Uttarakhand
तीन महीने से जहरीला पानी पी रहे ग्रामीण, टैंक से निकले 4 मरे हुए सांप, 3 ग्रामीण बीमार, एक गाय की मौत।

उत्तरकाशी – जनपद उत्तरकाशी के सिरी गांव में ग्रामीण तीन महीने से जहरीला पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं। विभाग की लापरवाही से टैंक के अंदर सांप ओर अन्य जहरीले कीड़े पनप रहे हैं। जिसके चलते 3 ग्रामीण बीमार होने के साथ एक गाय की भी मौत हो चुकी है।

इस दौरान ग्रामीणों का कहना है कि पानी के टैंक के अंदर से बदबू आनी शुरू हुई तो ग्रामीणों ने टैंक का ढक्कन खोला तो उसमें चार मरे हुए सांप निकले जिसे देखकर गांव वालों के होश उड़ गए। इस जहरीले पानी पीने से गांव के तीन लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं जबकि एक गाय की भी मौत हो चुकी है। लेकिन शासन-प्रशासन इन गांव वालों की समस्या को अनदेखा कर रहा है,जबकि जहरीला पानी पीने से ग्रामीणों में महामारी फैलने का खतरा बना हुआ है। लेकिन प्रशासन टैंक की साफ-सफाई और जाली लगाने तक की जहमत तक नही उठा रहा है।

आपको बता दे की जल जीवन मिशन के तहत इस गांव में पेयजल योजना शुरू हुई…लेकिन ठेकेदारों ने कहीं पर भी कोई फ़िल्टर नहीं लगाया जिसके कारण टैंक में लगातार सांप और अन्य जहरीले कीड़े जा रहे हैं। इस बीच विभाग का कोई भी कर्मचारी आज तक टैंक की सुध लेने नही पहुंचा है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कब शासन प्रशासन इन ग्रामीणों की सुध लेगा।।
Ramnagar
गर्जिया मंदिर में दर्शनों पर लगी रोक, अगले एक महीने तक श्रद्धालु नहीं कर पाएंगे दर्शन

Ramnagar News : रामनगर के प्रसिद्ध गिरिजा देवी मंदिर में दर्शनों पर रोक लगा दी गई है। अगले एक महीने तक श्रद्धालु मंदिर के दर्शन नहीं कर सकेंगे।
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गर्जिया मंदिर में दर्शनों पर लगी रोक
गर्जिया मंदिर में दर्शनों पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि इन दिनों चल रहे सुदृढ़ीकरण कार्य के चलते मुख्य मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी गई है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार जॉन ने जानकारी देते हुए बताया कि मां गिरिजा देवी के टीले को मजबूत करने का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के मुख्य मंदिर तक पहुंचने पर रोक लगाई गई है।
अगले एक महीने तक श्रद्धालु नहीं कर पाएंगे दर्शन
अगले एक महीने 30 अप्रैल से 30 मई तक श्रद्धालु मां के दर्शन नहीं कर सकेंगे। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर के दूसरे छोर पर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में मां गिरिजा देवी की चरण पादुका के दर्शन किए जा सकते हैं।
मंदिर के टीले में आईं दरारों को किया जा रहा है ठीक
बता दें कि साल 2010 की बाढ़ के बाद से ही गर्जिया मंदिर के टीले में दरारें आनी शुरू हो गई थीं, जो समय के साथ बढ़ती चली गईं। इससे मंदिर की संरचना को खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद सिंचाई विभाग द्वारा लगातार मरम्मत के प्रस्ताव भेजे गए और मई 2024 में पहले चरण का कार्य पूरा किया गया।

फिलहाल दूसरे चरण का कार्य तेजी से जारी है। अधिशासी अभियंता के अनुसार, मंदिर का क्षेत्र बेहद संवेदनशील है एक ओर बहती नदी और दूसरी ओर कमजोर हो चुका टीला, जिससे कार्य करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। निर्माण कार्य के दौरान नदी के भीतर करीब 5 मीटर तक खुदाई की जा रही है, जहां लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। ऐसे में कार्य को बेहद सावधानी के साथ अंजाम दिया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की क्षति न हो।
15 जून तक बढ़ाई जा सकती है अवधि
उन्होंने बताया कि इससे पहले फरवरी में भी कुछ दिनों के लिए मंदिर को बंद किया गया था। वहीं 10 मार्च से 30 अप्रैल तक पूर्ण रूप से बंद रखने के आदेश दिए गए थे, लेकिन कार्य अभी हाई फ्लड लेवल (HFL) तक नहीं पहुंच पाया है। इसी को देखते हुए अब मंदिर को 30 मई तक बंद रखने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को 15 जून तक भी बढ़ाया जा सकता है।
big news
धामी कैबिनेट की बैठक हुई समाप्त, उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी

Dhami Cabinet Decisions : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक समाप्त हो गई है। बैठक में कुल 18 प्रस्ताव आए। जिसमें उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
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धामी कैबिनेट की अहम बैठक हुई समाप्त
गुरुवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में कुल 18 प्रस्तावों पर चर्चा की गई, जिनमें से कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। इनमें उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 भी शामिल है। बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी
नए नियमों के तहत अब प्रवर्तन अधिकारी वर्दी में नजर आएंगे। इसके अलावा शहरी विकास से जुड़े कार्यों, खासकर कुंभ मेले की तैयारियों के लिए स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, मेला अधिकारी को 1 करोड़ रुपये तक के कार्यों की मंजूरी का अधिकार होगा, मंडलायुक्त 5 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को स्वीकृति दे सकेंगे, जबकि इससे अधिक राशि के प्रस्ताव शासन स्तर पर मंजूर किए जाएंगे।

धामी कैबिनेट की बैठक में लिए गए ये बड़े फैसले
- 1. उत्तराखंड कैबिनेट ने अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी दी।
- 2. वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष निर्धारित की गई। वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई।
- 3. जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
- 4. उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 के तहत मदरसों की मान्यता प्रक्रिया में बदलाव किया गया।
- 5. कक्षा 1 से 8 तक चल रहे 452 मदरसों को अब जिला स्तर से मान्यता मिलेगी। केवल कक्षा 9 से 12 तक के मदरसों (करीब 52) को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इस संबंध में अध्यादेश लाया जाएगा
- 6. 50 हजार से अधिक छात्र 8वीं तक मदरसों में पढ़ रहे हैं। कार्मिक विभाग में निर्णय: प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) अब अधिकतम एक वर्ष तक ही मान्य होगी। यदि एक वर्ष के भीतर नियुक्ति मिलती है, तो प्रतीक्षा सूची वैध मानी जाएगी।
- 7. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करते हुए विशेष शिक्षक शिक्षा नियमावली को मंजूरी दी गई। शैक्षिक संवर्ग नियमावली को स्वीकृति: सहायक अध्यापकों के 62 पदों के लिए पहली बार सेवा नियम तय किए गए।
Haridwar
Haridwar News : बाबा विश्वनाथ जगदीशीला डोली पहुंची हरिद्वार, हरकी पौड़ी पर किया गंगा स्नान

Haridwar News : बाबा विश्वनाथ जगदीशीला डोली धर्मनगरी हरिद्वार पहुंची। जहां डोली ने हरकी पौड़ी पर गंगा स्नान किया। इस दौरान भक्तों में जबरदस्त उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला।
बाबा विश्वनाथ जगदीशीला डोली पहुंची हरिद्वार
विश्वनाथ जगदीशीला डोली आज हरिद्वार पहुंची। डोली के स्वागत के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने बताया कि ये डोली यात्रा अपने 27 वें वर्ष में उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों का भ्रमण करेगी।
देव संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है उद्देश्य
पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि यात्रा का समापन 25 मई को गंगा दशहरा के दिन विश्वनाथ पर्वत पर होगा। जहां स्वामी राम तीर्थ और गुरु वशिष्ठ की तपोस्थली मानी जाती है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति और देव संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।

इस यात्रा से समाज में फैलेगी आध्यात्मिक जागरूकता
वहीं महामंडलेश्वर ललिता नंद ने कहा कि यह देव डोली यात्रा सनातन संस्कृति को जागृत करने और लोगों को अपने तीर्थों व देवी-देवताओं के प्रति आस्था बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कामना की कि देवभूमि उत्तराखंड न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए।
उन्होंने गऊ माता, पितरों और भारत माता के प्रति श्रद्धा बढ़ाने का संदेश देते हुए कहा कि इस यात्रा से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलेगी और सभी को सत्कर्म व ज्ञान की प्रेरणा देगी ।
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