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होलिका दहन पर पड़ रहा भद्रा का साया, होली जलाने को मिलेगा 3 घंटे 11 मिनट का समय, जानें शुभ मुहूर्त

Holika Dahan Time : होली से पहले इस बार चंद्र ग्रहण लग रहा है जिस कारण होली और होलिका दहन को लेकर लोग असमंजस की स्थिति में हैं। 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। लेकिन होलिका दहन पर भद्रा का साया पड़ रहा है।
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होलिका दहन पर पड़ रहा भद्रा का साया
होलिका दहन हस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर किया जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च से प्रारंभ होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी, लेकिन प्रदोष काल से पहले ही पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी।
इसी वजह से होलिका दहन की सही तिथि और समय को लेकर असमंजस बना हुआ है। तिथियों के इस संयोग के साथ-साथ पूर्णिमा के दौरान भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, जिसके कारण शुभ मुहूर्त सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होगा। इसलिए होलिका दहन करते समय भद्रा काल से बचते हुए निर्धारित शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
बात करें होलिका दहन के शुभ मुहूर्त की तो 3 मार्च को ग्रहण के कारण होलिका दहन नहीं किया जाएगा। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा।
2 मार्च को शाम 5:55 बजे से भद्रा काल शुरू होगा, जो 3 मार्च की सुबह 5:32 बजे तक रहेगा। भद्रा के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करने से परहेज किया जाता है। इसलिए होलिका दहन भद्रा समाप्त होने के बाद ही किया जाना उचित माना गया है। बता दें कि होलिका दहन के लिए इस साल प्रदोष काल में शाम 6 बजकर 22 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट के बीच का समय शुभ रहेगा।

होलिका दहन एवं चंद्र ग्रहण समय सारणी (2026)
| विवरण | तिथि | समय | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| सूर्यास्त | 2 मार्च 2026 | शाम 6:36 बजे | सूर्यास्त के बाद होलिका दहन शुभ |
| होलिका दहन का शुभ समय | 2 मार्च 2026 | शाम 6:36 – रात 9:00 बजे | पूर्णिमा तिथि में करना शास्त्रसम्मत |
| विरल छाया में प्रवेश (चंद्र ग्रहण) | 3 मार्च 2026 | दोपहर 2:14 बजे | ग्रहण की प्रारंभिक अवस्था |
| ग्रहण स्पर्श | 3 मार्च 2026 | दोपहर 3:20 बजे | ग्रहण का मुख्य आरंभ |
| ग्रहण मोक्ष | 3 मार्च 2026 | शाम 6:45 बजे | ग्रहण समाप्त |
| सूतक प्रारंभ | 3 मार्च 2026 | सूर्योदय से पूर्व (लगभग 9 घंटे पहले) | सूतक सूर्योदय पर प्रभावी |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 3 मार्च 2026 | शाम 5:08 बजे | इसके बाद पूर्णिमा नहीं रहेगी |
| शास्त्रसम्मत होलिका दहन | 2 मार्च 2026 | सूर्यास्त के बाद | निर्णय सागर पंचांग अनुसार |
FAQs – Holika Dahan Time
Q1. होली 2026 कब मनाई जाएगी?
होली का रंगों वाला त्योहार 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इसी दिन लोग रंग-गुलाल के साथ होली खेलेंगे।
Q2. क्या 3 मार्च 2026 को होली मनाई जाएगी?
नहीं, 3 मार्च को रंगों वाली होली नहीं खेली जाएगी। इस दिन केवल होलिका दहन से जुड़े धार्मिक कार्य और ग्रहण का प्रभाव रहेगा।
Q3. होलिका दहन कब किया जाएगा?
होलिका दहन 2 मार्च 2026 को किया जाएगा, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण उस दिन दहन करना उचित नहीं माना गया है।
Q4. भद्रा काल कब से कब तक रहेगा?
भद्रा काल 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को सुबह 5:32 बजे तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते।
Q5. भद्रा का होलिका दहन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
भद्रा काल में होलिका दहन करना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाएगा।
Q6. होली का धार्मिक महत्व क्या है?
होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे के साथ त्योहार मनाते हैं।
धर्म-कर्म
जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा, लगाएं ये भोग मिलेगी कान्हा की कृपा

Janmashtami 2026 : भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खास विधि से अगर भगवान कृष्ण की पूजा करो तो कान्हा जी कृपा आप पर बनी रहेगी।
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जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए रखें उपवास
इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करते हैं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाने के साथ आरती की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोलते हैं।
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा, जिसे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा मध्यरात्रि 12 बजे के आसपास करना शुभ माना गया है।

जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
सबसे पहले पूजा स्थल और भगवान लड्डू गोपाल के आसन को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार श्रृंगार करें।
श्रृंगार में मोर मुकुट और बांसुरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं और उनके आसपास खिलौने रख सकते हैं। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में श्रीकृष्ण की आरती करें और अपनी पूजा-व्रत की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के सात्विक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनिया पंजीरी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।
इसके अलावा भगवान को माखन-मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है, इसलिए इसका भोग भी लगाया जा सकता है। दूध से बने पकवान, मौसमी फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।
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रक्षाबंधन पर उत्तराखंड में उत्साह, राज्यपाल और सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं

Uttarakhand News : रक्षाबंधन का त्योहार देशभर के साथ उत्तराखंड में भी उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक यह पर्व प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी हैं।
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रक्षाबंधन पर राज्यपाल और सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और विश्वास को मजबूत करने वाला विशेष पर्व है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत करता है।
महिलाओं का सम्मान एक बेहतर समाज की बुनियाद
सीएम धामी ने कहा कि महिलाओं का सम्मान और उनकी सुरक्षा एक बेहतर समाज की बुनियाद है। रक्षाबंधन का पर्व भी महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

सीएम ने महिलाओं से की खास अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण के बिना विकसित और समृद्ध उत्तराखंड का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रदेशवासियों से महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और प्रगति के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने में सहयोग देने की अपील की।
आज और कल महिलाओं के लिए रोडवेज में फ्री रहेगी यात्रा
रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तराखंड की महिलाओं के लिए राज्य सरकार ने विशेष सुविधा भी दी है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को 28 और 29 अगस्त को निशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार के इस फैसले से रक्षाबंधन पर अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए यात्रा करने वाली महिलाओं को राहत मिलेगी।
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Rakhi shubh muhurat : 28 अगस्त को इन समयों में न बांधें राखी, जानिए रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

Rakhi 2026 shubh muhurat : भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और आपसी स्नेह को समर्पित रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। जिसको लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
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रक्षाबंधन पर राखी बांधने का ये है शुभ मुहूर्त
राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस बार पूर्णिमा तिथि के समय को देखते हुए 28 अगस्त की सुबह राखी बांधने को खास माना जा रहा है। बता दें कि 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा। यानी भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा।

राखी बांधने का सबसे शुभ समय
सुबह के समय को अलग-अलग शुभ मुहूर्त में बांटा गया है। सुबह 7:33 बजे से 9:10 बजे तक लाभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 9:10 बजे से 9:48 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त माना गया है। ऐसे में अगर आप सुबह राखी बांधने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह 7:33 बजे से 9:48 बजे के बीच का समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

28 अगस्त को इन समयों में न बांधें राखी
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल और कुछ अशुभ चौघड़िया के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। 28 अगस्त को इन समयावधियों में राखी बांधने से परहेज किया जा सकता है।
- राहुकाल: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
- रोग चौघड़िया: दोपहर 1:58 बजे से 3:35 बजे तक
- उद्वेग चौघड़िया: दोपहर 3:35 बजे से शाम 7:11 बजे तक
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