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Rishikesh News: दिसंबर तक बंद रहेगा ऋषिकेश का राम झूला, जानें क्यों लिया गया ये फैसला ?

Rishikesh News : ऋषिकेश के प्रसिद्ध रामझूला पुल को मरम्मत कार्य के चलते आम लोगों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) नरेंद्र नगर के अनुसार पुल के व्यापक पुनर्वास का काम शुरू हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मरम्मत पूरी होने के बाद ही पुल को दोबारा जनता के लिए खोला जाएगा।
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दिसंबर तक बंद रहेगा ऋशिकेष का राम झूला
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, रामझूला पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और इसे राज्य के असुरक्षित पुलों की सूची में शामिल किया गया था। आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सरकार ने मरम्मत कार्य के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया।
मरम्मत के कारण लिया गया ये फैसला
मरम्मत के दौरान गंगा नदी के भीतर स्थित पुल के 20 पाइलों (आधार स्तंभों) को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा पुल में लगे 440 सस्पेंडर वायर भी बदले जा रहे हैं, ताकि इसकी संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वर्ष 1985 में निर्मित ये सस्पेंशन पुल लगभग 220 मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा है। रामझूला मुनि की रेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र को जोड़ने वाला एक प्रमुख संपर्क मार्ग होने के साथ-साथ धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

2023 में बारिश के कारण पुल के सहायक तार हो गए थे क्षतिग्रस्त
गौरतलब है कि 17 अगस्त 2023 को भारी बारिश और गंगा के जलस्तर में तेज वृद्धि के कारण पुल के कुछ सहायक तार क्षतिग्रस्त हो गए थे और संरचना में दरारें आने के बाद दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई थी। इससे पहले जुलाई 2019 में भी कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि मरम्मत कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि दिसंबर के अंत तक रामझूला को सुरक्षित रूप से फिर से आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए खोला जा सके।
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कौन हैं नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?, आज तक नहीं हारे एक भी चुनाव, जाने कितने हैं पढ़े-लिखे…

New Education Minister Of India : नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी आधिकारिक आदेश में उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की पुष्टि की गई।
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कौन हैं नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने प्रह्लाद जोशी चर्चाओं में हैं। हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है। प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ। उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे, जबकि उनकी माता मालतीबाई गृहिणी थीं।
कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री
प्रह्लाद जोशी की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, हुबली में प्रवेश लिया, जहां से उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बी.ए.) की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों और जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया। सार्वजनिक जीवन में बढ़ती भागीदारी के साथ उन्होंने लोगों से जुड़कर विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम किया, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक सफर की मजबूत नींव रखी।

ऐसे हुई थी राजनीतिक जीवन की शुरुआत
प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ सक्रिय रूप से काम किया। 1990 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान तिरंगा आंदोलन और कर्नाटक में ‘कश्मीर बचाओ आंदोलन’ जैसे अभियानों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1998 में उन्हें भाजपा के धारवाड़ जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।
आज तक नहीं हारे एक भी चुनाव
साल 2004 में उन्होंने पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता। तब से लेकर 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज करते हुए वे पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं। वर्ष 2014 से 2016 तक वे कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।

केंद्र सरकार में निभाई कई अहम जिम्मेदारियां
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुके हैं। वे संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में उनके पास खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, उपभोक्ता मामले और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वे केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं।
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नहीं रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

Hira Singh Bisht : उत्तराखंड की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राजनीतिक जगत में शोक की लहर फैल गई।
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नहीं रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट
कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट का देर रात निधन हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक हीरा सिंह बिष्ट पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। देर रात करीब डेढ़ बजे उन्हें अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद परिजन उन्हें देहरादून के ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक जीवन लंबे अनुभव और जनसेवा के लिए जाना जाता है। उन्होंने श्रमिकों, गरीबों और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। उनके सरल स्वभाव और जनसंपर्क के कारण उन्हें जनता के बीच एक लोकप्रिय नेता माना जाता था।

एन.डी. तिवारी सरकार में रहे थे कैबिनेट मंत्री
अपने राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने उत्तराखंड की तत्कालीन एन.डी. तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां निभाईं। परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का संचालन करते हुए उन्होंने कई प्रशासनिक और जनहित से जुड़े कार्य किए।
उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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उत्तराखंड में भी उठी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग, हरक सिंह रावत बोले तभी मिलेगा छात्रों को न्याय

Uttarakhand News : दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के बाद आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद से युवाओं में खुशी की लहर है। कॉकरोच जनता पार्टी ने जहां इसे लोकतंत्र की जीत बताया है तो वहीं कांग्रेस ने इसे युवा शक्ति की जीत बताया है।
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उत्तराखंड में भी उठी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड में भी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग उठने लगी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने उत्तराखंड टेक्निकल यूनीवर्सिटी में हुए पेपर लीक को लेकर कहा है कि उत्तराखंड के युवाओं को भी न्याय मिलना चाहिए और शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को अपना इस्तीफा देना चाहिए।
सोशल मीडिया पर तेज हुई इस्तीफे की मांग
हरक सिंह रावत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग वाले कमेंटस की जैसे बाढ़ सी आ गई है। युवा और जनता शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। बता दें कि हाल ही में यूटीयू की दो पेपर लीक होने के कारण परीक्षाएं रद्द की गई। हालांकि पेपर लीक करने वाले आरोपी प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन छात्रों का कहना है कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

हरक सिंह रावत बोले तभी मिलेगा छात्रों को न्याय
हरक सिंह रावत का बयान सामने आने के बाद अब छात्रों का कहना है कि उत्तराखंड में एक के बाद एक होने वाले पेपर लीक की सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। हरक सिंह का कहना है कि तभी जाकर उत्तराखंड के युवाओं को न्याय मिलेगा।
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