Uttarakhand
Khaliya Top Trek Hindi Guide 2026 : मुनस्यारी के इस छिपे हुए स्वर्ग की संपूर्ण यात्रा और जरूरी टिप्स

Khaliya Top Trek
क्या आप प्रकृति प्रेमी हैं और पहाड़ों की गॉड में कुछ पल सुकून के बिताना चाहते हैं? या फिर आप एक ऐसे एडवेंचर की तलाश में हैं जो बहुत ज्यादा थका देने वाला भी न हो और आपको हिमालय के गगनचुंबी शिखरों के बेहद करीब ले जाए? यदि हाँ, तो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित खलिया टॉप ट्रेक (Khaliya Top Trek) आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
कुमाऊं हिमालय की वादियों में बसा यह खूबसूरत मखमली घास का मैदान (Bugyal) समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर (11,483 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यदि आप इससे भी आगे जाना चाहते हैं, तो इसका उच्चतम बिंदु जीरो पॉइंट (Zero Point) है, जो 4,000 मीटर की ऊंचाई पर है। मुनस्यारी के पास स्थित यह ट्रेक न केवल आपको बर्फ से ढकी चोटियों के जादुई दर्शन कराता है, बल्कि घने जंगलों और अनूठे वन्यजीवों से भी रूबरू कराता है।
आइए, इस विस्तृत ट्रेवल गाइड में जानते हैं कि आप खलिया टॉप ट्रेक की योजना कैसे बना सकते हैं, यहाँ क्या खास है, और आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
खलिया टॉप ट्रेक: एक नज़र में (Trek Overview)
ट्रेक पर निकलने से पहले इस यात्रा से जुड़ी मुख्य बातों को एक तालिका के माध्यम से समझ लेते हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| स्थान | मुनस्यारी के पास, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड |
| अधिकतम ऊंचाई | 3,500 मीटर (खलिया टॉप), 4,000 मीटर (जीरो पॉइंट) |
| ट्रेक की दूरी | बलाती बेंड से लगभग 15 किमी (आना-जाना) |
| ट्रेक की अवधि | 3 से 4 दिन (काठगोदाम से काठगोदाम) |
| कठिनाई का स्तर | आसान से मध्यम (Easy to Moderate) |
| सबसे अच्छा समय | अप्रैल से जून (गर्मियों में) और सितंबर से नवंबर (सर्दियों की शुरुआत में) |
| मुख्य आकर्षण | पंचचूली, नंदा देवी, हरदेओल और राजरंभा चोटियों का 360-डिग्री व्यू |
खलिया टॉप क्यों है इतना खास? (Why Choose Khaliya Top Trek?)
उत्तराखंड में वैसे तो केदारकंठ, दयरा बुग्याल और रूपकुंड जैसे कई प्रसिद्ध ट्रेक हैं, लेकिन खलिया टॉप की बात ही कुछ अलग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. पांच प्रसिद्ध चोटियों के साक्षात दर्शन
खलिया टॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ से हिमालय की पांच प्रसिद्ध चोटियों—पंचचूली (Panchachuli), नंदा देवी (Nanda Devi), हरदेओल (Hardeol), नंदकोट (Nandakot), और राजरंभा (Rajrambha) का बेहद स्पष्ट और भव्य नजारा दिखाई देता है। शाम के समय जब डूबते सूरज की किरणें इन बर्फबारी चोटियों पर पड़ती हैं, तो ये सोने की तरह चमक उठती हैं। यह नजारा किसी का भी दिल जीतने के लिए काफी है।
2. जीरो पॉइंट का 360-डिग्री पैनोरैमिक व्यू
खलिया टॉप से महज 1 किलोमीटर आगे बढ़ने पर आप जीरो पॉइंट (Zero Point) पहुँचते हैं। 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान मुनस्यारी क्षेत्र का सबसे ऊँचा बिंदु है। यहाँ खड़े होकर जब आप चारों तरफ घूमते हैं, तो आपको बादलों का समंदर और हिमालय की अनंत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं, जो आपको दुनिया के शिखर पर होने का अहसास कराती हैं।
3. अद्भुत जैव विविधता और घने जंगल
यह ट्रेक बुरांश (Rhododendron), बांझ (Oak), देवदार (Cedar), और सनोवर (Spruce) के घने जंगलों से होकर गुजरता है। वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में जब लाल और गुलाबी बुरांश के फूल खिलते हैं, तो पूरा रास्ता किसी दुल्हन की तरह सज जाता है। इसके अलावा, यहाँ उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल (Monal), कस्तूरी मृग (Musk Deer), और पहाड़ी तीतर जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिल जाते हैं।
4. विंटर और समर स्पोर्ट्स
सर्दियों के महीनों में जब यह पूरा बुग्याल सफेद बर्फ की चादर से ढक जाता है, तब यह स्कीइंग (Skiing) के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन मैदान बन जाता है। यहाँ स्कीइंग ट्रेनिंग एसोसिएशन भी काम करते हैं। वहीं गर्मियों के दिनों में यहाँ पर्यटकों के रोमांच के लिए पैराग्लाइडिंग (Paragliding) का आयोजन भी किया जाता है।

खलिया टॉप ट्रेक का विस्तृत रूट मैप और यात्रा कार्यक्रम (Day-by-Day Itinerary)
खलिया टॉप की यात्रा को अच्छे से एन्जॉय करने के लिए 4 दिनों का यह रूट सबसे आदर्श माना जाता है:
दिन 1: काठगोदाम से मुनस्यारी (दूरी: 300 किमी, समय: 9-11 घंटे)
आपकी यात्रा कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम रेलवे स्टेशन से शुरू होती है। यहाँ से आपको मुनस्यारी के लिए सीधे टैक्सी या बस मिल जाएगी। यह सफर लंबा जरूर है, लेकिन बेहद खूबसूरत है। रास्ता अल्मोड़ा, बागेश्वर और थल जैसे पहाड़ी कस्बों से होकर गुजरता है। रास्ते में आपको हरे-भरे पहाड़, कलकल बहती नदियां और खूबसूरत बिरथी फॉल्स (Birthi Falls) देखने को मिलेंगे। शाम तक आप मुनस्यारी पहुँच जाएंगे, जहाँ आप किसी होटल या होमस्टे में विश्राम कर सकते हैं।
दिन 2: मुनस्यारी से बलाती बेंड (ड्राइव) और भुजानी तक ट्रेक (ट्रेक दूरी: 2 किमी)
सुबह मुनस्यारी के शांत वातावरण में पंचचूली चोटियों के दर्शन के साथ शुरुआत करें। इसके बाद मुनस्यारी से करीब 9 किमी दूर बलाती बेंड (Balati Bend) के लिए ड्राइव करें। बलाती बेंड ही इस ट्रेक का शुरुआती बिंदु (Starting Point) है। यहाँ से आपका पैदल सफर शुरू होता है। पहले दिन आपको घने जंगलों के बीच से होते हुए भुजानी (Bhujani) बेस कैंप तक लगभग 2 किमी की चढ़ाई करनी होगी। कुछ हिस्से थोड़े सीधे और थका देने वाले हैं, इसलिए अपनी गति धीमी रखें। रात का ठहराव भुजानी में टेंट के अंदर तारों की छांव में होगा।
दिन 3: भुजानी से खलिया टॉप और जीरो पॉइंट, वापसी मुनस्यारी (ट्रेक दूरी: 8 किमी)
यह इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत दिन है। सुबह जल्दी उठकर भुजानी से खलिया टॉप की ओर बढ़ें। जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ेंगे, पेड़ कम होने लगेंगे और विशाल मखमली घास के मैदान आपका स्वागत करेंगे। खलिया टॉप पहुँचकर आपको जो दृश्य दिखेगा, वह आपकी सारी थकान मिटा देगा।
यदि मौसम साफ हो और आपकी शारीरिक क्षमता अनुमति दे, तो यहाँ से 1 किमी आगे जीरो पॉइंट तक जरूर जाएं। वहाँ की जादुई खूबसूरती को अपने कैमरे और यादों में कैद करने के बाद, वापस बलाती बेंड की तरफ उतरना शुरू करें। बलाती बेंड से गाड़ी पकड़कर शाम तक वापस मुनस्यारी आ जाएं और होटल में आराम करें।
दिन 4: मुनस्यारी से काठगोदाम (वापसी)
सुबह नाश्ते के बाद, अपनी खूबसूरत यादों के साथ वापस काठगोदाम के लिए प्रस्थान करें। शाम तक काठगोदाम पहुँचकर आप अपनी आगे की ट्रेन या बस पकड़ सकते हैं।

खलिया टॉप जाने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
यूं तो खलिया टॉप साल के अधिकांश महीनों में खूबसूरत लगता है, लेकिन आपकी पसंद के आधार पर दो बेहतरीन सीजन हैं:
- अप्रैल से जून (वसंत और गर्मी): यदि आप खिले हुए रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी घास और सुहावना मौसम देखना चाहते हैं, तो यह समय सबसे बेस्ट है। इस समय तापमान ट्रेकिंग के लिए एकदम अनुकूल होता है।
- सितंबर से नवंबर (शरद ऋतु): मानसून के ठीक बाद आसमान बिल्कुल साफ होता है। इस दौरान हिमालय की चोटियाँ इतनी स्पष्ट दिखाई देती हैं कि लगता है हाथ बढ़ाते ही उन्हें छू लेंगे। फोटोग्राफी के लिए यह समय सर्वोत्तम है।
- दिसंबर से फरवरी (सर्दियों का मौसम): जो लोग बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं और स्कीइंग के शौकीन हैं, वे सर्दियों में आ सकते हैं। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड होती है और रास्ता काफी फिसलन भरा हो जाता है।
बजट और ठहरने के विकल्प (Where to Stay and Accommodation)
मुनस्यारी और खलिया टॉप ट्रेक के दौरान ठहरने के लिए बजट से लेकर प्रीमियम तक कई विकल्प मौजूद हैं:
- कैंपिंग (Camping): भुजानी या खलिया टॉप के पास खुले आसमान के नीचे टेंट में रहना सबसे रोमांचक अनुभव है। कई ट्रेकिंग एजेंसियां इसके लिए पूरा पैकेज देती हैं।
- KMVN गेस्ट हाउस: खलिया टॉप समिट से लगभग 1 किलोमीटर पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) का एक टूरिस्ट रेस्ट हाउस भी है। यहाँ आपको गरम पानी और बुनियादी सुविधाएं मिल जाती हैं। मुनस्यारी मुख्य बाजार में भी KMVN का बड़ा रेस्ट हाउस है।
- मुनस्यारी में बजट होटल्स: मुनस्यारी बस स्टैंड के पास पांडे लॉज, बिज्जू इन, और होटल हयात पैराडाइज जैसे कई विकल्प हैं, जहाँ ₹500 से लेकर ₹2500 तक में अच्छे कमरे मिल जाते हैं।
ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां (Essential Travel Tips)
खलिया टॉप ट्रेक भले ही आसान से मध्यम श्रेणी का हो, लेकिन हिमालय के मौसम और ऊंचाई को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यात्रा पर जाने से पहले इन बातों को नोट कर लें:
- पर्याप्त कैश (नकद) साथ रखें: मुनस्यारी और उसके आसपास के इलाकों में एटीएम हमेशा काम नहीं करते हैं, और नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पेमेंट (UPI) में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए पर्याप्त कैश साथ लेकर चलें।
- गर्म कपड़े ले जाना न भूलें: पहाड़ों पर रातें हमेशा ठंडी होती हैं। भले ही आप गर्मियों में जा रहे हों, अपने साथ एक अच्छी विंडप्रूफ जैकेट, थर्मल इनर और ऊनी टोपी जरूर रखें।
- शारीरिक फिटनेस: ट्रेक पर कुछ जगह चढ़ाई काफी खड़ी है। यात्रा पर जाने से कम से कम एक महीने पहले से रोजाना दौड़ने या वॉक करने की आदत डालें, इससे आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ेगी।
- एएमएस (Acute Mountain Sickness) के प्रति सतर्क रहें: जब आप अचानक अधिक ऊंचाई पर जाते हैं, तो सिरदर्द, उल्टी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं और चढ़ाई के दौरान जल्दबाजी न करें।
- फर्स्ट एड किट: अपनी जरूरी दवाइयों के साथ ओआरएस (ORS), दर्द निवारक स्प्रे, बैंडेज और एंटी-नोसिया (उल्टी रोकने की) दवाइयाँ हमेशा अपने पास रखें।
- ट्रेकिंग गियर: एक अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज और एक ट्रेकिंग पोल (Sticks) आपकी चढ़ाई और उतराई को 50% तक आसान बना देते हैं।

खलिया टॉप कैसे पहुँचें? (How to Reach Khaliya Top)
ट्रेन द्वारा (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम (KGM) है। दिल्ली, देहरादून, कोलकाता और लखनऊ से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं (जैसे शताब्दी और रानीखेत एक्सप्रेस)। काठगोदाम से आगे का सफर सड़क मार्ग से तय करना होता है।
सड़क मार्ग द्वारा (By Road)
दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 570 किमी है। आप दिल्ली के आनंद विहार से अल्मोड़ा या हल्द्वानी के लिए बस ले सकते हैं, और वहां से मुनस्यारी के लिए लोकल शेयरिंग टैक्सी या बस बदल सकते हैं। काठगोदाम से मुनस्यारी के लिए सुबह-सुबह सीधी टैक्सियां चलती हैं।
हवाई मार्ग द्वारा (By Air)
सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (PGH) है, जो काठगोदाम से करीब 32 किमी दूर है। पंतनगर के लिए दिल्ली और देहरादून से नियमित उड़ानें हैं। हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही आपको मुनस्यारी या काठगोदाम के लिए कैब मिल जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
खलिया टॉप ट्रेक केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के उस अनछुए रूप से साक्षात्कार है जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो गया है। घने जंगलों की ताजी हवा, पैरों के नीचे मखमली बुग्याल और आंखों के सामने पंचचूली का विशाल साम्राज्य—यह एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता।
चाहे आप अकेले यात्रा कर रहे हों, दोस्तों के साथ एडवेंचर पर हों या परिवार के साथ एक शांत वेकेशन चाहते हों, खलिया टॉप आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा। तो देर किस बात की? अपने बैग पैक कीजिए, पहाड़ों को अपना रुख कीजिए और खलिया टॉप के इस छिपे हुए खजाने को खुद अपनी आंखों से महसूस कीजिए।
क्या आपने कभी उत्तराखंड के बुग्यालों की यात्रा की है? खलिया टॉप के बारे में आपका क्या विचार है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
Uttarakhand
CM धामी का बड़ा फैसला: देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में पेड़ों का कटान फिलहाल स्थगित

मुख्यमंत्री बोले- जनभावनाओं, पर्यावरण और विकास तीनों हैं समान रूप से महत्वपूर्ण
देहरादून–ऋषिकेश : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि पिछले कुछ दिनों से नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं एवं सुझावों का उन्होंने गंभीरता से संज्ञान लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी।
देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना
उन्होंने बताया कि देहरादून–ऋषिकेश परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रावधान किया गया है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु की घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से पुनः विस्तृत संवाद स्थापित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों एवं निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हुए आगे की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति एवं विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान स्थगित रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए उत्तराखण्ड की प्रकृति, जनभावनाएँ और प्रदेश का विकास तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं तथा सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।
Uttarakhand
Ramnagar Dehradun Express Train : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उत्तराखंड को दी बड़ी सौगात , रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन को दिखाई हरी झंडी…

Ramnagar Dehradun Express Train : उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रामनगर से प्रदेश की राजधानी देहरादून के लिए पहली बार सीधी रेल सेवा की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल माध्यम) के जरिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर रामनगर रेलवे स्टेशन को बेहद खूबसूरती से सजाया गया था, जहाँ स्थानीय निवासियों, रेलवे अधिकारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भारी उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिला।
Table of Contents
कुमाऊं के विकास और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
वर्चुअल समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह नई रेल सेवा कुमाऊं और गढ़वाल के बीच के संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी। इस ट्रेन के चलने से छात्रों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आवागमन में बड़ी सुविधा होगी। वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड में आधुनिक रेल बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तार कर रही है, और यह नई ट्रेन उसी संकल्प का हिस्सा है।
रामनगर रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद क्षेत्रीय सांसद अनिल बलूनी ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा:
“यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने वाला कदम है।”

सप्ताह में 6 दिन चलाने का है लक्ष्य
सांसद अनिल बलूनी ने जनता को भरोसा दिलाया कि वर्तमान में यह ट्रेन सप्ताह में दो दिन चलेगी, लेकिन जल्द ही इसे सप्ताह में छह दिन संचालित कराने के प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने रामनगर से देश की राजधानी दिल्ली के लिए भी एक सुपरफास्ट ट्रेन शुरू कराने की प्रतिबद्धता जताई।
विकास कार्यों पर बात करते हुए उन्होंने कंडी मार्ग मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने की जानकारी दी और कहा कि भाजपा सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल उद्घाटन कार्यक्रमों में शामिल होना नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्यों को समय से पूरा कर जनता को सुविधाएं पहुंचाना है।
Ramnagar Dehradun Express Train: समय सारणी और रूट (Time Table & Route)
यात्रियों की सुविधा के लिए इस नई एक्सप्रेस ट्रेन का शेड्यूल और रूट इस प्रकार तय किया गया है:
- दिन: यह ट्रेन प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को संचालित की जाएगी।
- रामनगर से देहरादून: सुबह 05:50 बजे रामनगर से प्रस्थान करेगी और दोपहर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी।
- देहरादून से रामनगर (वापसी): दोपहर 03:55 बजे देहरादून से रवाना होकर रात 11:30 बजे रामनगर वापस लौटेगी।
- प्रमुख ठहराव (Stoppages): अपनी यात्रा के दौरान यह ट्रेन दोनों दिशाओं में काशीपुर, रोशनपुर, पीपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।
कार्यक्रम में शामिल हुए कई दिग्गज
इस भव्य शुभारंभ कार्यक्रम में सांसद अनिल बलूनी के अलावा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक अरविंद पांडे, स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट सहित रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी और भारी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार के इस फैसले की सराहना की।
Uttarakhand
डोबरा-चांटी मोटर मार्ग बदहाल, गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा; लोगों ने PWD से लगाई मरम्मत की गुहार
Dobra Chanti Motor Road: प्रतापनगर की जीवनरेखा बनी परेशानी
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के प्रतापनगर क्षेत्र की Dobra Chanti Motor Road इन दिनों बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। सड़क पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
Table of Contents
जगह-जगह बने गहरे गड्ढे, सफर हुआ मुश्किल
स्थानीय लोगों के अनुसार डोबरा-चांटी मोटर मार्ग पर लंबे समय से मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन गए हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को बेहद सावधानी से गुजरना पड़ रहा है।
बरसात के दौरान जलभराव के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे वाहन फिसलने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
कई बार की गई शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक सड़क की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही का मुख्य रास्ता है। स्कूली बच्चों, मरीजों, कर्मचारियों और व्यापारियों सहित बड़ी संख्या में लोग इसी सड़क का उपयोग करते हैं।
क्षेत्रवासियों ने उठाई मरम्मत की मांग
क्षेत्रवासियों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन से डोबरा-चांटी मोटर मार्ग की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो बरसात के मौसम में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
लोगों ने प्रशासन से सड़क की स्थिति का जल्द निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराने की अपील की है, ताकि आम जनता को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
FAQ’S
प्रश्न 1: डोबरा-चांटी मोटर मार्ग कहाँ स्थित है?
उत्तर: डोबरा-चांटी मोटर मार्ग उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के प्रतापनगर क्षेत्र में स्थित है। यह कई गांवों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
प्रश्न 3: डोबरा-चांटी मोटर मार्ग की खराब स्थिति से लोगों को क्या परेशानियां हो रही हैं?
उत्तर: वाहन चालकों और राहगीरों को गड्ढों, उखड़ी हुई सड़क और जलभराव के कारण रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग अधिक जोखिमभरा बन गया है।
प्रश्न 4: डोबरा-चांटी मार्ग स्थानीय लोगों की क्या मांग है?
उत्तर: क्षेत्रवासियों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रशासन से डोबरा-चांटी मोटर मार्ग की जल्द से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके।
प्रश्न 5: डोबरा-चांटी मार्ग की मरम्मत क्यों जरूरी है?
उत्तर: यह मार्ग प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही का मुख्य रास्ता है। समय पर मरम्मत होने से दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और स्थानीय लोगों को सुरक्षित एवं बेहतर यातायात सुविधा मिल सकेगी।
READ MORE
केतन हत्याकांड में आया बड़ा मोड़, मृतक और उसके दोस्त खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
Cricket18 hours agoगल्ले मारवाल्स बनाम कोलोंबो स्ट्राइकर्स आज की ड्रीम टीम , लंका प्रीमियर लीग मैच 3 (18-07-2026)
Uttarakhand18 hours agoडोबरा-चांटी मोटर मार्ग बदहाल, गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा; लोगों ने PWD से लगाई मरम्मत की गुहार
Uttarakhand15 hours agoRamnagar Dehradun Express Train : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उत्तराखंड को दी बड़ी सौगात , रामनगर–देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन को दिखाई हरी झंडी…
Breakingnews14 hours agoIND vs ENG Dream11 Prediction 3rd ODI 2026: प्लेइंग XI और ड्रीम11 टीम (19-07-2026)
Cricket11 hours agoWI vs NZ Dream11 Team 4th ODI 2026: फैंटेसी क्रिकेट प्रेडिक्शन, प्लेइंग XI और पिच रिपोर्ट
Uttarakhand13 hours agoCM धामी का बड़ा फैसला: देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में पेड़ों का कटान फिलहाल स्थगित








































