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लालकुआं में अज्ञात वाहन की टक्कर से दंपत्ति की दर्दनाक मौत, हादसे के बाद जागा प्रशासन

Lalkuan News : हल्द्वानी के लालकुआं में चाची के शोकाकुल में जा रहे लालकुआं निवासी रामनिवास शर्मा और पत्नी मालती शर्मा को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की जोरदार टक्कर से हादसे में स्कूटी सवार दंपति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
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लालकुआं में अज्ञात वाहन की टक्कर से दंपत्ति की हुई दर्दनाक मौत
Lalkuan में दर्दनाक सड़क हादसे में दंपत्ति की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। मृतक दंपति लालकुआं के बजरी कंपनी क्षेत्र के निवासी थे। जबकि उनका मूल निवास जनपद शाहजहांपुर है। रामनिवास शर्मा सेंचुरी पेपर मिल में इलेक्ट्रिक विभाग में मुंशी के पद पर कार्यरत थे।
शोकाकुल परिजनों से मिलने जा रहे थे दोनों
बताया जा रहा है कि रामनिवास शर्मा की चाची का निधन हुआ था। इसी कारण वे अपनी पत्नी के साथ स्कूटी से शोकाकुल परिजनों से मिलने घोड़ानाला स्थित वीआईपी गेट की ओर जा रहे थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए 108 एम्बुलेंस से भेज दिया है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

एसपी क्राइम और यातायात ने किया मौके पर मुआयना
मृतक दंपति के परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। दर्दनाक सड़क हादसे में दो जिंदगियों के बुझने के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी है। हादसे ने सिस्टम की लापरवाही को बेनकाब कर दिया।
जिसके बाद एसपी सिटी मनोज कत्याल, एआरटीओ जीतेन्द्र सिंगवान, एसपी क्राइम और यातायात डॉ जगदीश चन्द्र, सीओ Lalkuan दीपशिखा अग्रवाल, तहसीलदार के नेतृत्व में प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया।
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उत्तराखंड के लाल लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जम्मू कश्मीर में शहीद, राजौरी में ऑपरेशन के दौरान दिया देश के लिए बलिदान

Almora News : जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए। इस खबर से उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई।
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उत्तराखंड के लाल लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी जम्मू कश्मीर में शहीद
जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी राजौरी के मंजाकोट क्षेत्र में चल रहे ‘ऑपरेशन शेरोवाली’ के तहत तैनात थे। अभियान के दौरान दुर्गम और जंगलों से घिरे इलाके में ऑपरेशनल ड्यूटी निभाते समय वे एक गहरी खाई में गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी सैनिकों ने तत्काल उन्हें बाहर निकालकर सहायता पहुंचाई, लेकिन बाद में उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
राजौरी में ऑपरेशन के दौरान दिया देश के लिए बलिदान
सेना के अधिकारियों के मुताबिक, जिस क्षेत्र में अभियान चलाया जा रहा है वह अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। घने जंगल, खड़ी चट्टानें, खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए अभियान को और जटिल बना देती हैं। क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना के बाद कई दिनों से तलाशी अभियान जारी है।

अल्मोड़ा में किया जाएगा अंतिम संस्कार
सेना के प्रवक्ता ने बताया कि शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर जम्मू एयर फोर्स स्टेशन लाया जाएगा। जहां सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक जनपद अल्मोड़ा भेजा जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत से उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर है। देश उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान को सदैव याद रखेगा।
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देहरादून से 10 दिन में 13 बच्चे लापता, सबसे ज्यादा नाबालिग बच्चियां हुई लापता, सामने आई चौंकाने वाली वजह

Dehradun News : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले 10 दिनों के दौरान 13 नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामले सामने आने से अभिभावकों, पुलिस और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मामलों ने बच्चों की सुरक्षा और बदलते सामाजिक परिवेश को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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देहरादून से 10 दिन में 13 बच्चे लापता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों की गुमशुदगी से जुड़े मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। इनमें ऋषिकेश, सेलाकुई, सहसपुर और अन्य इलाकों से नाबालिगों के घर से लापता होने की घटनाएं शामिल हैं। सभी मामलों में बच्चों की उम्र 12 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है।
सबसे ज्यादा बच्चियां हुई लापता
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि लापता होने वाले बच्चों में बड़ी संख्या नाबालिग बच्चियों की है। इससे परिजनों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की भी चिंताएं बढ़ी हैं। पुलिस इन मामलों की जांच में जुटी है और बच्चों की तलाश के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव, आभासी दुनिया की ओर आकर्षण और अपेक्षाओं में वृद्धि जैसी परिस्थितियां बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। उनका कहना है कि कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों से नाराज होकर भावनात्मक निर्णय ले लेते हैं और घर छोड़ने जैसे कदम उठा बैठते हैं।
डॉक्टर ने सोशल मीडिया को बताया इसकी वजह
डॉक्टर ने सोशल मीडिया को इसकी वजह बताया है। उन्होंने बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत का संदेश दिया है। विशेषज्ञ परिवारों में संवाद बढ़ाने, बच्चों की भावनात्मक स्थिति को समझने और उनकी गतिविधियों पर संतुलित नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि दर्ज मामलों में कार्रवाई जारी है और बच्चों को सुरक्षित खोजने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
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हरीश रावत का बड़ा बयान, राहुल गांधी को अल्मोड़ा पहुंचने से भाजपा सरकार ने रोका !

Uttarakhand Politics : कांग्रेस नेता राहुल गांधी का गुरूवार को उत्तराखंड दौरा था। राहुल गांधी की अल्मोड़ा में विशाल जनसभा होनी थी लेकिन मौसम खराब होने के कारण उनका हेलीकॉप्टर उड़ान ही नहीं भर पाया और वो अल्मोड़ा नहीं पहुंचे। ऐसे में उन्होंने फोन से अल्मोड़ा की जनसभा को संबोधित किया और ना पहुंचने पर माफी भी मांगी।
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राहुल गांधी को अल्मोड़ा पहुंचने से भाजपा सरकार ने रोका !
राहुल गांधी के अल्मोड़ा में जनसभा में ना पहुंचने से कार्यकर्ताओं में निराशा देखने को मिली। हालांकि उन्होंने इसके लिए माफी मांगी और दोबारा आने का वादा भी किया लेकिन जैसे ही उनके ना पहुंचने की खबर मिली कई कार्यकर्ता जनसभा छोड़कर चले गए।
अब इस मामले को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब उसी मौसम और उड़ान मार्ग पर अन्य हेलीकॉप्टर उड़ान भर रहे थे, तो राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर पंतनगर से क्यों नहीं उड़ पाया ?

जब दूसरे हेलीकॉप्टर उड़ रहे थे तो राहुल गांधी का क्यों नहीं ?
हरीश रावत पूछा है कि जिस वायु मार्ग से सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर आए हैं, तो हमारा डबल इंजन हेलीकॉप्टर कैसे नहीं आ सका? कहीं न कहीं या तो हेली कंपनी, या डीजीसीए, या यूकाडा में से किसी को जवाब देना चाहिए। देश के प्रतिपक्ष के नेता अल्मोड़ा क्यों नहीं पहुंच पाए? उनका हेलीकॉप्टर क्यों नहीं उड़ पाया? जबकि दूसरे हेलीकॉप्टर उसी वायु मार्ग से उड़ान भर पाए हैं और संचालित हुए हैं।
राहुल गांधी के अल्मोड़ा ना पहुंच पाने पर गर्म हुए चर्चाओं के बाजार
हरीश रावत ने कहा है कि पायलट और हेली सर्विसेज इन्हीं संस्थाओं के द्वारा संचालित होती हैं। ये गंभीर प्रश्न आम लोगों के दिमाग में उठ रहा है। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा है कि जब दूसरे हेलीकॉप्टर उड़ रहे थे उसी मार्ग पर तो राहुल गांधी को अनुमति ना मिलना कई सवाल खड़े करता है। इस पूरे वाक्ये के बाद सवाल तो कई उठ रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये केवल खराब मौसम के कारण हुआ या इसके पीछे कोई और कारण था।
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