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मकर ज्योति 2026: तारीख, समय, महत्व और दर्शन की पूरी जानकारी..

Makara Jyothi 2026: तारीख, समय, इतिहास और धार्मिक महत्व
Makara Jyothi 2026 दक्षिण भारत के सबसे पवित्र और आध्यात्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल मकर संक्रांति की संध्या पर केरल के सबरीमला में प्रकट होने वाला यह दिव्य प्रकाश भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए आस्था, तपस्या और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन लाखों श्रद्धालु सबरीमला और आसपास के क्षेत्रों में एकत्र होकर Makara Jyothi के दर्शन करते हैं। यह क्षण 41 दिनों की कठिन व्रत साधना के पूर्ण होने का संकेत देता है और भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति का मार्ग खोलता है।
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Makara Jyothi 2026 Date and Time (सटीक जानकारी)
- तारीख: 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
- समय: लगभग 6:45 PM से 7:00 PM IST
- स्थान: सबरीमला, केरल
- अवसर: मकर संक्रांति संध्या
Makara Jyothi का समय सूर्यास्त पर आधारित होता है, इसलिए हर वर्ष कुछ मिनटों का अंतर संभव है। आमतौर पर सूर्यास्त के तुरंत बाद यह दिव्य ज्योति दिखाई देती है।
Makara Jyothi क्या है?
Makara Jyothi एक दिव्य प्रकाश है जो सबरीमला के पास स्थित पोनमाला पर्वत पर दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह भगवान अयप्पा की उपस्थिति और उनकी कृपा का प्रतीक है।
यह ज्योति:
- अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा को दर्शाती है
- तपस्या के फल को दर्शाने वाला संकेत मानी जाती है
- भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है
Makara Jyothi का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
Makara Jyothi केवल एक दृश्य घटना नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थ से जुड़ी हुई है।
धार्मिक दृष्टि से:
- यह आत्मशुद्धि का प्रतीक मानी जाती है
- अहंकार, क्रोध और मोह से मुक्ति का संकेत देती है
- भगवान अयप्पा के प्रति समर्पण की अंतिम परीक्षा मानी जाती है
कई भक्त मानते हैं कि Makara Jyothi के दर्शन से:
- मानसिक शांति मिलती है
- जीवन में स्थिरता आती है
- कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है
Makara Jyothi और Makar Sankranti का संबंध
Makara Jyothi हमेशा Makar Sankranti के दिन ही दिखाई जाती है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है।
इसी कारण:
- यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है
- दक्षिण भारत में इसे विशेष पर्व के रूप में मनाया जाता है
- सबरीमला यात्रा का यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है
41 दिन का व्रत और Makara Jyothi
भगवान अयप्पा के भक्त Makara Jyothi से पहले 41 दिन का मंडल काल व्रत रखते हैं। इस दौरान:
- सात्विक जीवन शैली अपनाई जाती है
- संयम और ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है
- नियमित पूजा और ध्यान किया जाता है
Makara Jyothi के दर्शन इस व्रत की पूर्णता माने जाते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
- दर्शन के लिए प्रशासन द्वारा तय नियमों का पालन करें
- भारी भीड़ के कारण सीमित क्षेत्र में ही प्रवेश संभव होता है
- कई टीवी चैनलों और आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर लाइव दर्शन उपलब्ध रहते हैं
- अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं से बचें
Makara Jyothi 2026 – FAQs
❓ Makara Jyothi 2026 किस दिन है?
Makara Jyothi 2026 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को है।
❓ Makara Jyothi 2026 का समय क्या है?
यह लगभग 6:45 PM से 7:00 PM IST के बीच दिखाई देगी।
❓ Makara Jyothi कहाँ दिखाई देती है?
यह केरल के सबरीमला स्थित पोनमाला पर्वत पर दिखाई देती है।
❓ क्या Makara Jyothi हर साल एक ही समय पर होती है?
नहीं, इसका समय सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए हर साल कुछ मिनटों का अंतर होता है।
❓ Makara Jyothi का मुख्य महत्व क्या है?
यह भगवान अयप्पा की दिव्य उपस्थिति, तपस्या की पूर्णता और आत्मशुद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
धर्म-कर्म
जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा, लगाएं ये भोग मिलेगी कान्हा की कृपा

Janmashtami 2026 : भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खास विधि से अगर भगवान कृष्ण की पूजा करो तो कान्हा जी कृपा आप पर बनी रहेगी।
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जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए रखें उपवास
इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करते हैं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाने के साथ आरती की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पूजा संपन्न कर व्रत खोलते हैं।
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा, जिसे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा मध्यरात्रि 12 बजे के आसपास करना शुभ माना गया है।

जन्माष्टमी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
सबसे पहले पूजा स्थल और भगवान लड्डू गोपाल के आसन को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार श्रृंगार करें।
श्रृंगार में मोर मुकुट और बांसुरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं और उनके आसपास खिलौने रख सकते हैं। भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में श्रीकृष्ण की आरती करें और अपनी पूजा-व्रत की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के सात्विक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनिया पंजीरी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।
इसके अलावा भगवान को माखन-मिश्री बेहद प्रिय मानी जाती है, इसलिए इसका भोग भी लगाया जा सकता है। दूध से बने पकवान, मौसमी फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।
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CM ने खोला मुफ्त सुविधाओं का पिटारा, अब एक साल में मिलेंगे 3 LPG सिलेंडर फ्री

Free LPG Cylinder : विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान तमिलनाडु सरकार ने राज्य के परिवारों के लिए बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री विजय ने सदन में कहा कि पात्र परिवारों को हर साल तीन LPG सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। ये योजना पोंगल 2027 से लागू किए जाने की तैयारी है।
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CM ने खोला पिटारा, साल में 3 LPG सिलेंडर मिलेंगे फ्री
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में नियम 110 के तहत इस योजना की घोषणा की। सरकार के मुताबिक, ‘अन्नपूर्णानी सुपर सिक्स’ नाम की इस योजना के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये का बजट रखा जाएगा। सरकार का अनुमान है कि योजना से करीब 1,38,16,104 परिवार लाभान्वित होंगे।
किन परिवारों को मिलेगा फायदा ?
योजना का लाभ उन परिवारों को देने की बात कही गई है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। इसके दायरे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अलावा छोटे और सीमांत किसान तथा ऐसे परिवार भी शामिल होंगे, जिनमें दिव्यांग सदस्य हैं और परिवार की आय निर्धारित सीमा के भीतर है।

सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी सिलेंडर की कीमत
सरकार के अनुसार, लाभार्थी जब LPG सिलेंडर के लिए पंजीकरण कराएंगे, तो तेल कंपनियों से संबंधित जानकारी ली जाएगी। इसके बाद मुफ्त सिलेंडर की कीमत लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे जमा किए जाने की व्यवस्था होगी। सरकार ने बताया कि योजना को लागू करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और पोंगल 2027 से इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
चुनावी वादे से जुड़ी है योजना
बता दें कि मुफ्त कुकिंग गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री विजय की TVK पार्टी के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल रहा है। विधानसभा में इस घोषणा के साथ सरकार ने अब इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत दिया है।
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NET के 3 पेपर रद्द, NTA के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, सड़कों पर उतरकर किया विरोध

UGC-NET Exam : UGC-NET जून 2026 में अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर रद्द होने से विवाद बढ़ गया है। हजारों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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NET के 3 पेपर रद्द, NTA के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल
UGC-NET जून 2026 की परीक्षा को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र समेत तीन विषयों की परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान कई सवाल दोहराए गए, कुछ प्रश्नों में तथ्यात्मक खामियां थीं और कई जगह भाषा व व्याकरण से जुड़ी गलतियां भी देखने को मिलीं।
सड़कों पर उतरकर किया विरोध
पेपर रद्द होने के फैसले के बाद छात्र संगठनों नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग
छात्र संगठनों की मांग है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाए। दिल्ली के ओखला स्थित NTA कार्यालय के बाहर SFI कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए NTA को समाप्त करने की मांग भी उठाई।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की स्थिति से उनके परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर आगे होने वाले PhD दाखिलों और अकादमिक करियर की प्रक्रिया पर भी पड़ने की आशंका है।
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