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लखीमपुर खीरी में मंडी गेट पर बेकाबू हुए सपा समर्थक, गुस्साए समर्थकों ने सुरक्षा कर्मियों पर पानी की बोतलें और चप्पलें बरसाई।

लखीमपुर – खीरी और धौरहरा सीट सपा के खाते में आने के बाद मंडी गेट पर हजारों समर्थकों की भीड़ जुट गई। इस दौरान हालात बेकाबू हो गए। धौरहरा सीट से आनन्द भदौरिया के जीत की अधिकारिक घोषणा की गई तो समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। समर्थक अपने प्रत्याशी से मिलने के बाद मतगणना स्थल पहुंचे।

समर्थकों की अधिक भीड़ देख सुरक्षाकर्मियों ने रोकने की कोशिश की, जिससे समर्थक भड़क गए। गुस्साए समर्थकों ने सुरक्षा कर्मियों पर पानी की बोतलें और चप्पलें फेंकनी शुरू कर दीं। पुलिस कर्मियों के अलावा एसएसबी जवानों ने किसी तरह समर्थकों को खदेड़ कर मंडी का मेन गेट बंद कर दिया। हालांकि काफी देर तक समर्थक मंडी गेट के बाहर हंगामा काटते रहे।
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सीएम पद से चूके अब स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी छिना, धन सिंह रावत से हटाकर सुबोध उनियाल को दिया गया चार्ज

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में दो दिन पहले कैबिनेट विस्तार देखने को मिला था। जिसमें पांच नए मंत्री बनाए गए हैं। जबकि रविवार को सीएम धामी ने नवनियुक्त मंत्रियों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया है। लेकिन इसके साथ ही पुराने मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला है।
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सुबोध उनियाल को मिली स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
रविवार को हुए विभागों के बंटवारे में स्वास्थ्य विभाग को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नौ साल से प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से ये जिम्मा वापस ले लिया गया है। अब ये जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को दी गई है।

सीएम पद से चूके अब स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी छिना
दो बार सीएम से बनने से चूके कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से अब स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा भी वापस ले लिया गया है। अब उनके पास विद्यालयी शिक्षा, उच्च ,तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा के साथ सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी ही बची है। बता दें कि फिलहाल धन सिंह रावत पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डॉ रावत के कार्यकाल में हुए कई आंदोलन
बता दें कि डॉ. धन सिंह रावत को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी त्रिवेंद्र सरकार में साल 2017 में सौंपी गई थी। जिसके बाद तीरथ रावत और धामी सरकार में भी ये जिम्मेदारी उन्हीं के पास रही। लेकिन अब नौ साल बाद ये जिम्मा उनस वापस ले लिया गया है। उत्तराखंड में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डॉ. धन सिंह रावत का कार्यकाल में पहाड़ों पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर कई आंदोलन देखने को मिले। चौखुटिया से लेकर टिहरी तक लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर आंदोलन तक किए।

चौखुटिया में सरकारी अस्पताल की बदहाली को लेकर बड़ा जन आंदोलन हुआ। टिहरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, पौड़ी और रामनगर में भी बड़े आंदोलन देखने को मिले। चौखुटिया में शुरू हुआ आंदोलन देहरादून कूच पदयात्रा में बदला। जिसके बाद खुद सीएम धामी ने इसका संज्ञान लिया था। माना जा रहा है बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लगातार हो रहे सरकार के विरोध के बाद ये फैसला लिया गया है।
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धाकड़ धामी का चार साल का कार्यकाल बेमिसाल, UCC से लेकर सशक्त भू-कानून तक लिए ये बड़े फैसले

Uttarakhand News : धामी सरकार ने आज चार साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस दौरान धामी सरकार ने UCC से लेकर सशक्त भू-कानून तक कई बड़े फैसले लिए जो ना केवल प्रदेश बल्कि देश के लिए नजीर बन गए हैं।
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धाकड़ धामी का चार साल का कार्यकाल बेमिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने चार वर्ष के दौरान कई ऐसे ऐतिहासिक और सशक्त फैसले लिए, जिनसे राज्य की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।
सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई। इसके साथ ही राज्य में सशक्त भू-कानून, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू कर कानून-व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
UCC से लेकर सशक्त भू-कानून तक लिए ये बड़े फैसले
यूसीसी के साथ ही सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इसका परिणाम ये रहा कि बीते चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

अवैध अतिक्रमण पर की गई कार्रवाई
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। जिसके अंतर्गत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है। अब यही प्राधिकरण पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए राज्य में लगभग 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जो प्रशासनिक दृढ़ता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई अहम फैसले
धामी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई अहम फैसले लिए हैं। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया। इसके साथ ही सहकारी प्रबंध समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना शुरू की गई। प्रदेश में अब तक 2.54 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संकेत है। स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का बिना ब्याज ऋण देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना की शुरुआत कर महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

राज्य आंदोलनकारियों के लिए लिया गया ऐतिहासिक निर्णय
उत्तराखण्ड सरकार ने चार साल के कार्यकाल में राज्य आंदोलनकारियों, सैनिकों और आमजन के सम्मान व कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को सम्मान देते हुए सरकारी नौकरियों में उन्हें 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है।
इसके साथ ही उनके आश्रितों की पेंशन ₹3000 से बढ़ाकर ₹5500 प्रतिमाह कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य आंदोलन के दौरान 7 दिन जेल गए व घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन भी ₹6000 से बढ़ाकर ₹7000 प्रतिमाह कर दी गई है, जो उनके संघर्ष के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर रोक
उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून की शुरुआत अप्रैल 2018 में हुई थी, जब उस समय की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने इसे लागू किया। इसके बाद नवंबर 2022 में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कानून को और कड़ा करते हुए इसमें संशोधन किया। संशोधित प्रावधानों के तहत जबरन धर्मांतरण के मामलों में अधिकतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया। आगे चलकर 2025 में इस कानून को और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त सख्त प्रावधान भी शामिल किए गए।
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उत्तराखंड BJP में कांग्रेसियों का बोलबाला, धामी कैबिनेट में आधे से ज्यादा मंत्री पूर्व कांग्रेसी, कार्यकर्ताओं की बढ़ेगी नाराजगी ?

Uttarakhand Politics: उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार हो गया है और आज सीएम धामी ने विभागों का भी बंटवारा कर दिया है। पहले जहां कैबिनेट विस्तार ना होने को लेकर चर्चाएं हो रहीं थी तो वहीं अब चर्चाएं धामी कैबिनेट में पूर्व कांग्रेसियों की संख्या को लेकर हो रही है।
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उत्तराखंड BJP में कांग्रेसियों का बोलबाला
उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों विकास की चर्चाएं कम और गोत्र की ज्यादा हो रहीं हैं। आप सोच रहे होंगे कि ये गोत्र कौन सा है तो ये गोत्र है कांग्रेस का। हाल ही में धामी कैबिनेट ने अपना कोरम पूरा करते हुए मंत्रिमंडल के पांच रिक्त पदों को भर लिया। जिस पर विकास की बातें कम गोत्र की बातें ज्यादा हो रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री धामी का शुक्रिया अदा किया। अपने बयान में गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी कांग्रेस गोत्र के नेताओं का खूब ख्याल रख रहे हैं।

धामी कैबिनेट में आधे से ज्यादा मंत्री पूर्व कांग्रेसी
दरअसल धामी कैबिनेट में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए मंत्रियों की संख्या के कारण ये चर्चाएं हो रही हैं। हाल ही में कैबिनेट विस्तार के बाद बनाए गए पांच मंत्रियों में से तीन मंत्री कांग्रेस गोत्र के बनाए गए हैं। यानी कि वो विधायक पहले कांग्रेस में थे और अब बीजेपी में आ गए हैं।
जिसके बाद अब धामी कैबिनेट में अच्छा खासा दबदबा कांग्रेस गोत्र के मंत्रियों का हो गया है। इनकी संख्या धामी कैबिनेट में 7 हो गई है। इस पर तंज कसते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने चुटकी ली है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं पर तंज करते हुए कहा कि वो इसी तरह दरी बिछाने का काम जारी रखें। सीटें और बड़े पद दूसरे दलों से आए नेता ले जाएंगे।

मथुरा दत्त जोशी हरक रावत के गोत्र पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के इस बयान पर कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मथुरादत जोशी ने पलटवार किया है। मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य किस गोत्र के हैं वो स्पष्ट करें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसी पाकिस्तानी को तो मंत्री नहीं बनाया।
धामी कैबिनेट में 12 में सात मंत्री पूर्व कांग्रसी
धामी सरकार में अब ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ गई है, जिनकी राजनीतिक शुरुआत कभी कांग्रेस से हुई थी। हाल ही में कैबिनेट में शामिल किए गए पांच विधायकों में से केवल मदन कौशिक और खजान दास का राजनीतिक आधार पूरी तरह भाजपा से जुड़ा रहा है। वहीं, भरत सिंह चौधरी, राम सिंह कैड़ा और प्रदीप बत्रा पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, हालांकि ये लंबे समय से भाजपा में सक्रिय हैं।
अगर पहले से मौजूद मंत्रियों पर नजर डालें, तो सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा और रेखा आर्य जैसे नाम भी ऐसे हैं, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से रही है, लेकिन वर्तमान में वे भाजपा का हिस्सा हैं।
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