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नैनीताल हाईकोर्ट में अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण पर में आज होगीं सुनवाई, कर्फ्यू इलाके में बांटी जा रही राहत सामग्री।

हल्द्वानी – हिंसाग्रस्त बनभूलपुरा में लोग घरों के बाहर ताला लगाकर अंदर रहते हुए मिले। उपद्रवियों की तलाश में पुलिस ने करीब 150 घरों में दबिश दी। इस दौरान 100 घरों में बाहर ताला लगा हुआ मिला लेकिन जब ताला तोड़कर पुलिस अंदर दाखिल हुई तो करीब 50 घरों में लोग छिपकर रहते मिले। पुलिस ने 35 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

हिंसा के दौरान गोली से घायल अधेड़ ने अस्पताल में तोड़ा दम..गफूर बस्ती निवासी मो. इसरार (50) को आठ फरवरी को उपद्रव के दौरान रात करीब आठ बजे गोली लग गई थी। इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
कर्फ्यूगस्त इलाके में प्रशासन की ओर से मंगलवार को भी राशन, सब्जी, दूध का वितरण किया गया। डीएम के निर्देश पर लोगों की चिकित्सीय मदद के लिए सीएमओ कैंप कार्यालय में 24 घंटे खुला रहने वाला कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
हाईकोर्ट में आज सुनवाई…
नैनीताल हाईकोर्ट में अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की याचिका पर बुधवार 14 फरवरी यानि की सुनवाई होगी।
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सर्पदंश से बच सकती है जान! वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन, जानिए क्या करें

Haldwani News : उत्तराखंड में मानसून के साथ सर्पदंश के मामलों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है। ऐसे में वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1926 जारी किया है।
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सर्पदंश से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर हुआ जारी
बरसात का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के कई इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। खेतों, जंगलों और रिहायशी क्षेत्रों में सांप निकलने से लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। कई बार घबराहट और अंधविश्वास के कारण मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों लोगों से सतर्क रहने और सही समय पर सही कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। हल्द्वानी वन प्रभाग ने जहां सांपों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए विशेष टीमें तैयार की हैं, वहीं सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि वन प्रभाग की पांचों रेंजों में सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए प्रशिक्षित टीमें तैनात की गई हैं। पिछले एक वर्ष में आबादी वाले क्षेत्रों से करीब 700 सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है।

हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से की अपील
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से अपील की कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे मारने की कोशिश करें। तत्काल वन विभाग के टोल फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देती है।
अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज पहुंचे अस्पताल
सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार इस वर्ष अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। जून में 22 औऱ जुलाई माह में 38 सबसे अधिक सर्पदंश के मरीज अस्पताल में एडमिट हुए हैं, उन्होंने बताया कि यदि मरीज को समय पर अस्पताल लाया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और एंटी स्नेक वेनम (ASV) मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। अब तक कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, दो मरीजों की मौत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में काफी देर हो गई थी।
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हल्द्वानी में खौफनाक मंजर! उफनती भाखड़ा नदी में फंसे दो लोग, बाल-बाल बची जान

Haldwani News : लगातार हो रही बारिश अब उत्तराखंड में खतरे की घंटी बनती जा रही है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने कुछ देर के लिए हर किसी की सांसें रोक दीं। फतेहपुर क्षेत्र की उफनती भाखड़ा नदी पार करते समय दो लोग तेज बहाव में फंस गए।
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हल्द्वानी में उफनती नदी में बहने ही वाले थे दो लोग
नैनीताल जिले के फतेहपुर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। भाखड़ा नदी पार करने के दौरान बाइक सवार दो लोग अचानक तेज बहाव में फंस गए। स्थिति गंभीर होती देख आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से पड़ी जान खतरे में
इन दिनों मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इसी बीच फतेहपुर की भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से दो लोगों की जान खतरे में पड़ गई।

बाइक के साथ नदी पार करने का कर रहे थे प्रयास
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों व्यक्ति बाइक के साथ नदी पार करने का प्रयास कर रहे थे। तभी नदी का बहाव तेज हो गया और वे बीच धारा में फंस गए। उन्हें संघर्ष करते देख आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की बदौलत दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बरसात के दौरान नदी का बढ़ जाता है जलस्तर
ग्रामीणों का कहना है कि खेती, स्कूल, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें रोज इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर बार दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण की मांग दोहराई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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हल्द्वानी के लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा, रेत में दबने से मजदूर की मौत

Haldwani News : उत्तराखंड के लालकुआं में एक स्टोन क्रशर पर हुए दर्दनाक हादसे ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्दूचौड़ निवासी 30 वर्षीय मजदूर पवन सिंह की काम के दौरान रेत में दबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि डंपर में रेत भरने की प्रक्रिया के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
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लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा
लालकुंआ में दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। मिली जानकारी क मुताबिक हल्दूचौड़ निवासी पवन सिंह रोज की तरह सुबह काम पर गया था। स्टोन क्रशर में वह डंपर के किनारों पर कट्टे लगा रहा था ताकि रेत बाहर न गिरे।
रेत में दबने से मजदूर की मौत
इसी दौरान लोडर चालक ने कथित तौर पर बिना ये देखे कि डंपर में कोई व्यक्ति मौजूद है या नहीं, उसमें रेत डालनी शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में पवन भारी मात्रा में रेत के नीचे दब गया। बरसात के कारण रेत गीली और अधिक भारी थी, जिससे उसके बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं बची।
रेत खाली करते समय चला हादसे का पता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ समय बाद जब डंपर से रेत उतारी जा रही थी, तब मजदूरों को रेत के नीचे पवन के दबे होने की जानकारी मिली। इसके बाद सभी ने मिलकर उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। माना जा रहा है कि रेत के दबाव और दम घुटने की वजह से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मशीन चलाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता कि डंपर के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारी मशीनों के संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। मशीन शुरू करने से पहले कर्मचारियों की मौजूदगी की पुष्टि करना, आपसी समन्वय बनाए रखना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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