Rudraprayag
उत्तराखंड: आपदा में राहत का हाथ बढाया योगी सरकार ने, यूपी से पहुंची 6 ट्रकों में मदद

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद जहां एक ओर प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटा है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस मुश्किल घड़ी में मदद का हाथ बढ़ाया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा से प्रभावित ग्रामीणों की मदद के लिए छह ट्रकों में भरकर राहत सामग्री भेजी है, जिसमें राशन किट, खाद्यान्न, तिरपाल, टेंट और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।
आपदा की मार और राहत की पहल
रुद्रप्रयाग जनपद की बसुकेदार तहसील के अंतर्गत आने वाले कई गांव – जैसे डुंगर, बड़ेथ, तालजामण, जौला, स्यूर, उछोला, बक्सीर और मथ्या – हालिया अतिवृष्टि और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। घर उजड़ गए, सड़कें टूट गईं और लोग अब भी सुरक्षित जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यूपी से आई राहत सामग्री इन लोगों के लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं है।
जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से जमीनी स्तर पर तत्काल राहत पहुंचाई जा सकेगी। राहत सामग्री को जिला मुख्यालय से प्रभावित गांवों तक जल्द ही पहुंचाया जाएगा।
16 दिन बाद भी नहीं मिला लापता लोगों का सुराग
आपदा को 16 दिन बीत चुके हैं, लेकिन छेनागाड़ क्षेत्र में लापता नौ लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीआरडीएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें मलबे के ढेर में संभावित ठिकानों की लगातार खोज कर रही हैं। भारी-भरकम बोल्डरों और गहराई में दबे मलबे के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है।
जेसीबी और अन्य मशीनों के सहारे मलबे की खुदाई जारी है। शुक्रवार को रेस्क्यू टीम ने आपदा में मलबे में दबी एक बस को बाहर निकालने में सफलता पाई, जिससे तलाशी अभियान को नई दिशा मिली है। जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि सूरज निकलने से लेकर अंधेरा होने तक राहत और खोज अभियान लगातार जारी है।
स्वास्थ्य सेवाओं और अस्थायी आवास की व्यवस्था
आपदा राहत सिर्फ मलबा हटाने तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की तैनाती भी सुनिश्चित की है। विशेष रूप से तालजामण, बक्सीर, स्यूर और उछोला जैसे इलाकों में मेडिकल टीमें सक्रिय हैं। ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और जरूरतमंदों को मौके पर ही दवाइयाँ और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
साथ ही जिन परिवारों के घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं, उनके लिए अस्थायी टेंट और आवास की व्यवस्था भी की गई है। राशन और पीने के पानी की आपूर्ति लगातार की जा रही है।
डीएम कर रहे हैं राहत कार्यों की निगरानी
पूरे राहत एवं बचाव अभियान की सीधी निगरानी खुद जिलाधिकारी प्रतीक जैन कर रहे हैं। वह समय-समय पर मौके पर पहुंचकर न सिर्फ स्थिति का जायजा ले रहे हैं, बल्कि मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। डीएम ने प्रभावितों से अपील की है कि वे धैर्य और संयम बनाए रखें, प्रशासन हरसंभव मदद के लिए तत्पर है।
आपदा में उत्तर प्रदेश सरकार आपके साथ
उत्तर प्रदेश से आई मदद का नाम भी भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है – “आपदा में सबके साथ उत्तर प्रदेश सरकार”। यह नारा सिर्फ कागज़ पर नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई बनकर प्रभावितों तक राहत पहुंचा रहा है। ट्रकों में भरकर भेजी गई सामग्री न सिर्फ लोगों की ज़रूरतें पूरी करेगी, बल्कि उनके मन में यह विश्वास भी जगाएगी कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
Rudraprayag
Rudraprayag: रामपुर न्याल्सू गाँव में पहाड़ी से गिरी महिला, हादसे में गंवाई जान

केदारघाटी के रामपुर में घास काटने गई महिला की पहाड़ी से गिरने पर मौत
रुद्रप्रयाग (Rudraprayag): जिले के केदारघाटी से एक दुखद खबर सामने आई जिससे पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया. सोनप्रयाग कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत जंगल में घास काटने गयी महिला की पहाड़ी से फिसलने से मौत हो गई है.
मुख्य बिंदु
केदारघाटी में घास काटने गई महिला गिरी पहाड़ी से
दरअसल, मंगलवार 10 फरवरी को रुद्रप्रयाग जिले में कोतवाली सोनप्रयाग से एसडीआरएफ को सूचना प्राप्त हुई कि रामपुर न्यालसू जंगल क्षेत्र में घास काटने गई एक महिला पहाड़ी से गिर गई है. सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ पोस्ट सोनप्रयाग से उप निरीक्षक संतोष परिहार के हमराह रेस्क्यू टीम तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई.
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पहाड़ी से गिरने पर महिला की मौत
SDRF रेस्क्यू टीम रामपुर गाँव तक सड़क मार्ग से पहुंची. जिसके बाद मन्दाकिनी नदी को पार कर 2 किलोमीटर खड़ी चढ़ाई के बाद टीम घटनास्थल पर पहुंची. जहाँ पर घास काटते समय पहाड़ी से गिरने पर महिला की मौके पर ही मौत हो चुकी थी.

मृतक महिला की पहचान
- महिला गीता देवी पत्नी गजपाल सिंह, उम्र लगभग 40 वर्ष, निवासी रामपुर न्यालसू
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घटना से परिजनों में मचा कोहराम
एसडीआरएफ टीम द्वारा रेस्क्यू उपकरणों की मदद से अत्यंत दुर्गम एवं तीव्र ढाल वाले पहाड़ी क्षेत्र से महिला के शव को लगभग 03 किलोमीटर पैदल नीचे लाया गया. जिसके बाद शव जिला पुलिस के सुपुर्द किया गया. हादसे के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है. पूरी केदार घटी में मातम पसरा हुआ है.
Uttarakhand
केदारनाथ हाईवे पर पहाड़ की अवैध कटिंग, प्रशासन की चुप्पी से उड़ी नियमों की धज्जियाँ
Rudraprayag: तिलवारा में हाईवे निर्माण में पर्यायवरण से समझौता
मुख्य बिंदु
रुद्रप्रयाग (Rudraprayag): तिलवाड़ा क्षेत्र में केदारनाथ नेशनल हाईवे के किनारे हो रही अवैध पहाड़ कटाई अब केवल निर्माण से जुड़ा मामला नहीं रह गया है. बल्कि ये प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और पर्यावरणीय अपराध का गंभीर प्रतीक बनती जा रही है. स्थानीय लोग इसे खुली मनमानी बता रहे हैं.
ठेकेदार निर्धारित मानकों की कर रहे अनदेखी
दरअसल, ग्रामीणों का आरोप है कि एक ठेकेदार द्वारा निर्धारित मानकों को दरकिनार कर हाईवे किनारे बेरोकटोक पहाड़ काटा गया. हैरानी की बात ये है कि ये सब कुछ एनएच विभाग और जिला प्रशासन की मौजूदगी में होता रहा. न तो तय सुरक्षा दूरी का पालन किया गया और न ही पर्यावरणीय नियमों की कोई परवाह की गई.
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इसके बावजूद, जब विभागीय स्तर पर नोटिस जारी किए गए और जुर्माना लगाया गया, तब भी कटिंग का काम थमता नजर नहीं आया. इससे ये सवाल उठने लगा है कि क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही. भारी मशीनों की लगातार आवाज और खुदाई से सड़क की मजबूती पर भी खतरा मंडराने लगा है.
पहाड़ की अवैध कटिंग से दुर्घटनाओं को न्यौता
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़ कटाई के कारण उड़ती धूल और मलबे से दृश्यता कम हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ गया . साथ ही भूस्खलन का खतरा भी कई गुना बढ़ चुका है. हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी लापरवाही को लोग सीधे जनजीवन से खिलवाड़ मान रहे हैं.
एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता द्वारा ठेकेदार का एनओसी निरस्त कर करीब दो लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई है. लेकिन ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतने गंभीर पर्यावरणीय नुकसान की कीमत बस इतनी ही है. अब मुद्दा यह नहीं है कि पहाड़ कितना कटा, लेकिन ये है कि यह सब किसकी चुप्पी और संरक्षण में हुआ. यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
Uttarakhand
रुद्रप्रयाग में 5 साल का मासूम बना गुलदार का निवाला, ग्रामीणों ने विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

Rudraprayag: सिन्द्रवाणी में मासूम को उठा कर ले गया गुलदार, घटना से क्षेत्र में दहशत
मुख्य बिंदु
रुद्रप्रयाग (Rudraprayag): उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव वन्य जीव संघर्ष के मामले अब बेहद चिंताजनक हो चुके हैं. बीती शाम एक मामला उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से सामने आया है. जहाँ पर एक पांच साल के नन्हे मासूम को गुलदार उसकी माँ के सामने से उठा कर ले गया. घटना के बाद से वन विभाग की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
रुद्रप्रयाग में मासूम बना गुलदार का निवाला
दरअसल, रुद्रप्रयाग जिले के सिन्द्रवाणी (छिनका नगरासू) से गुलदार एक पांच साल के मासूम को उठा कर ले गया. जिसके बाद से मौके पर हड़कंप मच गया. बच्चे के लापता होते ही ग्रामीणों ने तत्काल सर्च अभियान शुरू किया. घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर वन विभाग, DDRF और जिला प्रशासन के जवानों ने मौके पर पहुंचकर बच्चे की तलाश शुरू की.
रात 11 बजे बरामद हुआ शव
सर्च अभियान में सात अलग अलग टीमों ने देर रात तक बच्चे को ढूढने के प्रयास किए. जिसके बाद रात करीब 11 बजे बच्चे का शव बरामद कर लिया गया. मृतक मासूम की पहचान –
- दक्ष (5 वर्ष) पुत्र हेमंत बिष्ट
घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे लोग
घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है. जबकि, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. लोग अब गुलदार के डर से घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं. साथ ही अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार खुलेआम आबादी वाले क्षेत्र में घूम रहा है, लेकिन प्रशासन और वन विभाग की तरफ से अभी तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है.
वन विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप
घटना की जानकारी मिलने के बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस सर्च अभियान शुरू नहीं किया. न तो मौके पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम भेजी गई, न ही गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए गए. इसके अलावा ड्रोन कैमरों और खोजी कुत्तों जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल नहीं किया गया. ऐसे में ये सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि आखिर सिस्टम कब हरकत में आएगा और जिम्मेदार अधिकारी कब जवाबदेही तय करेंगे.
ग्रामीणों में गुस्सा, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
इस दर्दनाक घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल गुलदार को पकड़ने, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर जल्द और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे.
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