Uttarakhand
Khaliya Top Trek Hindi Guide 2026 : मुनस्यारी के इस छिपे हुए स्वर्ग की संपूर्ण यात्रा और जरूरी टिप्स

Khaliya Top Trek
क्या आप प्रकृति प्रेमी हैं और पहाड़ों की गॉड में कुछ पल सुकून के बिताना चाहते हैं? या फिर आप एक ऐसे एडवेंचर की तलाश में हैं जो बहुत ज्यादा थका देने वाला भी न हो और आपको हिमालय के गगनचुंबी शिखरों के बेहद करीब ले जाए? यदि हाँ, तो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित खलिया टॉप ट्रेक (Khaliya Top Trek) आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
कुमाऊं हिमालय की वादियों में बसा यह खूबसूरत मखमली घास का मैदान (Bugyal) समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर (11,483 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यदि आप इससे भी आगे जाना चाहते हैं, तो इसका उच्चतम बिंदु जीरो पॉइंट (Zero Point) है, जो 4,000 मीटर की ऊंचाई पर है। मुनस्यारी के पास स्थित यह ट्रेक न केवल आपको बर्फ से ढकी चोटियों के जादुई दर्शन कराता है, बल्कि घने जंगलों और अनूठे वन्यजीवों से भी रूबरू कराता है।
आइए, इस विस्तृत ट्रेवल गाइड में जानते हैं कि आप खलिया टॉप ट्रेक की योजना कैसे बना सकते हैं, यहाँ क्या खास है, और आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खलिया टॉप ट्रेक: एक नज़र में (Trek Overview)
ट्रेक पर निकलने से पहले इस यात्रा से जुड़ी मुख्य बातों को एक तालिका के माध्यम से समझ लेते हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | मुनस्यारी के पास, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड |
| अधिकतम ऊंचाई | 3,500 मीटर (खलिया टॉप), 4,000 मीटर (जीरो पॉइंट) |
| ट्रेक की दूरी | बलाती बेंड से लगभग 15 किमी (आना-जाना) |
| ट्रेक की अवधि | 3 से 4 दिन (काठगोदाम से काठगोदाम) |
| कठिनाई का स्तर | आसान से मध्यम (Easy to Moderate) |
| सबसे अच्छा समय | अप्रैल से जून (गर्मियों में) और सितंबर से नवंबर (सर्दियों की शुरुआत में) |
| मुख्य आकर्षण | पंचचूली, नंदा देवी, हरदेओल और राजरंभा चोटियों का 360-डिग्री व्यू |
खलिया टॉप क्यों है इतना खास? (Why Choose Khaliya Top Trek?)
उत्तराखंड में वैसे तो केदारकंठ, दयरा बुग्याल और रूपकुंड जैसे कई प्रसिद्ध ट्रेक हैं, लेकिन खलिया टॉप की बात ही कुछ अलग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. पांच प्रसिद्ध चोटियों के साक्षात दर्शन
खलिया टॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ से हिमालय की पांच प्रसिद्ध चोटियों—पंचचूली (Panchachuli), नंदा देवी (Nanda Devi), हरदेओल (Hardeol), नंदकोट (Nandakot), और राजरंभा (Rajrambha) का बेहद स्पष्ट और भव्य नजारा दिखाई देता है। शाम के समय जब डूबते सूरज की किरणें इन बर्फबारी चोटियों पर पड़ती हैं, तो ये सोने की तरह चमक उठती हैं। यह नजारा किसी का भी दिल जीतने के लिए काफी है।
2. जीरो पॉइंट का 360-डिग्री पैनोरैमिक व्यू
खलिया टॉप से महज 1 किलोमीटर आगे बढ़ने पर आप जीरो पॉइंट (Zero Point) पहुँचते हैं। 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान मुनस्यारी क्षेत्र का सबसे ऊँचा बिंदु है। यहाँ खड़े होकर जब आप चारों तरफ घूमते हैं, तो आपको बादलों का समंदर और हिमालय की अनंत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं, जो आपको दुनिया के शिखर पर होने का अहसास कराती हैं।
3. अद्भुत जैव विविधता और घने जंगल
यह ट्रेक बुरांश (Rhododendron), बांझ (Oak), देवदार (Cedar), और सनोवर (Spruce) के घने जंगलों से होकर गुजरता है। वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में जब लाल और गुलाबी बुरांश के फूल खिलते हैं, तो पूरा रास्ता किसी दुल्हन की तरह सज जाता है। इसके अलावा, यहाँ उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल (Monal), कस्तूरी मृग (Musk Deer), और पहाड़ी तीतर जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिल जाते हैं।
4. विंटर और समर स्पोर्ट्स
सर्दियों के महीनों में जब यह पूरा बुग्याल सफेद बर्फ की चादर से ढक जाता है, तब यह स्कीइंग (Skiing) के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन मैदान बन जाता है। यहाँ स्कीइंग ट्रेनिंग एसोसिएशन भी काम करते हैं। वहीं गर्मियों के दिनों में यहाँ पर्यटकों के रोमांच के लिए पैराग्लाइडिंग (Paragliding) का आयोजन भी किया जाता है।

खलिया टॉप ट्रेक का विस्तृत रूट मैप और यात्रा कार्यक्रम (Day-by-Day Itinerary)
खलिया टॉप की यात्रा को अच्छे से एन्जॉय करने के लिए 4 दिनों का यह रूट सबसे आदर्श माना जाता है:
दिन 1: काठगोदाम से मुनस्यारी (दूरी: 300 किमी, समय: 9-11 घंटे)
आपकी यात्रा कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम रेलवे स्टेशन से शुरू होती है। यहाँ से आपको मुनस्यारी के लिए सीधे टैक्सी या बस मिल जाएगी। यह सफर लंबा जरूर है, लेकिन बेहद खूबसूरत है। रास्ता अल्मोड़ा, बागेश्वर और थल जैसे पहाड़ी कस्बों से होकर गुजरता है। रास्ते में आपको हरे-भरे पहाड़, कलकल बहती नदियां और खूबसूरत बिरथी फॉल्स (Birthi Falls) देखने को मिलेंगे। शाम तक आप मुनस्यारी पहुँच जाएंगे, जहाँ आप किसी होटल या होमस्टे में विश्राम कर सकते हैं।
दिन 2: मुनस्यारी से बलाती बेंड (ड्राइव) और भुजानी तक ट्रेक (ट्रेक दूरी: 2 किमी)
सुबह मुनस्यारी के शांत वातावरण में पंचचूली चोटियों के दर्शन के साथ शुरुआत करें। इसके बाद मुनस्यारी से करीब 9 किमी दूर बलाती बेंड (Balati Bend) के लिए ड्राइव करें। बलाती बेंड ही इस ट्रेक का शुरुआती बिंदु (Starting Point) है। यहाँ से आपका पैदल सफर शुरू होता है। पहले दिन आपको घने जंगलों के बीच से होते हुए भुजानी (Bhujani) बेस कैंप तक लगभग 2 किमी की चढ़ाई करनी होगी। कुछ हिस्से थोड़े सीधे और थका देने वाले हैं, इसलिए अपनी गति धीमी रखें। रात का ठहराव भुजानी में टेंट के अंदर तारों की छांव में होगा।
दिन 3: भुजानी से खलिया टॉप और जीरो पॉइंट, वापसी मुनस्यारी (ट्रेक दूरी: 8 किमी)
यह इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत दिन है। सुबह जल्दी उठकर भुजानी से खलिया टॉप की ओर बढ़ें। जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ेंगे, पेड़ कम होने लगेंगे और विशाल मखमली घास के मैदान आपका स्वागत करेंगे। खलिया टॉप पहुँचकर आपको जो दृश्य दिखेगा, वह आपकी सारी थकान मिटा देगा।
यदि मौसम साफ हो और आपकी शारीरिक क्षमता अनुमति दे, तो यहाँ से 1 किमी आगे जीरो पॉइंट तक जरूर जाएं। वहाँ की जादुई खूबसूरती को अपने कैमरे और यादों में कैद करने के बाद, वापस बलाती बेंड की तरफ उतरना शुरू करें। बलाती बेंड से गाड़ी पकड़कर शाम तक वापस मुनस्यारी आ जाएं और होटल में आराम करें।
दिन 4: मुनस्यारी से काठगोदाम (वापसी)
सुबह नाश्ते के बाद, अपनी खूबसूरत यादों के साथ वापस काठगोदाम के लिए प्रस्थान करें। शाम तक काठगोदाम पहुँचकर आप अपनी आगे की ट्रेन या बस पकड़ सकते हैं।

खलिया टॉप जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
यूं तो खलिया टॉप साल के अधिकांश महीनों में खूबसूरत लगता है, लेकिन आपकी पसंद के आधार पर दो बेहतरीन सीजन हैं:
- अप्रैल से जून (वसंत और गर्मी): यदि आप खिले हुए रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी घास और सुहावना मौसम देखना चाहते हैं, तो यह समय सबसे बेस्ट है। इस समय तापमान ट्रेकिंग के लिए एकदम अनुकूल होता है।
- सितंबर से नवंबर (शरद ऋतु): मानसून के ठीक बाद आसमान बिल्कुल साफ होता है। इस दौरान हिमालय की चोटियाँ इतनी स्पष्ट दिखाई देती हैं कि लगता है हाथ बढ़ाते ही उन्हें छू लेंगे। फोटोग्राफी के लिए यह समय सर्वोत्तम है।
- दिसंबर से फरवरी (सर्दियों का मौसम): जो लोग बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं और स्कीइंग के शौकीन हैं, वे सर्दियों में आ सकते हैं। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड होती है और रास्ता काफी फिसलन भरा हो जाता है।
बजट और ठहरने के विकल्प (Where to Stay and Accommodation)
मुनस्यारी और खलिया टॉप ट्रेक के दौरान ठहरने के लिए बजट से लेकर प्रीमियम तक कई विकल्प मौजूद हैं:
- कैंपिंग (Camping): भुजानी या खलिया टॉप के पास खुले आसमान के नीचे टेंट में रहना सबसे रोमांचक अनुभव है। कई ट्रेकिंग एजेंसियां इसके लिए पूरा पैकेज देती हैं।
- KMVN गेस्ट हाउस: खलिया टॉप समिट से लगभग 1 किलोमीटर पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) का एक टूरिस्ट रेस्ट हाउस भी है। यहाँ आपको गरम पानी और बुनियादी सुविधाएं मिल जाती हैं। मुनस्यारी मुख्य बाजार में भी KMVN का बड़ा रेस्ट हाउस है।
- मुनस्यारी में बजट होटल्स: मुनस्यारी बस स्टैंड के पास पांडे लॉज, बिज्जू इन, और होटल हयात पैराडाइज जैसे कई विकल्प हैं, जहाँ ₹500 से लेकर ₹2500 तक में अच्छे कमरे मिल जाते हैं।
ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां (Essential Travel Tips)
खलिया टॉप ट्रेक भले ही आसान से मध्यम श्रेणी का हो, लेकिन हिमालय के मौसम और ऊंचाई को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यात्रा पर जाने से पहले इन बातों को नोट कर लें:
- पर्याप्त कैश (नकद) साथ रखें: मुनस्यारी और उसके आसपास के इलाकों में एटीएम हमेशा काम नहीं करते हैं, और नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पेमेंट (UPI) में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए पर्याप्त कैश साथ लेकर चलें।
- गर्म कपड़े ले जाना न भूलें: पहाड़ों पर रातें हमेशा ठंडी होती हैं। भले ही आप गर्मियों में जा रहे हों, अपने साथ एक अच्छी विंडप्रूफ जैकेट, थर्मल इनर और ऊनी टोपी जरूर रखें।
- शारीरिक फिटनेस: ट्रेक पर कुछ जगह चढ़ाई काफी खड़ी है। यात्रा पर जाने से कम से कम एक महीने पहले से रोजाना दौड़ने या वॉक करने की आदत डालें, इससे आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ेगी।
- एएमएस (Acute Mountain Sickness) के प्रति सतर्क रहें: जब आप अचानक अधिक ऊंचाई पर जाते हैं, तो सिरदर्द, उल्टी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं और चढ़ाई के दौरान जल्दबाजी न करें।
- फर्स्ट एड किट: अपनी जरूरी दवाइयों के साथ ओआरएस (ORS), दर्द निवारक स्प्रे, बैंडेज और एंटी-नोसिया (उल्टी रोकने की) दवाइयाँ हमेशा अपने पास रखें।
- ट्रेकिंग गियर: एक अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज और एक ट्रेकिंग पोल (Sticks) आपकी चढ़ाई और उतराई को 50% तक आसान बना देते हैं।

खलिया टॉप कैसे पहुँचें? (How to Reach Khaliya Top)
ट्रेन द्वारा (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम (KGM) है। दिल्ली, देहरादून, कोलकाता और लखनऊ से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं (जैसे शताब्दी और रानीखेत एक्सप्रेस)। काठगोदाम से आगे का सफर सड़क मार्ग से तय करना होता है।
सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 570 किमी है। आप दिल्ली के आनंद विहार से अल्मोड़ा या हल्द्वानी के लिए बस ले सकते हैं, और वहां से मुनस्यारी के लिए लोकल शेयरिंग टैक्सी या बस बदल सकते हैं। काठगोदाम से मुनस्यारी के लिए सुबह-सुबह सीधी टैक्सियां चलती हैं।
हवाई मार्ग द्वारा (By Air)
सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (PGH) है, जो काठगोदाम से करीब 32 किमी दूर है। पंतनगर के लिए दिल्ली और देहरादून से नियमित उड़ानें हैं। हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही आपको मुनस्यारी या काठगोदाम के लिए कैब मिल जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
खलिया टॉप ट्रेक केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के उस अनछुए रूप से साक्षात्कार है जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो गया है। घने जंगलों की ताजी हवा, पैरों के नीचे मखमली बुग्याल और आंखों के सामने पंचचूली का विशाल साम्राज्य—यह एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता।
चाहे आप अकेले यात्रा कर रहे हों, दोस्तों के साथ एडवेंचर पर हों या परिवार के साथ एक शांत वेकेशन चाहते हों, खलिया टॉप आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा। तो देर किस बात की? अपने बैग पैक कीजिए, पहाड़ों को अपना रुख कीजिए और खलिया टॉप के इस छिपे हुए खजाने को खुद अपनी आंखों से महसूस कीजिए।
क्या आपने कभी उत्तराखंड के बुग्यालों की यात्रा की है? खलिया टॉप के बारे में आपका क्या विचार है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
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धामी सरकार ने पेश किया 7,844 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट, जानिए किसे क्या मिला ?

Uttarakhand News : गैरसैंण में आज धामी सरकार ने 7,844 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इस बजट में किसानों से लेकर मरीजों, छात्रों, महिलाओं और खिलाड़ियों तक के लिए क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं ? किस योजना को कितनी रकम मिली और किन क्षेत्रों के लिए खोला गया सरकारी खजाना?
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धामी सरकार ने पेश किया 7,844 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण विधानसभा में 7,844 करोड़ 18 लाख रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इसके बाद प्रदेश के कुल बजट का आकार बढ़कर 1 लाख 19 हजार 547 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा।
अनुपूरक बजट में सबसे बड़े प्रावधानों में से एक धान-गेहूं खरीद के लिए है। अन्नपूर्ति योजना के तहत 1,100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। बारानी कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ और माइक्रो फूड प्रोसेसिंग योजना के लिए करीब 35 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
जानिए अनुपूरक बजट में किसे क्या मिला ?
अटल आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़ और कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये रखे गए हैं। पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों सहित नर्सिंग कॉलेजों के लिए करीब 160 करोड़ रुपये का प्रावधान है। वहीं, जल जीवन मिशन में बकाया भुगतान के लिए 300 करोड़ और डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

कुंभ मेले के लिए 290 करोड़ रुपये
आगामी दिव्य कुंभ मेले की व्यवस्थाओं के लिए करीब 290 करोड़ रुपये और हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर के लिए 30 करोड़ रुपये रखे गए हैं। खेल विश्वविद्यालय के लिए 35 करोड़, अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों के पुरस्कार के लिए 15 करोड़ और चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कल्याणकारी पेंशन के लिए करीब 93 करोड़, विधवा पेंशन के लिए 27 करोड़ और भोजन माताओं के मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वहीं, जोशीमठ समेत अन्य स्थानों पर भू-धंसाव से जुड़े कार्यों के लिए 48 करोड़ और पुलिस भवनों के निर्माण के लिए 55 करोड़ रुपये का प्रावधान है। ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 721 करोड़ रुपये भी रखे गए हैं।
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मसूरी में विंटर लाइन का मनमोहक नजारा, सूर्यास्त के रंगों में खो रहे पर्यटक

Mussoorie News : मसूरी में इन दिनों विंटर लाइन का खूबसूरत नजारा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सूर्यास्त के वक्त दून घाटी के आसमान में लाल, नारंगी और सुनहरे रंगों की अनूठी छटा बिखरती है। इस दृश्य को देखने के लिए पर्यटक माल रोड समेत शहर के कई स्थानों पर रुक रहे हैं।
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मसूरी में विंटर लाइन का मनमोहक नजारा
विंटर लाइन एक खास प्राकृतिक घटना है, जो आमतौर पर नवंबर से फरवरी के बीच दिखाई देती है। सूर्यास्त के दौरान क्षितिज पर रंगों की एक आकर्षक पट्टी उभरती है, जो लगभग 15 से 20 मिनट तक नजर आती है। मसूरी के अलावा स्विट्जरलैंड में भी इस तरह का नजारा देखने को मिलता है।
सूर्यास्त के रंगों में खो रहे पर्यटक
मसूरी में माल रोड, लालटिब्बा, गनहिल, विंसेट हिल, सिस्टर बाजार, राधा भवन स्टेट, सर्कुलर रोड, कुलड़ी और शहर के दक्षिणी हिस्सों से विंटर लाइन का दीदार किया जा सकता है। साफ मौसम में आसमान के बदलते रंग इस दृश्य को और भी खास बना देते हैं।

प्रसिद्ध लेखक गणेश सैली के अनुसार, मसूरी की प्राकृतिक खूबसूरती उसे दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग पहचान देती है। विंटर लाइन भी प्रकृति की ऐसी ही खास देन है, जिसे देखने के लिए माल रोड पर घूम रहे पर्यटक भी ठहर जाते हैं।
शहर में विशेष व्यू पॉइंट विकसित करने की योजना
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि विंटर लाइन को बढ़ावा देने के लिए शहर में विशेष व्यू पॉइंट विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही इस प्राकृतिक आकर्षण का प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि कम पर्यटकों वाले मौसम में भी मसूरी की ओर अधिक सैलानी आकर्षित हो सकें।
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उत्तराखंड में अशासकीय स्कूलों में भर्ती का रास्ता साफ, खाली पद भरने की तैयारी

Uttarakhand News : उत्तराखंड में सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता खुल गया है। लंबे समय से भर्ती पर लगी रोक हटाए जाने के बाद अब इन विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इससे उन स्कूलों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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उत्तराखंड में अशासकीय स्कूलों में भर्ती का रास्ता साफ
उत्तराखंड में अशासकीय स्कूलों में भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से भर्ती पर लगी रोक हट गई है। सरकार के फैसले के तहत विद्यालयों में नियुक्तियां छात्र संख्या और स्वीकृत रिक्त पदों के आधार पर की जाएंगी। भर्ती की जिम्मेदारी निर्धारित नियमों के अनुसार विद्यालय प्रबंधन समितियां निभा सकेंगी।
लंबे समय से खाली पदों को भरने की तैयारी
अशासकीय विद्यालयों में भर्ती पर रोक के कारण लंबे समय से रिक्त पदों को भरने में दिक्कतें आ रही थीं। शिक्षा मंत्री के अनुसार, कुछ विद्यालयों की प्रबंधन समितियां नियुक्तियों की अनुमति के लिए हाईकोर्ट तक पहुंच रही थीं, जबकि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बीच काम चलाया जा रहा था।
इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में नियमित शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता खोलने का निर्णय लिया है।

स्वीकृत पदों के आधार पर होंगी नियुक्तियां
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में उन्हीं रिक्त पदों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें सक्षम स्तर से बहाल या पुनर्जीवित किया गया है। नियुक्तियों का दायरा विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या और वास्तविक जरूरत के अनुसार निर्धारित होगा।
शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में शासनादेशों और निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का जोर नियुक्तियों को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने पर है, ताकि आगे किसी तरह की प्रशासनिक अड़चन न आए।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद
सरकार के इस फैसले से राज्य के सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, कितने पदों पर भर्ती होगी और किन विद्यालयों में नियुक्तियां की जाएंगी, यह स्वीकृत एवं बहाल पदों और छात्र संख्या के आधार पर तय होगा।
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