Uttarakhand
UTTARKASHI: प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम से सीमांत क्षेत्र में उत्साह, शीतकालीन यात्रा को मिलेगा बढ़ावा…

उत्तरकाशी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 27 फरवरी 2025 को उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्र मुखवा और हर्षिल में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में भारी उत्साह है। इस कार्यक्रम के बाद क्षेत्र में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिलने के साथ ही तीर्थाटन और पर्यटन में वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय अनाज और विल्सन वैरायटी के सेव को एक नई पहचान मिल सकती है।
स्थानीय निवासियों का मानना है कि प्रधानमंत्री के आगमन के बाद इन क्षेत्रों के विकास की गति और तेज़ होगी, जैसे कि केदारनाथ में उनके दौरे के बाद केदारघाटी में हुआ था। मुखवा और हर्षिल के विकास के साथ-साथ वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत छह गांवों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान मुखवा गांव के हर घर को सजाया जा रहा है, मंदिर की सजावट चल रही है और सड़क, हेलीपैड, पार्किंग, और रास्तों का निर्माण युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से क्षेत्र का पलायन रुकेगा, और युवा आत्मनिर्भर बनेंगे। शीतकालीन यात्रा के बढ़ते आगमन से क्षेत्र का चहुमुखी विकास होगा और मंदिर के पास व्यू प्वाइंट का निर्माण भी किया जा रहा है, जहां से प्रधानमंत्री पूरी घाटी का नैसर्गिक सौंदर्य देख सकेंगे।
Rudraprayag
देवप्रयाग में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत, तीन घायल

Devprayag News : उत्तराखंड में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला देवप्रयाग का है, जहां एक वैगनआर कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में चालक समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
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देवप्रयाग में खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत
देवप्रयाग में दर्दनाक हादसा हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक, कार चंडीगढ़ से रुद्रप्रयाग जा रही थी। देवप्रयाग से करीब चार किलोमीटर श्रीनगर की ओर ग्राम पाली में रिवर व्यू कैफे एंड रेस्टोरेंट के पास वाहन अचानक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। कार में चालक सहित पांच लोग सवार थे।
पुलिस ने चलाया रेस्क्यू अभियान
हादसे की सूचना मिलने पर देवप्रयाग पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर खाई में फंसे लोगों को बाहर निकाला। तीन घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी, देवप्रयाग पहुंचाया गया। दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस हादसे के कारणों का लगा रही पता
पुलिस ने मृतकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। हादसे में सत्येश्वरी देवी (72), पत्नी हुकम सिंह चौहान, निवासी किमखाल, थाना कर्णप्रयाग, जिला चमोली और अनिल, पुत्र सुदर्शन, निवासी किमोली, जिला चमोली की मौत हो गई।
हादसे में चार तीन लोग घायल
- उत्तम सिंह (33), पुत्र मोहन सिंह, निवासी लाडोली, रुद्रप्रयाग।
- टीशा रावत (18), पुत्री लक्ष्मण सिंह रावत, निवासी बीना, थाना रुद्रप्रयाग।
- सुनीता देवी (45), पत्नी लक्ष्मण सिंह रावत, निवासी बीना, थाना रुद्रप्रयाग।
uttarakhand weather
उत्तराखंड में आज बदलेगा मौसम, 16 अक्टूबर तक कई जिलों में बारिश और बर्फबारी के आसार

Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है।मानसून की विदाई के बाद उत्तराखंड में अब ठंड का असर बढ़ने लगा है। इसी बीच प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है।
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उत्तराखंड में आज बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, 14 से 16 अक्टूबर के बीच कई जिलों में बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। वहीं, ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है। आज प्रदेश के पर्वतीय जिलों में बारिश के आसार हैं।
15 अक्टूबर को आंधी और ओलावृष्टि के आसार
मौसम विभाग के अनुसार, 15 अक्टूबर को देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, अल्मोड़ा, हरिद्वार, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं मौसम खराब रह सकता है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।

16 अक्टूबर को इन जिलों के लिए अलर्ट
16 अक्टूबर को कुमाऊं मंडल में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है। नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 15 अक्टूबर को गढ़वाल और मैदानी इलाकों में मौसमी गतिविधियां अधिक सक्रिय रह सकती हैं, जबकि अगले दिन कुमाऊं क्षेत्र में इनका प्रभाव बढ़ने की संभावना है।
14 अक्टूबर को 3,800 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। वहीं, 15 और 16 अक्टूबर को 3,500 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात के आसार हैं।
17 और 18 अक्टूबर को हल्की बारिश के आसार
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर के बाद प्रदेश में मौसमी गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि, उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के दूरस्थ उत्तरी क्षेत्रों में 17 और 18 अक्टूबर को भी कहीं-कहीं हल्की बारिश और 3,800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी हो सकती है। 19 अक्टूबर से प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
Pithoragarh
उत्तराखंड में भांग की खेती पर सख्ती, पिथौरागढ़ में पहला मुकदमा हुआ दर्ज

Pithoragarh News : उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भांग की खेती को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। धारचूला के गलाती क्षेत्र में भांग की खेती के मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसे जिले में इस तरह का पहला मामला बताया जा रहा है।
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पिथौरागढ़ में भांग की खेती पर मुकदमा हुआ दर्ज
पिथौरागढ़ में भांग की खेती को लेकर पुलिस ने पहला मुकदमा दर्ज किया है। मिली जानकारी के मुताबिक धारचूला के गलाती क्षेत्र में भांग की खेती किए जाने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(बी)/20(क्यू) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सीमांत पिथौरागढ़ जिले में भांग की खेती को लेकर दर्ज इस मुकदमे को पहला मामला बताया जा रहा है।
गांव-गांव में जाकर अभियान चला रही पुलिस
भांग की खेती और इसके संभावित दुरुपयोग को देखते हुए पुलिस जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चला रही है। पुलिसकर्मी गांवों में पहुंचकर लोगों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दे रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि अवैध रूप से भांग की खेती करने और नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वे अवैध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दें और अभियान में सहयोग करें।

पहाड़ की पारंपरिक चटनी भी चर्चा में
भांग की खेती पर कार्रवाई के बीच पहाड़ के पारंपरिक खानपान को लेकर भी चर्चा हो रही है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भांग के बीजों से तैयार होने वाली चटनी लंबे समय से स्थानीय भोजन का हिस्सा रही है। खासकर सर्दियों में भुने और पीसे हुए भांग के बीजों से बनी चटनी को काफी पसंद किया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि भांग के बीजों का पारंपरिक खाद्य उपयोग और नशीले पदार्थों के लिए इसका दुरुपयोग अलग-अलग विषय हैं। ऐसे में जरूरी है कि अवैध नशे के कारोबार पर रोक लगाने के साथ पारंपरिक उपयोग को लेकर भी स्पष्टता बनी रहे।
लाइसेंस और बीजों की उपलब्धता भी अहम मुद्दा
भांग की नियंत्रित खेती के लिए निर्धारित नियमों के तहत अनुमति का प्रावधान है। हालांकि, मानकों के अनुरूप बीज उपलब्ध नहीं होने से खेती करने के इच्छुक लोगों को परेशानी होने की बात सामने आती रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियमानुसार ऐसी खेती में टीएचसी यानी नशीले प्रभाव के लिए जिम्मेदार तत्व की मात्रा 0.3 प्रतिशत या इससे कम होनी चाहिए।
फिलहाल पिथौरागढ़ में पुलिस की कार्रवाई के बाद भांग की खेती को लेकर निगरानी बढ़ गई है। अब यह देखना अहम होगा कि अवैध खेती और नशीले पदार्थों के कारोबार पर रोक लगाने के लिए अभियान किस तरह आगे बढ़ता है।
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