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भारत में स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा जल्द शुरू हो सकती है: जानें प्रमुख बातें और कीमत….

नई दिल्ली : एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा जल्द ही शुरू कर सकती है। हाल ही में, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पुष्टि की कि भारत सरकार स्टारलिंक को सैटेलाइट इंटरनेट लाइसेंस देने के लिए तैयार है। हालांकि, इसके लिए कंपनी को भारत के सुरक्षा और नियमों का पालन करना होगा।
स्टारलिंक भारत के डेटा स्टोरेज और सुरक्षा नियमों का पालन करेगा
खबरों के मुताबिक, स्टारलिंक भारत के डेटा स्टोरेज और सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए तैयार है, जो सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, कंपनी को अभी भी इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी सहमति आधिकारिक रूप से प्रस्तुत करनी है।
TRAI सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की कीमत पर करेगा निर्णय
भारत में स्टारलिंक की सेवा की कीमत पर Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) का निर्णय अहम होगा। TRAI इस समय सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के वितरण और सैटेलाइट कंपनियों द्वारा इंटरनेट सेवा देने के नियमों पर विचार कर रहा है। इस फैसले का असर यह तय करेगा कि सैटेलाइट कंपनियां भारत में इंटरनेट सेवा कैसे प्रदान करेंगी और उनकी सेवा की कीमत क्या होगी।
भारत में स्टारलिंक की सेवा की संभावित कीमत
हालांकि अभी कीमत को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कंपनी के पूर्व प्रमुख के अनुसार, स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की शुरुआत में कीमत करीब ₹1,58,000 हो सकती है, जो पहले वर्ष के लिए स्टारलिंक डिश और अन्य उपकरणों की खरीदारी को शामिल करेगी। दूसरे वर्ष से सेवा की लागत लगभग ₹1,15,000 हो सकती है, जिसमें सभी टैक्स शामिल होंगे।
स्टारलिंक का उपकरण लगभग ₹37,400 का हो सकता है, और मासिक सेवा शुल्क करीब ₹7,425 हो सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
Jio और अन्य स्थानीय कंपनियों से होगा मुकाबला
भारत में स्टारलिंक को Jio जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जो इंटरनेट सेवा काफी सस्ते दरों पर उपलब्ध कराती हैं। अगर स्टारलिंक को भारत में सफलता प्राप्त करनी है, तो उसे अपनी कीमतों को प्रतिस्पर्धी रखना होगा, क्योंकि भारतीय उपभोक्ता बाजार में किफायती इंटरनेट की उच्च मांग है।
मुख्य बातें:
- स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए भारत के सुरक्षा और नियमों का पालन करेगा।
- TRAI सैटेलाइट स्पेक्ट्रम वितरण और इंटरनेट सेवा की कीमतों पर निर्णय लेगा, जो स्टारलिंक की कीमत को प्रभावित करेगा।
- पहले वर्ष में स्टारलिंक की सेवा की कीमत लगभग ₹1,58,000 हो सकती है।
- मासिक शुल्क करीब ₹7,425 हो सकता है, लेकिन इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
- Jio और अन्य स्थानीय इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी, जिन्हें किफायती दरों पर इंटरनेट सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
जैसे ही TRAI अपने नियमों को अंतिम रूप देगा, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का भविष्य एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच सकता है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो स्टारलिंक भारत में इंटरनेट सेवाओं की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसकी सफलता उसकी कीमत और प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगी।
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Delhi Bomb Threat: 4 स्कूल और Axis Bank को मिली धमकी, मचा हड़कंप

दिल्ली में बम धमकी के बाद अलर्ट, छात्रों को सुरक्षित निकाला गया
Delhi Bomb Threat: सोमवार सुबह दिल्ली में चार स्कूलों और एक बैंक को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। ईमेल के जरिए मिली इस धमकी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं। एहतियातन स्कूलों और बैंक परिसर को खाली कराया गया और सभी जगहों पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया
मुख्य बिंदु
दिल्ली के चार स्कूलों को मिली बम से उड़ाने की धमकी
सोमवार सुबह दिल्ली में उस समय हड़कंप मच गया जब अलग-अलग इलाकों में स्थित चार स्कूलों और एक बैंक को बम से उड़ाने की धमकी मिली। ये धमकी ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। सुरक्षा के मद्देनजर संबंधित परिसरों को खाली कराया गया और आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई। शुरुआती जांच में किसी भी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी है।
ईमेल के जरिए मिली थी धमकी
जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे से साढ़े 9 बजे के बीच दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर स्थित स्कूलों और एक बैंक को धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए। इनमें दिल्ली कैंट स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल, मयूर विहार का सलवान पब्लिक स्कूल, जनकपुरी का मीरा पब्लिक स्कूल और बल्लीमारान का राबिया गर्ल्स स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा बराखंबा रोड स्थित एक बैंक शाखा को भी धमकी भरा संदेश मिला। सूचना मिलते ही पुलिस टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और सभी स्थानों पर सघन जांच शुरू कर दी गई।
धमकी की मिलने के बाद स्कूलों को कराया खाली
धमकी मिलने के बाद एहतियातन स्कूल परिसरों को खाली कराया गया। छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। इसके साथ ही बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने स्कूल और बैंक परिसरों में गहन तलाशी अभियान चलाया। सुरक्षा एजेंसियों ने हर कोने की बारीकी से जांच की ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
साइबर टीम ईमेल का स्रोत पता लगाने में जुटी
पुलिस अधिकारियों के मुतबिक, अब तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। हालांकि जांच अभी जारी है और सभी स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वहीं साइबर टीम को भी सक्रिय कर दिया गया है, जो धमकी भरे ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
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कैब इंडस्ट्री में बड़ा धमाका : 5 फरवरी से शुरू हुई ‘Bharat Taxi App’, ओला-उबर को देगी टक्कर!

Bharat Taxi App : कैब इंडस्ट्री में बड़ी क्रांति, अब न सर्ज प्राइसिंग का डर और न कमीशन का बोझ
भारतीय परिवहन (Transportation) के इतिहास में 5 फरवरी 2026 की तारीख एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर ‘भारत टैक्सी ऐप’ (Bharat Taxi App) का आधिकारिक आगाज़ हो चुका है। यह महज एक और कैब बुकिंग ऐप नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ‘गेम चेंजर’ मॉडल है जो ओला और उबर जैसी दिग्गज कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने और ड्राइवर्स व यात्रियों के हितों की रक्षा करने के लिए मैदान में उतरा है।
सरकार के समर्थन और सहकारी (Cooperative) भावना के साथ शुरू हुई यह सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में अपनी दस्तक दे चुकी है, जिसे जल्द ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे महानगरों में चरणों में विस्तारित किया जाएगा।
क्यों चर्चा में है भारत टैक्सी ऐप? (Unique Value Proposition)
भारत में अब तक कैब एग्रीगेटर्स का जो मॉडल रहा है, उसमें अक्सर दो शिकायतें सबसे प्रमुख रही हैं: पहली, यात्रियों से वसूला जाने वाला बेतहाशा ‘सर्ज प्राइस’ (Surge Pricing) और दूसरी, ड्राइवर्स से लिया जाने वाला भारी-भरकम कमीशन (जो अक्सर 25% से 30% तक होता है)। भारत टैक्सी ऐप ने इन दोनों ही समस्याओं की जड़ पर प्रहार किया है।
ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल: अब ड्राइवर ही बनेंगे मालिक
इस ऐप की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खूबी इसका ‘ड्राइवर-ओनरशिप मॉडल’ है। पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स पर ड्राइवर केवल एक ‘पार्टनर’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन भारत टैक्सी में वे प्लेटफॉर्म के सह-मालिक (Co-owners) होंगे।
- ज़ीरो कमीशन: भारत टैक्सी अपने ड्राइवर्स से किसी भी ट्रिप पर कोई कमीशन नहीं लेगा। यानी यात्री जो भुगतान करेगा, उसका पूरा हिस्सा सीधे ड्राइवर की जेब में जाएगा।
- शेयरहोल्डिंग: इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले प्रत्येक ड्राइवर को सहकारी संस्था के 5 शेयर दिए जाएंगे। इससे ड्राइवर्स का संगठन के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा और वे खुद को एक कर्मचारी के बजाय एक उद्यमी महसूस करेंगे।
- न्यूनतम मेंबरशिप फीस: कमीशन के बजाय, ड्राइवर्स को केवल एक मामूली मेंबरशिप फीस देनी होगी। इसे अपनी सुविधा के अनुसार दैनिक, साप्ताहिक या मासिक आधार पर चुकाया जा सकता है।
यात्रियों के लिए क्या है खास? (Passenger Benefits)
एक आम यात्री हमेशा दो चीजें चाहता है: सस्ता सफर और पारदर्शिता। भारत टैक्सी इन दोनों पैमानों पर खरी उतरती दिख रही है।
किराए में 30% तक की बचत
कंपनी का दावा है कि भारत टैक्सी का किराया मौजूदा मार्केट रेट्स से लगभग 20 से 30 फीसदी तक कम होगा। चूंकि कंपनी बीच में अपना कमीशन नहीं रख रही है, इसलिए उस बचत का सीधा लाभ यात्रियों को सस्ते किराए के रूप में दिया जा रहा है।
सर्ज प्राइसिंग का खात्मा
अक्सर देखा जाता है कि बारिश होने पर या ऑफिस ऑवर्स के दौरान कैब का किराया अचानक दोगुना या तिगुना हो जाता है। भारत टैक्सी ने स्पष्ट किया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ‘नो सर्ज प्राइसिंग’ नीति लागू होगी। मौसम खराब हो या ट्रैफिक जाम, यात्री को वही किराया देना होगा जो बुकिंग के समय स्क्रीन पर दिखेगा।
विविध विकल्प
भारत टैक्सी ऐप केवल कारों तक सीमित नहीं है। इसमें यात्रियों को उनकी ज़रूरत और बजट के हिसाब से तीन प्रमुख विकल्प मिलेंगे:
- बाइक (Bike Taxi) – कम दूरी और ट्रैफिक से बचने के लिए।
- ऑटो (Auto Rickshaw) – किफायती और आसान सफर के लिए।
- कार (Cabs/Taxis) – कंफर्टेबल लंबी दूरी की यात्रा के लिए।
ड्राइवर्स की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा (Social Security)
भारत टैक्सी केवल बिजनेस पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि यह अपने ड्राइवर्स (जिन्हें ‘सारथी’ कहा जा सकता है) के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। प्लेटफॉर्म ने लॉन्च के साथ ही निम्नलिखित लाभों की घोषणा की है:
- दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance): ड्यूटी के दौरान किसी भी अनहोनी की स्थिति में ड्राइवर को 5 लाख रुपये का कवर दिया जाएगा।
- स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance): ड्राइवर और उसके परिवार की सेहत का ख्याल रखते हुए 5 लाख रुपये का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा भी प्रदान किया जाएगा।
- पारदर्शी भुगतान: भुगतान प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि ड्राइवर्स को उनके पैसे के लिए हफ्तों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
आंकड़ों में भारत टैक्सी का दबदबा
लॉन्चिंग के समय ही भारत टैक्सी ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। यह दिखाता है कि मार्केट में इस तरह के विकल्प की कितनी सख्त ज़रूरत थी।
| विवरण | आंकड़े |
| लॉन्च की तारीख | 5 फरवरी 2026 |
| प्रारंभिक शहर | दिल्ली-एनसीआर |
| पंजीकृत ड्राइवर्स | 3 लाख से ज्यादा |
| शुरुआती यूजर्स | 1 लाख से ज्यादा |
| संभावित बचत | 30% तक (यात्रियों के लिए) |
| कमीशन दर | 0% (शून्य) |
कैब इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?
भारत टैक्सी का आना भारतीय गिग इकोनॉमी (Gig Economy) के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे बड़ी विदेशी कंपनियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: जब ग्राहकों को सस्ता और ड्राइवर्स को बेहतर विकल्प मिलेगा, तो अन्य कंपनियां भी अपनी दरों और कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव करने पर मजबूर होंगी।
- ड्राइवर संतुष्टि: अगर ड्राइवर्स को बेहतर कमाई और सम्मान मिलता है, तो कैब कैंसिलेशन (Cancellation) जैसी समस्याएं कम होंगी, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: सहकारी मॉडल होने के कारण, पैसा विदेशी कंपनियों के खातों में जाने के बजाय देश के भीतर और सीधे काम करने वाले लोगों के पास रहेगा।
निष्कर्ष: एक नई उम्मीद का उदय
भारत टैक्सी ऐप का उद्देश्य केवल एक कमर्शियल ऐप बनना नहीं, बल्कि एक समावेशी (Inclusive) पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। जहां तकनीक का इस्तेमाल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सेवा और सशक्तिकरण के लिए किया जा रहा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो यह आने वाले समय में न केवल परिवहन, बल्कि अन्य डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए भी एक मानक (Benchmark) बन जाएगा।
यदि आप भी दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और महंगे किराए व सर्ज प्राइसिंग से परेशान हैं, तो ‘भारत टैक्सी ऐप’ को आज़माना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह न केवल आपकी जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि देश के लाखों ड्राइवर्स को एक सम्मानजनक जीवन जीने में मदद भी करेगा।
Uttarakhand
भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी उत्तराखंड की झांकी, “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर है आधारित

Uttarakhand News : भारत पर्व पर उत्तराखंड की झांकी भी प्रदर्शित होगी। जो कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर आधारित है। इसमें अल्मोड़ा और बागेश्वर की ताम्र कला को प्रदर्शित किया गया है।
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भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी उत्तराखंड की झांकी
भारत पर्व के आयोजन के दौरान 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखण्ड की विकास यात्रा के दर्शन किए जा सकेंगे। इस वर्ष उत्तराखण्ड की झांकी की थीम “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” रखी गई है, जो आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पारंपरिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
“आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की थीम पर है आधारित
सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने बताया कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” झांकी के ट्रैक्टर सेक्शन में पारंपरिक वाद्ययंत्रों ढोल और रणसिंघा की आकर्षक तांबे की प्रतिकृतियां हैं, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्पी कारीगरों की कलात्मक महारत का प्रतीक हैं।

ट्रेलर सेक्शन के पहले भाग में तांबे के मंजीरे की एक बड़ी मूर्ति दिखायी गई है, जो तांबे की कला की बारीकियों को विस्तार से उजागर करती है। बीच का सेक्शन खूबसूरती से बनाए गए तांबे के बर्तन जैसे गागर, सुरही, कुण्डी को दर्शाया गया है, जो उत्तराखण्ड के पारंपरिक घरेलू जीवन के आवश्यक तत्व हैं।
कौशल और श्रम की गरिमा का प्रतीक हैं ये बर्तन
इस सेक्शन के नीचे, साइड पैनल पारंपरिक वाद्ययंत्र भोंकोर के प्रमुख चित्रणों से सजाए गए हैं, जो सांस्कृतिक कहानी को और समृद्ध करते हैं। झांकी के पिछले सेक्शन में तांबे के कारीगर की एक आकर्षक और प्रभावशाली मूर्ति है, जो हाथ से तांबे के बर्तन बनाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है। कारीगर के चारों ओर बारीकी से बनाए गए तांबे के बर्तन हैं, जो पीढ़ियों से मिले ज्ञान, कौशल और श्रम की गरिमा का प्रतीक हैं।
उत्तराखण्ड की ये झांकी उत्तराखण्ड के शिल्पी समुदाय की कारीगरी, सांस्कृतिक योगदान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका, कौशल एवं परम्परा को दर्शाती है। चौहान ने आगे बताया कि उत्तराखण्ड की झांकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उसकी प्राचीन शिल्प कला के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रस्तुत करती है, जो आज भी जीवंत रूप में समाज का हिस्सा बनी हुई है।

उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और रचनात्मक विरासत
स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक तकनीकों से निर्मित तांबे के बर्तन और उपकरण न केवल उत्कृष्ट शिल्प कौशल का उदाहरण हैं, बल्कि राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक के साथ ही धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है। सदियों से ये शिल्प उत्पाद घरेलू उपयोग और पारंपरिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग रहे हैं, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपराओं और रचनात्मक विरासत को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शिल्पी समुदाय के अनेक परिवारों के लिए ये प्राचीन शिल्प केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि आजीविका का एक सशक्त माध्यम भी है। पीढ़ियों से चली आ रही उत्कृष्ट तकनीकें प्रत्येक कृति को एक साधारण उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर कला के विशिष्ट नमूने में परिवर्तित कर देती हैं, जो शिल्पी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को प्रतिबिंबित करती हैं।
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