धर्म-कर्म
जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा, लगाएं ये भोग मिलेगी कान्हा की कृपा

Janmashtami 2026 : भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खास विधि से अगर भगवान कृष्ण की पूजा करो तो कान्हा जी कृपा आप पर बनी रहेगी।
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जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए रखें उपवास
इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करते हैं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाने के साथ आरती की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोलते हैं।
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा, जिसे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा मध्यरात्रि 12 बजे के आसपास करना शुभ माना गया है।

जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
सबसे पहले पूजा स्थल और भगवान लड्डू गोपाल के आसन को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार श्रृंगार करें।
श्रृंगार में मोर मुकुट और बांसुरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं और उनके आसपास खिलौने रख सकते हैं। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में श्रीकृष्ण की आरती करें और अपनी पूजा-व्रत की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के सात्विक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनिया पंजीरी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।
इसके अलावा भगवान को माखन-मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है, इसलिए इसका भोग भी लगाया जा सकता है। दूध से बने पकवान, मौसमी फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।
Festival
Rakhi shubh muhurat : 28 अगस्त को इन समयों में न बांधें राखी, जानिए रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

Rakhi 2026 shubh muhurat : भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और आपसी स्नेह को समर्पित रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। जिसको लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
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रक्षाबंधन पर राखी बांधने का ये है शुभ मुहूर्त
राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस बार पूर्णिमा तिथि के समय को देखते हुए 28 अगस्त की सुबह राखी बांधने को खास माना जा रहा है। बता दें कि 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा। यानी भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा।

राखी बांधने का सबसे शुभ समय
सुबह के समय को अलग-अलग शुभ मुहूर्त में बांटा गया है। सुबह 7:33 बजे से 9:10 बजे तक लाभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 9:10 बजे से 9:48 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त माना गया है। ऐसे में अगर आप सुबह राखी बांधने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह 7:33 बजे से 9:48 बजे के बीच का समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

28 अगस्त को इन समयों में न बांधें राखी
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल और कुछ अशुभ चौघड़िया के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। 28 अगस्त को इन समयावधियों में राखी बांधने से परहेज किया जा सकता है।
- राहुकाल: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
- रोग चौघड़िया: दोपहर 1:58 बजे से 3:35 बजे तक
- उद्वेग चौघड़िया: दोपहर 3:35 बजे से शाम 7:11 बजे तक
धर्म-कर्म
इस दिन होगा साल का अंतिम चंद्रग्रहण, ये लोग हो जाएं सावधान, भूलकर भी ना करें ये काम

Chandra Grahan 2026 : साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने वाला है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को विशेष अवधि माना जाता है। इस दौरान कुछ कार्यों से बचने और धार्मिक नियमों का पालन करने की परंपरा है। हालांकि, इन मान्यताओं का पालन व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।
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28 अगस्त को लगेगा साल का अंतिम चंद्रग्रहण
28 अगस्त को साल का आखिरी ग्रहण लगने जा रहा है। मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के समय लोग पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। वहीं, कुछ धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के दौरान भोजन और मांगलिक कार्यों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।
चंद्रग्रहण के दिन भूलकर भी ना करें ये काम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इस समय भोजन करने, शादी-विवाह या अन्य शुभ कार्य शुरू करने से परहेज करने की परंपरा है। कई जगह मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूने से बचने की मान्यता है।

गर्भवती महिलाओं को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं, लेकिन ग्रहण से गर्भस्थ शिशु को नुकसान होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। ग्रहण के दौरान तनाव और अधिक शारीरिक मेहनत से बचें तथा मन को शांत रखने के लिए ध्यान, प्रार्थना या मंत्र जाप कर सकते हैं।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भगवान विष्णु और चंद्र देव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। लोग अपनी आस्था के अनुसार मंत्र जाप और ध्यान कर सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने और घर की साफ-सफाई करने की परंपरा भी कई जगहों पर है।
इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अन्य उपयोगी सामान का दान करने की मान्यता है। भोजन और पानी को तुलसी के पत्तों से ढककर रखने की परंपरा भी कुछ परिवारों में निभाई जाती है।
Festival
27 या 28 अगस्त किस दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन ?, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

2026 raksha bandhan date : रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करती है। वहीं भाई बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।
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27 या 28 अगस्त किस दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन ?
साल 2026 में raksha bandhan की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगी। ऐसे में कई लोग जानना चाहते हैं कि आखिर रक्षाबंधन 27 अगस्त को मनाया जाएगा या 28 अगस्त को?

28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा raksha bandhan
हिंदू पंचांग के मुताबिक, श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:07 बजे शुरू होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:49 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसलिए राखी बांधने के लिए 28 अगस्त की तारीख को प्रमुख माना जा रहा है।

27 या 28 अगस्त को लेकर क्यों है भ्रम?
बता दें कि इस बार पूर्णिमा तिथि दो तारीखों को पड़ रही है। यही वजह है कि रक्षाबंधन की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि उदया तिथि के नियम के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
त्योहार से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग और क्षेत्र के अनुसार बताए गए मुहूर्त की भी पुष्टि की जा सकती है।

राखी बांधने का शुभ समय
28 अगस्त को राखी बांधने के लिए शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। बता दें कि इस दिन राखी बांधने से पहले बहनें भाई को तिलक लगाकर आरती करती हैं और मिठाई खिलाती हैं। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके मंगलमय जीवन की कामना की जाती है।
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