Uttarakhand
मेनका गुंज्याल ने बर्फीली वादियों में किया कमाल , खेलो इंडिया विंटर गेम्स में जीता स्वर्ण पदक….

पिथौरागढ़ : जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में चल रहे पाँचवें चरण के खेलो इंडिया नेशनल विंटर गेम्स में उत्तराखंड की स्नो गर्ल मेनका गुंज्याल ने स्वर्ण पदक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया। इस शानदार उपलब्धि के बाद उत्तराखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है। पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के गूंजी गांव की रहने वाली मेनका ने बर्फीली वादियों में अपना कौशल साबित करते हुए गोल्ड मेडल जीता।
गुलमर्ग में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, भारतीय सेना और आईटीबीपी सहित अन्य राज्यों की टीमें प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। रविवार को हुए स्की पर्वतारोहण इवेंट में महिला वर्ग में मेनका ने शानदार प्रदर्शन किया और स्प्रिंट स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया।
मेनका गुंज्याल के इस विजयी प्रदर्शन से उत्तराखंड में उत्साह का माहौल है, खासकर पहले ही दिन स्वर्ण पदक मिलने के बाद अन्य एथलीटों से भी अच्छे परिणामों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। एडवेंचर एसोसिएशन ऑफ जोशीमठ के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय स्कियर विवेक पंवार ने भी कहा कि उत्तराखंड को इन एथलीटों से बड़ी उम्मीदें हैं और मेनका की उपलब्धि ने नई प्रेरणा दी है।
मेनका गुंज्याल का यह पदक उत्तराखंड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पूर्व भी मेनका ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं। खासकर पिथौरागढ़ जनपद के लिए यह एक बड़ी गौरव की बात है।
सोसायटी फॉर एक्सन इन हिमालया के निदेशक जगत मर्तोलिया ने भी मेनका की सराहना की और कहा कि मेनका आज भी अपनी मातृभूमि से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने धारचूला और मुनस्यारी विकासखंड के विभिन्न विद्यालयों में छात्रों के कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है, जो उन्हें और अन्य युवाओं को प्रेरित करता है।
Udham Singh Nagar
‘NRI लेक सिटी’ मामले में बिल्डर को रेरा में भी नहीं मिली राहत, 25 हजार का नहीं अब लगाया 50 लाख का जुर्माना

Rudrapur News : ‘एनआरआई लेक सिटी’ परियोजना के बिल्डर को रेरा में भी राहत नहीं मिल पाई है। इस मामले में बिल्डर की अपील रेरा ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी।
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‘NRI लेक सिटी’ मामले में बिल्डर को रेरा में भी नहीं मिली राहत
‘NRI लेक सिटी’ मामले में बिल्डर को रेरा में भी राहत नहीं मिल सकी। इस मामले में रेरा ने बिल्डर की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही रेरा ने पहले जारी आदेश को बरकरार रखा है। लेकिन 25 हजार रूपए लागू जुर्माने को हटाकर 50 लाख रुपये जुर्माना लगा दिया गया है।
बता दें कि रेरा के सदस्य नरेश सी. मठपाल की पीठ में हुई सुनवाई के दौरान बिल्डर की तरफ से आदेश में राहत देने की अपील की गई थी, लेकिन प्राधिकरण ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। रेरा ने स्पष्ट कहा कि खरीदार को फ्लैट का कब्जा न देना और पहले जारी किए गए आदेशों का पालन न करना गंभीर नियम उल्लंघन है। प्राधिकरण ने 23 जनवरी को निर्देश जारी करते हुए बिल्डर को शिकायतकर्ता को फ्लैट से जुड़ी बकाया राशि ब्याज सहित कुल 9.70 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया था।

ये है NRI लेक सिटी मामला
ये मामला रुद्रपुर में स्थित ‘एनआरआई लेक सिटी’ प्रोजेक्ट के फ्लैट नंबर-114 से संबंधित है। फ्लैट खरीदार शब्बीर अहमद ने इस संपत्ति को खरीदा था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उनकी जमा की गई रकम वापस की गई।
इस मामले में रेरा ने 11 सितंबर 2023 को ही आदेश जारी करते हुए बिल्डर को निर्देश दिया था कि या तो खरीदार को फ्लैट का कब्जा सौंपा जाए या फिर उनकी जमा राशि वापस की जाए। इसके बावजूद बिल्डर की ओर से आदेश का पालन नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान ये भी सामने आया कि जिस फ्लैट को लेकर विवाद चल रहा है, उसे किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया गया। रेरा ने इस कृत्य को नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है। जिसके बाद ये फैसला दिया गया है।
big news
गैरसैंण में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक रहा विधानसभा सत्र, जानें बजट सत्र की खास बातें

Uttarakhand News : उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण रहा। धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने की दहलीज पर आयोजित यह सत्र न केवल सरकार की उपलब्धियों और नीतियों का प्रतिबिंब बना, बल्कि सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक नए, आक्रामक और मुखर राजनीतिक अंदाज की भी झलक का साक्षी बना।
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गैरसैंण में सीएम धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक रहा विधानसभा सत्र
9 मार्च से शुरू हुए इस बजट सत्र के दौरान गैरसैंण में सदन की कार्रवाई कुल 41 घंटे 10 मिनट तक चली, जो घंटों के लिहाज से गैरसैंण में अब तक का सबसे लंबा विधानसभा सत्र माना जा रहा है। इस दौरान सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया और कुल 12 विधेयकों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही चार अध्यादेशों को भी सदन ने स्वीकृति प्रदान की।
सत्र के दौरान विधानसभा को 50 अल्प सूचित प्रश्न और 545 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 291 प्रश्नों के उत्तर सदन में दिए गए। यह सत्र केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के विकास और सरकार की कार्यशैली को लेकर व्यापक चर्चा का मंच भी बना। इस दौरान कई विधायकों ने सदन में धामी सरकार के कार्यों और विकासात्मक प्रयासों की सराहना भी की।
सदन में आक्रामक दिखाई दिए सीएम धामी
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अलग ही तेवर देखने को मिला। आम तौर पर शांत, संयमित और संतुलित अंदाज में नजर आने वाले धामी इस बार पूरी तरह आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखे हमले करते हुए एक-एक मुद्दे पर कांग्रेस की राजनीति, उसके कार्यकाल और उसकी नीतियों को कठघरे में खड़ा किया।

सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार घोषणाएँ करने वाली सरकार नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने वाली सरकार है। उन्होंने बताया कि मुख्य सेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाएँ पूरी हो चुकी हैं और बाकी पर तेजी से काम जारी है।
खनन का राजस्व बढ़कर हुआ 1200 करोड़
सीएम धामी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार केवल शिलान्यास और लोकार्पण के शिलापट लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि घोषणाओं को कर्म की स्याही से लिखने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि शायद विपक्ष के लिए यह समझना कठिन है, क्योंकि उनके समय में जनता के प्रति जवाबदेही का भाव ही नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के कार्यकाल पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश में खनन गतिविधियां बाहुबलियों और दबंगों के भरोसे छोड़ दी गई थीं। नियमों की खुलेआम अनदेखी होती थी और राज्य का राजस्व खनन माफिया और उनके आकाओं की जेब में चला जाता था। उन्होंने बताया कि उस समय खनन से मिलने वाला राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 1200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

2012 से 2017 के दौर था पॉलिसी पैरालिसिस
कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला जारी रखते हुए धामी ने वर्ष 2012 से 2017 के दौर को पॉलिसी पैरालिसिस का समय बताया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार का पूरा ध्यान केवल शराब नीति पर केंद्रित था और मुख्यमंत्री सचिवालय तक लाइसेंस के बदले नकदी की नीति में उलझा हुआ था। उस दौर के स्टिंग ऑपरेशनों ने पूरे देश में उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचाया था।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने राष्ट्रहित के बड़े फैसले लेने का साहस नहीं दिखाया। धारा 370 हटाने, तीन तलाक समाप्त करने और प्रभु श्रीराम मंदिर के निर्माण जैसे ऐतिहासिक निर्णय वर्षों तक टाले गए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन संकल्पों को सिद्धि में बदला गया।
समान नागरिक संहिता को लेकर सीएम ने विपक्ष को घेरा
समान नागरिक संहिता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू की। इससे महिलाओं को तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों की आँखों पर तुष्टिकरण की पट्टी बंधी हो और सिर पर वोट बैंक की राजनीति की टोपी हो, उन्हें समान अधिकारों की बात समझ में नहीं आती।
धामी ने लैंड जिहाद और अतिक्रमण के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने बताया कि सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में अवैध कब्जे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष की राजनीति हमेशा तुष्टिकरण और वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को केवल एक राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल किया, जबकि उनकी सरकार चाहती है कि हर बच्चे के हाथ में टूलकिट नहीं बल्कि अच्छी किताब हो और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
Dehradun
देहरादून में आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल, अपनी मांगों को लेकर किया सीएम आवास कूच

Dehradun News : देहरादून में आज आंनबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में पहुंची आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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देहरादून में आंगबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल
देहरादून में आज प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है।

अपनी मांगों को लेकर किया सीएम आवास कूच
बता दें कि आंनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में वेतन वृद्धि और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग शामिल है। बड़ी संख्या में पहुंची कार्यकर्ताओं के कारण सड़कों पर जनसैलाब जैसा माहौल देखने को मिला और प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय मंत्री पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री आवास कूच करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभागीय मंत्री रेखा आर्य पर भी निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।
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