Champawat
Mystery Story Uttarakhand 40 साल से वीरान ‘भूतिया घर’ में आज भी सुनाई देती हैं अजीब आवाज़ें

Mystery Story Uttarakhand शांत पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसा चंपावत शहर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखी कहानी के लिए भी जाना जाता है। शहर के किनारे स्थित एक पुराना घर पिछले कई वर्षों से लोगों के बीच डर और रहस्य का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों का दावा है कि शाम ढलते ही इस वीरान घर से अजीब-अजीब आवाजें आने लगती हैं। कभी किसी के रोने की, कभी हँसने की, कभी किसी के तेज़ी से भागने की।
40 साल पुरानी घटना के पिछे छिपा रहस्य
बताया जाता है कि करीब चार दशक पहले इस घर में एक परिवार रहा करता था। गांव वालों के मुताबिक, उसी परिवार की एक महिला एक दिन अचानक लापता हो गई। गांव के लोगों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। महिला के गायब होने के बाद ही घर के भीतर से अजीब आवाजें आना शुरू हो गईं। बंद दरवाज़ा अपने आप खुलने की आवाज, फर्नीचर खिसकने जैसी ध्वनियाँ और रात के सन्नाटे में किसी के कदमों की आहट।
लोगों ने देखी ‘सफेद चादर वाली लड़की
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने खिड़की पर सफेद चादर में लिपटी एक लड़की जैसी आकृति देखी। लेकिन जैसे ही वे हिम्मत जुटाकर घर के पास पहुँचे, आकृति अचानक गायब हो गई। धीरे-धीरे डर का माहौल बढ़ा और घर पूरी तरह खाली हो गया। गांव वालों ने इसे “भूतिया घर” कहना शुरू कर दिया।
शाम के बाद कोई नहीं जाता
आज भी इस घर के पास शाम के बाद कोई नहीं जाता। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई शाम के बाद इस जगह के पास पहुंचता है तो उसे अजीबों गरीब आवाजें सुनाई देती हैं। लोगों का मानना है कि वह महिला की आत्मा आज भी अपने घर आने का रास्ता तलाश रही है। कहा जाता है कि जिस रात घर की खिड़कियां अपने आप खुल जाती हैं, वही रात उस आत्मा की मौजूदगी की होती है।
Champawat
34 यात्रियों की जान बचाकर अमर हो गया जांबाज चालक, मुख्यमंत्री ने पुत्र से की बात, डीएम पहुंचे गांव

Lohaghat News : लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाटन पुल के समीप उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बस दुर्घटना में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जान गंवाने वाले चालक बेनीराम थ्वाल के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
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बस हादसे में मारे गए चालक के बेटे से सीएम ने की फोन पर बात
लोहाघाट में हुए दर्दनाक हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर है। चालक की सूझबूझ और साहस के चलते बस में सवार 34 यात्रियों की जान बच गई, लेकिन खुद वो जिंदगी की जंग हार गए। इस दुखद घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत चालक को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कठिन समय में हरसंभव सहयोग का दिलाया भरोसा
मुख्यमंत्री ने दूरभाष के माध्यम से बेनीराम थ्वाल के पुत्र से बात कर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और इस कठिन समय में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

जिलाधिकारी भी पहुंचे दिवंगत चालक के पैतृक गांव
दुर्घटना के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार भी दिवंगत चालक के पैतृक गांव स्वाला बड़ोली पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। जिलाधिकारी ने कहा कि बेनीराम थ्वाल ने अपने कर्तव्यों के प्रति अद्वितीय निष्ठा और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
जिलाधिकारी ने दिवंगत चालक की सेवाओं को नमन करते हुए श्रद्धांजलि की अर्पित
जिलाधिकारी ने परिवार को आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन इस दुःख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है। शासन स्तर से मिलने वाली सभी अनुमन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने दिवंगत चालक की सेवाओं को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
Breakingnews
चंपावत में ब्रेक फेल होने से रोडवेज बस हुई हादसे का शिकार, चालक की मौके पर ही मौत, कई घायल

Champawat Accident : चंपावत में बुधवार सुबह-सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। यहां रोडवेज बस के ब्रेक फेल होने से बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में चालक की मौके पर ही मौत हो गई।
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चंपावत में ब्रेक फेल होने से रोडवेज बस हुई हादसे का शिकार
चंपावत जिले के लोहाघाट क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। धारचूला से टनकपुर की ओर जा रही उत्तराखंड परिवहन निगम की बस लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मरोड़ाखान और रायकोट के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में बस चालक बेनीराम भट्ट की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे में चालक की मौके पर ही मौत
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस में तकनीकी खराबी आने की आशंका जताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के मुताबिक, मोड़ के पास चालक ने बस को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन इसी दौरान वो वाहन से नीचे गिर गए। दुर्भाग्यवश बस का पहिया उनके ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी जान चली गई।

बस में सवार 34 यात्रियों का किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी की सहायता से बस को हटाकर चालक के शव को बाहर निकाला गया। बस में सवार 34 यात्री इस हादसे में सुरक्षित बताए जा रहे हैं। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
Champawat
चंपावत की बेटी ने अमेरिका में लहराया परचम, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

Champawat News : चंपावत की प्रतिभाशाली बेटी आयुष्री भावे ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अमेरिका की प्रतिष्ठित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद प्राप्त कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
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चंपावत की बेटी ने अमेरिका में लहराया परचम
चंपावत की बेटी ने आयुष्री भावे ने अमेरिका में परचम लहराया है। आयुष्री ने अमेरिका की प्रतिष्ठित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद प्राप्त कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। आयुष्री की इस शानदार उपलब्धि पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उन्हें सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर
जिलाधिकारी ने कहा कि पहाड़ की कठिन परिस्थितियां और सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते, यदि लक्ष्य स्पष्ट और प्रयास निरंतर हों। उन्होंने कहा कि आयुष्री भावे आज उत्तराखण्ड की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं।

इस अवसर पर आयुष्री की माता भावना को भी सम्मानित किया गया, जो वर्तमान में राजकीय इंटर कॉलेज देवीधुरा में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि बेटी की सफलता के पीछे मां के संस्कार, शिक्षा और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
फार्माकोलॉजी विषय पर आयुष्री की कई पुस्तकें प्रकाशित
लोहाघाट निवासी आयुष्री भावे ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालयों से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने भीमताल से बी-फार्मा और जयपुर से एम-फार्मा की पढ़ाई पूरी की। कठिन परीक्षाओं को सफलता से उत्तीर्ण करते हुए उन्होंने अमेरिका में ये प्रतिष्ठित उपलब्धि हासिल की।
आयुष्री केवल शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कला और संगीत के क्षेत्र में भी उनकी विशेष रुचि और उपलब्धियां रही हैं। फार्माकोलॉजी विषय पर उनकी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही उन्होंने फाइन आर्ट एवं संगीत में भी डिग्री हासिल कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है।
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