Dehradun
सीएम धामी ने 57 साल पुराने जनसंघ के संकल्प को किया सिद्धि, देश का पहला समान नागरिक कानून सदन में हुआ पेश।

देहरादून – उत्तराखंड में धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता का बिल विधानसभा में पेश कर दिया है। इसके साथ ही सीएम धामी ने 57 साल पुराने जनसंघ के संकल्प को भी सिद्धि तक पहुँचाया है। 1967 में भारतीय जनसंघ ने अपने घोषणापत्र में वायदा किया था कि अगर वह सत्ता में आते है तो वह समान नागरिक कानून पारित करेंगे। जनसंघ ने इस कानून में विवाह, दत्तकग्रहण उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर बनाने की बात कही थी।

202 पन्नों के इस बिल में मुख्यत: इन्ही विषयों को शामिल किया गया है। इस क़ानून में विवाह ,तलाक , गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, दत्तकग्रहण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
विधानसभा में ऐतिहासिक "समान नागरिक संहिता विधेयक" पेश किया। #UCCInUttarakhand pic.twitter.com/uJS1abmeo7
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) February 6, 2024
समान नागरिक क़ानून को लेकर पूरा देश इंतजार कर रहा था, लगभग दो वर्षों तक समाज के विभिन्न धर्म, संप्रदाय के प्रतिनिधियों से रायशुमारी कर 43 जनसंवाद और 72 बैठकों के बाद 2 लाख 32 हज़ार से अधिक सुझाव लेकर समिति ने UCC का ड्राफ्ट तैयार किया।
इस समान नागरिक संहिता का मूल आधार समानता और समरसता रखा गया है। यह कानून हिन्दू-मुस्लिम के वाद-विवाद सम्बंधित नहीं है। यह बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक जैसे शब्दों से भी परे कानून है। यूनिफार्म की बजाय इसे ‘कॉमन सिविल कानून’ नाम दिया गया है। इसलिए कानून के पक्ष-विपक्ष में चर्चा इसके प्रावधानों पर करनी चाहिए। अतः यह स्पष्ट कानून है, जिसे उपरोक्त विषयों में नहीं उलझाना चाहिए। यह एक प्रगतिशील – प्रोग्रेसिव कानून है। विगत 75 सालों में जिन अधिकारों से महिलाओं और बच्चों को वंचित रखा गया है। अतः इसका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं और बाल अधिकारों को सुनिश्चित करना है। यह कानून लोगों के अधिकार छीनने का नहीं बल्कि लोगों को अधिकार देने से सम्बंधित है। यह कानून सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
सीएम धामी ने कहा हमारी सरकार ने पूरी जिम्मेदारी के साथ समाज के सभी वर्गों को साथ लेते हुए समान नागरिक संहिता का विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया है।
देवभूमि के लिए वह ऐतिहासिक क्षण निकट है जब उत्तराखण्ड आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विजन ”एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का मजबूत आधार स्तम्भ बनेगा।
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सशस्त्र सेना झंडा दिवस आज, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लगाया फ्लैग

सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से लोक भवन में निदेशक, सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास श्याम सिंह ने मुलाकात कर फ्लैग लगाया।
देशभर में मना जा रहा सशस्त्र सेना झंडा दिवस
देशभर में आज सशस्त्र झंडा दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देहरादून में लोक भवन में निदेशक, सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास श्याम सिंह ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से मुलाकात कर उन्हें फ्लैग लगाया। इस दौरान राज्यपाल ने सशस्त्र सेना झंडा कोष में सहयोग राशि देते हुए प्रदेशवासियों से भी अंशदान देने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने दी सशस्त्र सेना झंडा दिवस की शुभकामनाएं
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रदेश के सभी सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सशस्त्र सेना झंडा दिवस हमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की याद दिलाता है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य भूमि है और हम सब का प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिजनों की अधिक से अधिक सहायता की जाए।
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उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस का सरकार पर बड़ा हमला

उपनल कर्मियों को नियमित करने की प्रस्तावित प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सरकार को इस मामले को लेकर घेरा है। उन्होंने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है।
उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर सियासी बहस तेज
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व CWC सदस्य करन माहरा ने कहा कि राज्य सरकार पर “डिवाइड एंड रूल” की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भाजपा अंग्रेजों की मुखबिरी वाली वही शैली अपनाकर कर्मचारियों को बांटने का काम कर रही है। कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि किसी भी उपनल कर्मचारी ने यदि 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है तो उसे स्वाभाविक रूप से नियमितीकरण का अवसर मिलना चाहिए।
करन माहरा का सरकार पर बड़ा हमला
करन माहरा ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिसने 2014 में ज्वाइन किया, उसे 2024 तक नियमित हो जाना चाहिए था। लेकिन सरकार कट-ऑफ डेट बदलकर 2018 कर रही है, जिससे कई कर्मचारियों के 10 साल पूरे होने के बावजूद वे नियमितीकरण से वंचित हो जाएंगे। माहरा ने सवाल उठाया कि “जो कर्मचारी 2025 में 11–12 साल की सेवा पूरी कर रहे हैं, उनकी क्या गलती है? सरकार स्पष्ट नीति बनाकर सभी के साथ समान न्याय करे।”
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पुलिस महानिदेशक की राज्यपाल से मुलाकात, शीतकालीन चारधाम यात्रा, कुम्भ मेला 2027 पर विशेष चर्चा

डीजीपी दीपम सेठ ने की राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट
देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से आज लोक भवन में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा तैयारियों पर विशेष फोकस
राज्यपाल ने पुलिस महानिदेशक से आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए, पुलिस व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक का उपयोग और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय
राज्यपाल ने शीतकालीन चारधाम यात्रा पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि कठिन मौसम और पहाड़ी रास्तों को देखते हुए तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
साइबर अपराधों पर रोक: वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करने पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिया कि साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर सुरक्षा नियमों से परिचित हो सकें।
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर चर्चा
भेंट के दौरान राज्यपाल ने नए लागू हुए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण के साथ-साथ आम नागरिकों को भी नए कानूनों की जानकारी देना आवश्यक है, ताकि कानून व्यवस्था और अधिक मजबूत बन सके।
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