Chamoli
बद्रीनाथ धाम की सुरक्षा आईटीबीपी के जवानों के हाथो में 24 घंटे रहेगें तैनात।

बद्रीनाथ – चारों धामों में सर्वश्रेष्ठ धाम कहा जाता है भगवान बद्री विशाल जी के धाम को जिस धाम के कपाट मात्र 6 महीना के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं आपको बता दें कि भगवान बद्री विशाल जी के धाम के कपाट आजकल शीतकालीन हेतु बंद है और ऐसे में बद्रीनाथ धाम में इस वर्ष भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के 23 बटालियन के जवान मंदिर परिसर की सुरक्षा हेतु तैनात कर दिए गए हैं और अब भगवान बद्री विशाल जी के धाम में आईटीबीपी के जवान ही 6 महीने भगवान बद्री विशाल जी के मंदिर की सुरक्षा मैं 24 घंटे तैनात रहेंगे।

बता दें कि बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष किशोर पवांर ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ धाम में आईटीबीपी के जवानों को धाम की सुरक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है पिछले वर्ष भी आईटीबीपी के जवान के हाथों में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था सौंप दी गई थी किशोर सिंह पंवार ने यह भी बताया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकालीन हेतु बंद है ऐसे में धाम की सुरक्षा में पहले उत्तराखंड पुलिस के जवान और बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी रहते थे लेकिन पिछले वर्ष से बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा आईटीबीपी के हाथों सौंप दी गई । हालांकि आजकल बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्य भी चल रहे हैं जो मास्टर प्लान का कार्य आजकल बहुत तेजी से देखने को मिल रहा है और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के अंतर्गत कार्य करने वाले कई मजदूर धाम में अभी भी मौजूद हैं।
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उत्तराखंड में यहां कुत्तों के आतंक से दहशत में लोग, चार दिनों के लिए बंद किए गए स्कूल

Chamoli News : उत्तराखंड के चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद इलाके में डर का माहौल है। खासकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए क्षेत्र के सभी विद्यालयों में चार दिन का अवकाश घोषित किया है।
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चमोली के नारायणबगड़ में कुत्तों के आतंक से दहशत में लोग
चमोली के नारायणबगड़ में आवारा कुत्तों के आतंक से लोग दहशत में हैं। लगातार आवारा कुत्ते स्थानीय लोगों और बच्चों पर हमला कर रहे हैं। जिस कारण लोगों को बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लग रहा है। कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि इलाके के स्कूलों को 4 दिन के लिए बंद करना पड़ा है।
चार दिनों के लिए बंद किए गए स्कूल
जिला शिक्षा अधिकारी, चमोली की ओर से जारी आदेश के अनुसार नारायणबगड़ क्षेत्र में संचालित सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी स्कूल निर्धारित अवधि तक भौतिक रूप से बंद रहेंगे। हालांकि, विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कुत्तों के हमलों से लोगों में दहशत
मिली जानकारी के मुताबिक नारायणबगड़ क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से आवारा और आक्रामक कुत्तों के हमले बढ़ने की जानकारी सामने आ रही है। इन घटनाओं में कई लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। बाजार सहित आसपास के इलाकों में लोगों को आवाजाही के दौरान सतर्क रहना पड़ रहा है।

बच्चों के स्कूल आने-जाने के दौरान किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए विद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य फिलहाल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ऑनलाइन जारी रहेगी पढ़ाई
अवकाश के दौरान स्कूल भवनों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होंगी, लेकिन विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह बंद नहीं की जाएगी। स्कूल प्रबंधन ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं आयोजित करेगा, ताकि छुट्टी के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां जारी रह सकें।
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चमोली THDC टनल हादसे में लापता दोनों श्रमिकों के शव बरामद, मृतकों की संख्या हुई 10

Chamoli Tunnel Accident : चमोली के पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में 13 अगस्त को हुए हादसे के बाद जारी रेस्क्यू अभियान में बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार को सुरंग के अंदर तलाश के दौरान लापता दोनों श्रमिकों के शव बरामद कर लिए गए। शवों को जिला चिकित्सालय, गोपेश्वर भेज दिया गया है।
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चमोली THDC टनल हादसे में लापता दोनों श्रमिकों के शव बरामद
विष्णुगाड़–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में दुर्घटना के बाद से ही राहत और बचाव टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई थीं। सुरंग के भीतर लापता श्रमिकों की तलाश के साथ-साथ जमा पानी को बाहर निकालने का काम भी जारी था।
रेस्क्यू टीमों ने सुरंग के अंदर अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी दौरान मंगलवार को दोनों लापता श्रमिकों के शव बरामद कर लिए गए।
एक श्रमिक की हुई पहचान
बरामद शवों में से एक की पहचान 31 वर्षीय लुकास टोपनो के रूप में हुई है। वह झारखंड के खूंटी जिले के सीमरटोली गांव के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम बोयसा टोपनो बताया गया है। दूसरे श्रमिक के शव की पहचान की प्रक्रिया भी की जा रही है।

हादसे के समय टनल में थे 22 श्रमिक
13 अगस्त को हुए हादसे के वक्त निर्माणाधीन सुरंग में कुल 22 श्रमिक मौजूद थे। हादसे के बाद 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। वहीं 8 श्रमिकों की मौत हो गई थी, जबकि दो श्रमिक लापता थे। लापता दोनों श्रमिकों की तलाश के लिए कई दिनों से सुरंग के भीतर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था। अब दोनों के शव मिलने के बाद इस हादसे में मृतकों की संख्या 10 हो गई है।
Chamoli
चमोली में भारी बारिश का कहर, कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर भूस्खलन, परिसर में घुसा मलबा

Chamoli News : पिछले चार-पांच दिनों से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। चमोली जिले में भी भारी बारिश के चलते आपदा का दौर जारी है। जोशीमठ ब्लॉक के पंच केदारों में शामिल कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर देर रात भारी भूस्खलन हुआ, जिससे मंदिर परिसर के अंदर मलबा आ गया।
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कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर हुआ भारी भूस्खलन
लगातार बारिश के बीच देर रात कल्पेश्वर मंदिर के ऊपर पहाड़ी से अचानक भारी मात्रा में मलबा गिर गया। कई टन मलबा गिरने के कारण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में नुकसान हुआ है। कल्पेश्वर मंदिर के सचिव लक्ष्मण नेगी के अनुसार, रात से लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी का एक हिस्सा खिसक गया और मलबा मंदिर परिसर तक पहुंच गया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि, राहत की बात ये है कि भूस्खलन की इस घटना में अभी तक किसी भी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है।

प्रशासन को दी गई घटना की जानकारी
घटना की सूचना तहसील प्रशासन जोशीमठ को दे दी गई है। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि स्थिति की जानकारी मिलने के बाद तहसील प्रशासन की टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेगी। इसके बाद मौके की स्थिति के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
गैरसैंण में बारिश से गौशाला ध्वस्त
चमोली जिले के विकासखंड गैरसैंण के अंतर्गत कुनीगाड़ क्षेत्र के कल्याणा मल्ला गांव में भी मूसलाधार बारिश का असर देखने को मिला। देर रात हुई भारी बारिश के चलते एक गौशाला ध्वस्त हो गई।
गनीमत रही कि गौशाला मालिक रतन सिंह ने बारिश की स्थिति को देखते हुए पहले ही अपने मवेशियों को दूसरी जगह बांध दिया था। इससे सभी मवेशियों की जान बच गई और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
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