Almora
जहाँ हर घंटी बयाँ करती है विश्वास की कहानी: पढ़िए उत्तराखंड के न्याय स्वरूप की महिमा !

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, एक ऐसी भूमि जहाँ देवी-देवताओं का निवास है। हिमालय की गोद में बसा यह क्षेत्र, अपने अद्भुत सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। इसे मनीषियों की पूर्ण कर्म भूमि माना जाता है, जहाँ साधक और भक्त अपने आत्मिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आते हैं। उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों में, गोलू देवता का विशेष स्थान है। इन्हें न्याय और सत्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। कुमाऊं क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं में गहराई से जुड़ी इस देवता की कथा, हजारों भक्तों को हर साल आकर्षित करती है। गोलू देवता अपने न्याय के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं। उत्तराखंड में कई स्थानों पर इनकी पूजा होती है, लेकिन इनमें से सबसे लोकप्रिय और आस्था का केंद्र अल्मोड़ा जिले में स्थित चितई गोलू देवता का मंदिर है। यह मंदिर न केवल भव्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की भक्तों की अपार भीड़ और लगातार गुंजती घंटियों की आवाज भी गोलू देवता की लोकप्रियता का प्रमाण देती है।
गोलू देवता की उत्पत्ति
स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, गोलू देवता एक ऐतिहासिक व्यक्ति हैं, जिन्हें गोलू के नाम से जाना जाता था। वह एक साहसी और न्यायप्रिय योद्धा थे। उनकी न्याय के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनकी असामयिक मृत्यु के बाद, वे एक देवता के रूप में प्रकट हुए, और आज भी अपने अनुयायियों की सहायता करते हैं।
गोलू देवता का मंदिर
गोलू देवता का मुख्य मंदिर अल्मोरा जिले में स्थित है। यह मंदिर अपनी अनोखी आभा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ भक्तों द्वारा चढ़ाए गए रंग-बिरंगे घंटियाँ और अन्य चिह्न देखे जा सकते हैं। लोग यहाँ अपनी इच्छाओं के लिए आकर प्रार्थना करते हैं, और कई भक्त इस बात का अनुभव करते हैं कि गोलू देवता ने उनकी समस्याओं का समाधान किया है।

न्याय के देवता
गोलू देवता को अक्सर एक विशिष्ट रूप में दिखाया जाता है, जिसमें वे एक तलवार और घंटी के साथ नजर आते हैं, जो उनकी न्याय सुनने की तत्परता का प्रतीक है। भक्त मानते हैं कि वे अपने जीवन में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि सत्य का वर्चस्व हो। गोलू देवता की चमत्कारिक कहानियाँ कई लोगों के बीच प्रचलित हैं, जो उनकी अद्भुत सहायता का अनुभव कर चुके हैं।
सांस्कृतिक महत्व और उत्सव
गोलू देवता की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है; यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का एक हिस्सा है। उनके प्रति समर्पित उत्सव जीवंत और रंगीन होते हैं, जिसमें लोक गीत, नृत्य और सामुदायिक आयोजन शामिल होते हैं। इन उत्सवों के दौरान, लोग गोलू के चमत्कारों की कहानियाँ सुनाते हैं, जो एकता और साझा विश्वास को बढ़ावा देती हैं।
Almora
अल्मोड़ा में जंगली जानवरों की दहशत, ड्रोन और वन कर्मियों की निगरानी में हुई प्रयोगात्मक परीक्षा

Almora: वन कर्मियों की तैनाती और ड्रोन की निगरानी में छात्रों ने दी परीक्षा
मुख्य बिंदु
अल्मोड़ा (Almora): उत्तराखंड में जंगली जानवरों का आतंक इस कदर छाया हुआ है कि अब छात्रों को स्कूल जाने में भी भारी मुश्किलों का समाना करना पढ़ रहा है. ऐसा ही एक मामला अल्मोड़ा जिले से सामने आया है. जहाँ पर वन विभाग की तैनाती और ड्रोन कैमरों की निगरानी में छात्र परीक्षाएं देते हुए नजर आए.
अल्मोड़ा में वन विभाग की तैनाती में छात्रों की परीक्षाएं
अल्मोड़ा जिले में जंगली जानवरों हमलों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है. इसी कड़ी में सल्ट विधानसभा क्षेत्र के टोटाम गाँव में इंटर कॉलेज के छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं चल रही हैं. जहाँ बीते रोज वन विभाग की टीम सुबह से ही स्कूल परिसर में तैनात रही. इसके साथ ही ड्रोन कैमरे से स्कूल परिसर और आस-पास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी गई.
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ड्रोन से रखी गई स्कूल परिसर में नजर
वन कर्मियों की तैनाती के बीच छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा के पुख्ता इन्तेजाम किए गए. इसके बाद छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षा समय पर पूरी हुई. वन कर्मियों की इस पहल के बाद शिक्षकों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली.
शनिवार को स्कूल परिसर में तेंदुआ दिखने से दहशत
दरअसल, टोटाम इंटर कॉलेज और प्राइमरी स्कूल के पास शनिवार शाम तेंदुआ दिखने से क्षेत्र में दहशत फैल गई. सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गश्त की और तेंदुए को दूर भगाने के लिए पटाखे जलाए. लेकिन बाद के दिनों में उसकी गतिविधि नजर नहीं आई, फिर भी परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा के लिए वनकर्मी विद्यालय में तैनात रहे.
वन विभाग के मुताबिक, गांव में मादा तेंदुआ अपने तीन शावकों के साथ देखी गई है. निगरानी और पकड़ के लिए गांव में पिंजरे, ट्रैप कैमरे और ड्रोन कैमरों की मदद से लगातार नजर रखी जा रही है.
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वन विभाग की टाम आगे भी क्षेत्र में करेगी गश्त
वन विभाग की टीम की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विद्यार्थियों ने अपनी प्रयोगात्मक परीक्षाएं संपन्न कीं. तेंदुए के भय से लोगों को राहत दिलाने के लिए विभागीय टीम विद्यालय और गांव क्षेत्र में लगातार गश्त करती रहेगी. बीते दो दिनों से क्षेत्र में तेंदुए के दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली है, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.
— गंगासरन, वन क्षेत्राधिकारी, मोहान रेंज
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उत्तराखंड में भारी बारिश ओर बर्फ़बारी का अलर्ट, इन जिलों में आज रहेंगे स्कूल बंद

Uttarakhand School closed : इन जिलों में बारिश और बर्फ़बारी का अलर्ट, स्कूलों में रहेगा अवकाश
Uttarakhand School closed: उत्तराखंड में मौसम विभाग ने 26 जनवरी को अपने पूर्वानुमान में कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया था। जिसके बाद बच्चों की सुरक्षा और ख़राब मौसम के मद्देनजर देहरादून, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।
इन जिलों में रहेंगे स्कूल बंद
दरअसल, मौसम विभाग के जारी पूर्वानुमान में प्रदेश के कई जिलों में मौसम बिगड़ने की संभावनाएं जताई गई थी। जिसके बाद जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आंगनबाड़ी केन्द्रों समेत जिले में कक्षा 1 से लेकर 12 तक के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में 27 जनवरी को एक दिन का अवकाश घोषित किया है।
आज 27 जनवरी को भारी बर्फ़बारी और बारिश के अलर्ट के चलते देहरादून, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में छुट्टी के आदेश दिए गए हैं। जिसके आदेश ये हैं
देहरादून :

अल्मोड़ा :

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अल्मोड़ा: क्वैराली गांव में चोरी की वारदात, शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

ALMORA: अल्मोड़ा में चोरी के मामले में राजस्व पुलिस कर रही किनारा, पीड़ित ने प्रशासन को लिख पत्र
अल्मोड़ा (ALMORA): उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के हवालबाग क्षेत्र के क्वैराली गांव में एक घर से चोरी का मामला सामने आया है। जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य बिंदु
अल्मोड़ा में चोरी के मामले में पीड़ित ने प्रशासन से लगाई गुहार
ग्राम क्वैराली निवासी नरेंद्र चौहान ने बताया कि वो 22 नवंबर को किसी रिश्तेदार की शादी समारोह में शामिल होने के लिए गांव से बाहर गए थे। दिसंबर में जब वो वापस लौटे तो घर का ताला टूटा मिला और कीमती सामान चोरी होने के साथ ही घर में तोड़-फोड़ की गई थी।
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राजस्व पुलिस पर तहकीकात न करने का आरोप
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने सबसे पहले क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक को सूचना दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोतवाली अल्मोड़ा से संपर्क किया गया, जहां इसे राजस्व क्षेत्र का मामला बताते हुए जिम्मेदारी से किनारा कर लिया गया।
पीड़ित ने तहसीलदार को पत्र लिख कार्रवाई की मांग की
लगातार प्रयासों के बावजूद सुनवाई न होने पर नरेंद्र चौहान ने तहसीलदार सदर अल्मोड़ा को लिखित शिकायत दी और सीपी ग्राम ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि चोरी के इस मामले में जल्द से जल्द जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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