Uttarakhand
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की मुलाकात, मिशन सिलक्यारा में मार्गदर्शन के लिए किया आभार व्यक्त।

नई दिल्ली – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें देहरादून में 8 व 9 दिसंबर, 2023 को आयोजित हो रहे वैश्विक निवेश सम्मेलन के उद्घाटन हेतु आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का सिल्क्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों की निकासी के दौरान दिये गये मार्गनिर्देशन और सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इसके लिए सभी आवश्यक संसाधन एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही निरन्तर इस विकट परिस्थिति का अनुश्रवण करने तथा इस अभियान से जुड़े लोगों, श्रमिकों एवं उनके परिजनों का मनोबल बढ़ाने से ही हम इस गंभीर संकट से अपने श्रमिक भाइयों को सुरक्षित वापस लाने में सफल हो पाये है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से जमरानी बांध परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल कर 1730.21 करोड़ की स्वीकृति के लिये आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने सौंग बांध पेयजल परियोजना को पूंजीगत व्यय हेतु वित्तीय सहायता के रूप में रू0 2460 करोड़ की स्वीकृति तथा जौलीग्रांट हवाई अड्डे के उच्चीकरण हेतु विशेष वित्तीय सहायता के रूप में रू0 3000 करोड़ की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर, हरिद्वार में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने, न्यूजीलैंड के सहयोग से चल रहे कीवी फिजिबिलिटी स्टडी में उत्तराखंड को सम्मिलित करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने मानसखण्ड मन्दिर माला परियोजना के विकास तथा पिथौरागढ़ के लिये सुगम यात्रा हेतु 508 किमी. सड़क के लिये 20 डीपीआर की मंजूरी के साथ रू0 1000 करोड की स्वीकृति तथा 3 राज्य मार्गों काठगोदाम-भीमताल ध्यानचुली- खेतीखान-लोहाघाट-पंचेश्वर मोटर मार्ग, ’मोहान-भतरोंजखान-भिकियासैंण-दे
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कुमाऊं में जोलिंगकोंग-बेदांग 05 कि०मी०, सिंपू-टोला 22 कि०मी० एवं मिलम लाप्थल 30 कि०मी० की तीन सुरंग परियोजनाओं की स्वीकृति के साथ टनकपुर-बागेश्वर रेल योजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में पूर्ण वित्तपोषण हेतु रू0-44,140 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति का अनुरोध किया। उन्होंने नैनी-सैनी हवाई अड्डे से फिक्स्ड विंग वायुयान के संचालन, पंतनगर हवाई अड्डे के विस्तार के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को त्वरित कार्यवाही करने तथा कुमाऊ क्षेत्र में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र की स्थापना का प्रधानमंत्री से अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने जनपद पिथौरागढ़ में धौलीगंगा एवं गौरी गंगा नदियों पर प्रस्तावित विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं के विकास एवं निर्माण की अनुमति तथा अलकनंदा, भगीरथी एवं उसकी सहायक नदियों में निर्विवादित 11 परियोजनाओं जिनकी कुल क्षमता 771 मे०वा० के विकास एवं निर्माण की अनुमति के साथ अलकनंदा, भगीरथी एवं उसकी सहायक नदियों में विशेषज्ञ समिति-2 द्वारा संस्तुत 10 परियोजनाओं जिनकी कुल क्षमता 1352 मेगावाट है के विकास एवं निर्माण की अनुमति देने का भी अनुरोध किया।
Uttarakhand
DEHRADUN में फूलदेई की धूम: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बच्चों संग मनाया पारंपरिक लोकपर्व

लोक भवन में पारंपरिक अंदाज में मनाया गया फूलदेई
DEHRADUN: रविवार को उत्तराखंड के पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई का आयोजन बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस अवसर पर गुरमीत सिंह ने लोक भवन में बच्चों के साथ मिलकर पर्व मनाया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह लोकसंस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
मुख्य बिंदु
बच्चों ने देहरी पर चढ़ाए फूल और चावल
लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे बच्चों ने देहरी पर फूल और चावल अर्पित किए। साथ ही उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई” जैसे पारंपरिक लोकगीत भी गाए, जिससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक सांस्कृतिक बन गया।

राज्यपाल ने बच्चों को दिए उपहार और आशीर्वाद
इस अवसर पर राज्यपाल ने बच्चों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद देते हुए उपहार भेंट किए। उन्होंने कहा कि फूलदेई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और खुशियां बांटने का संदेश देने वाली हमारी समृद्ध लोक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से बच्चे घर-घर जाकर फूल अर्पित करते हैं और सभी के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश
राज्यपाल ने पारंपरिक वेशभूषा में पर्व मनाने के लिए बच्चों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी से हमें यह सीख मिलती है कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है। जब बच्चे गर्व के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को अपनाते हैं, तो यह हमारी विरासत के संरक्षण का मजबूत संदेश देता है।

पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की सराहना
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उनका उत्साह यह दर्शाता है कि खुशियों का वास्तविक आनंद तभी मिलता है जब उन्हें सबके साथ साझा किया जाए। उन्होंने पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की भी सराहना करते हुए कहा कि संस्था उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की परंपराएं और पूर्वजों की विरासत हमें प्रकृति से प्रेम, आपसी सद्भाव और समाज में खुशियां बांटने की प्रेरणा देती हैं।
Uttarakhand
Uttarakhand News: 5 साल में 826 स्कूल बंद, विधानसभा में चौंकाने वाला खुलासा

पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था पर पलायन की मार, पांच सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
UTTARAKHAND NEWS: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में इस बार कई चौंकाने वाले मामले सामने आए. ऐसी ही एक खबर शिक्षा विभाग से निकलकर सामने आई. विधानसभा में भाजपा के ही विधायक के सवाल पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बतया कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में लगभग 826 प्राथमिक स्कूल बंद हुए हैं. सरकार ने इसके पीछे की वजह बढ़ते पलायन को बताया है.
मुख्य बिंदु
विधानसभा में आया शिक्षा विभाग से जुड़ा चौंकाने वाला मामला
विधानसभा में ये मुद्दा भाजपा विधायक महेश जीना ने उठाया, जिसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने स्थिति को सदन में स्पष्ट किया. सरकार ने माना कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम रह गई थी, जिसके कारण उन्हें चलाना मुश्किल हो गया. ऐसे में शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कर छात्रों को पास के बड़े स्कूलों में समायोजित करने का निर्णय लिया. सरकार का कहना है कि इससे बच्चों को बेहतर शिक्षण माहौल और सुविधाएं मिल सकेंगी.
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पिछले 5 सालों में 826 स्कूलों पर लगा ताला
उत्तराखंड में लचर शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता जिलेवार आंकड़े भी हैं. सबसे अधिक टिहरी जिले में 262 स्कूल बंद हुए हैं. इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104, अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43 और देहरादून में 38 स्कूल बंद हुए हैं. वहीं चंपावत में 34, उत्तरकाशी और बागेश्वर में 25-25, उधम सिंह नगर में 21, रुद्रप्रयाग में 15 और हरिद्वार में 2 स्कूलों पर ताले लगे हैं. वर्तमान में राज्य में करीब 10,940 स्कूल संचालित हो रहे हैं. लेकिन उनमें से कई स्कूल ऐसे भी हैं जहाँ पर बच्चों की संख्या केवल दो से तीन ही रह गई है.
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पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था के लिए अभिशाप बन रहा पलायन
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की कमी भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. कई सरकारी स्कूलों में भवन जर्जर हैं और शौचालय, पेयजल व खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. यही कारण है कि अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को बचाए रखना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
Udham Singh Nagar
‘NRI लेक सिटी’ मामले में बिल्डर को रेरा में भी नहीं मिली राहत, 25 हजार का नहीं अब लगाया 50 लाख का जुर्माना

Rudrapur News : ‘एनआरआई लेक सिटी’ परियोजना के बिल्डर को रेरा में भी राहत नहीं मिल पाई है। इस मामले में बिल्डर की अपील रेरा ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी।
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‘NRI लेक सिटी’ मामले में बिल्डर को रेरा में भी नहीं मिली राहत
‘NRI लेक सिटी’ मामले में बिल्डर को रेरा में भी राहत नहीं मिल सकी। इस मामले में रेरा ने बिल्डर की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही रेरा ने पहले जारी आदेश को बरकरार रखा है। लेकिन 25 हजार रूपए लागू जुर्माने को हटाकर 50 लाख रुपये जुर्माना लगा दिया गया है।
बता दें कि रेरा के सदस्य नरेश सी. मठपाल की पीठ में हुई सुनवाई के दौरान बिल्डर की तरफ से आदेश में राहत देने की अपील की गई थी, लेकिन प्राधिकरण ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। रेरा ने स्पष्ट कहा कि खरीदार को फ्लैट का कब्जा न देना और पहले जारी किए गए आदेशों का पालन न करना गंभीर नियम उल्लंघन है। प्राधिकरण ने 23 जनवरी को निर्देश जारी करते हुए बिल्डर को शिकायतकर्ता को फ्लैट से जुड़ी बकाया राशि ब्याज सहित कुल 9.70 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया था।

ये है NRI लेक सिटी मामला
ये मामला रुद्रपुर में स्थित ‘एनआरआई लेक सिटी’ प्रोजेक्ट के फ्लैट नंबर-114 से संबंधित है। फ्लैट खरीदार शब्बीर अहमद ने इस संपत्ति को खरीदा था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उनकी जमा की गई रकम वापस की गई।
इस मामले में रेरा ने 11 सितंबर 2023 को ही आदेश जारी करते हुए बिल्डर को निर्देश दिया था कि या तो खरीदार को फ्लैट का कब्जा सौंपा जाए या फिर उनकी जमा राशि वापस की जाए। इसके बावजूद बिल्डर की ओर से आदेश का पालन नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान ये भी सामने आया कि जिस फ्लैट को लेकर विवाद चल रहा है, उसे किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया गया। रेरा ने इस कृत्य को नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है। जिसके बाद ये फैसला दिया गया है।
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