में एवलॉन्च का खतरा, प्रशासन अलर्ट मोड पर

हाई अलर्ट पर उत्तराखंड! 3 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बर्फबारी के बीच एवलॉन्च का डर
UTTARAKHAND WEATHER ALERT: उत्तराखंड में बदलते मौसम के साथ खतरे की घंटी भी बजने लगी है. पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश और बर्फ़बारी के चलते डिफेंस जियो इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) ने राज्य के 5 जिलों के लिए एवलौंच का अलर्ट जारी किया है. DGRE की तरफ से जारी अलर्ट के बाद आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के आदेश दिए गए हैं.
मुख्य बिंदु
उत्तराखंड में बर्फ़बारी के साथ एवलांच का अलर्ट
उत्तराखंड में बीते हफ्ते मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में जहाँ एक ओर भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीँ पहाड़ों पर भी भारी बर्फ़बारी देखने को मिली. अब मौसम परिवर्तन के इस समीकरण के साथ उत्तराखंड के लिए खतरे की घंटी बजनी भी शुरू हो गई है. शनिवार को डिफेंस जियो इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) की तरफ से राज्य के 5 जिलों के लिए एवलॉन्च का अलर्ट जारी किया है.
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उत्तराखंड के तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट
शनिवार 21 मार्च को डिफेंस जियो इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) की ओर से जारी अलर्ट में तीन जिलों को डेंजर लेवल-3 में रखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इनमे उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ शामिल हैं. वहीँ रुद्रप्रयाग और बागेश्वर को डेंजर लेवल-1 में रखा गया है. जिसके बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने एडवाइजरी जारी कर सभी विभागोंन को अलर्ट मोड़ पर रहने के निर्देश दिए हैं.

DGRE के पूर्वानुमान के मुताबिक
21 मार्च को शाम 5 बजे डिफेंस जियो इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, 21 मार्च से 22 मार्च को शाम 5 बजे तक उत्तराखंड के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी/हिमस्खलन की संभावना व्यक्त की गयी है. विशेष रूप से उत्तरकाशी, चमोली एवं पिथौरागढ़ (Danger level-3 में रखा गया है) और रुद्रप्रयाग एवं बागेश्वर (Danger level-1 में रखा गया है) में बर्फबारी/हिमस्खलन की संभावना जताई गई है. ऐसे में इन क्षेत्रों में अधिक बर्फ पड़ने की दशा में अवरोध या अवलांच का खतरा भी हो सकता है.
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आपदा प्रबंधन ने जारी की एडवाइजरी
राज्य आपदा प्रबंधन ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से इसका पालन करने की अपील की है.
- दिन व रात दोनों में अपने नजदीकी क्षेत्रों में गिर रही बर्फ/हिमस्खलन की जानकारी लेते रहें.
- हिमस्खलन/बर्फ गिरने की दशा में बर्फ वाले क्षेत्रों में अति आवश्यक होने पर ही आवागमन करें अन्यथा इससे बचें.
- हिमस्खलन/बर्फ गिरने के दौरान अपने घरों या अस्थायी आवासों, गोशालाओं की छतों पर अधिक बर्फ न जमने दें व इसे साफ करते रहें.
- बर्फीले क्षेत्रों में आवागमन के दौरान बर्फ के फिसलने पर नजर बनाए रखें.
- अगर किन्हीं कारणों से अस्थायी रूप से अधिक बर्फ पड़ने वाले क्षेत्रों में निवास कर रहे हो तो एक-दो दिन के लिए निचले स्थानों पर चले जाएं.
- पुराने अवलांच (हिमस्खलन) घटित क्षेत्रों में अत्यधिक सतर्कता रखें.
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Monsoon Update: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक में हो सकती है देरी, IMD ने बताया कब पहुंचेगा उत्तराखंड ?

Uttarakhand Monsoon Update : उत्तराखंड में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री सामान्य समय से कुछ देर से होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून देरी से आगे बढ़ रहा है। जिस कारण उत्तराखंड पहुंचने में उसे देरी हो सकती है।
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उत्तराखंड में मानसून की दस्तक में हो सकती है देरी
शुरुआती अनुमान के अनुसार मानसून के 20 जून तक राज्य में पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसके आगमन में कुछ दिनों की देरी हो सकती है।
हालांकि प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं, जिसके चलते पर्वतीय जिलों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। दूसरी ओर मैदानी और तराई क्षेत्रों में अभी तक व्यापक वर्षा नहीं हुई है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में तापमान और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार शुरुआत में सामान्य गति से आगे बढ़ा, लेकिन बाद में इसकी प्रगति धीमी पड़ गई। कई क्षेत्रों में मानसून की गतिविधियां ठहराव की स्थिति में हैं, जिससे उत्तर भारत और विशेष रूप से उत्तराखंड तक इसके पहुंचने में देरी की संभावना बढ़ गई है।
उत्तराखंड में सामान्य तौर पर मानसून 20 जून के आसपास प्रवेश करता है, लेकिन इस बार इसकी समय-सीमा कुछ आगे खिसक सकती है।
रूक-रूक कर तय किया अंडमान से केरल तक का सफर
इस वर्ष मानसून अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में सामान्य से लगभग छह दिन पहले सक्रिय हो गया था। इसके बाद यह 4 जून को केरल तट पर पहुंचा, जो सामान्य तिथि से करीब तीन दिन विलंबित था। अरब सागर शाखा ने इसके बाद तेजी दिखाई और निर्धारित समय के आसपास कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक पहुंच गई। हालांकि 8 जून के बाद इसकी प्रगति धीमी हो गई।

वहीं बंगाल की खाड़ी शाखा ने भी कुछ दिनों की देरी से पूर्वोत्तर राज्यों में प्रवेश किया और बाद में आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड तथा बिहार के कई हिस्सों तक पहुंची। इसके बावजूद मानसून की गति सामान्य से थोड़ी धीमी बनी हुई है।
उत्तराखंड पहुंचने में होगी कुछ दिन की देरी
मौसम विभाग के अनुसार मानसून को झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कुछ हिस्सों से गुजरने के बाद उत्तराखंड तक पहुंचना होता है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसके आगमन में कुछ दिनों की देरी संभव है।
मानसूनी बारिश कृषि, जल स्रोतों के पुनर्भरण और गर्मी से राहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में किसान और आम लोग दोनों मानसून का इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि मानसून फिलहाल अपनी सामान्य प्रगति से थोड़ा पीछे चल रहा है। हालांकि राज्य में प्री-मानसून बारिश का सिलसिला जारी है और आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में बारिश की संभावना बनी रहेगी।
मौसम विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।
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उत्तराखंड वालों सावधान ! उत्तराखंड में आज आठ जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

Uttarakhand Weather Alert : उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से लोगों को आज कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि मौसम में होने वाला ये बदलाव अपने साथ कई चुनौतियां भी लेकर आ सकता है। मौसम विभाग ने राज्य के आठ जिलों में तेज बारिश, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
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उत्तराखंड में आज आठ जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के मौसम में अचानक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।
50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं
विभाग का अनुमान है कि इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

इसके अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के पर्वतीय क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी भी देखने को मिल सकती है।

मौसम विभाग ने लोगों को दी सावधानी बरतने की सलाह
मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग ने खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने तथा आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का यही रुख बना रह सकता है।
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उत्तराखंड में बढ़ी गर्मी की मार, पहाड़ से मैदान तक चढ़ा पारा, जानें और कितने दिन होगी गर्मी

Uttarakhand Weather Update : प्रदेश में एक बार फिर से गर्मी बढ़ने लगी है। पहाड़ से लेकर मैदान तक सूरज की तपिश बढ़ने से लोग गर्मी की मार झेल रहे हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने वेदर अपडेट जारी किया है। जिसके मुताबिक फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं है।
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उत्तराखंड में बढ़ी गर्मी की मार, पहाड़ से मैदान तक चढ़ा पारा
उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से गर्मी लगातार अपने तेवर दिखा रही है। मैदानों से लेकर पहाड़ों तक तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मंगलवार को चटक धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को दिनभर परेशान किया। जिससे जनजीवन प्रभावित नजर आया।
रविवार से मौसम साफ होने के बाद प्रदेश में तापमान तेजी से बढ़ना शुरू हुआ था। इसके बाद से गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार सुबह से ही तेज धूप ने लोगों को बेहाल कर दिया। दोपहर के समय हालात सबसे ज्यादा कठिन रहे, जब लू जैसी गर्म हवाओं के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

बढ़ती गर्मी के चलते ज्यादा घरों में रह रहे लोग
गर्मी के बढ़ते असर के चलते सड़कों और बाजारों में भी लोगों की आवाजाही कम दिखाई दी। मैदानी इलाकों के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल मौसम में राहत मिलने के आसार कम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, फिलहाल मौसम में राहत मिलने के आसार कम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश में मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। वहीं, पिछले सप्ताह हुई बारिश और आंधी-तूफान से मिली राहत अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
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