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भारत में Nipah Virus की वापसी –लक्षण और बचाव की पूरी जानकारी

कोलकाता मे Nipah Virus के नए मामलें
भारत एक बार फिर स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के केंद्र में है, जहां देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में Nipah Virus (NiV) के नए मामलों ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आए संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। हालांकि राहत की बात यह है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निरंतर सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको निपाह वायरस के वर्तमान प्रकोप, इसके इतिहास, इससे जुड़े खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
1. ताजा स्थिति: पश्चिम बंगाल में निपाह की दस्तक (2025-26)
हाल ही में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से निपाह वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह घटना तब प्रकाश में आई जब दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में दो स्वास्थ्य कर्मियों (नर्स) में संदिग्ध लक्षण देखे गए।
क्या है पूरा मामला?
जनवरी 2026 की शुरुआत में, बारासात (कोलकाता के पास) के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले दो नर्सों (एक पुरुष और एक महिला) की तबीयत अचानक बिगड़ी। उनमें तेज बुखार और दिमागी सूजन (एन्सेफलाइटिस) के लक्षण पाए गए। 13 जनवरी 2026 को पुणे स्थित ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ (NIV) ने इन नमूनों में निपाह वायरस की पुष्टि की।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मामला सामने आते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर स्थिति की समीक्षा की और एक ‘नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम’ को राज्य में भेजा।
- कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग: स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लगभग 200 लोगों (जिनमें परिवार वाले और अस्पताल के कर्मचारी शामिल थे) की पहचान की और उनकी जांच की। राहत की बात यह रही कि सभी संपर्कों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वायरस का सामुदायिक फैलाव (Community Transmission) नहीं हुआ है।
- वर्तमान स्थिति: 27 जनवरी 2026 को ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (NCDC) ने घोषणा की कि दिसंबर के बाद से कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
2. केरल में भी रहा वायरस का असर (2025)
पश्चिम बंगाल से पहले, वर्ष 2025 के मध्य में दक्षिण भारतीय राज्य केरल में भी निपाह वायरस ने अपना कहर बरपाया था। जुलाई 2025 के आसपास केरल के मलप्पुरम और कोझिकोड जिलों में संक्रमण के मामले देखे गए थे।
- केरल में 2025 के दौरान कुल 4 मामले सामने आए, जिनमें से दुर्भाग्यवश 2 लोगों की मृत्यु हो गई।
- केरल सरकार ने पिछले अनुभवों (2018, 2019, 2021, 2023) से सीखते हुए बहुत तेजी से कंटेनमेंट जोन बनाए और स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और WHO का बयान
भारत में आए इन इक्का-दुक्का मामलों ने पड़ोसी देशों को भी सतर्क कर दिया है।
- स्क्रीनिंग: थाईलैंड, सिंगापुर, नेपाल, म्यानमार और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत से आने वाले यात्रियों के लिए हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी है।
- WHO का आश्वासन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 जनवरी 2026 को जारी अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत से इस वायरस के वैश्विक स्तर पर फैलने का जोखिम “कम” (Low) है। WHO ने भारत पर किसी भी तरह के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता को खारिज कर दिया है, क्योंकि भारत के पास इस वायरस को ट्रैक करने और रोकने की मजबूत क्षमता मौजूद है।
4. आखिर क्या है Nipah Virus? (Understanding Nipah Virus)
निपाह वायरस (NiV) एक ज़ूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus) है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह पैरामिक्सोविरिडे (Paramyxoviridae) परिवार से ताल्लुक रखता है।
मुख्य वाहक (Natural Host)
इस वायरस का प्राकृतिक वाहक फ्रूट बैट्स (Fruit Bats) यानी फल खाने वाले चमगादड़ हैं, जिन्हें ‘फ्लाइंग फॉक्स’ भी कहा जाता है। ये चमगादड़ बिना बीमार हुए अपने शरीर में वायरस को ले जा सकते हैं और अपने मल, मूत्र या लार के जरिए इसे फैला सकते हैं।
इतिहास
- 1998 (मलेशिया): निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के ‘सुंगई निपाह’ गांव में हुई थी। वहां यह सूअरों के जरिए इंसानों में फैला था।
- भारत में इतिहास: भारत में इसका पहला प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में देखा गया था। इसके बाद 2007 में नादिया (पश्चिम बंगाल) और फिर 2018 से केरल में इसके मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

5. यह कैसे फैलता है? (Transmission)
निपाह वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से तीन तरीकों से होता है:
- जानवरों से इंसानों में: यदि कोई व्यक्ति संक्रमित चमगादड़ या सूअर के सीधे संपर्क में आता है, या उनके मल-मूत्र से दूषित चीजों को छूता है।
- दूषित भोजन: यह भारत और बांग्लादेश में संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है। चमगादड़ अक्सर खजूर के पेड़ों से रस पीते हैं या फलों को कुतरते हैं। यदि कोई इंसान कच्चा खजूर का रस (ताड़ी) पीता है या चमगादड़ द्वारा कुतरा हुआ फल खाता है, तो वह संक्रमित हो सकता है।
- इंसान से इंसान में: यह आमतौर पर अस्पतालों में या परिवार के सदस्यों के बीच होता है जब वे किसी संक्रमित मरीज की देखभाल कर रहे होते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके शारीरिक तरल पदार्थों (Blood, Saliva) के संपर्क में आने से यह स्वस्थ व्यक्ति को बीमार कर सकता है।
6. लक्षण और पहचान (Symptoms)
संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 4 से 14 दिन (Incubation Period) लग सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में यह समय 45 दिनों तक भी हो सकता है।
शुरुआती लक्षण:
- तेज बुखार और बदन दर्द।
- सिरदर्द और भारीपन।
- खांसी और गले में खराश।
- सांस लेने में तकलीफ।
- उल्टी और पेट दर्द।
गंभीर लक्षण (खतरे की घंटी):
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, वायरस दिमाग पर हमला करता है, जिसे ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस’ (Acute Encephalitis) कहते हैं। इसके लक्षण हैं:
- चक्कर आना और भ्रम की स्थिति (Drowsiness/Confusion)।
- दौरे पड़ना (Seizures)।
- 24 से 48 घंटों के भीतर मरीज का कोमा में चले जाना।
मृत्यु दर: निपाह वायरस की मृत्यु दर (Case Fatality Rate) बहुत अधिक है, जो प्रकोप की गंभीरता के आधार पर 40% से 75% तक हो सकती है। यही कारण है कि इसे कोविड-19 से भी अधिक घातक माना जाता है, भले ही यह कोविड जितना संक्रामक नहीं है।
7. इलाज और वैक्सीन (Treatment & Vaccine)
यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशिष्ट दवा या वैक्सीन (टीका) उपलब्ध नहीं है।
- सपोर्टिव केयर: इलाज का मुख्य आधार ‘सपोर्टिव केयर’ है। यानी डॉक्टर मरीज के लक्षणों का इलाज करते हैं—बुखार कम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना, और सांस लेने में दिक्कत होने पर वेंटिलेटर का उपयोग करना।
- मोनोक्लोनल एंटीबॉडी: कुछ मामलों में (जैसे केरल में 2018 और 2024 में), प्रयोगात्मक तौर पर ‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी’ (m102.4) का उपयोग किया गया है, लेकिन यह अभी भी ट्रायल के चरण में है और हर जगह उपलब्ध नहीं है।
8. बचाव ही सुरक्षा है: क्या करें और क्या न करें
चूंकि इसका कोई पक्का इलाज नहीं है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपाय निम्नलिखित हैं:
खान-पान में सावधानी:
- फलों की जांच: जमीन पर गिरे हुए फल कभी न खाएं। बाजार से लाए गए फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं और छीलें।
- दांतों के निशान: अगर किसी फल पर पक्षी या जानवर के दांतों/नाखूनों के निशान दिखें, तो उसे तुरंत फेंक दें।
- खजूर का रस: खुले बर्तनों में इकट्ठा किया गया कच्चा खजूर का रस या ताड़ी पीने से पूरी तरह बचें। इसे उबालकर पीना सुरक्षित है।
व्यक्तिगत स्वच्छता:
- अपने हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं, खासकर भोजन करने से पहले और बाद में।
- अगर आप अस्पताल जा रहे हैं, तो N95 मास्क का प्रयोग करें।
बीमारों से दूरी:
- बुखार और खांसी से पीड़ित व्यक्तियों के बेहद करीब जाने से बचें।
- अगर किसी क्षेत्र में निपाह का प्रकोप है, तो वहां की यात्रा टालें।
- मृत जानवरों (विशेषकर चमगादड़ और सूअर) को न छुएं।
9. निष्कर्ष: डरें नहीं, जागरूक रहें
वर्तमान परिदृश्य में, पश्चिम बंगाल और केरल दोनों ही जगहों पर स्वास्थ्य तंत्र ने सराहनीय कार्य किया है। भारत सरकार की सर्विलांस प्रणाली (Surveillance System) मजबूत है और संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान की जा रही है।
आम जनता के लिए संदेश साफ है—घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। निपाह वायरस हवा में कोरोना की तरह आसानी से नहीं फैलता है। यह केवल बहुत नजदीकी संपर्क या दूषित भोजन से फैलता है। इसलिए, अपनी स्वच्छता का ध्यान रखें, फलों को धोकर खाएं और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें।
यदि आपको या आपके परिवार में किसी को तेज बुखार के साथ दिमागी उलझन या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
“सतर्कता ही सुरक्षा है, और जागरूकता ही बचाव।”
(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और स्वास्थ्य संगठनों (WHO/NCDC) की रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी चिकित्सीय सलाह के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श करें।)
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Dehradun
उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू ने बढ़ाई टेंशन, 24 घंटे में सामने आए 31 नए केस, आंकड़ा 484 पार

Dehradun News : उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में संक्रमण के 31 नए मामले सामने आए हैं। जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
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स्वाइन फ्लू ने बढ़ाई टेंशन, 24 घंटे में सामने आए 31 नए केस
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। एक ही दिन में 31 नए मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और संक्रमण की रोकथाम से जुड़ी गतिविधियां तेज कर दी हैं। नए मामलों के साथ राज्य में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 484 हो गई है। इनमें से 84 मरीज अभी सक्रिय हैं और अलग-अलग अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है।
देहरादून में सबसे ज्यादा नए मामले
24 घंटे में सामने आए 31 नए मामलों में 23 मरीज देहरादून जिले से हैं। राज्य में अब तक सामने आए कुल 484 मामलों में भी बड़ी संख्या देहरादून जिले से ही है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए देहरादून के सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

रैपिड रिस्पॉन्स टीमें सक्रिय
स्वाइन फ्लू के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अलग-अलग जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय किया गया है। इन टीमों के जरिए नए मरीजों की जानकारी जुटाने के साथ संक्रमण के संभावित स्रोत और संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है।
संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए हो रहा काम
देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में स्वाइन फ्लू के संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जहां भी स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ रहे हैं, स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर उनकी ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी जुटा रही हैं। इसके साथ ही मरीज के संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग भी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग का फोकस नए मामलों की समय पर पहचान करने और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने पर है। बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी में जुटी हुई हैं।
Uttarakhand
बारिश में बढ़ा डेंगू-मलेरिया का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी….

Uttarakhand News : बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के साथ-साथ डायरिया, टायफायड, हैजा और पीलिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
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बारिश में बढ़ा डेंगू-मलेरिया का खतरा
बारिश में डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ गया। प्रदेशभर के अस्पतालों में सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बासी और अधपका भोजन खाने से बचने तथा खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करने की सलाह दी है। तरबूज, खरबूज और गन्ने के रस का सेवन करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। दूषित पानी से बनी बर्फ से भी परहेज करने की सलाह दी गई है।

पानी को उबालकर ही करें इस्तेमाल
पीने और खाना बनाने के लिए पानी को अच्छी तरह उबालकर इस्तेमाल करने की अपील की गई है। वहीं, पानी को क्लोरीन से शुद्ध करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की सलाह का पालन करने को कहा गया है।
मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई है। पानी की टंकियों और अन्य बर्तनों को ढककर रखने के साथ गमलों, पुराने डिब्बों, बोतलों और बेकार टायरों में पानी जमा न होने देने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दी ये सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के इस्तेमाल और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने की सलाह दी है। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर या जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द अथवा त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न लें।
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू से संक्रमित 5 मरीजों की मौत, प्रदेश में अब तक सामने आए 49 मामले

Uttarakhand News : स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक कुल 40 मामले सामने आए हैं। जिनमें से 27 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि अन्य मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
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उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू से संक्रमित 5 मरीजों की मौत
उत्तराखंड में अब तक स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों में से अब तक 5 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों में अन्य गंभीर बीमारियां और को-मॉर्बिडिटी भी मौजूद थीं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के लिए एडवाइजरी जारी
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। राज्य स्तर से भी एडवाइजरी मिलने के बाद अस्पतालों में आइसोलेशन बेड चिह्नित करने, फ्लू के मरीजों के लिए आवश्यक व्यवस्था करने, पर्याप्त दवाइयां, मास्क, सैनिटाइजर और पीपीई किट उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सामग्री की खरीद भी की जा रही है।

वर्तमान स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वर्तमान स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार फिलहाल सामने आ रहे अधिकांश मामले माइल्ड हैं। हालांकि बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी या को-मॉर्बिडिटी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का करें इस्तेमाल
विभाग ने लोगों से अपील की है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें। सर्दी, जुकाम या बुखार जैसे लक्षण होने पर घर पर रहें और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें। खांसते या छींकते समय रुमाल अथवा टिश्यू का इस्तेमाल करें, खुले में न थूकें और किसी सतह को छूने के बाद हाथों को सैनिटाइज करें। अधिकारियों ने कहा कि कोरोना काल के दौरान अपनाई गई सावधानियां इस संक्रमण से बचाव में भी कारगर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें
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