Uttarakhand
सिलक्यारा हादसा: कार्य प्रगति पर नही आई कोई अड़चन तो कल बाहर होंगे मजदूर, बदलेंगे सुरंग निर्माण मानक।

उत्तरकाशी – सिलक्यारा सुरंग में 10 दिन से फंसे 41 श्रमिकों की मंगलवार को पहली तस्वीर सामने आई। छह इंच के पाइप से भेजे गए एंडोस्कोपिक कैमरे में सभी श्रमिक सुरक्षित नजर आए। वॉकी-टॉकी से उनसे बात भी हुई। मजदूरों को इसी पाइप से दवाई, संतरे, केले, रोटी, सब्जी, पुलाव और नमक भेजा गया।
इस बीच, श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लि. ने सुरंग के भीतर से रेस्क्यू पर फोकस बढ़ा दिया है। एमडी महमूद अहमद ने बताया कि बुधवार को रेस्क्यू अभियान की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पूर्व में 22 मीटर तक भेजे गए 900 मिमी के पाइप के भीतर से 800 मिमी का पाइप टेलीस्कोपिक तकनीक से भेजा जा रहा है।
Uttarakhand
Banbhulpura News: रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले की सुनवाई, इस दिन आएगा फैसला

हल्द्वानी बनभूलपुरा केस: कड़ी सुरक्षा के बीच सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Banbhulpura News: नैनीताल जिले के हल्द्वानी में बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने 19 मार्च को सुनवाई की अगली तारीख तय की है. आज की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस ने कड़े सुरक्षा व्यवस्था के इन्तजाम किए थे. ड्रोन कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर राखी गई.
मुख्य बिंदु
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रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में 19 मार्च को होगी सुनवाई
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण मामले में आज 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को सुनिश्चित की है. आज की सुनवाई को देखते हुए हल्द्वानी, बनभूलपुरा और आस-पास के इलाकों में कड़े सुरक्षा के इन्तजाम किए गए थे.
सुनवाई के दौरान चप्पे चप्पे पर नजर आई पुलिस
सुनवाई के दौरान कोई भी अप्रिय घटना घटित न हो इसके लिए स्वयं एसएसपी मंजुनाथ टी. सी. ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. साथ ही पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई. अराजक तत्वों पर विशेष निगरानी के साथ संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी राखी गई.
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कोर्ट के फैसले पर टिका 5 हजार परिवारों का भविष्य
बनभूलपुरा क्षेत्र का मामला इसलिए संवेदनशील बना हुआ है क्योंकि रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण होने की बात कही जाती है. इस जमीन पर लगभग 3660 मकान बने हैं, जिनमें 5236 परिवार निवास करते हैं. इस कारण हजारों लोगों का भविष्य इस मामले के फैसले पर निर्भर माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में लगातार चिंता का माहौल बना हुआ है.
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जानिए.. अब तक क्या रहा मामले का पूरा हाल
दरअसल, वर्ष 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद प्रभावित पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने को कहा. साथ ही फरवरी 2023 में राज्य सरकार और रेलवे से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई, जबकि मार्च 2023 में पुनर्वास और मानवीय पहलुओं पर विचार करने की बात सामने आई.
इसके बाद वर्ष 2024 और 2025 में भी इस मामले में कई बार सुनवाई की तारीख तय हुई, लेकिन अन्य मामलों के कारण सुनवाई टलती रही. अब प्रस्तावित सुनवाई को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा. अब कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी.
Haldwani
धमकी भरे मेल से दहशत, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज को बम से उड़ाने की धमकी

हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज को मिली बम से उड़ाने की धमकी
HALDWANI NEWS: उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी में स्थित सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज को घातक साइनाइट बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया. इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट, सिविल कोर्ट और हल्द्वानी जजी कोर्ट को भी ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है.
मुख्य बिंदु
कॉलेज के प्रिंसिपल को आया धमकी भरा मेल
जानकारी के मुताबिक, 24 फरवरी को सुबह 11 बजकर 38 मिनट एक धमकी भरा मेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को भेजा गया था. इस मेल में दावा किया गया कि सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज परिसर में साइनाइट पॉयजन वाले बम लगाए गए हैं, जो दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर ब्लास्ट करेंगे. मेल में सुबह 11 बजे तक डॉक्टरों और स्टूडेंट्स को बाहर निकालने की चेतावनी भी दी गई थी.
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घटना की सूचना मिलने पर मची अफरा-तफरी
सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई और एहतियातन सभी डॉक्टरों, स्टाफ और छात्रों को बिल्डिंग से बाहर निकाल दिया गया. सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. सबसे पहले पुलिस ने सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्च ऑपरेशन चलाया.
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बम डिस्पोजल स्क्वॉड और पुलिस ने चलाया सर्च अभियान
बम डिस्पोजल स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीम ने पार्किंग, वार्ड, कार्यालय और अन्य संवेदनशील स्थानों की गहन तलाशी ली. इसके बाद टीम मेडिकल कॉलेज परिसर पहुंची और पूरे परिसर की सघन जांच की.
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सीओ, हल्द्वानी, अमित कुमार ने बताया कि
हमें मेडिकल कॉलेज को ईमेल के माध्यम से धमकी मिलने की सूचना मिली थी.एहतियातन पूरे परिसर को खाली कराकर बम डिस्पोजल और डॉग स्क्वॉड से चेकिंग कराई गई है. फिलहाल कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। मामले की जांच की जा रही है.
Uttarakhand
ALMORA NEWS: सल्ट में दहशत फैलाने वाला गुलदार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की साँस
ALMORA NEWS: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के डभरा सौराल गांव में कई दिनों से दहशत का कारण बना गुलदार आखिरकार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद कर लिया गया. आबादी के पास उसकी लगातार मौजूदगी और पालतू जानवरों पर हमलों से ग्रामीण में दहशत का माहौल बना हुआ था. गुलदार के पकड़े जाने के बाद गांव के लोगों ने राहत की साँस ली है.
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मुख्य बिंदु
वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ गुलदार
दरअसल, ग्रामीणों के मुताबिक गुलदार पिछले कुछ समय से गांव के आसपास घूम रहा था और कई बार बकरियों को अपना शिकार बना चुका था. सी कारण लोगों में डर का माहौल बन गया था. खासतौर पर बच्चों और महिलाओं को अकेले बाहर भेजने में परिजन असहज महसूस कर रहे थे और लगातार वन विभाग से कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
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गुलदार के कैद होने के बाद ग्रामीणों में राहत
इसके बाद वन विभाग ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील स्थान पर पिंजरा लगाया. निगरानी बढ़ाई गई और टीम को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए. जिसके बाद सुबह के समय लगभग दो वर्षीय मादा गुलदार पिंजरे में फंस गया, जिसे देखकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली.
मेडिकल जांच के बाद होगी अग्रिम कार्रवाई
वन अधिकारियों के मुताबिक पकड़ा गया गुलदार स्वस्थ है और उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू सेंटर अल्मोड़ा भेजा जा रहा है. वहां चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. साथ ही अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें और किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें.
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