Uttarakhand
Khaliya Top Trek Hindi Guide 2026 : मुनस्यारी के इस छिपे हुए स्वर्ग की संपूर्ण यात्रा और जरूरी टिप्स

Khaliya Top Trek
क्या आप प्रकृति प्रेमी हैं और पहाड़ों की गॉड में कुछ पल सुकून के बिताना चाहते हैं? या फिर आप एक ऐसे एडवेंचर की तलाश में हैं जो बहुत ज्यादा थका देने वाला भी न हो और आपको हिमालय के गगनचुंबी शिखरों के बेहद करीब ले जाए? यदि हाँ, तो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित खलिया टॉप ट्रेक (Khaliya Top Trek) आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
कुमाऊं हिमालय की वादियों में बसा यह खूबसूरत मखमली घास का मैदान (Bugyal) समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर (11,483 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यदि आप इससे भी आगे जाना चाहते हैं, तो इसका उच्चतम बिंदु जीरो पॉइंट (Zero Point) है, जो 4,000 मीटर की ऊंचाई पर है। मुनस्यारी के पास स्थित यह ट्रेक न केवल आपको बर्फ से ढकी चोटियों के जादुई दर्शन कराता है, बल्कि घने जंगलों और अनूठे वन्यजीवों से भी रूबरू कराता है।
आइए, इस विस्तृत ट्रेवल गाइड में जानते हैं कि आप खलिया टॉप ट्रेक की योजना कैसे बना सकते हैं, यहाँ क्या खास है, और आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खलिया टॉप ट्रेक: एक नज़र में (Trek Overview)
ट्रेक पर निकलने से पहले इस यात्रा से जुड़ी मुख्य बातों को एक तालिका के माध्यम से समझ लेते हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | मुनस्यारी के पास, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड |
| अधिकतम ऊंचाई | 3,500 मीटर (खलिया टॉप), 4,000 मीटर (जीरो पॉइंट) |
| ट्रेक की दूरी | बलाती बेंड से लगभग 15 किमी (आना-जाना) |
| ट्रेक की अवधि | 3 से 4 दिन (काठगोदाम से काठगोदाम) |
| कठिनाई का स्तर | आसान से मध्यम (Easy to Moderate) |
| सबसे अच्छा समय | अप्रैल से जून (गर्मियों में) और सितंबर से नवंबर (सर्दियों की शुरुआत में) |
| मुख्य आकर्षण | पंचचूली, नंदा देवी, हरदेओल और राजरंभा चोटियों का 360-डिग्री व्यू |
खलिया टॉप क्यों है इतना खास? (Why Choose Khaliya Top Trek?)
उत्तराखंड में वैसे तो केदारकंठ, दयरा बुग्याल और रूपकुंड जैसे कई प्रसिद्ध ट्रेक हैं, लेकिन खलिया टॉप की बात ही कुछ अलग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. पांच प्रसिद्ध चोटियों के साक्षात दर्शन
खलिया टॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ से हिमालय की पांच प्रसिद्ध चोटियों—पंचचूली (Panchachuli), नंदा देवी (Nanda Devi), हरदेओल (Hardeol), नंदकोट (Nandakot), और राजरंभा (Rajrambha) का बेहद स्पष्ट और भव्य नजारा दिखाई देता है। शाम के समय जब डूबते सूरज की किरणें इन बर्फबारी चोटियों पर पड़ती हैं, तो ये सोने की तरह चमक उठती हैं। यह नजारा किसी का भी दिल जीतने के लिए काफी है।
2. जीरो पॉइंट का 360-डिग्री पैनोरैमिक व्यू
खलिया टॉप से महज 1 किलोमीटर आगे बढ़ने पर आप जीरो पॉइंट (Zero Point) पहुँचते हैं। 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान मुनस्यारी क्षेत्र का सबसे ऊँचा बिंदु है। यहाँ खड़े होकर जब आप चारों तरफ घूमते हैं, तो आपको बादलों का समंदर और हिमालय की अनंत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं, जो आपको दुनिया के शिखर पर होने का अहसास कराती हैं।
3. अद्भुत जैव विविधता और घने जंगल
यह ट्रेक बुरांश (Rhododendron), बांझ (Oak), देवदार (Cedar), और सनोवर (Spruce) के घने जंगलों से होकर गुजरता है। वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में जब लाल और गुलाबी बुरांश के फूल खिलते हैं, तो पूरा रास्ता किसी दुल्हन की तरह सज जाता है। इसके अलावा, यहाँ उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल (Monal), कस्तूरी मृग (Musk Deer), और पहाड़ी तीतर जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिल जाते हैं।
4. विंटर और समर स्पोर्ट्स
सर्दियों के महीनों में जब यह पूरा बुग्याल सफेद बर्फ की चादर से ढक जाता है, तब यह स्कीइंग (Skiing) के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन मैदान बन जाता है। यहाँ स्कीइंग ट्रेनिंग एसोसिएशन भी काम करते हैं। वहीं गर्मियों के दिनों में यहाँ पर्यटकों के रोमांच के लिए पैराग्लाइडिंग (Paragliding) का आयोजन भी किया जाता है।

खलिया टॉप ट्रेक का विस्तृत रूट मैप और यात्रा कार्यक्रम (Day-by-Day Itinerary)
खलिया टॉप की यात्रा को अच्छे से एन्जॉय करने के लिए 4 दिनों का यह रूट सबसे आदर्श माना जाता है:
दिन 1: काठगोदाम से मुनस्यारी (दूरी: 300 किमी, समय: 9-11 घंटे)
आपकी यात्रा कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम रेलवे स्टेशन से शुरू होती है। यहाँ से आपको मुनस्यारी के लिए सीधे टैक्सी या बस मिल जाएगी। यह सफर लंबा जरूर है, लेकिन बेहद खूबसूरत है। रास्ता अल्मोड़ा, बागेश्वर और थल जैसे पहाड़ी कस्बों से होकर गुजरता है। रास्ते में आपको हरे-भरे पहाड़, कलकल बहती नदियां और खूबसूरत बिरथी फॉल्स (Birthi Falls) देखने को मिलेंगे। शाम तक आप मुनस्यारी पहुँच जाएंगे, जहाँ आप किसी होटल या होमस्टे में विश्राम कर सकते हैं।
दिन 2: मुनस्यारी से बलाती बेंड (ड्राइव) और भुजानी तक ट्रेक (ट्रेक दूरी: 2 किमी)
सुबह मुनस्यारी के शांत वातावरण में पंचचूली चोटियों के दर्शन के साथ शुरुआत करें। इसके बाद मुनस्यारी से करीब 9 किमी दूर बलाती बेंड (Balati Bend) के लिए ड्राइव करें। बलाती बेंड ही इस ट्रेक का शुरुआती बिंदु (Starting Point) है। यहाँ से आपका पैदल सफर शुरू होता है। पहले दिन आपको घने जंगलों के बीच से होते हुए भुजानी (Bhujani) बेस कैंप तक लगभग 2 किमी की चढ़ाई करनी होगी। कुछ हिस्से थोड़े सीधे और थका देने वाले हैं, इसलिए अपनी गति धीमी रखें। रात का ठहराव भुजानी में टेंट के अंदर तारों की छांव में होगा।
दिन 3: भुजानी से खलिया टॉप और जीरो पॉइंट, वापसी मुनस्यारी (ट्रेक दूरी: 8 किमी)
यह इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत दिन है। सुबह जल्दी उठकर भुजानी से खलिया टॉप की ओर बढ़ें। जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ेंगे, पेड़ कम होने लगेंगे और विशाल मखमली घास के मैदान आपका स्वागत करेंगे। खलिया टॉप पहुँचकर आपको जो दृश्य दिखेगा, वह आपकी सारी थकान मिटा देगा।
यदि मौसम साफ हो और आपकी शारीरिक क्षमता अनुमति दे, तो यहाँ से 1 किमी आगे जीरो पॉइंट तक जरूर जाएं। वहाँ की जादुई खूबसूरती को अपने कैमरे और यादों में कैद करने के बाद, वापस बलाती बेंड की तरफ उतरना शुरू करें। बलाती बेंड से गाड़ी पकड़कर शाम तक वापस मुनस्यारी आ जाएं और होटल में आराम करें।
दिन 4: मुनस्यारी से काठगोदाम (वापसी)
सुबह नाश्ते के बाद, अपनी खूबसूरत यादों के साथ वापस काठगोदाम के लिए प्रस्थान करें। शाम तक काठगोदाम पहुँचकर आप अपनी आगे की ट्रेन या बस पकड़ सकते हैं।

खलिया टॉप जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
यूं तो खलिया टॉप साल के अधिकांश महीनों में खूबसूरत लगता है, लेकिन आपकी पसंद के आधार पर दो बेहतरीन सीजन हैं:
- अप्रैल से जून (वसंत और गर्मी): यदि आप खिले हुए रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी घास और सुहावना मौसम देखना चाहते हैं, तो यह समय सबसे बेस्ट है। इस समय तापमान ट्रेकिंग के लिए एकदम अनुकूल होता है।
- सितंबर से नवंबर (शरद ऋतु): मानसून के ठीक बाद आसमान बिल्कुल साफ होता है। इस दौरान हिमालय की चोटियाँ इतनी स्पष्ट दिखाई देती हैं कि लगता है हाथ बढ़ाते ही उन्हें छू लेंगे। फोटोग्राफी के लिए यह समय सर्वोत्तम है।
- दिसंबर से फरवरी (सर्दियों का मौसम): जो लोग बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं और स्कीइंग के शौकीन हैं, वे सर्दियों में आ सकते हैं। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड होती है और रास्ता काफी फिसलन भरा हो जाता है।
बजट और ठहरने के विकल्प (Where to Stay and Accommodation)
मुनस्यारी और खलिया टॉप ट्रेक के दौरान ठहरने के लिए बजट से लेकर प्रीमियम तक कई विकल्प मौजूद हैं:
- कैंपिंग (Camping): भुजानी या खलिया टॉप के पास खुले आसमान के नीचे टेंट में रहना सबसे रोमांचक अनुभव है। कई ट्रेकिंग एजेंसियां इसके लिए पूरा पैकेज देती हैं।
- KMVN गेस्ट हाउस: खलिया टॉप समिट से लगभग 1 किलोमीटर पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) का एक टूरिस्ट रेस्ट हाउस भी है। यहाँ आपको गरम पानी और बुनियादी सुविधाएं मिल जाती हैं। मुनस्यारी मुख्य बाजार में भी KMVN का बड़ा रेस्ट हाउस है।
- मुनस्यारी में बजट होटल्स: मुनस्यारी बस स्टैंड के पास पांडे लॉज, बिज्जू इन, और होटल हयात पैराडाइज जैसे कई विकल्प हैं, जहाँ ₹500 से लेकर ₹2500 तक में अच्छे कमरे मिल जाते हैं।
ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां (Essential Travel Tips)
खलिया टॉप ट्रेक भले ही आसान से मध्यम श्रेणी का हो, लेकिन हिमालय के मौसम और ऊंचाई को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यात्रा पर जाने से पहले इन बातों को नोट कर लें:
- पर्याप्त कैश (नकद) साथ रखें: मुनस्यारी और उसके आसपास के इलाकों में एटीएम हमेशा काम नहीं करते हैं, और नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पेमेंट (UPI) में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए पर्याप्त कैश साथ लेकर चलें।
- गर्म कपड़े ले जाना न भूलें: पहाड़ों पर रातें हमेशा ठंडी होती हैं। भले ही आप गर्मियों में जा रहे हों, अपने साथ एक अच्छी विंडप्रूफ जैकेट, थर्मल इनर और ऊनी टोपी जरूर रखें।
- शारीरिक फिटनेस: ट्रेक पर कुछ जगह चढ़ाई काफी खड़ी है। यात्रा पर जाने से कम से कम एक महीने पहले से रोजाना दौड़ने या वॉक करने की आदत डालें, इससे आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ेगी।
- एएमएस (Acute Mountain Sickness) के प्रति सतर्क रहें: जब आप अचानक अधिक ऊंचाई पर जाते हैं, तो सिरदर्द, उल्टी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं और चढ़ाई के दौरान जल्दबाजी न करें।
- फर्स्ट एड किट: अपनी जरूरी दवाइयों के साथ ओआरएस (ORS), दर्द निवारक स्प्रे, बैंडेज और एंटी-नोसिया (उल्टी रोकने की) दवाइयाँ हमेशा अपने पास रखें।
- ट्रेकिंग गियर: एक अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज और एक ट्रेकिंग पोल (Sticks) आपकी चढ़ाई और उतराई को 50% तक आसान बना देते हैं।

खलिया टॉप कैसे पहुँचें? (How to Reach Khaliya Top)
ट्रेन द्वारा (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम (KGM) है। दिल्ली, देहरादून, कोलकाता और लखनऊ से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं (जैसे शताब्दी और रानीखेत एक्सप्रेस)। काठगोदाम से आगे का सफर सड़क मार्ग से तय करना होता है।
सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 570 किमी है। आप दिल्ली के आनंद विहार से अल्मोड़ा या हल्द्वानी के लिए बस ले सकते हैं, और वहां से मुनस्यारी के लिए लोकल शेयरिंग टैक्सी या बस बदल सकते हैं। काठगोदाम से मुनस्यारी के लिए सुबह-सुबह सीधी टैक्सियां चलती हैं।
हवाई मार्ग द्वारा (By Air)
सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (PGH) है, जो काठगोदाम से करीब 32 किमी दूर है। पंतनगर के लिए दिल्ली और देहरादून से नियमित उड़ानें हैं। हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही आपको मुनस्यारी या काठगोदाम के लिए कैब मिल जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
खलिया टॉप ट्रेक केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के उस अनछुए रूप से साक्षात्कार है जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो गया है। घने जंगलों की ताजी हवा, पैरों के नीचे मखमली बुग्याल और आंखों के सामने पंचचूली का विशाल साम्राज्य—यह एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता।
चाहे आप अकेले यात्रा कर रहे हों, दोस्तों के साथ एडवेंचर पर हों या परिवार के साथ एक शांत वेकेशन चाहते हों, खलिया टॉप आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा। तो देर किस बात की? अपने बैग पैक कीजिए, पहाड़ों को अपना रुख कीजिए और खलिया टॉप के इस छिपे हुए खजाने को खुद अपनी आंखों से महसूस कीजिए।
क्या आपने कभी उत्तराखंड के बुग्यालों की यात्रा की है? खलिया टॉप के बारे में आपका क्या विचार है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
Haldwani
हल्द्वानी के लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा, रेत में दबने से मजदूर की मौत

Haldwani News : उत्तराखंड के लालकुआं में एक स्टोन क्रशर पर हुए दर्दनाक हादसे ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्दूचौड़ निवासी 30 वर्षीय मजदूर पवन सिंह की काम के दौरान रेत में दबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि डंपर में रेत भरने की प्रक्रिया के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
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लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा
लालकुंआ में दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। मिली जानकारी क मुताबिक हल्दूचौड़ निवासी पवन सिंह रोज की तरह सुबह काम पर गया था। स्टोन क्रशर में वह डंपर के किनारों पर कट्टे लगा रहा था ताकि रेत बाहर न गिरे।
रेत में दबने से मजदूर की मौत
इसी दौरान लोडर चालक ने कथित तौर पर बिना ये देखे कि डंपर में कोई व्यक्ति मौजूद है या नहीं, उसमें रेत डालनी शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में पवन भारी मात्रा में रेत के नीचे दब गया। बरसात के कारण रेत गीली और अधिक भारी थी, जिससे उसके बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं बची।
रेत खाली करते समय चला हादसे का पता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ समय बाद जब डंपर से रेत उतारी जा रही थी, तब मजदूरों को रेत के नीचे पवन के दबे होने की जानकारी मिली। इसके बाद सभी ने मिलकर उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। माना जा रहा है कि रेत के दबाव और दम घुटने की वजह से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मशीन चलाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता कि डंपर के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारी मशीनों के संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। मशीन शुरू करने से पहले कर्मचारियों की मौजूदगी की पुष्टि करना, आपसी समन्वय बनाए रखना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
Haridwar
हरिद्वार में VIP नंबरों की दीवानगी, कार से महंगा खरीदा नंबर, 5.40 लाख की लगी बोली

Haridwar News : हरिद्वार में वाहन मालिकों के बीच वीआईपी और फैंसी नंबरों का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। परिवहन विभाग की नई वाहन पंजीकरण श्रृंखला UK08 BM शुरू होते ही ऑनलाइन ई-नीलामी में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
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हरिद्वार में VIP नंबरों की दीवानगी, कार से महंगा खरीदा
हरिद्वार में नीलामी में कई पसंदीदा नंबरों पर लाखों रुपये की बोलियां लगीं। सबसे ज्यादा चर्चा UK08 BM 0009 नंबर की रही, जिसे एक वाहन स्वामी ने ₹5.40 लाख की रिकॉर्ड बोली लगाकर अपने नाम कराया। खास बात ये है कि इतनी रकम में एक छोटी कार खरीदी जा सकती है।
फैंसी नंबरों के लिए जबरदस्त उत्साह
वाहनों पर अलग और आकर्षक नंबर लगाने का शौक लोगों में लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि 0001, 0009, 1111, 8888 और 5555 जैसे नंबरों के लिए हर बार कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। परिवहन विभाग इन विशेष नंबरों को सामान्य पंजीकरण की बजाय ऑनलाइन ई-ऑक्शन के जरिए आवंटित करता है। सबसे अधिक बोली लगाने वाले व्यक्ति को संबंधित नंबर जारी किया जाता है।
नई सीरीज खुलते ही लाखों की बोली
परिवहन विभाग के अनुसार, नई वाहन पंजीकरण श्रृंखला UK08 BM शुरू होते ही आकर्षक नंबरों के लिए भारी उत्साह देखने को मिला। ऑनलाइन ई-नीलामी में बड़ी संख्या में वाहन स्वामियों ने भाग लिया और कई नंबरों पर उम्मीद से कहीं अधिक बोली लगी। विभाग का कहना है कि इससे साफ है कि फैंसी और वीआईपी नंबरों की मांग लगातार बढ़ रही है।
₹5.40 लाख में बिका सबसे चर्चित नंबर
ई-नीलामी में UK08 BM 0009 सबसे महंगा नंबर साबित हुआ। इस नंबर के लिए ₹5.40 लाख की सबसे ऊंची बोली लगी। ये राशि इतनी अधिक है कि इससे एक नई छोटी कार खरीदी जा सकती है। यही कारण है कि ये नंबर पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया।
Uttarkashi
उत्तरकाशी में वरूणा नदी में नहाते समय 18 वर्षीय युवक लापता, SDRF का सर्च ऑपरेशन जारी

Uttarkashi News : उत्तरकाशी जिले में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। जिला मुख्यालय के पास स्थित वरूणा नदी में दोस्तों के साथ नहाने गया 18 वर्षीय युवक तेज बहाव की चपेट में आकर लापता हो गया।
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उत्तरकाशी में दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था युवक
उत्तरकाशी में ज्ञानसू निवासी 18 वर्षीय अनमोल जोशी, पुत्र महेश जोशी, रविवार दोपहर अपने दोस्तों के साथ वरूणा नदी में स्नान करने गया था। बताया गया कि बड़ेथी चुंगी के पास वो नदी में छलांग लगाकर नहा रहा था। इसी दौरान नदी का तेज बहाव उसे अपनी चपेट में ले गया और वो पानी में बहने लगा।
दोस्तों ने मचाया शोर, स्थानीय लोगों ने किया बचाने का प्रयास
घटना होते ही अनमोल के साथ मौजूद दोस्तों ने मदद के लिए शोर मचाया। आसपास मौजूद लोगों ने भी नदी में बह रहे युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण वह कुछ ही पलों में उनकी नजरों से ओझल हो गया। इसके बाद तुरंत पुलिस और जिला प्रशासन को सूचना दी गई।

पुलिस, एसडीआरएफ और क्यूआरटी ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और क्विक रिस्पांस टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। राहत एवं बचाव दल ने मौके का निरीक्षण करने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने वरूणा नदी के कई हिस्सों में खोजबीन की और गंगा नदी तक तलाशी अभियान चलाया।
हालांकि देर शाम तक चले अभियान के दौरान युवक का कोई पता नहीं चल पाया। प्रशासन का कहना है कि खोज एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और नदी के आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी रखी जा रही है।
परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
घटना की खबर मिलते ही अनमोल के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। अपने बेटे के लापता होने की सूचना से परिवार सदमे में है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि स्थानीय लोग भी युवक के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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